राष्ट्रीय आय (National Income):-
- किसी देश के द्वारा एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं का अंतिम मूल्य राष्ट्रीय आय कहलाता है।
- राष्ट्रीय आय की अवधारणा के जनक साइमन कुजनेट्स थे।
साइमन कुजनेट्स के अनुसार-
किसी देश में उत्पादित उन वस्तुओं व सेवाओं का मूल्य जो अंतिम उपभोक्ता को प्राप्त होती है।
राष्ट्रीय आय की गणना में निम्नलिखित शामिल अथवा शामिल नही है:-
- राष्ट्रीय आय की गणना मौद्रिक रूप से की जाती है।
- गत वर्ष का स्टॉक राष्ट्रीय आय का हिस्सा नही होता है।
- गत वर्ष का उत्पादन राष्ट्रीय आय में शामिल नही किया जाता है।
- ब्याज प्राप्तियाँ राष्ट्रीय आय का हिस्सा होती है।
- पेंशन,वजीफा,भत्ता अंतरण राष्ट्रीय आय में शामिल नही है।
- उधारियों की पुन: प्राप्ति राष्ट्रीय आय का हिस्सा नही है।
भारत में राष्ट्रीय आय:-
- भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय की गणना 1868 में दादाभाई नौरोजी द्वारा की गई। अपनी पुस्तक ‘पॉवर्टी एंड अनब्रिट्रिश रूल इन इंडिया’ में उन्होने प्रति व्यक्ति आय 20 रूपये प्रतिवर्ष बतायी।
- 1911-12 में फिडले शिराज द्वारा प्रतिव्यक्ति आय 49 रूपये बतायी गयी।
- 1931-32 में वी.के.आर.वी.राव द्वारा सर्वप्रथम वैज्ञानिक आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना की गयी।
- अगस्त-1949 में राष्ट्रीय आय समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष पी.सी.महालनोबिस थे।
राष्ट्रीय आय की गणना:-
- 1 जनवरी 2015 को राष्ट्रीय आय गणना हेतु आधार वर्ष 2004-05 को परिवर्तित कर 2011-12 कर दिया गया।
- राष्ट्रीय आय के आंकड़ो की गणना करने हेतु केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय C.S.O की स्थापना 1951 में नई दिल्ली में की गयी जिसके प्रथम अध्यक्ष पी.सी.महालनोबिस थे जिन्हें भारतीय सांख्यिकी का जनक भी कहा जाता है।
- सर्वप्रथम CSO द्वारा 1956 में राष्ट्रीय आय के आंकडे़ जारी किये गये।
- 23 मई 2019 को CSO तथा NSSO को मिलाकर राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (NSO) किया गया जो वर्तमान में राष्ट्रीय आय के आंकडे जारी करता है।
- विदेशों से प्राप्त आय की गणना RBI द्वारा की जाती है।
- राष्ट्रीय आय की गणना आधार वर्ष तथा प्रचलित वर्ष पर की जाती है।
1 आधार वर्ष /स्थिर वर्ष/base year:-
- आधार वर्ष से तात्पर्य उस वर्ष से है जिसकी कीमतों को आधार मानकर अर्थव्यवस्था की गणना की जाती है।
नोट-1 जनवरी 2015 को आधार वर्ष 2004-05 से बदलकर 2011-12 कर दिया गया है।
2 प्रचलित वर्ष /चालू वर्ष/current year:-
- वर्तमान में प्रचलित कीमतों के आधार पर गणना की जाती है।
हिन्दू वृद्वि दर (hindu growth rate):-
- हिंदू वृद्वि दर से तात्पर्य राष्ट्रीय आय की निम्नवृद्वि दर है-
हिंदू वृद्वि दर को प्रोफेसर राजकृष्णा द्वारा परिभाषित किया गया।
अंतिम वस्तुएँ (final goods):-
- उत्पादन प्रक्रिया के दौरान तैयार उपभोग योग्य वस्तुएँ अंतिम वस्तुएँ कहलाती है।
- उपयोग के आधार पर दो प्रकार की वस्तुएं है:-
(1) उपभोक्ता वस्तु (consumer goods)
जिस वस्तु का उपयोग उपभोग हेतु किया जाता है।
(2) पूंजीगत वस्तु (capital goods)
जिस वस्तु के उपयोग से आय का सृजन व पूंजी निर्माण होता है।
उपभोक्ता वस्तुएँ (consumer goods भी दो प्रकार की है:-
(1) टिकाऊ वस्तु
वे उपभोक्ता वस्तुएँ जो उपभोग के दौरान अपने अस्तित्व को बनाए रखती है जैसे-टेलीविजन, एयरकंडीशन, फ्रिज
(2) गैर टिकाऊ उपभोक्ता वस्तु
वे उपभोक्ता वस्तुएँ जो उपभोग के दौरान अपना अस्तित्व खो देती है जैसे- पिज्जा, बर्गर, चाउमीन
पूरक वस्तुएँ
- दो वस्तुओं में पाया जाना वाला वह संबंध जिसमें एक वस्तु की मांग बढ़ने से दूसरी वस्तु की मांग भी बढ़ जाती है तथा दूसरी वस्तु की मांग घटने से पहली वस्तु की मांग भी घट जाती है।
जैसे- कार – पेट्रोल
चाय – दूध
पेन - स्याही
स्थापन्न/स्थानापन्न् वस्तुएँ:-
- दो वस्तुओं में पाया जाने वाला वह संबंध जिसमें एक वस्तु की मांग बढ़ने से दूसरी वस्तु की मांग घटती है तथा पहली वस्तु की मांग घटने से दूसरी वस्तु की मांग घट जाती है यह संबंध स्थापन कहलाता है तथा वस्तुएँ स्थानापन्न वस्तुएँ कहलाती है।
जैसे- पेट्रोल – डीजल
पेन – पेंसिल
चाय – कॉफी
गिफिन वस्तुएँ:-
- उपभोग की वे निम्न स्तरीय वस्तुएं जो अर्थशास्त्र के मांग तथा कीमत सिद्वांत का पालन नही करती है वस्तुओं का यह विरोधाभास गिफिन विरोधाभास तथा वस्तुएं गिफिन वस्तुएं कहलाती हैं।
जैसे – नमक, खाद्य पदार्थ, शराब
राष्ट्रीय आय गणना विधि:-
राष्ट्रीय आय गणना की तीन विधियाँ :-
1 उत्पादन विधि
2 आय विधि
3 व्यय विधि
1 उत्पादन विधि (production method):-
इस विधि में देश में हो रहे सभी उत्पादन प्रक्रिया के मूल्यवर्धन को जोड़कर GDP की गणना की जाती है
\(\mathrm{GDP}=\mathrm{GVA}_{1}+\mathrm{GVA}_{2}+\mathrm{GVA}_{3}+\ldots \ldots \ldots\)
\(=\sum^{n} G V A_{i}\)
\(=\mathrm{GDP}\)
नोट :- इसमें केवल एक वर्ष के उत्पादन को शामिल किया जाता है गतवर्ष के स्टॉक को नहीं जोड़ा जाता है।
2 आय विधि :-
आय विधि से राष्ट्रीय आय की गणना करने हेतु देश की समस्त आय को जोड़ दिया जाता है।
GDP = कुल किराया+कुल मजदूरी+कुल ब्याज+कुल लाभ
\(\sum_{i=1}^{n} \text { rent } ;+\sum_{i=1}^{n} \text { wages } ;+\sum_{i=1}^{n} \text { int erest } ;+\sum_{i=1}^{n} \text { profit }=\mathrm{R}+\mathrm{W}+\mathrm{I}+\mathrm{P}\)
3 व्यय विधि :-
इस विधि से राष्ट्रीय आय की गणना करने हेतु एक वित्तीय वर्ष में होने वाले व्ययों को जोड़ा जाता है।
GDP = उपभोक्ता व्यय +कुल सरकारी व्यय+(बचत = निवेश)+शुद्व विदेशी खर्च (निर्यात-आयात)
GDP = \(\sum^{n} \text { consumer exp. enditure }+\sum^{n} \text { gov.exp }\)
\(+\sum^{n}(\text {saving}=\text {investment})+\)
\(\sum^{n} \text { net foreign exp enses }\)
= C+G+(I= S) +(Net foreign expense)
GDP = C+G+(I=S) +F
- उत्पादन विधि में प्राथमिक व द्वितीयक क्षेत्र की गणना होती है
- आय विधि में तृतीयक क्षेत्र की गणना की जाती है।
- व्यय विधि में निर्माण कार्यो की गणना की जाती है।
राष्ट्रीय आय अवधारणा
(concept of national income):-
(1) GDP- Gross domestic product :-
सकल घरेलू उत्पाद
- किसी देश की घरेलू सीमा में एक वित्त वर्ष में उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं का अंतिम मूल्य सकल घरेलू उत्पाद कहलाता है।
GDP में निम्न सम्मिलित होंगे
1 स्थलीय भौगोलिक सीमा
2 समुद्री सीमा से 200 नॉटिकल मील की दूरी
3 घरेलू जलयान तथा वायुयान का उत्पादन
4 विदेशो में स्थित दूतावास
5 अंतरिक्ष में स्थित उपग्रह
(2) GNP = gross national product
सकल राष्ट्रीय उत्पाद
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में से विदेशियों द्वारा देश में अर्जित आय को घटकार तथा देश के नागरिको द्वारा विदेशों से अर्जित आय को जोड़कर सकल राष्ट्रीय उत्पाद प्राप्त किया जाता है।
- GNP = GDP+X-m
- X = देश के नागरिकों द्वारा विदेशों से प्राप्त आय
- M= विदेशियों द्वारा देश में अर्जित आय
- GNP = GDP+NFIA (विदेशों से प्राप्त शुद्व आय)
- यदि NFIA negative होता है तो GNP, GDD की तुलना में कम होगी।
(3) NNP = Net national product
शुद्व राष्ट्रीय उत्पाद
- सकल राष्ट्रीय उत्पाद में से उत्पादन प्रक्रिया के दौरान होने वाले मूल्यह्रास को घटाकर शुद्व राष्ट्रीय उत्पाद प्राप्त किया जाता है।
- NNP = GNP – मूल्यह्रास
मूल्यह्रास (depreciation)
- वस्तु के मूल्य में होने वाली गिरावटमूल्यह्रास कहलाती है उत्पादन के दौरान मशीन के मूल्य में गिरावट आना मूल्यह्रास कहलाता है।
![]()
वैयक्तिक आय (personal income)
- P.I = राष्ट्रीय आय – अवितरित आय – निगम कर + अंतरण (transfer)- सामुदायिक सेवा शुल्क
- P.I = N.I –UDI- C.T-T-C.S.C
खर्च योग्य वैयक्तिक आय- disposable personal income
- वैयक्तिक आय में से शुद्व प्रत्यक्ष कर घटाने पर खर्च योग्य वैयक्तिक आय प्राप्त होती है।
GDP- अवस्फीतिकारक – deflation
- GDP deflation निकालने के लिए नाममात्र की GDP अर्थात nominal GDP में से वास्तविक GDP का भाग देना होता है।

- GDP अवस्फीतिकारक व real GDP में व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है।
नोट :- 1 जनवरी 2015 से राष्ट्रीय आय गणना विधि में परिवर्तन किया गया
- प्रत्येक क्षेत्र के अलग-अलग प्रदर्शन की गणना हेतु कारक लागत पर G.V.A. (gross value add) सकल मूल्य वर्धनअपनाया गया।
- प्राप्त GDP को मुद्रास्फीति से समायोजित कर प्राप्त GDP को अधिकारिक GDP कहा गया।
कारक लागत/साधन लागत/ factor cost:-
- कारक मूल्य से तात्पर्य उत्पाद के उस मूल्य से है जो उत्पादन में काम में लिये गये साधनों या कारकों का योग होता है।
बाजार मूल्य/अंतिम मूल्य/ market price:-
- बाजार मूल्य वह जिस पर वस्तु खरीदी या बेची जाती है।
- बाजार मूल्य को Tax व subsidy प्रभावित करते है।
- कारक लागत= बाजार कीमत-कर+ सब्सिडी
- शुद्व राष्ट्रीय उत्पाद कारक लागत पर
कार लागत पर
अर्थातNNP(Factor cost)= NNP(M.P) – tax+subsidy
- कारक लागत पर शुद्व राष्ट्रीय उत्पाद ही राष्ट्रीय आय कहलाती है।
- N.I = NNP (F.C)
- राष्ट्रीय आय = NNP (M.P)- tax+ subsidy
प्रति व्यक्ति आय- per capital income
- प्रति व्यक्ति आय प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय आय को देश की कुल जनंसख्या से विभाजित किया जाता है।
![]()
2019-20 के आंकडे़
- GDP = 204.4 लाख करोड़ रूपये
GDP विकास दर = 4.9%
प्रतिव्यक्ति आय = स्थिर मूल्य पर – 96563 रूपये
- स्थिर मूल्य पर – 96563 रूपये
- प्रचलित मूल्य पर – 135050 रूपये