मुगलकालीन कला संस्कृति
    मुगलकालीन स्थापत्य कला में अरबी, फारसी, ईरानी (मध्यएशिया), तुर्की व भारतीय तत्वों का मिश्रण पाया जाता है।
    निर्माण- मुगलकाल में-महल, दुर्ग, मंदिर, मस्जिद, मकबरों इत्यादि का निर्माण किया गया।
    मुगलकालीन कला संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ- 
    (i) पित्राड्यूरा का प्रयोग
    (ii) दोहरा गुम्बद
    (iii) महाराबों का प्रयोग
    (iv) चार मीनार पद्धति
    (v) चार बाग पद्धति 
    (vi) बहते हुए झरनों (पानी) का प्रयोग
    
    बाबर कालीन इमारते:-
-    बाबर को बाग लगवाने का शौक था।
-    उसने ज्मातीय विधि से बाग लगवाये।
-    बाबर को चारबाग पद्धति का जनक माना जाता है।
    (i) आराम बाग (आगरा)-बाबर को पहली बार यहीं दफनाया गया ।
    (ii) नूरे अफगान (बाग-ए-बाबर)-काबुल बाबर को अंतिम रूप से यहां दफनाया गया था।

    बाबर कालील मस्जिदे
    बाबर ने पानीपत हरियाणा में काबुलीबाग मस्जिद का निर्माण करवाया था।
-   बाबरी मस्जिद इसका निर्माण- 1527 ई.में  
    बाबर ने अपनी सेनापति “मीर बांकी”को आदेश देकर अयोध्या (उत्तर प्रदेश) रामकूट पहाड़ी पर  इसका निर्माण करवाया था। 
-   संभल मस्जिद का निर्माण रूहेलखण्ड (उत्तर प्रदेश) में करवाया था। 

    हुमायूँ कालीन स्थापत्य:-
    (1)दीनपनाह नगर:-

-    इसका निर्माण- 1534-35 ई. दिल्ली में करवाया था।
-    दिल्ली का प्रसिद्ध “तैरता हुआ बाजार”यहीं पर स्थित है।
-    शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को पराजित कर इस किले का नाम बदलकर (शेरगढ़ शेरमंडल) रखा।
-    यहां स्थित पुस्तकालय की सीढ़ीयों से गिरकर हुमायूँ की मृत्यु हुई थी।

-    हुमायूँ के द्वारा आगरा की मस्जिद का निर्माण 1540 ई. में करवाया गया था। 
-    हुमायूँ के द्वारा फतेहाबाद (हरियाणा) मस्जिद का निर्माण करवाया गया। जो ईरानी शैली में निर्मित है।

    शेरशाह सूरी:-
-    दिल्ली में शेरगढ़ नामक नगर की स्थापना की जिसे वर्तमान में पुराना किला के नाम से जाना जाता है।
-    वर्तमान में इसके अवशेषों में केवल-लालदरवाजा व खूनी दरवाजा ही शेष बचे है, (पुराने किले में-शेरमण्डल स्थित है, जो कि अष्टकोणिय है।)
-    1542 ई. पुराने किले के अंदर-किला-ए-कुहना नामक मस्जिद का निर्माण करवाया गया।
-    शेरशाह सूरी ने-सासाराम बिहार में मकबरे का निर्माण करवाया जोकि तालाब के बीचोंबीच स्थित होने के कारण-द्विगुणिन नजर आता है।
    नोट:-कनिंघम महोदय ने”शेरशाह के मकबरे को ताजमहल से सुंदर माना है।”
    
    अकबरकालीन इमारते:-
    हुमायूँ का मकबरा:-

-    यह अकबर के काल की प्रथम इमारत मानी जाती है।
-    इसमें पहली बार दोहरे गुम्बद व चार बाग पद्धति का प्रयोग किया गया।
-    इसे ताजमहल का पूर्वगामी माना जाना, परन्तु इसमें स्वतंत्र चार मीनारे नहीं है।

    आगरा का किला:-
-   इसका निर्माण 1566 ई.में प्रारंभ हुआ जो 1573 ई.में पूर्ण हुआ।
-   इसका वास्तुकार कासिम खाँ थे।
-   यह यमुना नदी के किनारे स्थित है।
-   इसके मुख्यत: दो दरवाजे है
    (i) दिल्ली दरवाजा (ii) अमरसिंह दरवाजा
-   आगरा के लाल किलें में-अकबर ने लगभग 500 इमारतों का निर्माण करवाया।
    नोट:- आगरा के किले पर सर्वप्रथम अधिकार पानीपत के युद्ध के समय बाबर ने किया।
    नोट:- अकबर के काल में 1569 ई. तक व अंतिम समय 1598-1605 ई. तक आगरा राजधानी के रूप में रहा।
-   आगरा के लाल किले की ईमारतों का निर्माण- बंगाल व गुजराती,मुगल शैली में किया गया।

    नोट:- 1583 ई. में अकबर द्वारा निर्मित”इलाहाबाद का किला अकबर” द्वारा निर्मित सबसे बड़ा किला माना जाता है।
-   अकबर ने 1578 ई. अजमेर के “मैग्जीन दुर्ग” का तथा 1581 ई. में अटक पंजाब वर्तमान (पाक) के दुर्ग का निर्माण करवाया।
    
    फतेहपुर सिकरी:-
-    अकबर ने 1569 ई. में सर्वप्रथम एक पहाड़ी पर”इस नगर की नींव डाली”तथा इसे “सिकरी” नाम दिया।
-    गुजरात विजय के बाद इसका नाम बदलकर “फतेहपुर सिकरी” रखा ।
-    इसका वास्तुकार- ब्रहाउद्दीन
-    अकबर ने इसे अपनी राजधानी बनाया तथा यहाँ अनेक इमारतों का निर्माण करवाया।
-    फतेहपुर सीकरी के निर्मित इमारतों को चार भागों में विभाजित किया जा सकता है-
   - विशाल राजप्रसाद
   - निवास स्थान        
   - कार्यालय
   - धार्मिक भवन

-    प्रमुख इमारते:-
    (i) दीवाने आम:-

-    यह आयताकार प्रागण था।
-    अकबर प्रत्येक गुरुवार को यहाँ बैठकर न्याय करता था।

    दीवाने-खास:-
-    अकबर का व्यक्तिगत भवन था।
-    भवन के मध्य एक स्तंभ पर वृत्ताकार पंच बना हुआ था, जो कि 36 गुंथे हुए तोड़ों पर टिका हुआ था।
-    मंच पत्थर की गैलेरी द्वारा जुड़ा हुआ था तथा एक पुल से जुड़ा हुआ।
-    प्रांगण के मध्य-4 छतरियाँ निर्मित थी।
    
    जोधाबाई का महल:-
-    फतेहपुर सीकरी का सबसे बड़ा व सर्वश्रेष्ठ व सबसे बड़ा महल माना जाता है, 
-    इसका निर्माण गुजराती शैली में गुजराती कारीगरों द्वारा किया गया था।

    तुर्की-सुल्ताना का महल:-
-    इसका निर्माण अकबर ने तुर्की रानियों के निवास हेतु बनवाया गया था।
-    इसका निर्माण पंजाबी कारीगरों द्वारा किया गया था। तथा पर्सी ब्राऊन ने”तुर्की सुल्ताना के महल को”मुगल स्थापत्य कला का रत्न (मोती) कहा है।

    बीरबल का महल:-
-    यह दो मंजिला इमारत है।
-    इसके छज्जों में कोष्ठकों का प्रयोग किया गया है।

    मरियम महल:-
-    जोधाबाई के महल के समीप ही स्थित है।
-    इसमें ईरानी चित्रों का प्रयोग किया गया है।
-    युद्ध, शिकार, जुलूस इत्यादि के चित्र चित्रित किए गए है।
-    इन चित्रों को औरंगजेब ने नष्ट करवा दिया था।

    बुलंद दरवाजा:-
-    इसका शाब्दिक अर्थ- महान (ऊँचा) होता है।
-    इसका निर्माण:गुजरात विजय के उपलक्ष में-1572-73 ई.से 1602 ई. में करवाया गया था। 
-    अकबर ने इसका निर्माण- इल्तुतमिश द्वारा निर्मित” अतारकिन (नागौर) दरवाजे से प्रेरित होकर करवाया था।
-    यह हिन्दु व फारसी शैली (ईरानी अर्द्ध गुम्बदीय चाप स्कन्द शैली) में निर्मित है।
-    इसकी ऊँचाई- जमीन से -176 फीट है जो विश्व का सबसे ऊँचा दरवाजा है। 
-    इस दरवाजे के आगे के स्तंभों पर”कुरान की आयतें खुदी हुई है”।
-    इस दरवाजे पर ईसा मसीह से संबंधित कुछ पंक्तियां भी उत्कीर्ण है ।
-    यह दरवाजा लाल व बलुआ पत्थर से निर्मित है।
-    इसे भव्यता का द्वार भी कहा जाता है।

    शेख सलीम चिश्ती का मकबरा
-    यह अकबर के आध्यात्मिक गुरु थे।
-    इसका निर्माण- 1571 में प्रारंभ जो 1586 ई. में पूर्ण हुआ।
-    अकबर ने इसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर में करवाया, परन्तु जहॉगीर ने इसे पुन: सफेद संगमरमर में बनवाया।
-    मकबरे की जालियाँ अत्यंत नक्काशीदारी व सुंदर है।
-    नक्काशीदार-होरिंग बोन छत जिसे “संगरताश” कहा जाता है।
            
    इस्लाम खाँ का मकबरा:-
-    यह शेख सलीम चिश्ती के मकबरे के दक्षिणी भाग में स्थित है।
-    यह प्रथम ऐसा मकबरा जिसमें वर्गाकार मेहराबों का प्रयोग किया गया है।

    फतेहपुर सिकरी की अन्य इमारतें-
    (i) इबादत खाना- धार्मिक मंत्रणा हेतु
    (ii) टकसाल
    (iii) ज्योतिष भवन
    (iv) हीरन मीनार- अकबर ने इसका निर्माण अपने हाथी के नाम पर रखा जिसे आकाश द्विप भी कहा जाता है।
    (v) अनूप तालाब:- दीवाने खास के सामने स्थित है।
    
    महत्वपूर्ण तथ्य:-
-    स्मिथ- “फतेहपुर सिकरी को पत्थर में ढ़ला हुआ रोमान्स” कहा है।
-    फर्ग्यूसन-”फतेहपुर सिकरी” उस महान व्यक्ति (अकबर) की परछाई है, जिसने उसे बनवाया था।
    
    जहॉगीर कालीन इमारते:-
    (i) अकबर का मकबरा:-

-    यह आगरा के समीप-सिंकदरा में स्थित है।
-    इसका निर्माण स्वंय अकबर ने प्रारंभ करवाया, परन्तु जहाँगीर के काल में-1612 ई. में पूर्ण हुआ।
-    जहाँगीर के काल में निर्मित यह प्रथम इमारत है।
-    इसकी शैली- हिन्दु, मुस्लिम, जैन, बौद्ध शैलियां का मिश्रण है तथा सर्वाधिक प्रभाव बौद्ध शैली का है।
-    इसकी बनावट बौद्ध विहार के समान, पिरामिडाकार है।
-    यह गुम्बद विहीन मकबरा है, केवल चारों कोनों पर चार सुंदर मिनारे है।
    नोट:-मकबरे के चारों और एक बगीचा है, जिसमें सिकन्दर लोदी द्वारा निर्मित “बरादी” महल स्थित है।
    नोट:-1668 ई. “राजाराम जाट” ने सिकंदरा पर आक्रमण कर, अकबर कब्र को तौड़ा तथा अस्थियाँ निकालकर, उसमें आग लगा दी।

    एतमादुद्दौला का मकबरा:-
-    यह आगरा यमूना नदी के किनारे स्थित है।
-    इसका निर्माण- 1622-23 ई. नूरजहाँ द्वारा अपने पिता-मिर्जा ग्यासबेग (एतमादुद्दौला)की स्मृति में करवाया गया।
-    यह मुगलकालीन की प्रथम इमारत जिसमें पहली बार- पित्राड्यूरा का प्रयोग किया गया।
    नोट:-सर्वाधिक पित्राड्यूरा का प्रयोग ताजमहल में किया गया है।
-    इसे बेबी ताजमहल भी कहा जाता है।
-    यह मुगल काल की प्रथम इमारत जिसका निर्माण पुर्ण रूप से सफेद संगमरमर से किया गया।
-    यह अन्य मुगलकालीन इमारतों से छोटी होने व पहली बार पित्राड्यूरा का प्रयोग होने के कारण इसे “आभूषण पेटी/श्रृंगारदान” भी कहा जाता है।
-    इसका गुम्बद मध्य एशियाई शैली में निर्मित है।

    जहॉगीर का मकबरा:-
-    यह लाहौर (शहादरा) में रावी नदी के तट पर स्थित है।    
-    मकबरे की योजना स्वयं जहाँगीर ने बनाई परन्तु पूर्ण नूरजहॉ ने करवाया।
-    जहाँगीर के मकबरे के समीप ही”नूरजहाँ” का मकबरा स्थित है।
    शाहजहाँ कालीन इमारते:-
-    शाहजहाँ को मुगलकालीन वास्तुकला का महान निर्मिता कहा जाता है, इसका काल मुगलकालीन वास्तुकला (स्थापत्य कला) का “स्वर्णिम युग” कहलाता है।
-    पर्सी ब्राउन के अनुसार शाहजहाँ ने मुगल इमारतों को लाल पत्थर में बना हुआ पाया और सफेद संगमरमर का बनाकर छोड़ गया”।

    शाहजहाँ द्वारा निर्मित आगरा की इमारते:
-    शाहजहाँ ने अकबर द्वारा निर्मित लाल पत्थर की इमारतों को तुड़वाकर उन्हे सफेद संगमरमर से बनवाया।
    दीवान-ए-आम:-
-    निर्माण- 1628 ई. में प्रारंभ
-    शाहजहाँ के काल की प्रथम सफेद इमारत
-    इसी में मयूरसिंहासन /तख्ते ताउस रखा जाता था।
-    यहाँ शाही दरबार लगता था।

    तख्ते-ताउस (मयूर सिंहासन)
-    इसका निर्माण-शाहजहाँ द्वारा- आगरा में करवाया गया(दीवाने आम) बाद में राजधानी दिल्ली स्थानांतरित होने पर इसे दिल्ली के दिवाने-आम में लगवाया गया।
-    इसका वास्तुकार-  बेबादल खाँ था।    
-    इसमें सोने से निर्मित (लागत-1 करोड़)कोहीनूर हीरा जड़ित था।
-    इसके पिछले भाग पर दो मयूरों का अंकन था।
-    शाहजहाँ इस पर बैठकर न्याय करता था।
-    1739 ई. फारस (ईरान) आक्रांता नादिरशाह के दिल्ली आक्रमण के दौरान वह इसे अपने साथ फारस ले गया।

    जामा मस्जिद (आगरा)
-    इसका निर्माण- शाहजहाँ की सबसे बड़ी पुत्री-जहॉनआरा द्वारा करवाया गया। अत: इस को ‘मस्जिद-ए-जहॉनामा’ भी कहा जाता है।

    दीवाने खास:-
-    1637 ई. में दीवाने खास का निर्माण करवाया गया तथा यहां पर  गुप्त मंत्रणा होती थी।    
    खास महल व झरोखा दर्शन:-
-    इस महल के माध्यम से रोजाना सूर्योदय के समय- शाहजहाँ व मुमताज एक साथ आकर लोगों का अभिवादन करते थे।
-    यह शाहजहाँ का खास व्यक्तिगत निवास स्थान भी था।

    मुस्समन बुर्ज:-
-    उत्तराधिकार संघर्ष के बाद औरंगजेब ने “शाहजहॉ” को इसी बुर्ज में कैद कर के रखा था।
-    शाहजहाँ ने अपने जीवन के अंतिम 8 वर्ष यहीं से “ताज” को निहारते हुए बिताए।
    
    मोती मस्जिद:-
-    आगरा की सबसे सुंदर इमारत मानी जाती है।
-    इसका निर्माण- 1648 ई में प्रारंभ हुआ जो 1654 में पूर्ण
-    इसके एक हिस्से को नक्काशीदार जालियों से ढका गया ताकि महिलाएं भी इबादत कर सके।
    
    ताजमहल:-
-    इसका निर्माण- शाहजहाँ ने अपनी प्रिय रानी मुमताज महल की याद में करवाया था।
-    इसका निर्माण  1631 ई. में प्रारंभ  हुआ जो 1653 ई. में पूर्ण हुआ।
-    इसकी  कुल 9 करोड़ की लागत आई।
-    यह यमुना नदी के किनारे स्थित है।
-    इसका वास्तुकार- “अहमद लाहारी” था जिसे शाहजहाँ ने नादिर-उल-असरार की उपाधि प्रदान की।
-    इसका प्रधान मिस्त्री- उस्ताद ईशा था।
    विशेषताऍ-
-     यह वर्गाकार नींव  आधार पर निर्मित है ।
-     इसमें चार मिनार, चार बाग, व कंदाकार (प्याजाकार) गुम्बद का प्रयोग किया गया ।
-     इसमें सर्वाधिक पित्राड्युरा का प्रयोग किया गया ।
-    इसके प्रधान कक्ष (मेहराबदार कक्ष)- घनाकार है जिसके प्रत्येक किनारे की ऊंचाई 55 मी. है। 
-    तथा गुम्बद की ऊंचाई 35 मी. है।
-    इसके शिखर उल्टे कमल के समान जो कि हिन्दु शैली का प्रतीक है।
-    इसके प्रत्येक मीनार की ऊँचाई- 40 मीटर जो सममित्तिय बनावट को दर्शाना है।    
-    1983 ई.में यूनेस्कों द्वारा इसे विश्व विरासत सूची में शामिल किया, संसार में मानवकृत इमारतों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
    कथन:- 
    (1) हेवेल ने इसे”भारतीय नारीत्व की साकार प्रतिमा कहा है”
    (2) रविन्द्रनाथ टैगोर ने इसे “काल के गाल पर टिका हुआ आंसू” कहा है।

    आगरा की अन्य इमारते:-
    (i) अंगूरी भवन
    (ii) मच्छी भवन
    (iii) शीश महल
    (iv) नगीना मस्जिद- इसका निर्माण शाही महिलाओं हेतु किया गया, इसकी बालकनी से खड़ी होकर-महिलाएं “मीना बाजार को निहारती थी तथा, खरीददारी करती थी”
    
    शाहजहाँ द्वारा निर्मित दिल्ली की इमारते:-
-    शाहजहाँ ने-1638 ई. में यमूना नदी के किनारे अपनी नई राजधानी “शाहजहॉनाबाद” (पुरानी दिल्ली)” का निर्माण करवाया।
-    1648 ई. में इसका निर्माण पूर्ण हुआ, शाहजहाँ अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित कर दी।
-    अपनी इस राजधानी में लाल बलुआ पत्थर से एक किले का निर्माण करवाया जिसे लाल किला कहा जाता है।
-    लाल किले का निर्माण- “हमीद अहमद” नामक शिल्पकार की देखरेख में पूर्ण ।
    नोट:- लाल किला “सलीमगढ़” के पूर्वी छोर पर स्थित है, जिसका निर्माण 1586 ई. में इस्लाम शाह सूरी द्वारा करवाया गया।
-    लाल किले के दरवाजे मुख्यत: दिल्ली दरवाजा व लाहौर दरवाजा-मुख्य प्रवेश द्वार है।
-    नक्कारखाना- संगीतज्ञों हेतु निर्मित महल का प्रवेश द्वार है।
-    यह 1857 की क्रांति के बाद लाल किल के प्रयोग- ब्रिटिश सेना ने अपने मुख्यालय के रूप में किया।
-    ब्रिटिश लोगों ने लाल किले की-80% इमारतों को नष्ट कर दिया।
-    बचे हुए भवनों व बागों के पुन: निर्माण हेतु “1903 में उम्मेद द्वार कमेठी का गठन किया गया तथा पुननिर्माण करवाया”
-    1947 ई. में स्वतंत्र होने के बाद ब्रिटिश सेना ने यह किला भारत सरकार को सौप दिया।
-    22-12-2003 ई. को भारतीय सेना ने इस किले को पर्यटन विभाग को सौपा।
-    2009 ई. में युनेस्को द्वारा इसे विश्व विरासत सूची में शामिल कर लिया गया।

    दिल्ली लाल किले की इमारते:-
-    दीवाने खास-

-    इसकी छत चाँदी से निर्मित है, उस पर सोने व बहुमुलय रत्नों से सजावट की गई है।
-    यहाँ लिखा हुआ है कि”अगर दुनिया में कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है”।

    दीवाने-आम-
-    आगरा से लाकर- तख्ते ताउस यहाँ स्थापित करवाया, इसी पर बैठकर शाहजहॉ न्याय करता था।

    रंग महल
-    सम्राट का हरम था, इसका निर्माण-यूरोपीय शैली में किया गया था।
-    रंगमहल की जाली “न्याय की तराजु” लगी हुई थी।
    

    जामा मस्जिद:-
-    भारत की सबसे बड़ी मस्जिद
-    इसका निर्माण- 1648 ई.में शाहजहाँ द्वारा करवाया गया जो 1656 ई.में पूर्ण हुआ।
    नोट:- शाहजहाँ ने लाहौर किले में भी, दीवाने आम, दीवाने खास, शाहबुर्ज शीशमहल, नौलखा महल, ख्वाबगाह, इत्यादि का निर्माण करवाया।

    औरंगजेबकालीन इमारते:-
-    बीबी का मकबरा-(वास्तुकार-अताउल्ला खान)
-    इसका निर्माण औरंगजेब ने अपनी पत्नी “राबिया दुर्रानी” की याद में करवाया था।
-    यह  औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में स्थित है।
-    इसे ताजमहल की (फुहड़) नकल कहा जाता है।
-    इसे दक्षिण भारत का ताजमहल कहा जाता है।

-    औरंगजेब ने मोती मस्जिद का निर्माण  दिल्ली में करवाया था जो कि पूर्णत सफेद संगमरमर से निर्मित है।
-    औरंगजेब द्वारा लाहौर की बादशाही मस्जिद- पाक की दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद

    मुगलकालीन बाग
-    मुगलकालीन बाग-ज्यामितीय विधि के आधार पर विकसित हुई थी।
-    इसमें चार बाग पद्धति का प्रयोग किया जाता था।
-    चार बाग पद्धति का जनक बाबर को माना जाता ह
    मुगलकालीन प्रमुख बाग व निर्माता 
-    आराम बाग- आगरा-बाबर द्वारा निर्मित
-    बाग-ए-बाबरी-(काबुल) बाब द्वारा विकसित व बाबर का मकबरा 
-    शालीमार-श्रीनगर-जहाँगीर द्वारा निर्मित
-    शालीमार- लाहौर- शाहजहॉ
-    निशान बाग- कश्मीर- शाहजहाँ द्वारा
-    चश्मा-ए-शाहीबाग- श्रीनगर- शाहजहाँ
-    पिंजौर बाग- हरियाणा- औरंगजेब
-    नूरजहाँ के भाई व शाहजहाँ के ससुर- आसफ खाँ ने श्रीनगर में निशांत बाग का निर्माण करवाया।
    नोट:-पिंजौर बाग को वर्तमान में 11”यादवेन्द्र बाग” के नाम से जाना जाता है।
    
    मुगलकालीन चित्रकला 
-    मुगलकालीन चित्रकला का सर्वप्रथम उल्लेख बाबरनामा में मिलता है।उल्लेख- स
-    बाबरनामा में एकमात्र चित्रकार”बिहजाद” (फारस का निवास)का उल्लेख मिलता है। 
-    बिहजाद को “पूर्व का राफेल” कहा जाता है।
-    मुगलकालीन चित्रकला का प्रारंभ- हुमायूं के काल से माना जाता है।
-    जहाँगीर का काल मुगलकालीन चित्रकला का ‘स्वर्णिम युग’ कहलाता है।

    हुमायूँ:-
-    हुमायूँ अपने निर्वासन काल (1540-1555) के दौरान जब हुमायूँ ने फारस के शासक “तहमाश्प” के यहाँ शरण ली उसी समय-2 चित्रकारों से मिला व इन्हें अपने साथ भारत ले आया।
    (i) मीर सैय्यद:-यह बिहजाद का शिष्य था तथा इसे
-     नादीर-उल-असरा की उपाधि से नवाजा गया । 
    (ii) अब्दसम्मद:-इसे अबकर के द्वारा सीरीकलम की उपाधि दी गई।
-    इसके कुछ चित्र जहाँगीर द्वारा तैयार-“गुलसन चित्रावली” में भी मिलते है।
    
    हम्जनामा:-
-    इसे मुगलकालीन इतिहास की प्रथम चित्रावली मानी जाती है।
-    मुगल चित्रकला का यह प्रथम चित्रसंग्रह है ।
-    इसमें पैगम्बर मोहम्मद के चाचा “मीर हम्जा” के वीरतापूर्ण कार्यों का चित्रांकन किया गया है-इसके अन्य नाम- दास्तान-ए-अमीर हम्जा।
-    इसमे कुल 1200 चित्र है जो कपड़े पर उत्कीर्ण है।
-    तथा 100 चित्रों के 12 खण्ड़ है। 
-    तथा इसकी भाषा- फारसी है।
-    इसे अर्द्ध पौराणिक काव्य भी कहा जाता है।
-    इसका प्रारंभ हुमायूँ के समय हुआ जबकि पूर्ण अकबर के काल में हुआ।
-    अकबर के काल में इसका कार्य “मी सैय्यद अली” के निर्देशन में हुआ।
-    कुछ चित्र अब्बदु सम्मद द्वारा भी बनाए गए है।
-    मुगलकाल की प्रथम चित्रित पुस्तक मानी जाती है।
    नोट:- मुल्ला अलाउद्दीन कजवीनी ने अपने ग्रंथ “नफाई सूल मासूल” में हम्जनामा को हुमायूँ के मस्तिष्क की उपज माना है।