प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है, जो हमें वस्तुओं को देखने में मदद करता है।

प्रकाश एक प्रकार की विकिरण ऊर्जा है, जो अन्य ऊर्जाओं की तरह नजर नहीं आती। अत: हम केवल उन वस्तुओं को ही देख पाते है, जिन पर प्रकाश ऊर्जा पड़ती है।

विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का वह भाग, जिसके लिए मानव नेत्र संवेदी होते हैं, दृश्य प्रकाश कहलाता है।

ये विद्युत चुम्बकीय तरंगों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करता है।

इन दृश्य प्रकाश तरंगों की तरंगदैर्ध्य लगभग 3800 Ao - 7600 Ao होती है।

प्रकाश की गति के दौरान इसकी गति की दिशा के लम्बवत् विद्युत एवं चुम्बकीय घटक पाए जाते हैं।

प्रकाश की प्रकृति के बारे में सर्वप्रथम ‘डेकार्ट’ ने बताया कि ‘प्रकाश छोटी-छोटी द्रव्यमान विहीन कणिकाओं से मिलकर बना होता है’।

डेकार्ट के बाद ‘न्यूटन’ ने भी प्रकाश को द्रव्यमान विहीन कणिकाओं से मिलकर बना माना तथा इसे सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे ‘प्रकाश का कणिका सिद्धांत (Particle theory of light)’ कहा गया।

यंग तथा हाइगेन्स जैसे वैज्ञानिकों ने माना प्रकाश तरंगों के रूप में पाया जाता है, इसे प्रकाश का तरंग सिद्धांत (Wave theory of light) कहा गया।

दोनों ही सिद्धांत सही थे लेकिन प्रकाश अलग-अलग परिघटनाओं के दौरान कभी तरंग के  समान तो कभी कण के समान व्यवहार करता है, इसे ही प्रकाश की द्वैत प्रकृति (Dual Nature of light) कहा गया।   

 

प्रकाश का तरंग के रूप में व्यवहार

प्रकाश का कण के रूप में व्यवहार

(1)

परावर्तन

(1)

प्रकाश विद्युत प्रभाव

(2)

अपवर्तन

(2)

कॉम्पटन प्रभाव

(3)

ध्रुवण

(3)

छाया का बनना।

(4)

व्यतिकरण

(5)

विवर्तन

     

प्रकाश तरंगों के गुण –

(i) प्रकाश की उपस्थिति

(ii) प्रकाश तरंगों का वस्तु से टकराकर हमारी आँखों तक पहुँचाना।    

प्रकाश का परावर्तन  –

 

परावर्तन के नियम  –

प्रकाश का परावर्तन दो नियमों पर आधारित होता है-

(i) आपतित प्रकाश किरण (i), अभिलम्ब तथा परावर्तित किरण (r) तीनों एक ही तल में पाए जाते हैं।

(ii) आपतन कोण (\(\theta\) i) एवं परावर्तन कोण (\(\theta\)r) का मान सदैव बराबर होता है।           \(\theta i=\theta r\) 

प्रकाश के परावर्तन के प्रकार  –

(Type of Reflection of light)

(1) नियमित परावर्तन
(2) विसरित परावर्तन

(1)   नियमित परावर्तन (Regular Reflection)

 

(2)   विसरित परावर्तन (Diffused Reflection) –

Note :

समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का निर्माण

        

पूरा रखने हेतु दर्पण की न्यूनतम लम्बाई दीवार की एक तिहाई \(\frac{1}{3}\) होनी चाहिए।

प्रकाश का अपवर्तन -

अपवर्तन का चित्र

अपवर्तन के नियम -

(1) आपतित प्रकाश किरण (i) अभिलम्ब (h) तथा अपवर्तित प्रकाश किरण (r) तीनों एक ही तल में होते हैं।

(2) स्नेल का नियम \(\frac{\sin \theta_{i}}{\sin \theta_{r}}=\mu\) (अपवर्तनांक) अर्थात् आपतन कोण की ज्या (sini) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sinr) का अनुपात किन्ही दो माध्यमों के लिए एक नियतांक होता है, जिसे दूसरे माध्यम का पहले माध्यम को सापेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं।

अपवर्तनांक ( \(\mu\)) -

\(\mu\) (काँच) > \(\mu\)  (जल) > \(\mu\)  (वायु)

अपवर्तनांक की निर्भरता -

(1) माध्यम पर -

\(\mu_s>\mu_1>\mu_g\) 

(2) माध्यम के तापमान पर -
\(\mu\)गर्मजल \(\mu\)ठंडजल

(3) प्रकाश के रंग पर -
\(\mu_v>\mu_R\) 

दैनिक जीवन में अपवर्तन -

(i) तारों का टिमटिमाते हुए प्रतीत होना।

(ii) जल में आधी डूबी हुई वस्तु का मुड़ा हुआ दिखाई देना।

(iii) पानी से भरी बाल्टी के पेंदे का ऊपर उठे हुए दिखाई देना।

(iv) सूर्योदय से पूर्व तथा सूर्यास्त के बाद भी कुछ समय तक सूर्य का दिखाई देना।

(v) लेंस से अपवर्तन की घटना

(vi) पानी से भरे काँच के ग्लास में रखा नीबू पार्श्व से देखने पर अपने वास्तविक आकार से बड़ा दिखाई पड़ता है।

कांच के आयताकार स्लैब से अपवर्तन

Note :-

पूर्ण आन्तरिक परावर्तन –

पूर्ण आंतरिक के लिए आवश्यक दो शर्तें –

(i) प्रकाश का सघन से विरल माध्यम में प्रवेश करना। (सघन →विरल)

(ii) आपतन कोण का मान क्रांतिक \(\rm{(\theta i)}\) कोण \(\rm{(\theta c)}\)  से अधिक \(\rm{(\theta i>\theta c)}\)

 

Example :

मरीचिका –

(1) रेगिस्तान की मरीचिका –

(2) ठंडे प्रदेशों में मरीचिका – इटली के दक्षिणी किनारे पर एक गाँव ऐसा भी है, जहाँ के लोगों को अक्सर पास ही सिसली द्वीप में एक उलटा नगर बना हुआ नजर आता है, यह फैटा मोरगाना कहलाता है।

प्रकाशिक तन्तु (Optical Fibers) –

 

प्रकाशिक तंतु के उदाहरण -

(i) जल में पड़ी हुई परखनली चमकीली दिखाई देना।

(ii) काँच में आयी दरारें चमकना।

(iii) कालिख से पुते हुए गोले का जल में चमकना।

प्रकाश का वर्ण विक्षेपण –

 

कोणीय विक्षेपण - \((\theta)=S r-S r =(U v-U R) A \)  

प्रिज्म की वर्ण विक्षेपण क्षमता (w) =

Note :

लेंस (Lens) –

(i) उत्तल लेंस (convex)

(ii) अवतल लेंस (concave)

(1) उत्तल लेंस (convex lens) –

वस्तु की स्थिति

प्रतिबिम्ब की स्थिति

प्रतिबिंब की प्रकृति

∞ (अनंत पर)

F(फोकस बिंदु पर)

वस्तु से बहुत छोटा, उल्टा+वास्तविक

∞-2f के मध्य

F-2F के मध्य

वस्तु से छोटा, उल्टा+वास्तविक

2F पर

2F पर

वस्तु के बराबर, छोटा,उल्टा+वास्तविक

2F-F के मध्य

2F-∞ के मध्य

वस्तु से बड़ा, उल्टा+वास्तविक

F पर

वस्तु से बहुत बड़ा, उल्टा+वास्तविक

F एवं प्रकाशिक केन्द्र के मध्य

वस्तु की ओर ही, वस्तु के पीछे बनता है।

वस्तु से बड़ा, आभासी एवं सीधा

(2)    अवतल लेंस (concave lens) –

अवतल लेंस से प्रतिबिम्ब-

उत्तल दर्पण के उपयोग –

अवतल दर्पण के उपयोग –

Note :

दृष्टिदोष एवं निवारण –

(1)   दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia/Long Sightedness)

 (2) निकट दृष्टि दोष (Myopia/Short Sightedness)

(3)   जरा दूरदर्शिता (Press biopia)

(4)   अबिन्दुकता (Astigmation)

(5)   मोतियाबिन्द (Cataract)

(6)   वर्णान्धता (Colour-bindness)

लेंस सूत्र (Lens-Formula) –
\(\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}\)

         लेंस की शक्ति/क्षमता –

       

विभिन्न माध्यमों में लेंस की क्षमता तथा प्रकृति में परिवर्तन –

(A)   1 < u माध्यम < u लेंस -

(B)   u माध्यम = u लेंस –

(C)   u माध्यम > u लेंस –

इन्द्रधनुष (Rainbow) –

(1)   प्राथमिक इन्द्रधनुष –

दो बार अपवर्तन तथा 1 बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के फलस्वरूप प्राथमिक इन्द्रधनुष बनता है। 

(2)   द्वितीयक इन्द्रधनुष –

प्रकाश का प्रकीर्णन –

प्रकाश के प्रकीर्णन के उदाहरण –

(1) सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय आकाश का लाल नारंगी दिखाई   देना।

(2) दिन के समय आकाश का नीला दिखाई देना।

(3) समुन्द्र का नीला दिखाई देना।

(4) खतरे के निशान लाल रंग के बनना।

(5) बादलों का रंग सफेद  दिखाई   देना। (यह रैले नियम का पालन नहीं करता है क्योंकि इसमें \(\alpha>>\lambda\)  आकार की जल की सूक्ष्म बूंदे होती है।)

Note -  

प्रकाशीय रंग

(1)   प्राथमिक रंग – लाल, हरा व नीला

(2)   द्वितीयक रंग – प्राथमिक रंगों के मिश्रण से बने रंग द्वितीयक रंग कहलाते है।

(1) हरा+लाल = पीला

(2) नीला+लाल = मैजेन्टा

(3) नीला+हरा = मोरपंखी नीला

(3)   पूरक रंग – दो रंग जो आपस में मिलकर श्वेत प्रकाश उत्पन्न करते है, पूरक रंग कहलाते हैं।

         (1) लाल+मैजेन्टा = सफेद

         (2) हरा+मैजेन्टा = सफेद

         (3) नीला+पीला=सफेद

         Note –

प्रकाश का व्यतिकरण (Interference of light) –

(1) संपोषी व्यतिकरण (तीव्रता अधिक)

(2) विनाशी व्यतिकरण (तीव्रता कम)

(1) \(\Delta=(2 n+1)-\frac{1}{2}\) होती है।

उदाहरण –

(1) साबुन के पानी में बुलबुले का रंगीन दिखाई देना।                    

(2) CD/DVD के एक भाग का रंगीन दिखाई देना।

(3) सड़क पर फैले तेल का रंगीन दिखाई देना।

ध्रुवण –

विवर्तन (Diffraction) –

प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photo-eletric Effect)   

आइन्सटीन की प्रकाश विद्युत समीकरण –   
\(\mathrm{h} v=\phi_{0}+\mathrm{Kmax}\)
\(K m a X=h v-\theta_{\circ}\)
\(\theta_{\circ}\) धातु का कार्य फलन

 

 

hv= आपतित फोटोन की ऊर्जा
v= प्रकाश की आवृत्ति

प्रकाश के स्त्रोत :-

प्राकृतिक स्त्रोत

कृत्रिम स्त्रोत

सूर्य

बल्ब

चन्द्रमा

ट्यूबलाइट

तारे

LED

जुगनू व मछलियाँ

दर्पण सूत्र :- 
\(\frac{1}{f}=\frac{1}{v}+\frac{1}{u} \)