सहायिकी/राजसहायता (Subsidy)
सहायिकी:–
- सब्सिडी एक प्रकार की वित्तीय मदद है जो कि सरकार द्वारा किसानों, उद्योगों, उपभोक्ताओं (मुख्यत: गरीबों) को उपलब्ध कराई जाती है जिसके कारण वांछित लोगों के लिए आवश्यक वस्तुओं का मूल्य नीचे आ जाता है।
- बहुत सारी ऐसी वस्तुएँ होती है जो हमारे दैनिक जीवन और व्यापार के लिए आवश्यक होती है परन्तु यह वस्तुएँ इतनी महंगी होती है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति इन्हें आसानी से खरीद नहीं सकता है। इसलिए सरकार द्वारा सब्सिडी (छूट) के रूप में विकल्प उपलब्ध करवाती है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग बिना किसी वित्तीय बोझ के जरूरत की वस्तुएँ खरीद सकें।
- सब्सिडी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप में प्रदान की जाती है।
- प्रत्यक्ष सब्सिडी:- जब सरकार द्वारा सब्सिडी का नगद भुगतान किया जाता है, तो उसे प्रत्यक्ष सब्सिडी कहते हैं।
- अप्रत्यक्ष सब्सिडी:- जब सरकार द्वारा सब्सिडी का नगद भुगतान न करके उसे अन्य माध्यम से उपलब्ध करवाया जाता है, तो उसे अप्रत्यक्ष सब्सिडी कहते हैं जैसे- कर में छूट एवं कम ऋण में ब्याज देना आदि।
- भारत में केन्द्र सरकार द्वारा खाद्य, उर्वरक, पेट्रोलियम आदि पर तथा राज्यों द्वारा सिंचाई, विद्युत, स्वास्थ्य आदि पर सब्सिडी प्रदान की जाती है।
सब्सिडी प्रदान करने के कारण (Reason’s for Providing Subsidy):–
- व्यक्तियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना।
- आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों को बढ़ावा देना।
- यदि किसी वस्तु की कीमत बढ़ जाती है तो सरकार लोगों को सब्सिडी देकर उस वस्तु की कीमत को कम कर देती है।
सब्सिडी की गणना (Calculate Subsidy):–
- भारत में प्रदान की जाने वाली सब्सिडी बहुत सारे तथ्यों पर विचार करते हुए प्रदान की जाती है।
- सब्सिडी में ऋण की ब्याज दर, राशि, कुल लागत, उत्पाद एवं सरकार संबंधी कार्यों में होने वाले व्यय को मिलाकर सरकार एक फार्मूले के आधार पर सब्सिडी की राशि तय करती है।
सब्सिडी के प्रकार (Types of Subsidy):–
- सरकार द्वारा सब्सिडी कई प्रकार से प्रदान की जाती है ताकि देश के आर्थिक स्थिति से कमजोर वर्गों का समुचित विकास किया जा सके।
- सब्सिडी के प्रकार निम्नलिखित हैं-
खाद्यान्न सब्सिडी (Food Subsidy):–
- इस प्रकार की सब्सिडी में सरकार गरीबों के लिए सस्ते मूल्य पर खाद्यान्न (चावल, गेहूँ, दाल, चीनी) इत्यादि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से उपलब्ध करवाती है।
किसानों के लिए सब्सिडी (Farmer Subsidy):–
- इस प्रकार की सब्सिडी में उर्वरक, ब्याज माफी, वाहन और अन्य उपकरण खरीदने के लिए किसानों को सब्सिडी प्रदान की जाती है।
तेल/ईंधन सब्सिडी (Petroleum Subsidy):–
- इस सब्सिडी के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले समुदाय को सरकार सस्ते मूल्य पर मिट्टी का तेल, रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल उपलब्ध करवाती है।
कर सब्सिडी (Tax Subsidy):–
- यह सब्सिडी मुख्य रूप से बड़े-बड़े उद्योग क्षेत्रों के लिए प्रदान की जाती है ताकि ये लोग अधिक लागत की स्थिति में भी उत्पादन करना बंद न करें जिससे देश में बेरोजगारी ना बढ़े।
धार्मिक सब्सिडी (Religious Subsidy):–
- यह सब्सिडी मुख्य रूप से धार्मिक संस्थाओं को प्रदत्त है जिसके माध्यम से सभी को अपने धर्म के उत्थान हेतु समान अवसर प्रदान करवाती है।
ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy):–
- इस सब्सिडी के अंतर्गत शिक्षा, आवास, व्यापार, कृषि, खनन, विद्युत, परिवहन, स्वास्थ्य एवं अनेक प्रकार के ऋणों पर सरकार स्वयं आर्थिक विकास के लिए ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है जिससे ऋणी को विकास के नए आयाम प्राप्त हो सकें।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System-PDS)
सार्वजनिक वितरण प्रणाली:-
- भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को रियायती कीमतों पर आवश्यक उपभोग की वस्तुएँ प्रदान करना है ताकि मूल्य वृद्धि के प्रभावों से उन्हें बचाया जा सके तथा नागरिकों में न्यूनतम पोषण की स्थिति को भी बनाए रखा जा सके।
- भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरित की जाने वाली वस्तुओं में सबसे महत्त्वपूर्ण चावल, गेहूँ, चीनी और मिट्टी का तेल हैं।
- केंद्र सरकार इसके माध्यम से सस्ता खाद्यान्न उपलब्ध कराती है और उसका वितरण स्थानीय स्तर पर राज्य सरकारों द्वारा आवंटित उचित मूल्य की दुकानों (राशन की दुकान) के द्वारा किया जाता है।
- इस प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1947 में हुई है।
- इसे भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत स्थापित किया गया है।
- इस प्रणाली के माध्यम से खाद्यान्न उपलब्ध कराने वाली प्रमुख एजेंसी भारतीय खाद्य निगम है। निगम का कार्य अनाज व अन्य पदार्थों की खरीद, बिक्री व भंडारण करना है।
- भारतीय खाद्य निगम P.D.S. के लिए खरीद और रखरखाव का कार्य करता है जबकि राज्य सरकारों को राशन एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण सुनिश्चित करना होता है।
- गौरतलब है कि वर्ष 1992 तक P.D.S. बिना किसी विशिष्ट लक्ष्य के सभी उपभोक्ताओं के लिए चलाई जाने वाली एक सामान्य पात्रता वाली योजना थी।
- वर्ष 1992 से P.D.S. को R.P.D.S. (Revamped PDS) यानी सुधरा हुआ P.D.S. कहा जाने लगा जिसमें गरीब परिवारों खासकर दूर-दराज़, पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों पर विशेष ध्यान दिया गया।
- वहीं वर्ष 1997 में आर.पी.डी.एस., टी.पी.डी.एस. (Targeted PDS) यानी लक्षित पी.डी.एस. बन गया, जिसमें सब्सिडाइज्ड दरों पर अनाज के वितरण के लिए फेयर शॉप की स्थापना की गई।
- राज्य के भीतर आवंटन, लाभार्थी परिवारों की पहचान, राशन कार्ड जारी करना और उचित मूल्य की दुकानों के कामकाज की निगरानी सहित संचालन संबंधी उत्तरदायित्व राज्य सरकारों के पास है।
- PDS के अंतर्गत वर्तमान में गेहूँ, चावल, चीनी और केरोसिन जैसे भोज्य प्रदार्थों का आवंटन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा किया जा रहा है। कुछ राज्य/केंद्रशासित प्रदेश दालों, खाद्य तेलों, आयोडीन युक्त नमक, मसालों आदि वृहत उपभोग की अतिरिक्त वस्तुओं का वितरण भी PDS दुकानों के माध्यम से करते हैं।
नवीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Revamped Public Distribution System- RPDS):-
- P.D.S. को सशक्त और सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ पहाड़ी, दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में (जहाँ गरीबों का एक बड़ा तबका पाया जाता है) इसकी पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जून 1992 में नवीकृत/संशोधित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (RPDS) लागू की गई।
- इसमें 1775 प्रखंड (Blocks) शामिल किए गए जहाँ सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP), एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाएँ (ITDP), मरुस्थल विकास कार्यक्रम (DDP) जैसे विशिष्ट कार्यक्रम कार्यान्वित किए जा रहे थे। इसके साथ ही राज्य सरकारों के परामर्श से कुछ नामित पहाड़ी क्षेत्रों (Designated Hill Areas- DHA) को विशेष देख-रेख के लिए शामिल किया गया है।
लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Targeted Public Distribution System)
- P.D.S. प्रणाली की विफलता के बाद गरीबों को लाभ पहुँचाने और बजटीय खाद्य सब्सिडी को वांछित सीमा तक नियंत्रित रखने के उद्देश्य से वर्ष 1997 में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TDPS) शुरू की गई।
- अवधारणात्मक रूप में सार्वभौमिक PDS से TDPS की ओर संक्रमण सही दिशा में उठाया गया कदम था, क्योंकि इसे सभी गरीब परिवारों को शामिल करने और उनके लिए इकाई सब्सिडी एवं राशन कोटा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
- TDPS का मुख्य उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को PDS से अत्यधिक रियायती कीमतों पर और गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों को अपेक्षाकृत अधिक मूल्य पर खाद्यान्न प्रदान करना है।
- इस प्रकार भारत सरकार द्वारा अपनाई गई TDPS योजना भी PDS के समान ही है, लेकिन यह गरीबी रेखा से नीचे के लोगों पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (NFSA) को अधिसूचित किया गया है जो कि देश की 75% ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी को अत्यधिक सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्राप्त करने के दायरे में लाती है।
भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India- FCI)
- FCI एक सांविधिक निकाय है जिसे भारतीय खाद्य निगम अधिनियम, 1964 के तहत वर्ष 1965 में स्थापित किया गया।
- देश में भीषण अन्न संकट, विशेष रूप से गेहूँ के अभाव के चलते इस निकाय की स्थापना की गई थी।
- इसके साथ ही कृषकों के लिए लाभकारी मूल्य की सिफारिश करने हेतु वर्ष 1965 में ही कृषि लागत और मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices- CACP) का भी गठन किया गया।
- इसका मुख्य कार्य खाद्यान्न एवं अन्य खाद्य पदार्थों की खरीद, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री करना है।
FCI के उद्देश्य
- किसानों को लाभकारी मूल्य प्रदान करना।
- प्रत्येक व्यक्ति के लिए हर समय खाद्यान्न की उपलब्धता, पहुँच और सामर्थ्य सुनिश्चित करना।
- खाद्यान्नों के कार्यात्मक बफर स्टॉक का संतोषजनक स्तर बनाकर राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से संपूर्ण देश में खाद्यान्न का वितरण।
- किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी मूल्य सहायता ऑपरेशन (Effective Price Support Operations)।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत गरीबों को ₹ 2 प्रति किलो गेहूँ और ₹ 3 प्रति किलो चावल देने की व्यवस्था की गई है। इस कानून के तहत लाभार्थियों को उनके लिए निर्धारित खाद्यान्न हर हाल में मिले, इसके लिए खाद्यान्न की आपूर्ति न होने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा भत्ते के भुगतान के नियम को जनवरी 2015 में लागू किया गया।
- जुलाई 2016 तक वैध एनएफएसए के तहत निर्दिष्ट खाद्यान्नों की कीमत – चावल ₹ 3 प्रति किग्रा., गेहूँ ₹ 2 प्रति किग्रा. और मोटा अनाज ₹ 1 प्रति किग्रा.।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर राजस्थान मॉडल:-
- राजस्थान में PDS प्रणाली में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को लागू किया गया।
- इस मॉडल में राजस्थान सरकार द्वारा ‘फ्यूचर ग्रुप’ के साथ अनुबंध किया गया तथा यह ग्रुप राजस्थान में ‘अन्नपूर्णा भंडार’ नाम से उचित मूल्य की दुकानें संचालित कर रहा है।
- इन भंडारों में फ्यूचर ग्रुप PDS सामानों के साथ-साथ अपने उत्पाद भी बेच सकता है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दु:-
- भारत सरकार ने वर्तमान की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को समाप्त करने की मंशा जताई है। फिलहाल हरियाणा व पुदुचेरी में यह प्रणाली समाप्त कर दी गई है और DBT के माध्यम से लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुँचाया जा रहा है। यदि इन दोनों जगहों पर यह मॉडल सफल होता है तो सरकार इसे पूरे देश में लागू कर सकती है।