भारतीय उद्योग
भारतीय उद्योग
- उद्योगों के प्रकार
- औद्योगिक नीति
- औद्योगिक वित्त तथा संगठन- IDBI, IFCI, SIDBI
- औद्योगिक अवसंरचना
- प्रमुख उद्योग योजनाएँ-
- स्थिति वर्ष 2019-20 में भारतीय G.D.P में उद्योगों का योगदान - 30.19%
- भारतीय उद्योग कच्चे माल की उपलब्धता तथा पूंजी की कम उपलब्धता का शिकार है।
उद्योगों के प्रकार
पूंजी निवेश के आधार पर
- लघु उद्योग
- बृहद् उद्योग
- कुटीर उद्योग
- ग्रामोद्योग
स्वामित्व के आधार
- सार्वजनिक क्षेत्र
- सहकारी क्षेत्र
- निजी क्षेत्र
कच्चे माल के आधार पर
- कृषि आधारित
- खनिज आधारित
- तकनीक आधारित
- पशु उत्पाद आधारित
- वन उपज आधारित
लघु उद्योग
2006 में S.P गुप्ता समिति लघु उद्योग को विभिन्न श्रेणी में विभक्त किया है।
2000 में MSME की परिभाषा में परिवर्तन
1. सेवा व विनिर्माण क्षेत्र के अंतर को समाप्त किया गया
2. निवेश तथा टर्नओवर के आधार पर परिभाषित
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निवेश |
टर्नऑवर |
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सूक्ष्म |
1 करोड़ ₹ तक |
5 करोड़ ₹ |
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लघु |
10 करोड़ ₹ तक |
50 करोड़ ₹ |
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मध्यम |
50 करोड़ ₹ तक |
250 करोड़ ₹ तक |
वृहत उद्योग
- वह उद्योग जिसमें बड़ी मात्रा में पूंजी निवेश करके मशीनीकरण तथा तकनीक की सहायता से अधिकमात्रा में उत्पादन किया जाता है। जैसे- लौह इस्पात उद्योग
कुटीर उद्योग
- निम्न पूंजी तथा बिना मशीनीकरण व बाहरी श्रम का सहयोग लिए बिना घरेलू लोगों द्वारा हाथों की सहायता से किए जाने वाले उत्पादन कार्य
ग्रामोद्योग
- 10 हजार तक की आबादी वाले क्षेत्रों में निम्न पूंजी निवेश किए जाने वाले उत्पादन कार्य। खादी व ग्रामोद्योग विभाग विकास हेतु उत्तरदायी
आधारभूत अद्योग
- अर्थव्यवस्था के विकास के लिए आवश्यक 8 आधारभूत उद्योग- 1. लौह इस्पात 2. सीमेंट 3. बिजली 4. कोयला 5. उर्वरक 6. क्रूड ऑयल 7. रिफायनरी 8. प्राकृतिक गैस
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम
महारत्न – 2009
1. लगातार तीन वर्षों से 5000 करोड़ का लाभ
2. नेटवर्क – 15000 करोड़
3. टर्न ओवर – 25000 करोड़
4. पूर्व में नवरन्त का दर्जा प्राप्त महारत्न में शामिल
महारत्न-10
1. SAIL- स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड
2. BHEL- भारत हेवी इले. लि.
3. GAIL- गैस अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड
4. NTPC- नेशनल थर्मल पॉवर कार्पोरेशन
5. CIL- कॉल इण्डिया लिमिटेड
6. HPCL- हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरर्पोरेशन लिमिटेड
7. BPCL- भारत पेट्रोलियम कॉरर्पोरेशन लिमिटड
8. IOCL- इण्डियन ऑयल कोरर्पोरेशन
9. ONGC- ऑयल एण्ड नेचुरल गैस कॉरर्पोरेशन लिमिटेड
10. PGCIL- पॉवर ग्रिड कॉरर्पोरेशन इण्डिया लिमिटेड
नवरत्न – 1997
- लगातार तीन वर्षों से 1000 करोड़ ₹ का लाभ
- 6 सूचकों पर 60% प्रदर्शन
मिनिरत्न – 1997
- लगातार तीन वर्षों से लाभ की स्थिति में
- सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं
- प्रबन्ध में सुधार कर लिया हो।
Industrial Policy (औद्योगिक नीतियाँ)
- प्रथम औद्योगिक नीति – 6 अप्रैल, 1948
- सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजी क्षेत्र की भूमिका को महत्तव
- उद्योगो को 4 भागों में बांटा गया
(1) राज्य के एकाधिकार वाले उद्योग- रेल परिवहन,अस्त्र- शास्त्र, परमाणु ऊर्जा
(2) मिश्रित क्षेत्र के उद्योग- लोहा, जल परिवहन, वायुपरिवहन कोयला, टेलीफोन, खनिज तेल
(3) सार्वजनिक नियंत्रण के उद्योग- 18 उद्योग
(4) निजी क्षेत्र उद्योग- शेष सभी को
औद्योगिक नीति- 1956
उद्देश्य-
- देश में आर्थिक विकास की गति को तेज करना
- सरकारी क्षेत्र का विस्तार
- सार्वजनिक क्षेत्र का विकास
- भारी मशीन बनाने वाले उद्योगों की स्थापना
उद्योगों का तीन श्रेणी में विभाजन किया
(1) सरकारी एकाधिकार वाले उद्योग
(2) मिश्रित क्षेत्र
(3) निजी क्षेत्र के उद्योग
औद्योगिक नीति- 1977
- लघु व कुटीर ग्रामोद्योगों के विकास पर बल प्रदान किया गया।
- बीमारू (घाटे वाली) ईकाइयों के प्रति चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाया:- अनावश्यक इकाई बन्द करना, आवश्यक। महत्त्वपूर्ण इकाई को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।
औद्योगिक नीति- 1980
- संघवाद की अवधारणा पर आधारित
- कृषि आधारित उद्योगों को रियायत प्रदान की गई
- पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर की स्थापना
नई औद्योगिक नीति- 1991
जुलाई 1991
- इसमें लाइसेंस तथा कोटा सिस्टम को समाप्त किया गया
- MRTP Act–1969 - एकाधिकार प्रतिबन्ध व्यापार व्यवहार अधिनियम 1969, को समाप्त कर दिया गया।
- केवल कु़छ उद्योगों के लिए लाइसेंस- सिगरेट, शराब, विस्फोट, रासायनिक उर्वरक, माचिस रक्षा सामग्री
- सरकारी क्षेत्र के एकाधिकार वाले उद्योगों की संख्या घटाकर तीन कर दी गई।
- रेलवे परिचालन
- परमाणु ऊर्जा
- परमाणु ऊर्जा से सम्बन्धित खनिज
- विदेशी निवेश को प्रोत्साहन- नए क्षेत्रों में विदेशी निवेश की छूट प्रदान की गई
- 10 लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों से 25 k.m. दूर उद्योग स्थापना
- विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करेन के लिये कानूनों को सरल बनाया गया तथा नए क्षेत्रों में विदेशी निवेश की छूट प्रदान की गई।
Industrial Finance
औद्योगिक – वित्त
- आवश्यकता के आधार पर
- समय के आधार पर
- स्त्रोत के आधार पर
आवश्यकता के आधार पर
स्थाई पूंजी (fixed capital)
- मशीन, भवन निर्माण, भूमि हेतु
कार्यशील पूंजी (working capital)
- कच्चामाल, मजदूरी, विपणन
समय के आधार:-
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अल्पकालिन वित्त, |
मध्यकालिन वित्त, |
दीर्घकालिन वित्त |
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15 महिने तक, कच्चामाल मजदूरी |
15 महिने से 5 वर्ष तक, छोटी मशीन |
5 वर्ष से अधिक, निर्माण नए उद्योग की स्थापना |
स्त्रोत के आधार:- आन्तरिक स्त्रोत, बाह्य स्त्रोत
- आन्तरिक वित्त
- स्वामी की पूंजी, अंश पूंजी लाभ का पुर्ननिवेश (Reinvestment of Profit)
- बाह्य वित्त-
- व्यापारिक बैंक, सार्वजनिक जमा औद्योगिक वित्तीय संगठन
प्रमुख औद्योगिक वित्तीय संगठन
IFCI.
- भारतीय औद्योगिक वित्त निगम
- (स्थापना- 1948) केन्द्रीय बैंकिग जाँच समिति की सिफारिश अनुसार
कार्य-
- 25 वर्षों तक की ऋण सुविधा उपलब्धता
- ऋण पत्रों की खरीद करके वित्तीय सुविधा
- विदेशी मुद्रा में ऋण सुविधा उपलब्ध
- वाणिज्यक व सहकारी बैंकों से लिए गए ऋणों की गारन्टी प्रदान करना
- विदेशों से खरीदी गई मशीनों के भुगतान की गारन्टी
IDBI
Industrial Development Bank of India
- स्थापना- 1964
कार्य
- उद्योगों को वित्तीय सुविधा उपलब्ध करना
- निवेश व विपणन को बढ़ाने हेतु वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराना
- औद्योगिक अवसंरचना विकास हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध कराना
- 2004 में इसे वाणिज्य बैंक का दर्जा दिया गया, वर्तमान में निजीकरण कर दिया गया, LIC द्वारा इसकी सम्पत्ति खरीद
SIDBI
भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
- स्थापना- अप्रैल- 1990
- मुख्यालय- लखनऊ
- वित्त स्त्रोत- IDBI, R.B.I ऋण पत्रों की बिक्री
कार्य-
1. लघु उद्योगों के लिए बाजार दरों से कम दर पर ऋण सुविधा उपलब्धता
2. उपनगरीय व कस्बों में औद्योगिक विकास प्रोत्साहन
राष्ट्रीय निवेश कोष
(National Investment Fund) 2005
- वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के अधीन कोष सरकार द्वारा विनिवेशन उद्देश्य से प्राप्त पूंजी का उपयोग
- 75% हिस्सा आर्थिक व सामाजिक कल्याण में
- 25% हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र में पुन: उद्वार हेतु निवेश
औद्योगिक अवसंरचना विकास
- राष्ट्रीय विनिर्माण नीति- 2011
- N IMZ
- औद्योगिक कॉरिडोर
- SEZ क्षेत्र
राष्ट्रीय विनिर्माण नीति- 2011
उद्देश्य-
- विनिर्माण क्षेत्र में 14-16% की वृद्धि करना
- 2022 तक G.D.P विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाकर 25% करना
- 10 करोड़ नए रोजगार सृजन करना
- राष्ट्रीय निवेश अवसंरचना क्षेत्रों की स्थापना
- औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि करके गुण्वत्ता में सुधार करना
- सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम की स्वायत्तता में वृद्धि करके रक्षा व ऊर्जा क्षेत्र को प्रोत्साहन
- राष्ट्रीय निवेश अवसंरचना क्षेत्रों की स्थापना करना
- औद्योगिक विकास उद्योग व श्रम कानूनों में सुधार करना
- औद्योगिक प्रशिक्षण व कौशल विकास पर बल देना
- भूमि अधिग्रहण से सम्बन्धित मुद्दे राज्य सरकार द्वारा हल कराए जाए।
औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor)
- एक क्षेत्र जहाँ उद्योगों के विकास के लिये अवसंरचना निवेश क्षेत्र औद्योगिक सिटी, एनर्जी, जल सुविधा, परिवहन सुविधा, आदि दी जाती है।
- वर्तमान में – 6 कॉरिडोर, भारत माला योजना के तहत 44 कॉरिडोर विकसित किये गये है।
1. दिल्ली मुम्बई औद्योगिक कॉरिडोर
2. मुम्बई बैंगलुरू औद्योगिक कॉरिडोर
3. बैंगलुरू कोच्ची औद्योगिक कॉरिडोर
4. बैंगलुरू चैन्नई औद्योगिक कॉरिडोर
5. पूर्वी तटीय औद्योगिक कॉरिडोर
6. अमृतसर दिल्ली कोलकात्ता औद्योगिक कॉरिडोर
NIMZ- राष्ट्रीय विनिर्माण निवेश क्षेत्र
- NIMS:- विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन व बढ़ावा देने के लिये स्थापित किये हुए क्षेत्र
- स्वायत्त शासी क्षेत्र
- क्षेत्रफल – 5000 हेक्टेयर
- 30% भाग पर विनिर्माण गतिविधि का संचालन
- समेकित औद्योगिक टाउन शिप
- आवश्यक परिस्थिति तंत्र हेतु बड़ा भू भाग
- विश्व स्तरीय विनिर्माण गतिविधि क्षेत्र
SEZ विशेष आर्थिक क्षेत्र – घरेलू सीमा में स्थित वे आर्थिक क्षेत्र जिन पर देश के सामान्य कानून लागू नहीं होते हैं तथा इनके लिये विशेष प्रावधान किया जाता है। निर्यात को बढ़ावा देने हेतु SEZ स्थापित है।
SEZ Act – 2000
SEZ Policy – 2005
वर्तमान में कार्यरत SEZ – 232
प्रस्तावित 351
प्रमुख उद्योग
लौह इस्पात उद्योग
- चीन के बाद भारत का विश्व में द्वितीय स्थान
कच्चामाल- लौह अयस्क, मैगनीज, कोयला, चूना पत्थर
प्रभावित करने वाले कारक
- 1. कच्चेमाल की उपलब्धता
2. बाजार तथा परिवहन की उपलब्धता
3. वित्तीय उपलब्धता
4. सरकार की नीतियाँ
इकाई-
- प्रथम - बंगाल आयरन वर्क्स- 1874 फुल्टा (पं. बंगाल)
- टाटा स्टील कम्पनी लिमिटेड- 1907 जमशेदपुर
- इण्डियन आयरन व स्टील वर्क्स- पं. बंगाल,
- विश्वैश्वरेया स्टील वर्क्स- 1973, शेमोगा (कर्नाटक)
- हिन्दुस्तान स्टील वर्क्स- भिलाई, छत्तीसगढ़- USSR
- हिन्दुस्तान स्टील वर्क्स दुर्गापुर, पं. बंगाल- ब्रिटेन
- हिन्दुस्तान स्टील वर्क्स- राउलकेला, उड़ीसा- जर्मनी
- हिन्दुस्तान स्टील वर्क्स- बोकारो, झारखण्ड
- स्टील ऑथोरिटी ऑफ अण्डिया लिमिटेड- SAIL महाराष्ट्र
सूती वस्त्र उद्योग
- कृषि आधारित परम्परागत उद्योग
- सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराना
- महत्त्व:- G.D.P में योगदान- 4%, औद्योगिक उत्पादन का- 14% हिस्सा, रोजगार- 3.5 करोड़
- मुम्बई- भारत की सूती वस्त्र नगरी
- अहमदाबाद- भारत का मेनचेस्टर
- कोयम्बटूर- दक्षिण भारत का मेनचेस्टर
- कानपुर- उत्तर भारत का मेनचेस्टर
इकाई
- प्रथम सूती वस्त्र मील कवास जी डागर द्वारा 1854, मुम्बई में स्थापित
- प्रमुख उत्पादक राज्य:- महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पं. बंगाल
सीमेन्ट उद्योग
प्रमुख आधारभूत उद्योग-
कच्चामाल- चूना पत्थर, कोयला, जिप्सम
स्थिति- विश्व में सीमेन्ट का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश, (2019 तक 54 कम्पनी 190 प्लांट) (उत्पादन- 485 मिलि. टन)
सीमेन्ट के प्रकार
1. पोर्टलैण्ड सीमेन्ट
2. पोर्टलैण्ड पोजोलोना सीमेन्ट
3. पोर्टलैण्ड फर्नेस सीमेन्ट
4. ऑयल सीमेन्ट
5. व्हाइट सीमेन्ट
सीमेन्ट इकाई-
- प्रथम- मद्रास उद्योग- 1904, इण्डिया सीमेन्ट लि.- 1946, तमिलनाडु, श्री सीमेन्ट ब्यावर अजमेर- 1997
- पूर्णत: भारत सरकार के स्वामित्व वाली इकाई सीमेन्ट कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड- 1965
सफेद सीमेन्ट-
- खांरियाखंगार जोधपुर, बिरला व्हाइट गोटन नागौर, J.K सीमेंट
एल्युमिनियम उद्योग
कच्चामाल- बॉक्साइट
- इकाई- एल्युमिनियम कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया- J.k नगर (पं. बंगाल)
हिन्दुस्तान एल्युमिनियम कम्पनी- रेनकुट (सोनभद्र) उत्तर प्रदेश HIDALCO
भारत एल्युमिनियम कम्पनी लिमिटेड (Balco) कोरना, छत्तीसगढ़
भारत एल्युमिनियम कम्पनी लिमिटेड (Balco) रत्नागिरी, महाराष्ट्र
नेशनल एल्युमिनियम कम्पनी लिमिटेड (NALCO) कोरापुर, उड़ीसा
वेदान्ता एल्युमिनियम कम्पनी लिमिटेड- लंजीगज, उड़ीसा
कागज उद्योग
- कच्चा माल- सेलुलोज जो पेड़ों के तनों को पीसकर प्राप्त किया जाता है
वन उपज आधारित उद्योग, 2.5 टन कच्चे माल से 1 टन कागज का निर्माण
- 70% बांस - कर्नाटक, असम (कच्चामाल),
15% सबई घास - मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, 7% Soft Wood- हिमालयन क्षेत्र
इकाई-
- प्रथम आधुनिक कारखाना- सेरामपुर (पं. बंगाल) 1832,
अखबारी कागज-
- प्रथम कारखाना- नेपानगर (M.P) मैसूर न्यूज प्रिन्ट पेपर लिमिटेड, मैसूर कर्नाटक तमिलनाडु न्यूज प्रिन्ट पेपरलि, वैल्लोर, तमिलनाडु
चीनी उद्योग
- परम्परागत कृषि आधारित उद्योग- कच्चामाल, गन्ना, चुकन्दर
- चीनी उत्पादन में विश्व में दूसरा व उपभोग में देश का प्रथम स्थान है
- विश्व का सर्वाधिक चीनी उत्पादक देश - ब्राजील, चीनी का कटोरा- क्यूबा
देश का प्रथम चीनी कारखाना- बिहार-1904
प्रमुख उत्पादक राज्य – 1. उत्तर प्रदेश 2. महाराष्ट्र 3. कर्नाटक
चीनी उद्योग की समस्या
1. प्रति हेक्टेयर गन्ने का निम्न उत्पादन
2. गन्ने की निम्न गुणवत्ता
3. मील द्वारा गन्ने के कुल उत्पादन का एक निश्चित भाग
उपयोग में लिया जाता है
4. तकनीक के अभाव के कारण लागत में वृद्धि।
पेट्रोलियम उद्योग:- (क्रूड ऑयल, रिफायनरी)
- उत्पादन क्षेत्र- असम, त्रिपुरा, मणिपुर, पं. बंगाल, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, J&K, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, राजस्थान, केरल, अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह
- भण्डार- 75.6 करोड़ टन, उत्पादन 35.7 m. टन
भारत में सर्वप्रथम तेल की खोज-
- ब्रह्मपुत्र घाटी में उत्पादन में सफलता- 1867
- उत्पादक कम्पनी- ONGC- 1956, OIL- 1981 ब्रह्मा ऑयल कम्पनी को परिवर्तन
रिफायनरी
- संख्या – 23, कुल क्षमता- 247.6 M.M.T प्रतिवर्ष, 2030 तक बढ़कर- 439 M.M.T प्रतिवर्ष
- रिफायनरी-23 (सरकारी क्षेत्र में-18, निजी क्षेत्र में-3, संयुक्त उपक्रम में-2)
सर्वाधिक क्षमता
- रिलाइंस रिफाइयनरी- जामनगर, गुजरात
- 2006- से एथेनॉल युक्त पेट्रोलियम, 10% एथेलॉल की मात्रा
- कृष्ण क्रान्ति- पेट्रोलियम उत्पादन
- भारत द्वारा सर्वाधिक आयात क्रूड ऑयल, निर्यात सर्वाधिक पेट्रोलियम उत्पाद