मुद्रा तथा बैंकिंग (Money and banking):-
1. मुद्रा
1. कार्य
2. प्रकार
3. भारतीय मुद्रा
4. तरलता
5. आर.बी.आई. द्वारा मुद्रा विभाजन
2. आर.बी.आई.
1. संरचना
2. कार्य
3. बैंक
1. कार्य
2. सुधार
4. मौद्रिक नीति
5. एन.पी.ए.
मुद्रा (Money):-
विनिमय का माध्यम है जिसमें क्रय शक्ति क्षमता है।
'वह वस्तु जो विनिमय का माध्यम तथा जिसमें खरीदने की क्षमता विद्यमान है। मुद्रा कहलाती है'
भारतीय मुद्रा- ₹
विशेषता :-
1. मुद्रा विनिमय का माध्यम है।
2. मुद्रा की स्वीकृति व मूल्यमान एक साथ होना चाहिए।
3. मुद्रा सामान्य व स्वतंत्र स्वीकृति होती है।
4. भुगतानों का मान होती है।
वस्तु विनिमय (कमियां)
1. विनिमय प्रणाली को जटिल बनाता है।
2. दोहरे संयोग की समस्या।
3. मूल्य मापन की समस्या।
मुद्रा के कार्य :-
1. प्राथमिक कार्य
1. विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करना।
2. मुद्रा मूल्य का मापन।
2. द्वितीयक कार्य (गौण कार्य)
1. संग्रहण का माध्यम।
2. भविष्य के भुगतान की गणना।
3. मूल्य ⁄ क्रयशक्ति हस्तान्तरण का कार्य करती है।
मुद्रा के प्रकार (Types of Money)
1. व्रतीका मुद्रा (Token Money)
2. वस्तु मुद्रा (Commodity Money)
3. प्लास्टिक मुद्रा (Plastic Money)
4. वैकल्पिक मुद्रा (Alternative Money)
5. वैध मुद्रा (Valid Money)
6. ई-मुद्रा (E-Money)
प्रतीक मुद्रा (token money):-
वह मुद्रा जिसका मूल्य उस वस्तु से ज्यादा है जो उसे बनाने में काम में ली गई है जैसे-
100 रूपये नोट
2000 रूपये नोट
वस्तु मुद्रा (Commodity Money)
यदि किसी मुद्रा का मूल्य वही हो जो उसे बनाने में काम में ली गई वस्तु का मूल्य है जैसे- सोने व चांदी का सिक्का
वैकल्पिक मुद्रा (Alternative Money)
वह वस्तु जो मुद्रा तो नहीं है परन्तु मुद्रा की तरह कार्य करती है वैकल्पिक मुद्रा कहलाती है। जैसे- डी.डी., चैक, चालान
प्लास्टिक मुद्रा (Plastic Money)
ए.टी.एम. कार्ड अर्थात डेबिट तथा क्रेडिट कार्ड प्लास्टिक के बने होने के कारण इन्हें प्लास्टिक मुद्रा कहा जाता है।
वैध मुद्रा (Valid Money):-
उच्च प्राधिकार द्वारा जारी की जाने वाली मुद्रा वैध मुद्रा कहलाती है जिसकी सामान्य स्वीकृति व मांग प्रत्येक समय बनी रहती है।
जैसे- डॉलर व SDR (IMF)
ई-मुद्रा ⁄ आभासी मुद्रा:-
इन्टरनेट की सहायता से तैयार तथा उसी आधार पर काम में ली जाने वाली मुद्रा ई-मुद्रा कहलाती है। इसका भौतिक अस्तित्व नहीं होता है। अत: किसी प्राधिकार द्वारा नियंत्रित नहीं होती है। जैसे- bitcoins
भारतीय मुद्रा प्रणाली
- भारत में मुद्रा की इकाई ‘₹’ है।
- कागजी मुद्रा व सिक्कों के रूप में मुद्रा प्रचलन में है।
- 1950 में अन्ना श्रृंखला के सिक्के जारी किये गये।
- वर्ष 1957 से मुद्रा प्रणाली में दशमलव व्यवस्था को लागू किया गया है। ₹ की इकाई को 100 भागों में बांटा गया तथा इसे नया पैसा कहा गया (पूर्व में रूपये 16 आने में विभाजित)
- भारत में आर.बी.आई. अधिनियम 1934 के अनुसार :-
2 रूपये से दस हजार रूपये तक के नोट छापने का अधिकार आर.बी.आई. के पास है।
एक रूपये का नोट व सिक्के भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) द्वारा जारी किये जाते है जिन पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते है।
1. नोट प्रिंटिंग प्रेस
1. देवास (मध्य प्रदेश)
2. मैसूर (कर्नाटक)
3. नासिक (महाराष्ट्र)
4. साज्ञानी (पं.बंगाल)
2. टकसाल (mint)
1. कलकत्ता (पश्चिमी बंगाल)
2. मुम्बई (महाराष्ट्र)
3. हैदराबाद (तेलंगाना)
4. नोएडा (उत्तर प्रदेश)
- होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) सिक्योरिटी पेपर मील में नोट छापने व स्टाम्प हेतु कागज तैयार किया जाता है।
- नोट छापने की स्याही का कारखाना देवास में स्थित है।
- वर्ष 2010 में रूपये का प्रतीक चिह्न- '₹' स्वीकार किया गया।
- यह चिह्न उदय कुमार द्वारा तैयार किया गया।
- प्रतीक चिह्न स्वीकार करने वाली विश्व की पांचवी मुद्रा।
डॉलर, येन, यूरो, पौण्ड, के बाद।
- अब तक तीन बार भारत में विमुद्रीकरण किया जा चुका है (वर्ष 1946, वर्ष 1978, वर्ष 2016)
मुद्रा प्रवाह (Money flow)
- एक निश्चित समय पर अर्थव्यवस्था में संचरण करने वाली मुद्रा की मात्रा मुद्रा प्रवाह कहलाता है। मुद्रा प्रवाह मांग को प्रभावित करता है।
मुद्रा प्रवाह ज्यादा होने पर मांग ज्यादा तथा मुद्रा प्रवाह कम होने पर मांग कम होगी।
मुद्रा की तरलता (liquidity of money):-
मुद्रा की तरलता से तात्पर्य मुद्रा की क्रय शक्ति क्षमता से है। जिस मुद्रा की क्रय शक्ति ज्यादा वह ज्यादा तरल मुद्रा जिसकी क्रय शक्ति कम वह कम तरल मुद्रा है।
तरलता का क्रम:-

तरलता के आधार पर आर.बी.आई. द्वारा मुद्रा के प्रकार
M1 = नगद नोट व सिक्के + बैंक की मांग जमा + आर.बी.आई. की जमा।
M2 = M1 डाकघर की बचत जमा
M3 = M1 बैंक की सावधि जमा
M4 = M3 डाकघर की समस्त जमा (राष्ट्रीय विकास पत्रों को छोड़कर)
वाई.वी. रेड्डी समिति द्वारा
उच्चाधिकार प्राप्त मुद्रा (High Powered Money)
नगद नोट व सिक्के + बैंक की आर.बी.आई. जमा + आर.बी.आई. की अन्य जमाएँ
नोट-
(1) M1 सबसे ज्यादा तरल तथा M4 सबसे कम तरल मुद्रा है।
(2) M1+ M2 संकुचित मुद्रा तथा M3+ M4 व्यापक मुद्रा है।
वित्त बाजार (Finance Market):-
जहाँ बचतकर्ता से निवेशकर्ता की ओर पूँजी का प्रवाह सम्पन्न होता है।
1. मुद्रा बाजार (Money Market):-
जहाँ अल्पकाल के लिए मुद्रा का लेन-देन सम्भव होता है।
1. असंगठित (Unorganized)
2. संगठित (Organized)
2. पूंजी बाजार (Capital Market)
जहाँ दीर्घकाल के लिए पूंजी का लेन-देन सम्भव होता है।
1. प्राथमिक पूंजी बाजार
2. द्वितीयक पूंजी बाजार (Stock Market)
मुद्रा बाजार (Money Market)
जहाँ अल्पकाल के लिए लेन-देन सम्भव होता है।
1 असंगठित मुद्रा बाजार
जैसे-
मित्र व रिश्तेदार
सेठ-साहूकार
आढतिये

रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया RBI
- स्थापना - 1 अप्रैल 1935 को RBI act. 1934 के तहत
- 1 जनवरी 1949 को राष्ट्रीयकरण किया गया
- वर्ष 1947 में वर्मा के लिए केन्द्रीय बैंक के रूप में कार्यबंद
- वर्ष 1948 में पाकिस्तान के लिए केन्द्रीय बैंक के रूप में कार्यबंद
- स्थापना के समय मुख्यालय कलकत्ता में। वर्ष 1937 पश्चात मुम्बई में।
संरचना:-
21 सदस्यीय निदेशक मण्डल
- आर.बी.आई. गवर्नर (एक)(अधिकतम 5 वर्ष के लिए नियुक्ति)
- आर.बी.आई. के उप गर्वनर (चार)
- वित्त मंत्रालय के सदस्य (दो)
- सदस्य भारत सरकार द्वारा नियुक्त (दस)
- सदस्य क्षेत्रीय परिषद (चार)
प्रथम गवर्नर - सर ओसबोर्न स्मिथ
स्वतंत्रता बाद प्रथम - सी.डी. देशमुख
वर्तमान में - शक्तिकान्त दास (25वें)
क्षेत्रीय परिषद (चार)
1. दिल्ली
2. मुम्बई
3. चैन्नई
4. कलकत्ता
क्षेत्रीय परिषदों में 5 सदस्यीय निदेशक मण्डल की 4 वर्ष हेतु नियुक्ति
भारत सरकार द्वारा की जाती है।
RBI के कार्य :-
प्राथमिक कार्य (Primary Work)
1. सरकार के बैंक तथा सलाहकार के रूप में कार्य
2. बैंको का बैंक
1. बैंक पर नियंत्रण व विनियमन का कार्य
2. बैंकों को जमा उधारी सुविधा उपलब्ध कराना।
3. विदेशी मुद्रा भण्डार का संरक्षक
Forex Reserve
1. गोल्ड
2. विदेशी मुद्रा
3. S.D.R – Special Drawing Rights
4. IMF ट्रेंच
4. नोट निर्गमन का कार्य
- 2 से 10 हजार रु. तक के नोट जारी करने का अधिकार (R.B.I. Act - 1934)
5. बैंको के मध्य भुगतान व समाधान का कार्य
6. अन्तिम ऋणदाता के रूप में कार्य
- जब बैक तरलता संकट का शिकार होता है।
7. साख सन्तुलन अर्थात् अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मात्रा का निर्धारण करना – मौद्रिक नीति जारी की जाती है।
प्रोत्साहन के कार्य –
- कृषि क्षेत्र में वित्तीय सुविधा हेतु –
ग्रामीण बैक –नाबार्ड आदि
- औद्योगिक विकास व प्रोत्साहन हेतु औद्योगिक वित्तीय संगठन की स्थापना जैसे – IDBI
- बैंको के नियंत्रण व विनियमन के अलावा विकासशील देशों में बैंकिग सुधार हेतु प्रशिक्षण
- वित्तीय अर्थव्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण आकड़े व रिपोर्ट का प्रकाशन
- मुद्रास्फीति व काले धन (Black Money) को नियंत्रित करने का कार्य
Bank-बैंक
- वे वित्तीय संगठन जो लोगों की जमा स्वीकार करते तथा ऋण सुविधा उपलब्ध कराते है अर्थात् बैंक एक वित्तीय मध्यस्थ है
- जमाकर्ता व निवेशकर्त्ता के मध्य
बैंक के कार्य
1. जमा स्वीकार करना
- चालू खाता
- बचत खाता
2. ऋण सुविधा उपलब्ध कराना
- अधिनिकासी (Overdraft)
- केश क्रेडिट (Cash Credit)
- होम लोन, गोल्ड लोन, एजुकेशन लोन
3. साख सृजन का कार्य-
4. क्रेडिट तथा डेबिट कार्ड अर्थात् ATM कार्ड की सुविधा
5 कम्पनियों के शेयर व बॉण्ड की खरीद करके वित्तीय सुविधा
6 विदेशी मुद्रा विनियम का कार्य
7 बैंक द्वारा भुगतान एजेन्ट के रूप में कार्य किया जाता है
8 बीमा सुविधा की उपलब्धता
9 भुगतान तथा ऋणों की गारन्टी प्रदान करना
10 लॉकर सुविधा उपलब्ध कराई जाती है
11 स्वर्ण खरीद व बिक्री का कार्य
बैंक के कार्य
- 1. Deposit (जमा) -जमाएं प्राप्त करना
- 2. Loan (ऋण) – ऋण सुविधा प्रदान करना
Deposit (जमा) दो प्रकार की होती है-
1 Demand Deposit (मांग जमा)
2 Time Deposite (समय जमा)
Demand Deposit में (किसी भी समय पर मांग)
दो प्रकार के जमा खाते होते है।
1 बचत खाता - (Saving A/c)
- व्यक्तिगत खाता होता है
- जमा-जमापर्ची तथा निकासी-निकासी पर्ची द्वारा
- जमा राशि पर ब्याज की उपलब्धता
- किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है।
2 चालू खाता - (Current A/c)
- फर्म/व्यवसाय का होता है
- जमा-जमापर्ची द्वारा तथा निकासी चैक मय सील व
हस्ताक्षर प्रोपराइटर द्वारा
- जमा राशि पर ब्याज सुविधा नहीं है
- जारी रखने हेतु शुल्क लिया जाता है
Time Deposit (समय जमा)
1 स्थायी जमा (F.D.)
- एक निश्चित समय के लिए एक बार में की गई जमा
2 आवृति जमा (R.D.)
- एक समय के लिए पुनरावृति (बार-बार) के आधार पर की गई जमा
Loan (ऋण)
1 Prime Custmer (विश्वसनीय ग्राहक)
2 Sub Prime Custmer (अविश्वसनीय ग्राहक)
विश्वसनीय ग्राहको को ऋण सुविधा
PLR- Prime landing rate
– वह कम से कम दर जिस पर बैकों द्वारा अपने विश्वसनीय ग्राहकों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है
Base Rate
- 2010 से Base Rate को अपनाया गया, यह वह कम से कम दर है जिससे कम पर बैकों द्वारा अपने किसी भी ग्राहक को ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है।
MCLR (Marginal cost of fund landing rate)
- 2016 से Base के स्थान पर R.B.I. द्वारा MCLR को अपनाया गया जो वह कम से कम दर है जिससे कम पर बैंक द्वारा किसी भी ग्राहक को उधार नहीं दी जाती है, MCLR की गणना के समय अल्पकालीन लागतों का भी उपयोग किया जाता है।
बैकों के प्रकार
व्यावसायिक बैंक (Commercial Bank)
- जिन बैकों की स्थापना बैंकिग विनियमन Act- 1949 के अनुसार की गई है।
- जनता को जमा व ऋण सुविधा अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से कराते है
उद्देश्य बैंक –
- ग्रामीण बैंक
- सहकारी बैंक
- Exim बैंक
- IDBI
- NABARD
वाणिज्य बैंक के प्रकार
1. कानूनी आधार पर
2. स्वामित्व के आधार पर
1. कानूनी आधार पर
अनुसूचित बैंक
- वे बैंक जो R.B.I. Act 1934 की धारा-II में शामिल
गैर अनुसूचित बैंक
- वे बैंक जो R.B.I. Act. 1934 की धारा–2 में शामिल नहीं हैं।
2. स्वामित्व के आधार पर
सार्वजनिक बैंक
- राष्ट्रीयकृत बैंक व गैर राष्ट्रीयकृत बैंक
निजी बैंक
- स्वदेशी व विदेशी
स्वामित्व के आधार
1. सार्वजनिक क्षेत्र बैंक
1. राष्ट्रीयकृत बैंक
1. पूर्व में निजी क्षेत्र में तथा बाद में सरकार द्वारा अधिकृत बैंक
2. पूर्ण स्वामित्व
1.एस.बी.आई. स्थापना के समन
2. निजी क्षेत्र बैंक
1. स्वदेशी (एच.डी.एफ.सी)
2. विदेशी (एच.एस.बी.सी)
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आर.आर.बी.)
स्थापना 2 अक्टूबर-1975
भागीदारी:-
1. केन्द्र (50%) 2. राज्य सरकार(15%) 3. वाणिज्य बैंक(35%)
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के कार्य :-
1. कृषि तथा ग्रामीण क्षेत्रों का विकास।
2. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता बढ़ाना।
3. ग्रामीण अवसंरचना का विकास।
4. कृषि हेतु बीज, उर्वरक, कीटनाशक हेतु सस्ती दरों पर
अल्पकालिक ऋण सुविधा उपलब्ध कराना।
सहकारी बैंक (Co-operation Bank)
सहकारी सिद्धांतों पर आधारित 'एक सबके लिए, सब एक के लिए'
सभी सदस्यों को बराबर मताधिकार प्राप्त होता है।
उददेश्य:-
1. कृषि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन।
2. आपसी वित्तीय सहयोग को बढ़ाना।
3. उपनगरीय व कस्बों में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराना।
ग्रामीण सहकारी बैंक
1. सहकारी सोसायटी अधिनियम 1912 के तहत पंजीकरण तथा RBI बैकिंग एक्ट 1949 के विनियमन के तहत ग्रामीण सहकारी बैंको की स्थापना की गई।
ग्रामीण सहकारी बैंक दो प्रकार से ऋण प्रदान करता है।
1 अल्पकालीन/मध्यकालीन ऋण हेतु त्रिस्तरीय संरचना है-
(a) राज्य स्तर पर – राज्य सहकारी बैंक
(b) जिला स्तर पर – केंद्रीय जिला सहकारी बैंक
(a) पंचायत स्तर पर – प्राथमिक सहकारी समितियाँ
2 दीर्धकालीन ऋण हेतु द्विस्तरीय संरचना -
(a) राज्य कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक
(b) जिला कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक
शहरी सहकारी बैंक (UCB)
शहरी सहकारी बैंक अधिनियम 2002 द्वारा पंजीकरण कुल 1540 बैंक है-
1 1482 शहरी
2 58 बहुराज्य
1. शहरी सहकारी बैंक
(जो बैंक एक ही राज्य तक सीमित)
2. बहुराज्य शहरी सहकारी बैंक
(जो बैंक एक से अधिक राज्य में थे)
- शहरी सहकारी बैंक पर आर.बी.आई का नियंत्रण बढ़ाने हेतु अध्यादेश- जून-2020
सुधार क्यों-
1. पी.एम.सी. बैंक में हुआ घोटाला।
2. भविष्य में इस प्रकार की घटना को रोकना।
3. सदन में सत्र में नहीं होना।
अध्यादेश के अनुसार सुधार-
1. बैंकिंग विनियमन अधिनियम-1949 के सम्पूर्ण प्रावधान यू.सी.बी. पर लागू होंगे।
2. निदेशक मण्डल में सुधार
3. पेशेवर बैंकर को बैंक प्रमुख बनाया जाएगा।
गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनी
(Non-Banking Finance Company)
- वित्तीय क्षेत्र में सूक्ष्म, ऋण, बीमा, विद्युत आदि सुविधा
- कृषि व औद्योगिक कार्यों से संबंधित कम्पनी NBFC में शामिल नहीं।
1. पंजीकरण कम्पनी अधिनियम-1956 ⁄ 2013 के तहत
2. मांग जमा स्वीकार नहीं करती है।
- CRR नियम एन.बी.एफ.सी. पर लागू नहीं परन्तु जमा स्वीकार करने वाली एन.बी.एफ.सी को 15 प्रतिशत SLR (Statutory Liquidity Ratio) की सीमा का पालन करना पड़ता है।
- NBFC भुगतान प्रणाली का हिस्सा नहीं होते है अर्थात इनके द्वारा चैक जारी नहीं किया जाता है।
- एन.बी.एफ.सी. जमा पर जमा बीमा सुविधा की उपलब्धता नहीं कराई जाती है।
- बजट-2020-21 में
बैंक जमा पर बीमा सुविधा 1 लाख रूपये से बढ़ाकर 5 लाख रूपये कर दी गई है।
बैंकिंग सुधार
जुलाई 1969 को 14 बैंकों का राष्ट्रीकरण जिनकी पूंजी 50 करोड़ रूपये से ज्यादा थी।
सन 1969 लीड़ बैंक योजना लायी गयी जो जिला स्तरीय जिला स्तरीय कार्य योजना थी अर्थात जिले के सबसे बड़े बैंक को प्रमुख बनाया गया
15 अप्रैल 1980- 6 बैंकों का राष्ट्रीकरण जिनकी पूंजी 200 करोड़ रूपये थी।
2 अक्टूबर 1975 को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको की स्थापना।
नरसिम्हन समिति-I- 1991
प्रावधान
- SLR की दर 38 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत तक की जाए
- CRR की दरों को 15 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत तक किया जाएं।
- PSL की सीमा 40 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक की जाए।
- ब्याज दरों का निर्धारण बाजार के आधार पर।
- एन.पी.ए. (गैर निष्पादन परिसम्पत्ति) को कम करने हेतु DRT
- विदेशी व निजी क्षेत्र को बैंक क्षेत्र में प्रवेश
- बेसल नियमों को लागू किया जाए।
नरसिम्हन समिति II-1997
बैंक परिसम्पत्ति गुणवत्ता में सुधार करके बैंक जोखिम को कम करना।
प्रावधान
1 बैंक विलय की प्रक्रिया पर जोर
2. सार्वजनिक बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से कम की जाए।
3. व्यावसायिक कुशलता के आधार पर नियुक्ति।
4. एन.पी.ए. की समय सीमा 180 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दी
गई।
5. सार्वभौमिक बैंकिंग की कल्पना तथा कम्प्यूटरीकरण पर जोर।
मालेगांव समिति-2010
(सूक्ष्म क्षेत्रों में वित्तीय सुधार हेतु)
दामोदरन समिति-2010
(ग्राहक सेवा स्तर में सुधार हेतु)
उषा थारोट समिति-2010
(एन.बी.एफ.सी कम्पनियों में सुधार हेतु)
उर्जित पटेल समिति-2013
(मौद्रिक नीति में सुधार हेतु)
सिफारिश
1. मुद्रा स्फीति गणना करने का आधार थोक मूल्य सूचकांक
(W.P.I) की जगह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (C.P.I) को आधार
माना जाए।
2. मुद्रा स्फीति की दर 4 प्रतिशत के स्तर पर जिसमें 2 प्रतिशत का
उतार-चढ़ाव सम्भव।
विमल जालान समिति-2012
नये बैंको को लाईसेंस प्रदान करना
दो नए बैंक (वर्ष 2015) 1. आई.डी.एफ.सी. 2. बंधन फाईनेंस
नचिकेता मोरे समिति-2013
सूक्ष्म क्षेत्रों में बैंकिंग सुधार रिपोर्ट 2014
दो नए प्रकार के बैंक (विभेदीकृत बैंकिंग)
1. पेमेन्ट बैंक ⁄ भुगतान बैंक
1. पूंजी आवश्यकता-100 करोड़
2. 1 लाख तक की जमा स्वीकार
3. ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं
4. डेबिट कार्ड सुविधा उपलब्ध कराता
परन्तु क्रेडिट कार्ड सुविधा नहीं
5. कुल सम्पत्ति का 75 प्रतिशत सरकारी परिसम्पत्ति में निवेश तथा 25 प्रतिशत बैंक को उपलब्धता
2. स्मॉल फाईनेंस(लघु वित्त बैंक)
1. पूंजी आवश्यकता 100 करोड़
2. 1 लाख से अधिक की जमा स्वीकार्य
3. ऋण सुविधा उपलबध कराता है
4. क्रेडिट तथा डेबिट दोनों प्रकार के कार्ड उपलब्धता
5 75 प्रतिशत वित्तीय सुविधा सूक्ष्म क्षेत्रों में उपलब्धता
पी.जे. नायक समिति
बैंक प्रबंधन में सुधार हेतु
बैंक विलय प्रस्ताव दिया
1. एस.बी.आई. में मार्च 2017 में 5+1 बैंको का विलय
1.स्टेट बैंक पटियाला
2. स्टेट बैंक मैसूर
3. स्टेट बैंक दावनकोर
4. स्टेट बैंक हैदराबाद
5. बीकानेर व जयपुर
2. 2018 में बैंक ऑफ बडौ़दा में देना बैंक तथा विजया बैंक का विलय किया गया।
अप्रैल 2020 में 10 बैंकों को मिलाकर 4 बैंक
1. पी.एन.बी. = ओ.बी.सी. + यूनाइटेड बैंक
2. केनरा बैंक + सिंडीकेट बैंक
3. इण्डियन बैंक + इलाहाबाद बैंक
4. यूनियन बैंक = आंध्रा बैंक + कॉरपोरेशन बैंक
घरेलू महत्वपूर्ण बैंक (Domestic Systematically Important Bank)
1. ये बैंक बड़े आकार वाले।
2. जी.डी.पी. की लगभग 2 प्रतिशत इनकी पूंजी
3. विस्तृत ग्राहक आधार
4. टू बिग टू फेल
बेसल मानक-3 लागू करना
बैंक आफॅ इनटरनेशनल सेटलमेंट (बी.आई.एस)
1930 मुख्यालय बेसल (स्वीटजरलैण्ड)
विश्व के केन्द्रीय बैंकों का समूह 60 बैंक
विभिन्न देशों के केन्द्रीय बैंक सदस्य
विश्व में वित्तीय स्थिरता लाना।
विनियमन के मानकों का निर्धारण
इस समिति द्वारा निर्धारित मानक 'बेसल नियम' तीन बार निर्धारण
बेसल प्रथम-1998
बेसल द्वितीय-2004
बेसल तृतीय-2011
भारत में 31 मार्च 2019 तक बेसल तृतीय लागू किए गए
परिसम्पत्ति जोखिम अनुपात 9 प्रतिशत
बैंकिंग लोकपाल (banking lokepal):-
ग्राहक सेवा स्तर में सुधार व शिकायत निवारण हेतु
सुविधा युक्त व पारदर्शी व भेदभाव रहित बैंक सुविधा उपलब्ध
अर्द्ध न्यायिक प्राधिकारी
बैंकिंग लोकपाल वर्ष 1995, 2002, 2006
बैंकिंग लोकपाल-2006
शिकायत प्रक्रिया-डाक ई-मेल ऑनलाईन-किसी भी आधार पर
शिकायत निस्तारण 30 दिनों में
शामिल- ग्रामीण, व्यापारिक व सहकारी बैंक
क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-पेमेंट
बैंकिंग लोकपाल की नियुक्ति RBI द्वारा
कोर बैंकिंग :-
कोर बैंकिंग से तात्पर्य उच्च स्तर को सूचना प्रौद्योगिकी की सहायता से बैंक तंत्र को एक सूत्र में पिरोकर बैंक लेन-देन को पारदर्शी व लचीला बनाना।
C.B.S. (Core Banking Solution)
बैंक शाखाओं की एक केन्द्रीकृत व्यवस्था जिसके तहत एक बैंक शाखा का खाताधारक उस बैंक के किसी भी शाखा में सुविधा प्राप्त करता है
सार्वभौमिक बैंकिंग व्यवस्था अर्थात बैंक से जुडी़ सभी सुविधा जैसे क्रेडिटकार्ड, ऑनलाईन बैंकिंग
ए.टी.एम. ATM
1. बैंक ए.टी.एम.
(बैंक द्वारा स्थापित तथा संचालित ए.टी.एम.)
2. व्हाइट ए.टी.एम.
(गैर बैंकिंग कम्पनियों द्वारा स्थापित तथा संचालित)
3. ब्राउन ए.टी.एम.
(गैर बैंकिंग कम्पनियों द्वारा अवसंरचना निर्माण तथा बैंक द्वारा संचालित)