चौहान वंश

(शाकम्भरी एवं अजमेर के चौहान)

प्रमुख चौहान शासक

अजयराज

अर्णोराज

विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव/कवि बांधव) (1158-1163 ई.)

पृथ्वीराज तृतीय (राय पिथौरा) (1177-1192 ई.)

रणथम्भौर के चौहान

हम्मीर देव (1282 ई. – 1301 ई.)

जालौर के चौहान

कान्हड़ देव

अलाउद्दीन खिलजी का जालौर आक्रमण :-

नाडोल के चौहान

▪ शाकंभरी के चौहान शासक वाक्पतिराज के पुत्र लक्ष्मण चौहान ने 960 ई. के आसपास चावड़ा राजपूतों के आधिपत्य को समाप्त कर नाडोल में चौहान वंश की स्थापना की।

▪ शाकंभरी से निकलने वाली यह चौहानों की सबसे प्राचीन शाखा थी।

▪ लक्ष्मण चौहान ने नाडोल में अपनी कुलदेवी आशापुरा देवी के मंदिर का निर्माण करवाया।

▪ सुंधा पर्वत अभिलेख से ज्ञात होता है कि यहाँ के शासक बलीराज ने मालवा शासक मुंज काे पराजित किया था।

▪ हेमाचार्य सूरी के ग्रंथ 'द्वयाश्रय काव्य' के अनुसार यहाँ के शासक महेन्द्र ने अपनी बहिन के विवाह हेतु स्वयंवर का आयोजन किया था।

▪ महेन्द्र के बाद अणहिल्ल नाडोल का शासक बना जिसने गुजरात शासक भीमदेव प्रथम को पराजित किया।

▪ किराडु अभिलेख के अनुसार अल्हण देव जैन धर्मावलम्बी था जिसने हर माह की अष्टमी, एकादशी तथा चतुर्दशी के दिन जीव हिंसा पर रोक लगाई थी।

▪ अल्हण के पुत्र कीर्तिपाल ने ही जालौर में चौहान वंश की स्थापना की थी। कालांतर में जालौर के चौहान शक्तिशाली होते गये तथा 13वीं शताब्दी के प्रांरभ में नाडोल राज्य को अपने राज्य में मिला लिया।

सिरोही के चौहान

हाड़ौती के चौहान