गरीबी (Poverty)
गरीबी
मापन- (संगठन समितियां)
प्रकार
कारण
लॉरेन्ज वक्र
गिन्नी गुणांक
नियंत्रण उपाय
गरीबी
सीमित संसाधनों की स्थिति और जीवन की वह अवस्था जिसमें व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम नहीं होता है अर्थात आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाता है तो गरीबी तथा व्यक्ति गरीब कहलाता है।
गरीबी मापन हेतु विभिन्न संगठन
नीति आयोग
- कैलोरी उपभोग आधार पर
- ग्रामीण = 2400 कैलोरी प्रतिदिन
शहरी = 2100 कैलोरी प्रतिदिन
N.S.S.O.
– 23 मई, 2019 को NSSO को NSO (National Statical organization) में परिवर्तन कर दिया गया।
इसका आधार – परिवार उपभोग खर्च तथा
प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन उपभोग खर्च रखा है।
समितियाँ
1 रथ तथा दाण्डेकर आयोग– 1971– रिपोर्ट-1973
2 Y.K. अलघ समिति– 1977-रिपोर्ट 1979 में
3 डी.डी. लकड़वाला आयोग– 1989– रिपोर्ट –1993 में
4 सुरेश तेन्दुलकर समिति 2004-05-रिपोर्ट-2009 में
- सुरेश तेंदुलकर समिति (2004-05) के अनुसार
- गरीबी गणना का आधार MRP को माना
- ग्रामीण – प्रतिदिन 27 रू., प्रतिमाह 816रू.
- शहरी – प्रतिदिन 33रू., प्रतिमाह -1000रू.
- वर्ष 2011-12 के अनुसार गरीबी
- भारत में गरीबी – 21.9%
- राजस्थान में गरीबी – 14.7%
5 सी रंगराजन समिति – 2012
- रिपोर्ट – 2014 में प्रस्तुत
- गरीबी गणना का आधार MMRP को माना
कैलोरी आधार-
ग्रामीण- 2155 कैलोरी
शहरी – 2090 कैलोरी
- भारत में गरीबी = 29.5%
राजस्थान की गरीबी = 21.7%
खर्च आधार
- ग्रामीण – प्रतिदिन 32रू. एवं प्रतिमाह 972 रू.
- शहरी – प्रतिदिन 47 रू. एवं प्रतिमाह 1407 रू.
6 हासिम समिति – 2013
- केवल शहरी गरीबी की गणना करने के लिए
7 अरविन्द पनगड़िया आयोग– 2015
- नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित टॉक्स फोर्स
गरीबी के प्रकार (Type of Poverty)
- समय के आधार पर
(1) दीर्घकालिक-सदैव गरीब और सामान्य गरीब
(2) अल्पकालिक –चक्रीय गरीब और अनियमित गरीब
(3) गैरनिर्धन-जो कभी गरीब न हो
- गणना प्रक्रिया के आधार पर
- सापेक्ष गरीबी
- निरपेक्ष गरीबी
सापेक्ष गरीबी
- जब अर्थव्यवस्था में एक निश्चित जीवन स्तर को प्राप्त कर लिया जाता है तो उस जीवन स्तर को आधार मानकर तुलनात्मक रूप से प्राप्त होने वाली गरीबी सापेक्ष गरीबी कहलाती है।
- सापेक्ष गरीबी की गणना लॉरेन्ज वक्र तक गिन्नी गुणांक के माध्यम से की जाती है।
निरपेक्ष गरीबी
- संसाधनों की कम उपलब्धता की स्थिति में मूल भूत आवश्यकता की पूर्ति होने या ना होने के आधार पर की गई गरीबी की गणना निरपेक्ष गरीबी कहलाती है अर्थात् गणना स्वतंत्र आधार पर की जाती है
- गणना – Head Count Method के आधार पर प्रतिव्यक्ति गणना की जाती है
- वर्ष 2015 में नीति आयोग द्वारा गरीबी गणना का आधार – निरपेक्ष गरीबी को स्वीकार किया गया
गरीबी के कारण
(i) सामाजिक कारण
- सामाजिक रीतिरिवाज व परम्पराएँ
- सामाजिक अन्धविश्वास व कुप्रथाएँ
- सामाजिक – बहिष्कार
- सामाजिक ऋणग्रस्तता
(ii) आर्थिक कारण
- उत्पादन का निम्न स्तर
- अर्थव्यवस्था में व्याप्त मुद्रास्फीति
- शिक्षा व स्वास्थ्य का निम्न स्तर
- जनसंख्या वृद्धि
- आधारभुत अवसंरचना का अभाव
- वित्तिय संगठनों की कमजोर स्थिति
- सरकारी योजनाओं का पूर्ण क्रियान्वयन नही होना
- आय हेतु कृषि पर निर्भरता तथा कृषि की निम्न उत्पादकता
- अर्थव्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार व लालफीता शाही

लॉरेज वक्र (Lorenz curve)
- लॉरेन्ज द्वारा जनसंख्या तथा आय वितरण के मध्य असमान सम्बन्ध प्रस्तुत किया गया।

गिनी गुणांक
लारेंज वक्र का गणितीय प्रदर्शन गिनी गुणांक कहलाता है
- गरीबी मापन का प्रमुख आधार
0 -1 तक विचलन होता है
0 पर पूर्ण समानता तथा 1 पर पूर्ण असमानता
गिन्नी गुणांक = \(\frac{A}{A+B}\)

बेरोजगारी (Unemployment)
- बेरोजगारी का अर्थ
- मापन
- प्रकार
- कारण
- फिलिप्स वक्र
- श्रम शक्ति – (15 से 59 वर्ष) आयु वर्ग
- कार्य क्षमता (working capacity)
बेरोजगारी
- श्रमशक्ति का वह हिस्सा जिसमें कार्य करने की क्षमता तथा कार्य इच्छाशक्ति विद्यमान हो परन्तु प्रचलित कीमतों पर रोजगार उपलब्ध नहीं होने की अवस्था बेरोजगारी तथा व्यक्ति बेरोजगार कहलाता है।,

- ऐच्छिक बेरोजगारी अनैच्छिक बेरोजगारी
- कार्यक्षमता होती कार्य क्षमता होती
- कार्यइच्छा शक्ति नही - कार्य इच्छा होती - प्रचलित कीमतों पर रोजगार - प्रचलित कीमतों पर रोजगार नही
- बेरोजगारी की गणना
(1) N.S.S.O. – राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन
- 1950 मुख्यालय – कलकत्ता
- 23 मई 2019 को NSSO तथा C.S.O को मिलकर
अब वर्तमान मेंN.S.O.(National Statical organization) बना दिया है जो बेरोजगारी की गणना करता है।
मापन का आधार
(I) सामान्य प्रमुख आधार
- 1 वर्ष में 273 दिन
8 घण्टे कार्य
(II) वर्तमान साप्ताहिक आधार
- सप्ताह में 1घण्टा
(III) वर्तमान दैनिक आधार
प्रतिदिन आधार पर
- 1 – 4 घण्टे – अर्द्धदिवस
- 5 – 8 घण्टे - पूर्ण दिवस
अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर संगठन (ILO) सप्ताह में 15 घण्टे आधार माना है
बेरोजगारी के प्रकार
1. विकसित देशों की बेरोजगारी
2. विकासशील /अल्पविकसित देशों की बेरोजगारी
विकसित देशों में बेरोजगारी
(i) चक्रीय बेरोजगारी
- प्रौधोगिक बेरोजगारी
- आकस्मिक बेरोजगारी (मंदी)
(ii) अनियमित बेरोजगारी
- घर्षण जनित बेरोजगारी (friction) भी कहते है।
- एक रोजगार/उत्पादन प्रक्रिया से दूसरे रोजगार / उत्पादन प्रक्रिया में प्रवेश के दौरान जितने समय बेरोजगारी की स्थिति होती है।
विकासशील / अल्पविकसित देशों की बेरोजगारी
संरचनात्मक बेरोजगारी – मांग ज्यादा, उपलब्धता कम
संरचनात्मक बेरोजगारी
ग्रामीण शहरी
1 मौसमी बेरोजगारी 1 शैक्षिक
2 छुपी हुई/प्रच्छन्न बेरोजगारी बेरोजगारी (कार्य करने पर भी उत्पादकता शून्य) 2 औद्यौगिक बेरोजगारी
खुली बेरोजगारी
- वह अवस्था जिसमें व्यक्ति कार्य की मांग करता है परन्तु रोजगार की उपलब्धता नहीं होती है।
- भारत में बेरोजगारी = 6.7%
ग्रामीण शहरी
5.9% 8.4%
बेरोजगारी के कारण
- रोजगार विहिन आर्थिक संवृद्धि सेवा
- अनुपयोगी उत्पादन प्रक्रिया DMIC
- अनुपयोगी शिक्षा व्यवस्था
- जनसंख्या वृद्धि – संसाधनों पर बढ़ता दबाव
अवसंरचना का कमजोर स्तर
- निवेश की कमी
- सरकारी कानून व प्रतिबन्ध
- वित्तीय संगठनों की अक्षमता
- रोजगार हेतु कृषि पर निर्भरता निम्न उत्पादकता, छुप्पी बेरोजगारी
- कौशल व प्रशिक्षण सुविधा (Skill Indida) का अभाव
फिलिप्स वक्र
- फिलिप्स नामक अर्थशास्त्री द्वारा बेराजगारी तथा मुद्रास्फीति में विपरीत सम्बन्ध प्रस्तुत किया गया ।
Inflation Unemployment
8% 1.5%
0% 3%

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ग्रामीण |
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शहरी |
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समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP/1978/79) |
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गरीबों हेतु शहरी बुनियादी सेवा |
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ग्रामीण युवाओं को स्वरोगार हेतु प्रतिशक्षण (TRYSEM - 1979) |
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नेहरू रोजगार कार्यक्रम |
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ग्रामीण महिला तथा बाल विकास – 1984 (DWACRA) |
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P.M. एकीकृत शहरी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम मिला दिया |
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ग्रामीण दस्तकार उन्नत औजार वितरण (SITRA - 1992) |
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दिसम्बर 1977- स्वर्ण जयन्ती शहरी स्वरोजगार योजना |
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दस लाख कुँआ योजना (MWS- 1996) |
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सितम्बर 2013 राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NUM) |
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गंगा कल्याण योजना (GKY -1997) |
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19 फरवरी 2016 पण्डित दीनदयाल उपाध्याय शहरी आजीविका मिशन , केन्द्र 60%, राज्य 40% |
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अप्रैल 1999 – स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना |
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3 जून 2011 राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) |
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25 सितम्बर 2014 पण्डित दीनदयाल उपाध्याय शहरी आजीविका कार्यक्रम , केन्द्र 60%, राज्य 40% |
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