गुप्तकालीन कला – संस्कृति

- कला, साहित्य, विज्ञान व संस्कृति के चहुमुखी विकास के दृष्टिकोण से गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग कहा जाता है तथा इसी काल को क्लासिकल युग या पेरीक्लीन युग के नामों से भी जाना जाता हैं।

गुप्तकालीन कला संस्कृति के स्रोत  
→ अभिलेख    

→ मंदिर व स्थापत्य कला                                    
→ साहित्य

गुप्तकालीन अभिलेख:
- प्रारंभिक गुप्तशासक जैसे- श्रीगुप्त, घटोत्कच, का  स्वयं का कोई भी अभिलेखीय साक्ष्य नहीं मिला है परन्तु सम्पूर्ण गुप्त वंशावली का उल्लेख बिलसड अभिलेख (कुमारगुप्त) में मिलता है लेकिन इसमें रामगुप्त का उल्लेख नहीं मिलता है।

चन्द्रगुप्त प्रथम:-

समुद्रगुप्त:

  1. प्रयाग प्रशस्ति-

नोट:- विसेंट स्मिथ ने समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा है।

चन्द्रगुप्त II

  1. महरौली लौह स्तंभ –
  1. उदयगिरी का गुहाभिलेख (विदिशा, मध्य प्रदेश)

नोट:- चन्द्रगुप्त प्रथम ने अपनी पुत्री पभावति का विवाह वाकाटक शासक रुद्रसैन द्वितीय के साथ किया इसी की सहायता से इसने शकों को पराजित किया तथा शकों को पराजित करने के उपलक्ष में चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की।

कुमारगुप्त प्रथम (महेन्द्रादित्य प्रथम):

  1. बिलसद अभिलेख: (एटा जिला, उत्तर प्रदेश)-
  1. तुमैन अभिलेख (मध्य प्रदेश)-

मंदसौर प्रशस्ति

  1. दामोदरपुर
  2. धनदैह- इसमें गुप्तकालीन भूमि के क्रय-विक्रय के बारें में जानकारी मिलती है।
  3. वैग्राम

नोट:- कुमारगुप्त ने अपने सिक्कों पर गरुड़ के स्थान पर मयूर का अंकन करवाया।

स्कन्दगुप्त

1. जूनागढ़ अभिलेख:-

2. भीतरी अभिलेख:-

  1. क्रमादित्य
  2. विक्रमादित्य

3. गढ़वा अभिलेख:

अन्य अभिलेख:-

  1. कहौम अभिलेख (उत्तर प्रदेश) स्कन्दगुप्त के समय का है।
  2. सुपिया अभिलेख (मध्य प्रदेश) स्कन्दगुप्त के समय का है।

भानुगुप्त

ऐरण अभिलेख:-

वास्तुकला (मंदिर निर्माण कला)

  1. गुप्तकाल में मंदिर निर्माण कला का जन्म हुआ।
  2. पहली बार शिखर युक्त मंदिर बनाए गए व सभा मंडपों का प्रयोग किया गया।

मंदिर निर्माण की प्रमुख शैलियाँ:-

  1. नागर शैली:

इस शैली की विशेषता:-

दशावतार मंदिर:-

द्रविड़ शैली:-

विशेषता:-

बेसर शैली:-

एकायतन शैली:-

गुप्तकालीन मंदिरों की विशेषताएँ:-

गुप्तकालीन मूर्तिकला(मूर्ति निर्माण) के प्रमुख केन्द्र:-

गुप्तकालीन अन्य मंदिर:-

  1. देवगढ़ का दशावतार मंदिर – झाँसी (उत्तर प्रदेश)
  2. भूमरा शिव मंदिर – सतना (मध्य प्रदेश)
  3. नचना-कुठार पार्वती मंदिर – पन्ना (मध्य प्रदेश)
  4. तिगवा विष्णु मंदिर – (मध्य प्रदेश)
  5. ऐरण विष्णु मंदिर – सागर जिला (मध्य प्रदेश)
  6. खोह शिव मंदिर – (मध्य प्रदेश)
  7. उदयगिरी शिव मंदिर – विदिशा – (मध्य प्रदेश)
  8. साँची का मंदिर – (मध्य प्रदेश)

1. भीतरगाँव(उत्तर प्रदेश)- विष्णु मंदिर

- ईंटो से निर्मित प्रथम हिंदू मंदिर।

- भारत में पहली बार इसके शिखर में “महराबों” का प्रयोग।

2. सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर:- (छत्तीसगढ़)

गुहा/गुफा:-

अजंता की गुफाएँ:-

अजन्ता की खुफाओं के अन्य चित्र:-

नोट:- गुफा संख्या 1 में पुलकेशिन द्वितीय द्वारा ईरानी शासक परवेज शाह खुसरों का स्वागत करते हुए दिखाया गया है।

गुप्तकालीन साहित्य-

Note: क्षेमेन्द्र की वृहत्कथामंजरी के अनुसार ‘कालीदास की कुल 8 रचनाएँ’।

  1. प्रेम प्रधान
  2. सुखान्त
  3. मध्य भाग-विरेह
  4. दो प्रकार के पात्र (किरदार)
  1. उच्चवर्ण – संस्कृत भाषा
  2. निम्नवर्ण – प्राकृत भाषा
  1. मालविकाग्निमित्र – 5 सर्ग (अध्याय)
  1. विक्रमोर्वशियम – 5 सर्ग – राजा पूरुरवा व उर्वशी
  1. अभिज्ञान शाकुन्तलम् – 7 सर्ग – कालीदास की सर्वश्रेष्ठ रचना मानी जाती है।
  1. कुमारसंभवम् – हिमालय पर्वत का वर्णन इसमें 17 सर्ग हैं –
  1. रघुवंशम्- 19 सर्ग हैं – रघुवंश के कुल 40 (29 + मूलत: रघु, 11 अन्य) राजाओं का वर्णन हैं।
  1. मेघदूतम्
  1. पूर्वमेघदूत
  2. उत्तरमेघदूत
  1. ऋतुसंहार

Note: अलकापुरी के शासक ‘कुबेर’ द्वारा यक्ष को निष्कासित करने पर दक्षिणी विरह की कथा।

Note: चन्द्रगुप्त द्वितीय कालीदास को अपने राजदूत के रूप में कुंतल नरेश के दरबार में भेजा जहाँ कालीदास ने

विशाखदत्त:

  1. मुद्राराक्षस: नंदों व मौर्यों का उल्लेख।
  2. देवी चन्द्रगुप्तम्: रामगुप्त व ध्रुवस्वामिनी की कथा है।
  1. कुमारचरित
  2. काव्यादर्श

गुप्तकालीन विज्ञान:

Note: इन्होंने गणित को ज्योतिष से अलग किया ऐसा करने वाले प्रथम व्यक्ति थे।

  1. पितामह
  2. सूर्य
  3. पॉलिश
  4. रोमक
  5. विशिष्ट

Note: 800 ई. में आर्यभट्‌ट के ग्रंथ आर्य भट्टीयम् का अरबी भाषा में अनुवाद (800 ई.) ‘जीज-अल-बहर’ के नाम से – जार्ज बूलर के द्वारा किया गया।

  1. ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मसिद्धांतिका)
  2. खण्डखाद्यक
  1. ब्रह्मफुटसिद्धान्त: सिंदाहिंद के नाम से।
  2. खण्डधारक: अल अकरंद के नाम से।
    वेदांग ज्योतिष टीका
    ध्यानग्रहोपदेश- ब्रह्मस्फूट सिद्धान्त का भाग माना जाता है।
  1. आर्यभट्‌टीयम भाष्य:
  1. लघुभास्कर्य
  2. महाभास्कर्य (वृहतभास्कर)
  1. अष्टांग हृदय
  2. अष्टांग संगृह