कथन एवं तर्क
(Statement & Arguments)
- तर्क (Argument) किसी कथन के पक्ष अथवा विपक्ष में व्यक्ति किया गया विचार है, जो कथन काे उचित अथवा अनुचित सिद्ध करने हेतु संदर्भित होता है।
- इस प्रकार के प्रश्नों में एक कथन दिया होता है तथा उसके बाद दो तर्क दिए गए होते हैं। परीक्षार्थियों को कथन एवं उसके बाद दिए गए तर्कों पर विचार करके यह ज्ञात करना होता है कि दिए हुए कथन के आधार पर दोनों तर्कों में से कौनसा तर्क (Argument) प्रबल (Forceful) है।
- महत्त्वपूर्ण प्रश्न के बारे में निर्णय करते समय 'ठोस' तर्क और 'निर्बल' तर्क के बीच प्रभेद कर सकना वांछनीय होता है, 'ठोस' तर्क वे हैं, जो महत्त्वपूर्ण और प्रश्न से सीधे संबंधित नहीं होते हैं या कम महत्त्वपूर्ण होते हैं और प्रश्न के नगण्य पहलू से संबद्ध होते हैं।
प्रबल तर्क ज्ञात करने के नियम –
- तर्क अपने मंतव्य को जितने ही सटीक ढंग से प्रतिपादित करते हैं, उतने ही प्रबल होते हैं। तर्कों के कुछ मानदण्ड होते हैं, जिन पर यदि ये खरे उतरते हैं, तो उत्तम तर्कों की श्रेणी में रखे जा सकते हैं।
- तर्कों के प्रबल अथवा कमजोर होने की जाँच निम्न बिन्दुओं के अंतर्गत की जा सकती है।
1. तर्क का संबंध कथन से सीधे होना चाहिए। यदि तर्क कथन से दूर का संबंध रखता है अथवा कथन से असंबद्ध होता है तो वह कमजोर होता है प्रबल नहीं।
2. तर्क किसी एक उदाहरण अथवा घटना पर आधारित नहीं होना चाहिए। किसी एक व्यक्ति अथवा एक देश इत्यादि से संबद्ध घटनाओं या विशेषताओं को सामान्यीकृत नहीं किया जा सकता। अत: ऐसे तर्कप्रबल नहीं होते हैं।
3. कोई तर्क यदि विचार मात्र है तो यह प्रबल नहीं होगा। तर्क से कथन का तार्किक जवाब मिलना चाहिए। यह कथन से उपजे क्या, क्यों, कैसे, कब इत्यादि का उत्तर होना चाहिए।
4. तर्क किसी धारणा पर आधारित नहीं होना चाहिए क्योंकि धारणा की व्यक्तिगत स्थापना होती है तथा सामान्यीकृत परिणाम देने में अक्षम होती है। इसमें यह मान लिया जाता है कि कोई बात सत्य अथवा असत्य है, जबकि यह बात सत्य भी हो सकती है और असत्य भी।
5. तर्क का अर्थ स्पष्ट और सीधा होना चाहिए। अस्पष्ट अर्थों वाला तथा बहुत घुमा फिराकर दिया गया तर्क प्रबल नहीं होता है।
6. ऐसे तर्क, जो वर्तमान सामाजिक मान्यताओं के विपरीत होते हैं, प्रबल नहीं हो सकते। ऐसे तर्क तथ्यात्मक रूप से गलत होते हैं।
7. यदि कथन 'हाँ, क्यों नहीं?' 'नहीं' 'ऐसा नहीं', 'हाँ, ऐसा तुरंत कर देना चाहिए' 'हाँ, देर किस बात की' जैसा हो तो यह प्रबल नहीं होगा। यह मात्र स्वीकारोक्ति या अस्वीकृति है, तर्क नहीं।
8. तर्क आदर्श, सत्य महत्त्वपूर्ण, तथ्यपूर्ण, वैचारिक तथा विश्लेषण परक होने चाहिए।
9. नेताओं, समाचार माध्यमों इत्यादि का उदाहरण तर्क को प्रबल नहीं बनाता है। तर्क का अपना वजन होना चाहिए।
10. ऐसे तर्क प्रबल नहीं होते हैं, जो कथन की पुनरावृत्ति मात्र होते हैं।