Tax (कर) :-
1. यह एक अनिवार्य भुगतान है।
2. बदले में लाभ की प्राप्ति नहीं।
3. सामान्य हित में उपयोग।
4. सेवा का मूल्य नहीं है।
5. भुगतान निजी कर्तव्य
फीस (शुल्क) :-
(सेवा के उपभोग पर भुगतान की जाने वाली फीस)
Duty :-परोक्ष रूप (Indirect) रूप से लाभ प्राप्त होने पर लियाजाने वाला शुल्क।
Cess - उपकर
विशेष उद्देश्य के लिए कराधार पर लगाया गया अतिरिक्त कर
Surcharge - अधिभार
विशेष उद्देश्य के लिए कर दायित्व पर जो कर आरोपित किए जाते है।
कर के प्रकार (Types of Tax)
1. प्रत्यक्ष कर (Direct Tax)
1. कराघात (Tax Incidence)
2. करापात (Tax Impact)
जिस पर आरोपित किया जाता है उसी के द्वारा भुगतान किया जाता है।
प्रत्यक्ष कर

2. अप्रत्यक्ष कर
1. कराघात (Tax Incidence)
2. करापात (Tax Impact)
- कर आरोपित कहीं ओर किया जाता है और भुगतान कहीं ओर किया जाता है।
निगम कर (Corporate Tax)
- किसी निगम, कम्पनी, व्यवसायिक घरानों की आय पर लगाया जाने वाला कर।
- वर्तमान में निगम कर 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया गया।
(MAT Minimum Alternative Tax)
- न्यूनतम वैकल्पिक कर
- यह कर की न्यूनतम दर है जो उन निगमों की आय पर आरोपित की जाती है जो कर छूटों कालाभ उठाकर कर दायरे से बाहर आ जाती है।
STT 2004प्रतिभूति हस्तान्तरण कर -
- प्रतिभूतियों के हस्तान्तरण पर आरोपित किया जाने वाला कर।
पूंजीगत लाभ कर (Capital Gain Tax)
पूंजीगत सम्पत्ति के लाभ पर अर्जित कर
A. भौतिक सम्पत्ति
(1) S.T. CGT
अल्पकालिक CGT (36 महिने से पूर्व आयकर)
(2) L.T. C.G.T (दीर्घकालीन CGT)
36 महिने के बाद 20 प्रतिशत
B. वित्तीय सम्पत्ति
1. ST CGT
अल्पकालीन CGT
12 महिने से पूर्व 15 प्रतिशत
2.LT CGT
दीर्घकालीन C.G.T.
12 महिने के बाद 10 प्रतिशत
Divident Distribution Tax - DDT
(कम्पनी द्वारा अपने धारकों को वितरित किए गए लाभांश पर लगाया जाने वाला कर)
* बजट 2020-21 में इसे समाप्त कर दिया गया।
अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)
कर का आरोपण तथा कर भुगतान अलग-अलग जगह कराघात तथा करापात अलग-अलग स्थानों पर हो तो वह अप्रत्यक्ष कर हैं।
1. केन्द्र सरकार
1. सीमाकर
2. केन्द्रीय उत्पाद कर
3. जी.एस.टी.
4. सेवाकर
2. राज्य कर
1. जी.एस.टी.
2. पेट्रोल व डीजल पर वेट
3. खराब उत्पादन कर
4. पथकर, मनोरंजन, स्टाम्प शुल्क
कर सिद्धांत (Tax Common)
1. प्रगतिशील कर प्रणाली (Progressive Tax)
(जैसे-जैसे आय में वृद्धि वैसे-वैसे कर की दरों में वृद्धि)

2. प्रतिगामी अप्रगतिशील कर प्रणाली (Unprogressive Tax)

3. आनुपातिक कर प्रणाली (Proportional Tax)

कर वंचन Tax Evasion
(सरकार द्वारा तैयार किए नियमों व कानूनों व छूटों की सहायता से कर दायित्व में कमी करना)
कर शमन Tax Mitigation
(सरकार द्वारा उपलब्ध छूटों का उपयोग करके दायित्वों में कमी)
(सरकार कानूनों का उपयोग करके देयता से बचना)
कर चोरी
(गैर कानूनी प्रक्रिया जिसमें आय के स्त्रोतों को छिपाकर तथा उत्पादन मात्रा को कम बताकर कर देयता में कमी की जाती है)
टोबिनटैक्स
सन 1970 में टोबिन द्वारा
विदेशी मुद्रा के लेन-देन से जो आय प्राप्त होती है, उस पर आरोपित किया जाने वाला कर।
दोहरा कर बचाव समझौता (DTAA)
- जब किसी आय व वित्तीय लेन-देन पर दो या दो से अधिक प्राधिकार द्वारा कर आरोपित किया जाता है तो यह प्रक्रिया दोहरा कर कहलाती हैअर्थात जहां से आय आर्जित की गई उस देश में कर तथा जिस देश का नागरिक है वहां कर।
- इस समस्या से बचने के लिए जो समझौता दो देशों के मध्य किया जाता है- DTAA कहलाता है।
भारत मॉरिशस के मध्य -1983
कर आतंकवाद (Tax Terrorism)
- सरकार द्वारा अपने राजस्व संग्रह के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कर की दरों में वृद्धि की जाती है, परन्तु कुछ करदाता चोरी करते है। अत: सरकार द्वारा अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ईमानदार करदाताओं से अवैध तरीकों से कर भुगतान हेतु दबाव डाला जाता है। यह प्रक्रिया कर आतंकवाद कहलाती है।
कर उत्पादकता ⁄ कर उछाल (Tax Buoyancy)
- किसी वित्त वर्ष में सांकेतिक जी.डी.पी. के अनुपात में कर राजस्व में होने वाली वृद्धि कर उछाल उत्पादकता कहलाती है।
प्रत्यक्ष कर (Direct Tax)
1. व्यक्ति या व्यवसाय की आय पर कर आरोपण।
2. यह प्रगतिशील कर है।
3. कराघात व करापात।
- एक ही स्थान पर होता है कर भुगतान उसी द्वारा जिस पर कर आरोपित।
अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)
1. वस्तु व सेवा पर आरोपित प्रतिगामी कर है।
2. कराघात व करापात अलग-अलग स्थानों पर होता है।
3. करारोपण व कर भुगतान अलग-अलग स्थानों पर होता है।
अप्रत्यक्ष कर सुधार (Indirect Tax Reform)
1976 - एल.के. झा समिति केन्द्र में वेट प्रणाली
1981 - विनिर्माण वेट
1981 - मोडवेट
1991 - चैलेया समिति
1994 -1995 सेवा कर
2003 में 88 वें संविधान संशोधन के तहत एक्ट 268 (a) सेवाकर
मूल्यवर्धन कर (Value added Tax - Vat)
- उत्पादन प्रक्रिया में होने वाले मूल्यवर्धन पर आरोपित किया जाने वाला कर।
वस्तु व सेवाकर (GST)
- देश में एक समान अप्रत्यक्ष कर प्रणाली अर्थात सभी प्रकार के अप्रत्यक्ष करों को मिलाकर समान कर प्रणाली
'एक देश, एक कर, एक समान बाजार'
- 1 जुलाई 2017 से देश में जी.एस.टी. लागू किया गया
विश्व में सर्वप्रथम - फ्रांस ने
भारत जी.एस.टी. - कनाडा मॉडल आधारित
जी.एस.टी. क्या
1. समेकित अप्रत्यक्ष कर (Compressive Indirect Tax)
(17 प्रकार के कर शामिल)
2. बहुस्तरीय कर प्रणाली (Multy Stage Tax)
3. बिन्दु आधारित कर प्रणाली (Destination Base Tax)
4. मूल्यवर्धन कर प्रणाली (Value Added Tax System) किया गया।
संविधान में
केन्द्र सूची-15-केन्द्र सरकार
राज्य सूची-20- राज्य सरकार
समवर्ती सूची-3- केन्द्र सरकार
जी.एस.टी. हेतु 122वां संविधान संशोधन बिल संसद में प्रस्तुत किया गया।
संविधान में 101 वां संशोधन किया गया।
101 वें संविधान संशोधन में-5 संशोधन
1. केन्द्रीय GST
2. राज्य GST
3. अन्तरराज्जीय GST
4. केन्द्रशासित प्रदेशों GST
5. राज्यों को क्षतिपूर्ति हेतु
जी.एस.टी के प्रकार (Types of G.S.T.)
1. C.G.S.T. (केन्द्र)
1. अतिरिक्त सीमा शुल्क
2. सेवा कर
3. केन्द्रीय उत्पादक कर
2. S.G.S.T. (राज्यों)
1. वेट
2. मनोरंजन कर
3. चुंगी
4. उत्पाद शुल्क
5. विलासिता
3. I.G.S.T. (केन्द्र)
1. केन्द्रीय बिक्री कर
नोट:- GST में 17 प्रकार के करों को शामिल किया गया है।
GST में शामिल नहीं होने वाले कर
1. मूल सीमा शुल्क
2. डम्पिग रोधी शुल्क
3. पेट्रोलियम उत्पाद
4. मानव उपभोग एलकोहल
5. स्टाम्प शुल्क
6. स्थानीय निकायों का सम्पदा कर
7. विघुत कर
जी.एस.टी. काउंसिल
अनुच्छेद 279 A के तहत संवैधानिक संस्था
संरचना:-
- अध्यक्ष- केन्द्रीय वित्त मंत्री
- सदस्य- केन्द्र में राज्य वित्त मंत्री तथा राज्यों के प्रभारी वित्त मंत्री
- कौरम ⁄ गणपूर्ति- 50 प्रतिशत सदस्य
सहमती = \(\frac{3}{4}\) मत ⁄ 75 प्रतिशत मत
मताधिकार
\(\frac{1}{3}\) केन्द्र सरकार = 33.3%
\(\frac{2}{3}\) राज्य सरकारों = 66.6%
अर्थात निर्णय केन्द्र तथा राज्यों के द्वारा सहयोगी रूप में लिया जाता है।
जी.एस.टी. परीषद के कार्य
1. जी.एस.टी. दरों का निर्धारण
2. जी.एस.टी. लागू करने हेतु कानून तैयार करना।
3. जी.एस.टी. में शामिल होने हेतु न्यूनतम सीमा का निर्धारण।
4. उत्तर पूर्व के राज्यों के लिए विशेष जी.एस.टी. निर्धारण।
5. आपदा के समय जी.एस.टी. दरों में छूट का निर्धारण।
6. पेट्रोल व डीजल हेतु जी.एस.टी. दरों का निर्धारण।
GST हेतु दरें :-
- 0 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत, 28 प्रतिशत स्वर्णाभूषण-3 प्रतिशत
- अनुच्छेद - 366 जी.एस.टी. - शराब को छोडकर सभी वस्तुएँ व सेवाएँ जी.एस.टी. में शामिल।
राज्यों को क्षतिपूर्ति:-
जी.एस.टी. लागू होने के कारण राज्यों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई केन्द्र द्वारा की जायेगी।
क्षतिपूर्ति का आधार:-
राज्यों की वर्ष 2015-16 की आय
क्षतिपूर्ति 5 वर्ष के लिए-प्रतिमाह भुगतान
E-Way-Bill (1 April-2018)
- (इससे तात्पर्य कम्प्यूटर आधारित बिल से है। वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए तैयार इलेक्ट्रानिक बिल) ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य के मध्य पारगमन पास की आवश्यकता को समाप्त करना।
कब :-
1. वस्तु आपूर्ति के सम्बंध में।
2. वस्तु की वापसी पर।
3. अपंजीकृत व्यक्ति द्वारा पंजीकृत को आपूर्ति की जाती है।
4. जब वस्तु की कीमत 50,000 रूपये से ज्यादा व दूरी 10 कि.मी. से ज्यादा
कौन :-
1. पंजीकृत व्यक्ति
2. अपंजीकृत व्यक्ति (आपूर्ति जब पंजीकृत व्यक्ति को हो)
3. परिचालक व ट्रांसपोटर बिल तैयार
जैसे ही ई वे बिल तैयार होगा
ई वे बिल नम्बर –प्राप्तकर्ता, आपूर्तिकत्ता, परिवाहक को सूचना उपलब्ध होगी ।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र को इसकी जानकारी दी जायेगी।
वैद्यता:-
- एक बार तैयार बिल 100 कि.मी. की दूरी व 1 दिन के लिए वैध तथा दूरी व दिन के इसी अनुपात में वैद्य माना जाएगा।
राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण
(National Anti-Profiting Athority) - NAPA
धारा – 171 के तहत 2017 में स्थापना
उद्देश्य:-
- जी.एस.टी काउंसिल द्वारा करों में की गई कमी का लाभ उपभोक्ता को उपलब्ध कराना
संरचना:-
- 1 अध्यक्ष, 4 सदस्य, उम्र-62 वर्ष
जी.एस.टी.एन.(G.S.T. Network)
- कम्पनी अधिनियम की धारा-8 के तहत स्थापित गैर लाभकारी संगठन।
उद्देश्य:-
- जी.एस.टी. के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक सूचना प्रौद्योगिकी से अवसंरचना सुविधा
1. केन्द्र सरकार
2. राज्य सरकार
3. अन्य हितधारक
GSTN में प्रारम्भ में हिस्सेदार

- सूचनाओं के दुरूपयोग को रोकने के लिए जी.एस.टी.एन.में सुधार किया गया।
- अब केन्द्र-50 प्रतिशत, राज्य -50 प्रतिशत अर्थात शत प्रतिशत सरकार की हिस्सेदारी होगी।
1. रिवर्स चार्ज मेकेनिज्म
2. कम्पोजिशन स्कीम
3. इनपुट क्रेडिट
1. रिवर्स चार्ज मेकेनिज्म:-
- जी.एस.टी. प्रक्रिया में जी.एस.टी. भुगतान की जिम्मेदारी आपूर्तिकर्त्ता की होती है। परन्तु कुछ मामलों में यह उत्तरदायित्व क्रेता या प्राप्तकर्ता का होता है।
मामले :-
जब आपूर्तिकर्त्ता पंजीकृत नहीं हो। जब आयात किया जाता है।
2. जी.एस.टी. कम्पोजिशन स्कीम -समाधान व्यवस्था
- छोटे व्यापारी जो जी.एस.टी. में पंजीकृत है उन्हें जी.एस.टी. की जटिलटा से बचाने हेतु दी गई सुविधा जिसका टर्न ऑवर 1.5 करोड़ रूपये। जो टर्न ऑवर का 1 प्रतिशत, 5 प्रतिशत या 6 प्रतिशत कर भुगतान करते हे।
3. इनपुट क्रेडिट (Input Credit):-
- इनपुट क्रेडिट से तात्पर्य इनपुट पर जो कर पहले चुकाया गया है उसे ऑउटपुट कर भुगतान के समय ऑउटपुट कर से घटा दिया जाता है।
शर्तें:-
1. इनपुट क्रेडिट की प्राप्ति तभी होगी जब उसने जी.एस.टी. का भुगतान कर दिया है जो उसने खरीददार से ली थी।
2. यदि इनपुट आउटपुट तो राशि को आगे ले जाया जा सकता है या मांग करने पर शेष राशि उपलब्ध कराई जा सकती है।
3. यदि आउटपुट इनपुट से शेष राशि भुगतान करनी होगी।
4. इनपुट सुविधा पूँजीगत वस्तु या सेवा के लिए उपलब्ध।
5. उपभोग वस्तु व सेवा पर इनपुट सुविधा नहीं।
जी.एस.टी. के लाभ:-
1. सम्पूर्ण देश एक समान बाजार के रूप में बदल गया (राज्यों के मध्य कर प्रतिबंध समाप्त होने के कारण)
2. भ्रष्टाचार और हेराफेरी में कमी (क्योंकि इनपुट क्रेडिट का प्रावधान)
3. अप्रत्यक्ष करों की अधिकता के कारण जो जटिलता भी वो समाप्त।
4. जी.एस.टी. में सभी निर्णय संघ व राज्यों द्वारा मिलकर लिए जाते है। अत: सहयोगात्मक संघवाद में वृद्धि।
5. मूल्य वर्धित कर प्रणाली होने के कारण-करों में दोहराव कम-उपभोक्ता को सस्ती दरों पर वस्तुओं व सेवाओं की उपलब्धता अर्थात मुद्रास्फीति की दर कम।
6. सम्पूर्ण देश में प्रतिस्पर्धी बाजार के कारण (गुणवत्ता में वृद्धि)
7. इस्पेक्टर राज की समाप्ति
8. करों के संग्रहण की लागत में कमी (एक प्रकार की कर प्रणाली होने से कम अधिकारियों की आवश्यकता)
9. कर संग्रहण में वृद्धि जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी।
ज्यादा आर्थिक क्रियाएँ करों के दायरे में शामिल होने से जी.डी.पी. वृद्धि दर तेज होगी।
10. सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होने से पूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी।
प्रत्यक्षकर सुधार
सन 1991- चैलेया समिति
सन 2002- विजय केलकर
ईश्वर पैनल-2016 (दस सदस्यीय)
प्रत्यक्ष कर संरचना में संशोधन समायोजन व सरलीकरण
डी.टी.सी. (Direct Tax Code)
1. आयकर अधिनियम-1961
2. सम्पत्ति कर अधिनियम-1957
1. आयकर घोषणा
2. आयकर सेतु
3. प्रोजेक्ट इनसाइट
4. आधार से लिंक
5. विवाद से विश्वास अधिनियम-2020
आयकर घोषणा योजना:-
इसके तहत आय कर डिफॉल्टर को आय अधिनियम के तहत आय का खुलासा तथा आयकर जमा करने का अवसर प्रदान किया गया है।
आयकर सेतु :-
आयकरदाताओं को आयकर की बारीकियों से अवगत कराने व आयकर भुगतान की सरल अवसंरचना उपलब्ध कराने हेतु आयकर रिटर्न दाखिल करके टी.डी.एस. सम्बंधी जानकारी।
प्रोजेक्ट इनसाइट :-
आयकरदाताओं के आय तथा व्यय के अंतर की विसंगतियों का पता लगाने के लिए उनके द्वारा किए गए भुगतानों की जाँच करना।
आधार लिंक :-पैन कार्ड आधारकार्ड से लिंक
विवाद से विश्वास अधिनियम-2020
30 जून से पूर्व आयकर जमा करने पर अतिरिक्त चार्ज से छूट प्रदान करना।
छूट प्राप्ति वाले मामले :-
1. आयकर आयुक्त में लम्बित मामले।
2. आयकर अपीलीय अधिकरण में लम्बित मामले।
3. उच्च न्यायालय में लम्बित मामले।
4. उच्चतम न्यायालय में लम्बित मामले।
नोट:-
विवाद से विश्वास अधिनियम के तहत समाधान किए गए किसी मामलें पर पुन: कार्यवाही नहीं होगी।
Subsidy – (अनुदान)
- सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता :-
सरकार बुनियादी वस्तुओं व सेवाओं की उपलबधता सभी लोगों के लिए सुनिश्चित करने हेतु आर्थिक लागत से कम लागत पर उपलब्ध कराती है तथा आर्थिक लागत व रियायती लागत के मध्य मूल्य का भुगतान जो सरकार द्वारा किया जाता है। सब्सिडी कहलाती है।
सब्सिडी = आर्थिक लागत - रियायती दर
सब्सिडी वस्तुओं तथा सेवाओं की लागत में कमी करती है।
उद्देश्य:-
1. बुनियादी वस्तुएँ व सेवाएँ सभी के लिए उपलब्ध कराना।
2. आर्थिक व सामाजिक आधार पर असमानता को समाप्त करना।
3. अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के प्रभाव को कम करना।
4. सरकार द्वारा मांग को बढ़ाकर उत्पादन क्षेत्र में प्रोत्साहन दिया जाता है।
5. खाद्य सुरक्षा प्रदान कर पोषण स्तर को बनाए रखना।
6. स्वास्थ्य तथा शिक्षा की उपलब्धता से मानव संसाधन का विकास।
7. उत्पादन लागत को कम करना तथा आय में स्थिरता प्रदान करना।
8. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तैयार मानकों के लक्ष्यों को प्राप्त कर वैश्विक मंचों पर साख मजबूत करना।
9. आर्थिक व सामाजिक न्याय के साथ गरिमामय जीवन के संवैधानिक लक्ष्यों को प्राप्त करना।
10. घरेलू उत्पादन को सब्सिडी प्रदान कर आयात हतोत्साहित व निर्यात को प्रोत्साहित किया जाता है।
सब्सिडी के प्रकार (Types of Subsidy) :-
1. प्रभाव के आधार (On the basis of Impact)
1. मैरिट आधारित सब्सिडी
2. नॉन मैरिट सब्सिडी
2. आवंटन ⁄ वितरण के आधार पर (On the basis of Distribution)
1. प्रत्यक्ष (Direct)
2. अप्रत्यक्ष (Indirect)
3. अन्तरण के आधार पर (On the basis of transfer)
1. तिरछी सब्सिडी (Cross Subsidy)
2. प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण (Direct Benefit Transfer)
3. यू.बी.आई. (U.B.I.)
उपादेयता आधार :-
1. मेरिट बेस :-
जब सब्सिडी का लाभ समाज के सभी वर्गों को प्राप्त होता है।(प्राथमिक शिक्षा व स्वास्थ्य)
2. नॉन मेरिट बेस
जब सब्सिडी का लाभ सभी वर्गों को प्राप्त नहीं होकर कोई विशेष वर्ग लाभंवित होता है। (उच्च शिक्षा अल्पसंख्यक कल्याण)
आवंटन के आधार पर (On the basis of distribution)
1. प्रत्यक्ष सब्सिडी (Direct Subsidy) :-
यदि बजट के किसी मद प्रत्यक्ष रूप से वित्त का आवंटन कर सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उर्वरक सब्सिडी, नि:शुल्क शिक्षा, खाद्यान सब्सिडी।
2. अप्रत्यक्ष सब्सिडी (Indirect Subsidy)
यदि बजट में किसी वस्तु या मद पर प्रत्यक्ष रूप से सहायता नहींउपलबध कराकर अप्रत्यक्ष रूप से लाभ प्रदान किया जाता है। रियायती दरों पर ऋण बिजली की दरों में छूट।
अन्तरण के आधार पर (On the basis of transfer)
1. तिरछी सब्सिडी (Cross Subsidy)
2. प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण (D.B.T.)
3. यू.बी.आई. (U.B.I.)
तिरछी सब्सिडी (Cross Subsidy) :-
जब किसी एक आर्थिक क्रिया में मूल्यों को कम करने के लिए किसी दूसरी आर्थिक क्रिया के मूल्य को बढ़ाकर उस पर पहली गतिविधी का बोझ डाला जाता है।
प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण (Direct Benefit Transfer) :-
लाभार्थी को सीधे बैंक खाते में प्रत्यक्ष रूप से उपलब्धता। अन्तर मूल्य का भुगतान सीधे खाते (आर्थिक लागत - रियायती लागत)
सब्सिडी भुगतान प्रक्रिया में लीकेज को समाप्त करना तथा भ्रष्टाचार को मिटाना।
पहली योजना-एल.पी.जी. गैस सब्सिडी ट्रांसफर
Universal Basis Income (U.B.I) :-
सब्सिडी की इस अवस्था को बुनियादी आवश्यकताओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए
न्यूनतम आय उपलब्ध कराई जाती है :-उददेश्य एक निश्चित जीवनस्तर की उपलब्धता सुनिश्चित्ता। सरकार द्वारा अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध कराई जा रही सब्सिडी दायित्व समाप्त।
यू.बी.आई. (U.B.I.) दोष :-
1. युवाओं में काम न करने की प्रवृत्ति का पैदा होना।
2. अनावश्यक राजकौषीय भार में वृद्धि होना।
3. श्रम की दरों में होने वाली वृद्धि उत्पादन लागत में वृद्धि करेगी।
4. अर्थव्यवस्था में बढ़ी मुद्रा तरलता मांग वृद्धि, मुद्रास्फीति।