Dis + ease
¯
Dis
= absence (अनुपस्थित)
Ease = सामान्य/आरामदायक अवस्था

I. जन्मजात रोग (Congenital disease) –

1.   मेण्डेलीयन विकार – गुणसूत्रों (Chromosomes) की संरचना में परिवर्तन। जैसे - हीमोफिलिया, वर्णांधता

2.   गुणसूत्री विकार – गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन। जैसे - क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम, डाउन सिंड्रोम

II. उपार्जित रोग (Acquired disease) –

1.   संक्रामक (Contegious) – रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में फैलते हैं। सूक्ष्मजीवों से फैलते हैं।

2.   गैर-संक्रामक (Non-cantagious) – रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में नहीं फैलते हैं।

रोगों से संबंधित परिभाषाएँ –

1.   रोगकारक (Pathogon) – ये सामान्यतया सूक्ष्मजीव होते हैं, जो कि रोग उत्पन्न करते हैं। उदाहरण - प्लाज़्मोडियम मलेरिया का रोगकारक है।

2.   रोगवाहक (Vector) – ये किसी रोगकारक को अपने शरीर में भोजन एवं आवास प्रदान करते हैं तथा रोगकारक के प्रसार में सहायता करते हैं। उदाहरण - मादा एनोफिलिज़ मच्छर मलेरिया के रोगकारक (प्लाज्मोडियम) की रोगवाहक है।

3.   वाहक (Carrier) – ये किसी रोगकारक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। उदाहरण - मक्खी 'हैजा' की वाहक है।

4.   आशय (Reservoir) – ये जीव किसी रोगकारक को अपने शरीर पर आवास तो प्रदान करते हैं, लेकिन स्वयं इससे प्रभावित नहीं होते हैं तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोगकारक को फैलाने में सहायता करते हैं।

फल चमगादड़ (Fruit Bat), निपाह वायरस का अाशय (Reservoir) है।

5.   इन्टरफेरॉन – वायरस संक्रमण के समय हमारी कोशिकाओं के द्वारा स्रावित प्रोटीन से बना पदार्थ, जो कि इनके संक्रमण को बढ़ने से रोकता है।

6.   टीकाकरण (Vaccination) – ये रोगों के प्रति प्रतिरोधकता (Immunity) उत्पन्न करने में सहायक। ये टीके मुख्यतया 2 प्रकार के -

सक्रिय टीका

(Active Vaccine)

  • इसमें किसी रोगकारक को निष्क्रिय या मृत अवस्था में शरीर में डाला जाता है, जिससे हमारे शरीर में उस रोगकारक के प्रति एंटीबॉडी का निर्माण हो जाता है।

  • ये पूरे जीवनभर रोग से सुरक्षा प्रदान करता है। उदाहरण - पोलियो वैक्सीन

निष्क्रिय टीका

(Inactive Vaccine)

  • इसमें पहले से तैयार एंटीबॉडीज़ को हमारे शरीर में प्रवेश कराया जाता है।

  • ये कम समय तक रोग के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है। उदाहरण - टिटेनस वैक्सीन

7.   एंटीजन – वह बाहरी पदार्थ, जो हमारे प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity System) को सक्रिय कर दे, 'एंटीजन' कहलाता है। ये सजीव या निर्जीव भी हो सकता है। उदाहरण - वायरस, बैक्टीरिया, धूल-मिट्‌टी के कण।

8.   एंटीबॉडीज़ – हमारे शरीर में एंटीजन के प्रति सुरक्षा हेतु प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) के द्वारा एंटीबॉडीज़ का निर्माण किया जाता है।

एण्डेमिक/Endonic

(स्थानीय रोग)

  • किसी क्षेत्र विशेष में ही पाया जाता है। उदाहरण - घेंघा/goitre(पहाड़ी क्षेत्रों में)

एपिडेमिक/Epidemic

(जानपदिक रोग)

  • कुछ देशों/राज्यों में फैला हुआ रोग। उदाहरण - प्लेग/Plague

पैण्डेमिक/Pendemic

(महामारी)

  • लगभग पूरे विश्व में फैला हुआ रोग। उदाहरण - COVID-19 स्वाइन फ्लू।

9.   ट्यूबरक्यूलोसिस (T.B.) –

      (a) MDR थैरेपी (Multiple Drug Resistant Therapy)

      (b) DOTS : Direct Observation Treatment Short-course

टायफॉइड/एन्टेरिक फीवर/मोतीझरा/Slow-fever/मियादी बुखार –

कॉलेरा/हैजा/विसूचिका –

डिफ्थीरिया (गलघाेंटू) –

परट्यूसिस/काली खाँसी/कुकर खाँसी/100 days cough (whooping cough) –

बोटुलिज़्म (खतरनाक खाद्य विषाक्तता/Food poisoning) –

कुष्ठ रोग/लेप्रोसी/हेनसन का रोग –

प्लेग/काली मौत/Black-Death/ब्यूबोनिक प्लेग –

एंथ्रेक्स –

 

गोनेरिया/सूजाक

सिफलिस

रोगकारक

नेस्सिरिया गोनोराई

ट्रेपोनीमा पैलिडम

संक्रमण

संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षिम यौन-संबंध

गोनेरिया के समान

लक्षण

जननांगों में संक्रमण, मूत्र करते समय जलन, मूत्र पथ में घाव बन जाते हैं। बाँझपन(Sterlity)

गोनेरिया के समान + याद्दाश्त में कमी आने लगती है, बाल झड़ने लगते हैं। बाँझपन

उपचार

एंटीबायोटिक दवाएँ

एंटीबायोटिक दवाएँ

न्यूमोनिया –

 

वायरस जनित रोग

बड़ी माता(Small Pox)/ चेचक –

छोटी माता/चिकन पॉक्स –

डेंगू (Dengue) –

प्रथम अवस्था में (प्रारंभिक 4-5 दिन) → तेज बुखार + शरीर में दर्द (हड्‌डी तोड़ बुखार/Bone-Breaking Fever)

द्वितीय अवस्था में (4-5 दिन बाद) → प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आने लगती है। रक्त पतला होने से आंतरिक रक्त स्राव होने लगता है।

पोलियो मायलाइटिस –

IPV

(Inactivated Polio Vaccine)

  • खोजकर्ता – साल्क

  • इसमें मृत वायरस को शरीर में इंजेक्शन के द्वारा डाला जाता है, जिससे शरीर में एंटीबॉडीज़ का विकास होता है।

OPV

(Oral Polio Vaccine)

  • खोजकर्ता – साबिन

  • इसमें जीवित लेकिन रोग उत्पन्न करने की क्षमता से रहित वायरस को मुखीय टीके (Oral Vaccine) के रूप में दिया जाता है।

मम्प्स(Mumps)/गलसुआ –

मीज़ल्स/ख़सरा/रुबियोला –

रुबेला/जर्मन खसरा –

हर्पीज़ –

एड्स/AIDS/एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम –

रेबीज़/जलभीति –

हिपेटाइटिस –

मेनिन्जाइटिस –

अन्य वायरस जनित रोग –

 

प्रोटोजोआ जनित रोग

मलेरिया –

(a) प्राथमिक पोषी (Primary Host) – मच्छर (लैंगिक अवस्था/जनन)

(b) द्वितीयक पोषी (Secondary Host) – मनुष्य (अलैंगिक अवस्था/जनन)

अमीबियासिस/अमीबता/अमीबीय पेचिश –

पायरिया/पेरियोडोन्टाईटिस –

लीशमानियेसिस/काला बाजार/Black fever –

ट्रिपनोसाेमियेसिस/अफ्रीकन निद्रा रोग –