कथन एवं कार्यवाही

(Statement & Cource Of Action)

- परीक्षार्थियों की प्रशासकीय क्षमता तथा समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता की जाँच इसके माध्यम से की जाती है।
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इस अध्याय के अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न में समस्या के रूप में एक कथन दिया जाता है तथा इसके नीचे दो या तीन कार्यवाहियाँ दी गई होती है।
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परीक्षार्थी को दी गई समस्या के समाधान के लिए कौन ऐसी कार्यवाही तर्कसंगत है। यह जाँच करना होता है।

समस्या

- हमारे सामान्य जनजीवन में गतिरोध उत्पन्न करने को आशक्त या पूर्णत: बाधित करने वाली घटना या स्थिति समस्या कहलाती है।
समस्या को दो प्रकार में बाँटा जा सकता है -

1.   जटिल समस्या – वह समस्या, जिसके लिए एक योजनाबद्ध तरीके से त्वरित एवं ठोस कार्यवाही की आवश्यकता होती है। इसके अंतर्गत सांप्रदायिक दंगा, उग्रवाद, महामारी, युद्ध, वाद, भूकंप।
2.   साधारण समस्या – वह समस्या, जिसमें त्वरित कार्यवाही की नहीं बल्कि, सुधार की आवश्यकता होती है। इसके अंतर्गत शोषण, बाल अपराध, बेरोजगारी, कुपोषण आदि।

कार्यवाही

- वह कार्य, जो प्रशासनिक या व्यावहारिक हो और समस्या का समाधान करे या दिए गए परिस्थिति को सुधारे।

प्रश्नों की आवश्यकता

1.   दिये गए कथन की साफ या निष्पक्ष समझ।
2.   दिए गए कथन में से समस्या की पहचान करना।
जब ये दो कार्य अभ्यर्थी द्वारा हो जाए तभी वह समस्या का समाधान ढूँढने में सफल हो पाएगा तथा इसे ध्यान में रखकर वह सही चुनाव कर सकेगा, जो तर्कसंगत भी होगा।

प्रश्नों के उत्तर ढूँढने की तकनीक –

- उस कार्यवाही को सही समझना चाहिए जो -
1.   कथन से समस्या का समाधान निकाला जा सके।
2.   तथा वह व्यावहारिक हो।

कार्यवाही का प्रभाव –

- किसी कार्यवाही को तभी सही माना जा सकता है, जब वह किसी तथ्य पर आधारित हो या किसी पूर्व तजुर्बे अथवा तार्किक मापदंड का संकेत हो।
इसकी हम विस्तार से चर्चा करेंगे।

अगर दी गई कार्यवाही एक निर्धारित तथ्य है।

- यहाँ हमें अपने सांसारिक सत्यों तथा तथ्यों के ज्ञान का उपयोग करना है। इसे दिये गए उदाहरण से समझा जा सकता है।

उदाहरण - 1

कथन : पानी से उत्पन्न बीमारियाँ जल्दी फैलती है।

कार्यवाही : उबला पानी पियें।

विश्लेषण : यह एक निर्धारित तथ्य है कि उबला पानी पीने से पानी से उत्पन्न बीमारियों से बचाव होता है। जबकि उबला पानी पीने से स्वास्थ्य ठीक रहता है, तो यह एक उचित कार्यवाही है।