सौर मण्डल :-
- 140 AD में यूनानी भूगोलवेत्ता क्लोडियस टोल्मी ने पृथ्वी केन्द्रित संकल्पना प्रस्तुत की।
- 153 AD में निकोलस कॉपरनिकस ने सूर्य केन्द्रित संकल्पना प्रस्तुत की।
- 1609 AD में गैलीलियों ने Telescoep की सहायता से ब्रह्माण्ड का अध्ययन करने वाला प्रथम विद्वान था।
- गैलीलियों ने Telescope की सहायता से बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि की खोज की।
- ब्रिटिश खगोल शास्त्री विलयम हर्शेल ने बताया कि हमारा सौर मंडल एक गैलेक्सी का छोटा सा अंश है।
- विलियम हर्शेल ने Uranus (अरुण) ग्रह की खोज की।
- एडविन पॉवेल हब्बल के अनुसार ब्रह्माण्ड लगातार फैल रहा है।
- ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से संबंधित सिद्धांत :-
1. महाविस्फोट सिद्धांत – आर्ज लैमेनटर
महाविस्फोट सिद्धांत को ही "Big Bang Theory" भी कहा जाता है।
- ब्रह्माण्ड में लगभग 10" galaries या आकाश गंगाएँ मौजूद है।
- और प्रत्येक गैलेक्सी में इतनी ही संख्या के तारे मौजूद है।
कुल तारे = 1011x1011=1022 तारे
- "लाइमन अल्फा हलॉक्स" ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी गैलेक्सी है।
- हमारे सौर मण्डल के सबसे नजदीक गैलेक्सी एन्ड्रोमीडा है।
- 'मंदाकीनी' या milky way ये गैलेक्सी सर्पिलाकार गैलेक्सी या Special shope कहलाती है।
- हमारा सौर मंडल मंदाकिनी गैलेक्सी में स्थित है।
- ओरियन नेबुला :- हमारी गैलेक्सी का सबसे चमकीला भाग कहलाता है, ये भाग तारों का झुण्ड होता है।
- प्रोक्सीमा सेन्चुरी :- सौर मण्डल में सबसे नजदीकी तारा है।
- सीरियस/डॉगस्टार :- हमारी गैलेक्सी का सबसे चमकीला तारा है।
- ध्रुव तारा/North Star/Polistar – ये तारा सदैव उत्तर दिशा में चमकता है।
- हमारा सौरमण्डल :-
- सौरमण्डल में सूर्य, ग्रह, उपग्रह, क्षुद्र ग्रह, उल्का पिण्ड, धूमकेतु, धूलकण तथा गैसे पायी जाती है।
सूर्य :-
- सूर्य हमारे C=3x108 m/s है।
- सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8 मिनट तथा 18 सैकेण्ड या लगभग (500 सैकेण्ड) का समय लगता है।
- सूर्य की ऊर्जा का स्त्रोत नाभिकीय सलयन (Nuclear Furior) क्रिया है।
1H2+"2He4+ऊर्जा
- सूर्य पर गैसे :-
1. हाइड्रोजन – 71%
2. हीलियन – 26.5%
3. अन्य गैसें – 2.5%
- सूर्य की कुल आयु – 10 बिलियन वर्ष
- सूर्य की वर्तमान आयु – 5 बिलियन वर्ष
- सूर्य का चमकीला भाग – प्रकाश मण्डल (Photosphere) कहलाता है।
- सूर्य का बाहरी भाग कोरोना (Corona)/किरीट, जिसका तापमान 6000 0 C है।
- सूर्य का आन्तरिक भाग क्रोड (Core), जिसका तापमान लगभग 150 लाख 0 C होता है।
- सूर्य के प्रकाश मण्डल में दो घटनाएँ दिखाई देती है।
- सौर चक्र को बनने में 22 वर्ष का समय लगता है।
- सूर्य का आयतन पृथ्वी से 13 लाख गुना अधिक है।
- सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल-पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से 28 गुना अधिक है।
सौर मण्डल के सदस्य
सूर्य
ग्रह
उपग्रह
क्षुद्रग्रह
उल्कापिंड
धूमकेतू
धूल कण तथा गोले
ग्रह:-
वे खगोलिय पीण्ड जो सूर्य के चारों ओर एक निश्चित पथ में परिक्रमण करते हैं, तथा इनका अपना कोई ऊर्जा का स्रोत नहीं होता है। निश्चित आकार एंव घनत्व होता है।
बुध
शुक्र
पृथ्वी
मंगल
बृहस्पति
शनि
अरूण
वरूण
सुर्य→बुध/मर्करी→शुक्र/वीनस→पृथ्वी→मंगल/मार्स→बृहस्पति/जूपिटर→शनि/सैटर्न→अरूण/यूरेनस→वरूण/नेप्चून
आन्तरिक/पार्थिव ग्रह:- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल
बाहरी/गैसीय/ जोबियन ग्रह:- बृहस्पति, शनि, अरूण, वरूण
मंगल तथा बृहस्पति के बीच एक शुद्ध ग्रह की पेटी पाई जाती है।
शुक्र तथा अरूण ग्रह सूर्य का परिक्रमण घड़ी की दिशा (Clock Wise)में करते है, जबकि बाकि सभी ग्रह घड़ी की विपरित दिशा (Anti Clock Wise)में सूर्य का परिक्रमण करते हैं।
ग्रहों का आकार – (घटते हुए क्रम में)
बृहस्पति > शनि > अरूण > वरूण > पृथ्वी > शुक्र > मंगल > बुध
बुध/(Mercury):-
सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह।
सबसे छोटा ग्रह।
परिक्रमण काल 88 दिन।
सबसे कम परिक्रमण काल।
कोई उपग्रह नहीं।
बुध पर कोई वायुमण्डल नहीं पाया जाता है।
शुक्र (Venus)
God of Beauty (सुन्दरता का देवता)
सूर्य से दूसरे स्थान पर स्थित है।
सबसे गर्म ग्रह (क्योंकि इसके वायुमण्डल में 90-95% Co2) गैस है।
सबसे चमकीला ग्रह
पृथ्वी के सबसे नजदीकी ग्रह
शुक्र को भोर का तारा एवं साँझ का तारा भी कहते है।
शुक्र का परिक्रमण काल 225 दिन हैं, लेकिन शुक्र का घुर्णन (परिभ्रमण) काल 243 दिन है।
सर्वाधिक घूर्णन काल वाला ग्रह।
सुर्योदय पश्चिम दिशा से होता है तथा कोई उपग्रह नहीं है।
शुक्र पृथ्वी का जुड़वा ग्रह कहलाता है। (समान आकार व घनत्व के कारण)
पृथ्वी मंगल (MARS)
दूसरा सबसे छोटा ग्रह।
मंगल ग्रह को लाल ग्रह भी कहा जाता है। आयरन ऑक्साइड की अधिकता के कारण।
मंगल ग्रह का परिक्रमण काल 687 दिन ।
मंगल ग्रह का घूर्णन काल पृथ्वी के घूर्णन काल के लगभग बराबर है।
पृथ्वी 23 घण्टे 56 मिनट
24 घण्टे 37 मिनट
ओलंपस मॉन्स ज्वालामुखी-मंगल ग्रह पर हमारे सौरमण्डल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी है।
निक्स ओलम्पिया पर्वत - मंगल ग्रह पर स्थित है, जो मांउट एवरेस्ट से तीन गुना बड़ा है।
मंगल ग्रह के दो उपग्रह है-फोबोस तथा डीमोस।
बृहस्पति (Jupiter)
क्षुद्र ग्रह मंगल एंव बृहस्पति के मध्य परिक्रमण करते है
सबसे बड़ा ग्रह है।
सबसे अधिक उपग्रहों (67) वाला ग्रह।
परिक्रमण काल लगभग 12 वर्ष है।
सबसे तीव्र घूर्णन गति वाला ग्रह-लगभग 10 घण्टें
इसके प्रमुख उपग्रह-ग्यानीमीड, यूरोपा, कैलिस्टो इत्यादि।
ग्यानीमीड उपग्रह हमारे सौर मण्डल का सबसे बड़ा उपग्रह है।
शनि (Satrun)
अरुण (URANUS)
वरुण (NEPTUNE)
प्लूटो/यम/कुबेर (PLUTO)
IAU-International Astronomical
Union (अन्तर्राष्ट्रीय खगोल संघ)
उपग्रह (Satellite)
चन्द्रमा (Moon)
ब्लू मून (Blue Moon)
Notes:- 2015 में खोजे गये एक क्षुद्रग्रह को IAU द्वारा मलाला युसुफ जई नाम दिया गया।
- ये आकाशीय धूल, बर्फ तथा हिमानी गैंसो से निर्मित खगोलीय पिण्ड होते है। ये पिण्ड सूर्य से दूर अंधेरे क्षेत्रों में रहते है तथा सूर्य के चारो ओर एक अनियमित कक्षा में घूमते है।
Notes:-
(1) हैली पुच्छल तारा :-
- सूर्य के चारो ओर एक लम्बे परवलयाकार पथ में परिक्रमण करता है तथा प्रत्येक 76 वर्ष बाद दिखाई देता है। 1986 में देखा गया। उसके बाद यह 2062 में दिखाई देगा।
(2) हेल-बॉय पुच्छल तारा (1995)
- पृथ्वी को जलीय व नीला ग्रह भी कहा जाता है।
- पृथ्वी की सूर्य से दूरी- 14.98 करोड़/15 करोड़ किमी. है।
- पृथ्वी के प्रकाश की गति- 3×108 m/sec
- पृथ्वी तक सूर्य के प्रकाश को पहुँचने में लगा समय-
8 मिनट 18 सैकण्ड लगभग-500 सैकण्ड है।
- (IUGG) भू-मापी एवं भू भौतिकी विज्ञान का अन्तर्राष्ट्रीय संघ के अनुसार-जियॉड (Geoid)/पृथ्वाकार है।
- पृथ्वी का गुरूत्वाकर्षण बल- 9.8 m/sec2
- पृथ्वी का पलायन वेग- 11.2 Km/sec
- पृथ्वी का घनत्व- 5.52 gm/cm3
- पृथ्वी का घनत्व सभी ग्रहों में सर्वाधिक है।
- सौर मण्डल में सबसे कम घनत्व वाला ग्रह-शनि (0.70 gm/cm3)
- पृथ्वी का पृष्ठ क्षेत्रफल-5.11 करोड़ Km2
स्थल क्षेत्र जल क्षेत्र (2/3)
(7 महाद्वीपों (14.58 करोड़ वर्ग किमी.) -5 महासागरों
1. एशिया 1. प्रशान्त महासागर
2. अफ्रीका 2. अटलांटिक महासागर
3. उत्तरी अमेरिका 3. हिन्द महासागर
4. दक्षिणी अमेरिका 4. अंटाकर्टिक महासागर
5. अंटार्कटिका 5. आर्कटिक महासागर
6. यूरोप
7. ऑस्ट्रेलिया
1. उपसौर :-
- पृथ्वी तथा सूर्य के मध्य न्यूनतम दूरी (14.7 करोड़ किमी.) को उपसौर कहते है।
- यह घटना 3 जनवरी को होती है।
2. अपसौर :-
- पृथ्वी एवं सूर्य के मध्य अधिकतम दूरी (15.2 करोड़ किमी. को अपसौर कहते है।
- यह घटना 4 जुलाई को होती है।
अक्षांश तथा देशान्तर-
कुछ महत्वपूर्ण अक्षांश रेखाएँ:-
क्षेत्रफल के आधार पर महाद्वीपों की स्थिति -
1. एशिया - आ.क. वि
2. अफ्रीका - म.क.वि
3. उत्तरी अमेरिका - आ.क
4. दक्षिणी अमेरिका - म.वि
5. अंटार्कटिका -
6. यूरोप - आ
7. ऑस्ट्रेलिया - म
Trick
आ = आर्कटिक वृत्त
म = मकर रेखा
क = कर्क रेखा
वि = विषुक्त रेखा
देशान्तर रेखाएँ:-
22 अक्टूबर, 1884 में वाशिंगटन डी.सी में 0° देशान्तर रेखा निर्धारित करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसके अन्तर्गत इंग्लैंड के लंदन शहर में ग्रीनविच नामक स्थान पर अंग्रेंजों की शाही खगोलशाखा से 0° देशान्तर को गुजारने के लिए सहमति हुई।
0° देशान्तर/ग्रीनविच रेखा-
कटिबंध :- दो अक्षांशों के मध्य का क्षेत्रफल कटिबंध कहलाता है।
15° = 1 घंटे/1° = 4 मिनट
प्रश्न - यदि ग्रीन विच पर दोपहर के 12 बजे है तो भारत में क्या समय होगा?
प्रश्न- एक नाविक 30° पूर्वी देशंतर से चलना प्रारंभ करता है और 90° पूर्वी देशांतर पर उसकी यात्रा समाप्त होती है। जहाँ से उसने चलना प्रारंभ किया वहाँ दोपहर के 2 बजे थे तो यहाँ क्या समय होगा?
प्रश्न- यदि ग्रीनविच पर दोपहर के 12:00 बजे है तो न्यूयार्क शहर में क्या समय होगा? यदि वह 74° पश्चिमी देशांतर पर स्थित है?
(a) 4:56 PM (b) 7:04 AM
(c) 7.04 PM (d) 4 : 56 PM
दिन-रात का एक समान न होना
(i) पृथ्वी का अपने अक्ष पर झुका होना।
(ii) पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर परिक्रमण।
नोट:- विषुवत् वृत्त पर दिन-रात की अवधि हमेशा एक समान होती है। विषुवत वृत्त से उत्तर या दक्षिण जाने पर दिन-रात में अंतर आता है।
आयनांत (Solistice) = जब सूर्य की लम्बवत् किरणें कर्क रेखा या मकर रेखा पर होती है उसे आयनांत कहते हैं। यह दो प्रकार का होता हैं-
1. शीत आयनांत (winter solistice) = जब सूर्य की लम्बवत किरणें मकर रेखा पर होती है तो उत्तरी गोलार्द्ध सर्दी तथा दक्षिणी गोलार्द्ध गर्मी के दिन होते हैं।
यह घटना 22 दिसंबर को होती है-
उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे छोटा दिन
दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन
सूर्य को लम्बवत् किरणें कर्क रेखा पर
21 जून = ग्रीष्म आयनांत (Summer Solisticer)
उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन
दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे छोटा दिन
22 दिसंबर - शीत आयनांत (Winter Solistier)
उत्तरी गोलार्द्ध - सबसे छोटा दिन
विषुव (Equonoxer)
सूर्य की लम्बवत् किरणें विषुवत् रेखा पर
21 मार्च को बसंत विषुव (Spring Equonoxes) तथा 23 23 सितंबर को शरद विषुव /पतझड़ विषुव (Antumnal Equasnoxes) दिन-रात बराबर होते हैं।
सौर वर्ष (Solar Year) -
ज्वार-भाटा (CTIDES) - समुद्र के जल का ऊपर उठना एवं नीचे गिरना ज्वार-भाटा कहलाता है।
कारण :- 1. सूर्य का आकर्षण बल
2. चन्द्रमा का आकर्षण बल
3. पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण उत्पन्न अपकेन्द्रिय बल
नोट:- पृथ्वी पर सूर्य की तुलना में चन्द्रमा का आकर्षण बल 2.2 गुणा अधिक लगता है।
सम्मुख भाग
ज्वार-भाटा के प्रकार -
1. दीर्घ /उच्च ज्वार (High Tide)
2. लघु /निम्न ज्वार (Low Tides)
दीर्घ /उच्च ज्वार - जब पृथ्वी, सूर्य तथा चन्द्रमा एक सीधी में होते हैं तब उच्च ज्वार की स्थिति बनती है।
इस स्थिति को पुति-विपुती (Syzygy) सिजगी
युति (Conjunction)
जब सूर्य एवं पृथ्वी के मध्य चन्द्रमा आ जाता है यह स्थिति सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) कहलाती है।
S+M - सूर्य एवं चन्द्रमा का संयुक्त
सूर्य = M = पृथ्वी
- इस स्थिति में उच्च ज्वार आता है। ऐसा केवल अमावस्या (New Moon) के दिन होता है।
वियुति (Opposition) -
जब सूर्य एवं चंद्रमा के मध्य पृथ्वी आ जाती है। इस स्थिति को चन्द्रग्रहण (Lunar Eclipse) कहते हैं।
- इस स्थिति में उच्च ज्वार आता है। ऐसा केवल पूर्णिमा के दिन होता है।
नोट:- विश्व में सबसे ऊँचा पठार (उत्तरी अमेरिका) के पूर्वी तट पर फंडी की खाड़ी में आता है।
- भारत में सबसे ऊँचा ज्वार - औखा (गुजरात) में आता है।
- इंग्लिश चैनल (ब्रिटेन एवं फ्रांस) 24 घंटे में चार बार ज्वार आता है।
ब्रह्माण्ड
- अस्तित्वमान द्रव्य एवं ऊर्जा के सम्मिलित रूप को ब्रह्माण्ड कहते हैं।
- दूसरे शब्दों में सूक्ष्मतम अणुओं से लेकर महाकाय आकाशगंगाओं (Galaxies) तक के सम्मिलित स्वरूप को ब्रह्माण्ड कहा जाता है।
- ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से संबंधित प्रमुख सिद्धान्त निम्न हैं
1. महाविस्फोट सिद्धान्त (Big-Bang Theory): 1930 वर्ष में बेल्जियम के ऐब जॉर्ज लैमेन्तेयर के द्वारा यह सिद्धान्त दिया गया था तथा बाद में जार्ज गैमो के द्वारा कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य प्राप्त हुए थे। जिनके द्वारा बिग बैंग सिद्धान्त को समझाया जा सकता है। इस सिद्धान्त के अनुसार विश्व के आरम्भ में लगभग 15 बिलियन साल पहले एक बहुत बड़े विखण्डन से प्रारम्भिक परमाणु प्राप्त हुआ था। उसके बाद आज तक विश्व का प्रसार चल रहा है, जो कि बाद में भी चलता रहेगा।
2. साम्यावस्था या सतत सृष्टि सिद्धान्त या स्थिर अवस्था संकल्पना (Steady State Theory): थॉमस गोल्ड एवं हर्मन बॉडी
3. दोलन सिद्धान्त (PulsatingUniverse Theory): डॉ. एलन संडेजा, विश्व के विकास का यह नवीनतम सिद्धान्त है। इसके अनुसार, यह विश्व करोड़ों वर्षों के अन्तराल में क्रमश: फैलता और सिकुड़ता रहा है।
4. स्फीति सिद्धान्त (Inflationary Theory): अलेन गुथ
महाविस्फोट सिद्धान्त के अनुसार :
1. आरंभ में वे सभी पदार्थ, जिनसे ब्रह्माण्ड बना है, अति छोटे गोलक (एकाकी परमाणु) के रूप में एक ही स्थान पर स्थित था, जिनका आयतन अत्यधिक सूक्ष्म एवं तापमान तथा घनत्व अनंत था।
2. अत्यधिक संकेन्द्रण के कारण बिन्दु का आकस्मिक विस्फोट हुआ, जिसे महाविस्फोट ब्रह्मांडीय विस्फोट (Big-Bang) कहा गया। इस अचानक विस्फोट से पदार्थों का बिखराव हुआ, जिससे सामान्य पदार्थ निर्मित हुए। इसके अलगाव के कारण काले पदार्थ बने, जिनके समूहन से अनेक ब्रह्मांडीय पिंडों का सृजन हुआ। वैज्ञानिकों का विश्वास है कि महाविस्फोट (Big-Bang)की घटना आज से लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले हुई थी।
- ब्रह्मांड के निरंतर विस्तारण के साक्ष्य के रूप में अंतरिक्ष में सूक्ष्म तरंगों की उपस्थिति का पता चलना, अंतरिक्ष में रेडशिफ्ट परिघटना का अवलोकन तथा आधुनिक अध्ययनों में सुपरनोवा का अंतरिक्ष में विस्फोट होना भी ब्रह्मांड के विस्तार के साक्ष्य रूप में माना जा रहा है।
- नासा NASA) द्वारा 30 जून, 2001 को डेविड वलकिंसन के नेतृत्व में बिग-बैंग की पुष्टि हेतु ‘मैप परियोजना’ (Microwave Anisotropy Probe-MAP) का शुभारंभ किया गया। मैप एक खोजी उपग्रह है। इससे प्राप्त चित्रों से बिग बैंग की पुष्टि होती है। 11 फरवरी, 2013 ई. को इस आधार पर नासा ने ब्रह्माण्ड की आयु 13.7 अरब वर्ष निर्धारित करने की घोषणा की।
- ब्रह्माण्ड का व्यास 108 प्रकाशवर्ष है। ब्रह्माण्ड में अनुमानतः 100 अरब मंदाकिनी (Galaxy)है। प्रत्येक मंदाकिनी में अनुमानतः 100 अरब तारे होते हैं।
- आकाशगंगा (Galaxy)
तारों के विशाल समूह को आकाशगंगा कहते है। गुरुत्वाकर्षण के कारण आकाशगंगाओं का एक-दूसरे से बँधे होने को प्रायद्वीपीय ब्रह्माण्ड कहते हैं। प्रत्येक आकाशगंगा के अन्दर असीमित तारें होते है।
- तारे (Stars)
तारे चमकने वाले पिण्ड हैं, जिनका अपना प्रकाश और ऊष्मीय ऊर्जा होती है। सूर्य हमारी पृथ्वी का सबसे निकटतम तारा है। यह पृथ्वी से 150 मिलियन दूर है तथा प्रकाश की चाल 3x108 मी/से होती है। इसलिए सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचने में 8.3 मिनट (500 सेकण्ड) का समय लेता है। सौर तन्त्र का सबसे निकटतम तारा प्रॉक्सिमा सेन्चुरी है। जिसकी पृथ्वी से दूरी 4.3 प्रकाश वर्ष है।
- तारे का जीवन चक्र
जब तारे में हाइड्रोजन कम हो जाती है, तो इसकी बाहरी सतह फुलने लगती है और तारा लाल हो जाता है। यह तारे के अन्तिम समय की पहली निशानी है। ऐसे तारे को लाल दानव (red giant) कहते हैं। हमारा सूर्य आगामी 5 अरब वर्षों में ऐसा लाल दानव बन जाएगा ऐसी सम्भावना है।
(तारे<सूर्य)-लाल दानव-श्वेत वामन तारे-काला वामन
तथा यदि (तारे > सूर्य) - बड़ा लाल दानव-अधिनव तारें – न्यूट्रॉन तारे या कृष्ण छिद्र (Black Hole)।
- श्वेत वामन तारे (White dwarf Stars)
यह बहुत छोटा, गर्म तारा होता है तथा इसके जीवन चक्र की अन्तिम अवस्था सूर्य के समान होता है। परन्तु इसके व्यास का 1% लगभग पृथ्वी के व्यास के जितना होता हैं।
- अधिनव तारा (Supernova)
वह तारे की विस्फोस्टक मृत्यु का परिणाम है। जिससे बहुत कम समय के लिए 100 मिलियन सूर्य की चमक प्राप्त होती है।
- न्यूट्रॉन तारा (Neutron Stars)
जब अधिनव तारा विस्फोटित होता है। तब न्यूट्रॉन संघटित होकर न्यूट्रॉन तारे बन जाते है। इलेक्ट्रान और प्रोटोन बलपूर्वक जुड़कर न्यूट्रॉन तारे बनाते हैं। इन तारों का द्रव्यमान तीन गुना अधिक परन्तु इनका व्यास केवल 20 किमी होता है।
- कृष्ण छिद्र (Black Holes)
अत्यधिक द्रव्यमान वाले वे तारे जिनका जीवन समय खत्म हो जाता है कृष्ण छिद्र बनाते हैं कृष्ण छिद्र में द्रव्यों का घनत्व नहीं मापा जा सकता हैं।
चन्देशेखर सीमा- किसी अघूर्णशील श्वेत वामन तारे का सीमाकारी द्रव्यमान (1.44) ही चन्द्रशेखर सीमा कहलाता है।
- मंदाकिनी: तारों का ऐसा समूह, जो धुंधला-सा दिखाई पड़ता है तथा जो तारा-निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत का गैसपुंज है, मंदाकिनी (galaxy) कहलाता है। हमारी पृथ्वी की अपनी एक मंदाकिनी है, जिसे दुग्धमेखला या आकाशगंगा (Milky Way) कहते हैं। अब तक ज्ञात इस मंदाकिनी का 80% भाग सर्पिला (spiral) है। इस मंदाकिनी को सबसे पहले गैलीलियो ने देखा था।
- आकाशगंगा की सबसे नजदीकी मंदाकिनी को देवयानी (Andromeda) नाम दिया गया है।
- नवीनतम ज्ञात मंदाकिनी (Galaxy) ड्वार्फ मंदाकिनी है
- निहारिका (Nebula) : यह एक ब्रह्मांडीय नर्सरी है जहाँ तारों का जन्म होता है। निहारिका में धूल और गैसों का बादल होता है। सभी तारों का जन्म निहारिका में होता है सिर्फ कुछ दुर्लभ अवसरों को छोड़कर जिसमें दो न्यूट्रान तारे एक श्याम विवर बनाते हैं। वैसे भी न्यूट्रान तारे और श्याम विवर मृत तारे माने जाते हैं। यहाँ पाए जाने वाले गैसों में हाइड्रोजन गैस, हीलियम गैस एवं अन्य आयनीकृत प्लाज्मा गैसें होती हैं।
- निहारिका दो अलग-अलग कारणों से बनती है, पहला ब्रह्मांड की उत्पति और दूसरा किसी विस्फोटक तारे से बने सुपरनोवा से ।
- ब्रह्मांड के जन्म के बाद परमाणुओं का जन्म हुआ और इन परमाणुओं से धूल और गैस के बादलों का निर्माण हुआ।
- सुपरनोवा से जो पदार्थ उत्सर्जित होता है इससे भी निहारिका का जन्म होता है। इसके उदाहरण हैं वेल और कर्क।
- निहारिका की उत्पत्ति ब्रह्मांड के जन्म और सुपरनोवा के मिश्रण से भी हो सकता है।
- निहारिका के कुछ प्रकार
1. उत्सर्जन निहारिकाएँ: यह सबसे सुंदर और रंग-बिरंगी होती है । ये बन रहे तारों से प्रकाशित होती है। उदाहरण-चील एवं झील निहारिका।
2. परावर्तन निहारिकाएँ: यह तारों के प्रकाश को परावर्तित करती है। ये तारे या तो निहारिका के अंदर होते हैं या पास में होते हैं। उदाहरण-प्लेइडेस निहारिका।
3. श्याम निहारिकाएँ: ये अपने पीछे से आने वाली प्रकाश को एक दीवार की तरह रोक देती है। यही कारण है कि हम अपनी आकाशगंगा में बहुत दूर तक नहीं देख सकते हैं।
4. ग्रहीय निहारिकाएँ: इसका निर्माण उस वक्त होता है जब एक सामान्य तारा एक लाल दानव तारे में बदलकर अपने बाहरी तहों को उत्सर्जित कर देता है। इसी वजह से इनका आकार गोल होता है ।