चित्रकला

राजस्थान में चित्रकला के संस्थान :-

  1. सरस्वती भण्डार – उदयपुर – चन्द्रमहल में
  2. पोथीखाना संग्रहालय – जयपुर – चन्द्रमहल में
  3. मान प्रकाश संग्रहालय – मेहरानगढ़ दुर्ग – जोधपुर
  4. जिनदत्त सूरी भण्डार संग्रहालय – स्वर्ण दुर्ग – जैसलमेर

राजस्थान में चित्रकला प्रमुख संस्था :-

  1. जोधपुर – 1. चितेरा और 2. धौरा
  2. भीलवाडा – 1. अंकन
  3. उदयपुर – 1. टकमण और 2. तुलीका कलाकार परिषद
  4. जयपुर – 1. पेग, 2. आयाम, 3. कलावृत और 4. रचनात्मक कला समूह

राजस्थान लघु चित्र शैलीयाँ :-

रंग समायोजन :-

वृक्ष :-

आँखों का समन्वय :-

मेवाड़ स्कूल ऑफ पेटिग्स :-

  1. उदयपुर शैली – कमलचन्द, मनोहर, साहिबुदीन, जैनाचार्य, हीराचन्द
  2. नाथद्वार शैली – चतर्भुज, रामलिंग, देवकृष्ण, रामचन्द्र, भगवान, कमला, इलाइची (महिला चित्रकार), हरिदेव, घासीराम, उदयराम
  3. चावंड शैली – नसीरूद्दीन (एकमात्र चित्रकार)
  4. देवगढ़ शैली – केवला, बगता, बैजनाथ, चौखा
  1. मेवाड़ शैली/उदयपुर शैली :-

मेवाड़ शैली की प्रमुख विशेषताएँ :-

  1. कद छोटा, रंग गौरा, लाला व पीले रंग की प्रधानता, कदम्ब वृक्ष, पहाडी दृश्य आदि का चित्रण।
  2. मेवाड़ शैली में “गीत-गोविन्द” का सर्वाधिक चित्रण हुआ है। अन्य चित्रण – रागमाला, बाहरमासा, ससिक प्रिया का टीका।
  3. मेवाड़ शैली में दमना व कलिला का चित्रण हुआ है।
  4. नरोत्तम शर्मा द्वारा बनाये गए मुरली मनोहर चित्र को मेवाड़ शैली का मोनालिसा माना जाता है।
  5. जैनाचार्य हीरानन्द ने महाराणा मोकल के शासनकाल में 1423 ई. में देलवाडा (सिरोही) नामक स्थान पर “सुपार्श्वनाथ चरियम” नामक ग्रन्थ चित्रित किया जो वर्तमान में उदयपुर संग्रहालय में सुरक्षित है।
  6. जैनाचार्य हीरानन्द महाराणा कुम्भा के चित्रकारिता के गुरू थे।
  1. नाथद्वार शैली/हवेली शैली :-

विशेषता

  1. पिछवाईयों का चित्रण
  2. सांझी का चित्रण
  3. माता यशोदा का चित्रण
  4. कृष्ण लीलाओं का चित्रण
  5. गायों का चित्रण
  6. गाय व हिरण के समान नेत्र
  7. केले के वृक्ष की प्रधानता
  8. प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण
  9. पुजारियों व गुसाईयों का चित्रण
  1. चावंड शैली :-
  1.  देवगढ़ शैली :-

मारवाड़ स्कूल ऑफ पेटिग्स :-

  1.  मारवाड़ शैली/जोधपुर शैली :-  शिवजीदास, रतनजी भाटी, वींरजी भाटी, छज्जू, सैफ, मतीराम
  2. बीकानेर शैली :- असीर खां, मोहम्मद खां, रुक्नुद्दीन, मुन्नालाल (मुसलमान सभी)
  3. किशनगढ़ शैली :- आमचंद, निहालचंद, सुर्यध्वज, मोरध्वज, लाडलीदास।
  4. अजमेर शैली :- लालचंद, साहिबा (महिला चित्रकार)।
  1. मारवाड़ शैली :-

मारवाड़ शैली की विशेषताएं :-

  1. मरूस्थल, घोडे, झाडियों  आदि का चित्रण
  2. पीले रंग की प्रधानता
  3. बादाम के समान नेत्र
  4. आम का वृक्ष
  1. अजमेर शैली :-
  1. नागौर शैली :-
  1. जैसलमेर शैली :-
  1. किशनगढ़ शैली :-

विशेषता :-

  1. कजराऊ नयन
  2. मित्र नयन
  3. सुरईदार गर्दन
  4. नाक में बेसरी आभूषण
  5. लम्बे बाल
  6. पारदर्शी वस्त्र
  1. बीकानेर शैली :-

विशेषता :-

  1. पीले रंग की प्रधानता
  2. घोडे का सर्वाधिक चित्रण
  3. आरम्भ से ही मुगल शैली का प्रभाव
  4. महाराजा सूरतसिंह के काल में कम्पनी शैली का प्रभाव पड़ा।
  1. शेखावाटी चित्रकला :-

हाड़ौती स्कूल ऑफ पेटिग्स :-

  1. कोटा शैली :-
  1. बून्दी शैली :-

ढूँढाड स्कूल ऑफ पेटिग्स :-

  1. आमेर शैली :-
  1. उणियारा शैली :-
  1. अलवर शैली :-
  1. हाथी दांत पर व्यक्ति का चित्रण – मूलचंद सोनी
  2. इस शैली में बार्डर को महत्व दिया गया। बार्डर को महत्व देने वाली शैली को बैसलो शैली कहते है।
  3. योगासन, गणिकाओं व वैश्याओं के चित्र
  4. मुगल शैली का सर्वाधिक प्रभाव – अलवर शैली पर पड़ा क्योंकि यह दिल्ली के सर्वाधिक निकट थी।

 

  1. जयपुर शैली :-