अपवाह तंत्र
Drainage System
- जल की एक निश्चित धारा एवं दिशा में प्रवाह को अपवाह कहते हैं तथा धाराओं के जाल को अपवाह तंत्र कहते हैं।
- नदी बेसिन या जलग्रहण क्षेत्र
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नदी द्रोणी
- नदी जिस क्षेत्र से जल ग्रहण करती है उसे उस नदी का जल ग्रहण क्षेत्र या Catchment Area कहते हैं।
- जल ग्रहण क्षेत्र के आधार पर नदी द्रोणियों को तीन भागों में बाँटा गया है -
1. बड़ी नदी द्रोणियाँ (Large Basins) :-
- जल ग्रहण क्षेत्र 20,000 km2 से अधिक
- 14 नदी द्रोणियाँ à बड़ी नदी द्रोणियों में आती हैं।
- गंगा, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा
2. मध्यम नदी द्रोणियाँ (Medium River Basins):-
- 2000-20,000 km2
- 44 नदी द्रोणियाँ हैं।
3. लघु नदी द्रोणियाँ (Small River Basins) :-
- जलग्रहण क्षेत्र – 2000 km2 से कम हैं।
- लगभग 55 नदी द्रोणियाँ हैं।
- जलसंभर :- बहुत छोटी नदी द्रोणियाँ हैं।
- जल विभाजक क्षेत्र
- दिल्ली – अम्बाला सहारनपुर
- अरावली
- विंध्याचल
- सतपुड़ा
- पश्चिमी घाट
- अपवाह प्रतिरूप (Drainage Pattern) :- अपवाह तंत्र एक विशेष ज्यामिति आकार के प्रकार है।
- वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप (Dendritic Drainage Pattern)
- पत्ताकार अपवाह प्रतिरूप (Pinnate Drainage Pattern)
- जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप (Trelis Drainage Pattern)
- आयताकार अपवाह तंत्र (Rectangalan Drainage Pattern)
- आरीय अपवाह तंत्र (Radial Drainage Pattern)


हिमालय की नदियाँ -
हिमालय की नदियाँ तीन मुख्य तंत्रों में विभाजित हैं। सिंधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र।
ये नदियाँ तिब्बत के पठार की दक्षिणी ढालों से निकलकर हिमालय के मुख्य अक्ष के समानान्तर अनुदैर्ध्य द्रोणियों में बहती हैं।
वे अचानक दक्षिण की ओर मुड़ती हैं तथा अन्नत पर्वतों के शृंगों को भेदकर उत्तरी मैदान में पहुँचती हैं।
सिंधु, सतलज, अलकनंदा, गंडक, बह्मपुत्र एवं कोसी के गहरे गॉज के दिखने से स्पष्ट है कि ये नदियाँ पर्वतों की अपेक्षा पुरानी हैं।
ये नदियाँ हिमालय के बनने की सभी अवस्थाओं में बहती रही हैं जिससे उनके किनारे ऊपर उठते गए, जबकि उनका तल गहरा होता गया तथा गार्ज की परिच्छेदिका में परिवर्तित हो गया।
प्रायद्वीपीय नदियाँ घाटियों में से होकर बहती हैं, जो लगभग पूरी तरह संतुलित हो चुकी हैं।
इन नदियों की समतली अनुदैर्ध्य परिच्छेदिका से यह संकेत मिलता है कि अब इनके द्वारा अपरदन की क्रिया किए जाने की गुंजाइश बहुत कम है।
इनमें से बहुत सी नदियाँ मौसमी हैं, क्योंकि उनका प्रवाह केवल वर्षा पर निर्भर रहता है।
पठार का दृढ़-शैलाधार तथा धरातल का सामान्यतः जलोढ़हीन चरित्र इन नदियों में विसर्पण नहीं होने देता।
यही कारण है कि प्रायद्वीपीय नदियों का मार्ग-सीधा तथा सामान्यतः रेखिक है।
उत्तर भारत की प्रमुख नदियाँ -
शिवालिक पहाड़ियों के निर्माण के फलस्वरूप भारत का अपवाह तन्त्र तीन भागों में विभक्त हो गया-
(1) सिन्धु नदी तंत्र
(2) गंगा नदी तंत्र एवं
(3) ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र।
1. सिन्धु नदी तन्त्र - सिन्धु नदी मानसरोवर झील के निकट तिब्बत में 5,180 मी. की ऊँचाई से निकलती है।
सिंधु नदी का उद्गम बोखर-चू ग्लेशियर से होता है जो कैलाश पर्वत के उत्तरी ढलान पर है।
सिन्धु तन्त्र की नदियाँ ब्रह्मपुत्र नदी से ठीक उल्टी ओर बहती है।
यह नदी जम्मू-कश्मीर राज्य में विशाल गाॅर्ज बनाती हुई कैलाश पर्वत श्रेणी को कई स्थानों पर काटती है।
इसकी सहायक नदियाँ सतलज, झेलम, चेनाव, रावी एवं व्यास हैं।
अटक के पास काबुल नदी तथा उसकी सहायक नदियाँ इससे मिलती हैं।
सिंधु नदी 2,880 किमी. लंबी है एवं इसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 11,65,000 वर्ग किमी. पर फैला है, जिसमें से लगभग 3,21,290 वर्ग किमी. क्षेत्र भारत में है।
पाकिस्तान से हुए सिंधु-जल समझौते के अन्तर्गत भारत इस नदी के जल का लगभग 20 प्रतिशत उपयोग कर सकता है।
दक्षिण की ओर सिंधु नदी से मिलने वाली महत्त्वपूर्ण सहायक नदियाँ कुर्रम, तोचो तथा झोब-गोमल हैं।
पंजाब की पाँच प्रसिद्ध नदियों सतलुज, व्यास, रावी, चिनाब तथा झेलम का सामूहिक प्रवाह पंचनद कहलाता है जो सिंधु नदी की मुख्यधारा से मीठनकोट के पहले मिलता है।
पंजाब में सिंधु की सहायक नदियों में से झेलम का पीर पंजाल तथा व्यास का हिमाचल के पर्वतों से उद्गम हुआ है।
सतलज नदी हिमालय की श्रेणियों के पार तिब्बत से निकलती है।
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नदी |
प्राचीन नाम |
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सिंधु नदी |
सिंधु (Indus) इण्डस |
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झेलम नदी |
वितस्ता नदी |
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चिनाब नदी |
अस्किनी नदी |
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रावी नदी |
परुष्णी नदी |
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व्यास नदी |
विपासा नदी |
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सतलज नदी |
सतुद्री नदी |
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नदी |
स्त्रोत |
स्थान |
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सिंधु नदी |
मानसरोवर झील |
तिब्बत |
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झेलम नदी |
शेषनाग झील |
जम्मू कश्मीर |
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चिनाब नदी |
बारालाचला दर्रा |
हिमाचल प्रदेश |
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रावी नदी |
रोहतांग दर्रा |
हिमालच प्रदेश |
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व्यास नदी |
व्यास कुण्ड |
हिमाचल प्रदेश |
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सतलज नदी |
राक्षस झील |
तिब्बत |
सिंधु नदी की सहायक नदियाँ:-

झेलम नदी :-
- झेलम नदी जम्मू एवं कश्मीर में 720 किमी शेषनाग झील से निकलती है।
- झेलम नदी कश्मीर घाटी का निर्माण करती है।
- वूलर झील झेलम नदी बनाती है।
- भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।
- वूलर झील एक गोखुर (Oxbow) झील का उदाहरण है।
- झेलम नदी अनंतनाग से बारामूला तक नौकागम्य नहीं है।
- झेलम नदी भारत-पाक की सीमा बनाती है।
- झेलम नदी की सहायक नदी – किशनगंगा नदी
- पाक – नीलम नदी
- उरी परियोजना, तुलबुल परियोजना झेलम नदी पर जम्मू और कश्मीर में स्थित है।
- चिनाब नदी (अस्किनी नदी) :- 1180 किमी
- सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
- चिनाब नदी हिमाचल प्रदेश ‘चन्द्र-भागा’ नदी बहती है।
- चिनाब नदी हिमाचल प्रदेश में बारालाचला दर्रे से निकलती है।
- दुलहस्ती परियोजन, सलल परियोजना, बगली हार परियोजना – चिनाब नदी पर जम्मू-कश्मीर में स्थित है।
- रावी नदी (परुष्णी नदी) :- 725 किमी
- रावी नदी हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे से निकलती है।
- रावी नदी जम्मू घाटी का निर्माण करती है।
- जम्मू तथा लाहौर शहर रावी नदी के तट पर स्थित है।
- रावी नदी – 26 जनवरी, 1930 पूर्ण स्वराज्य की मांग की गई थी, कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में।
- रोहतांग दर्रा – मनाली को लेह से जोड़ता है। (अटल सुरंग)
- व्यास नदी :-
- व्यास नदी हिमाचल प्रदेश में नैना देवी के समीप गहरे गाॅर्ज का निर्माण करती है।
- पंजाब के हरिके नामक स्थान पर सतलज नदी में मिल जाती है।
- पौंग बाँध हिमालच प्रदेश में व्यास नदी पर स्थित है।
जलाशय – महाराणा प्रताप सागर
सतलज नदी – सतुद्री नदी
कुल लम्बाई – 1450 किमी
भारत में लम्बाई – 1050 किमी
- सतलुज नदी कैलाश पर्वत के समीप राक्षस झील से निकलती है।
- सतलुज नदी भारत में शिपकिला दर्रे से प्रवेश करती है।
- सतलुज नदी हिमाचल प्रदेश तथा पंजाब में बहती हुई पाकिस्तान में प्रवेश करती है।
- सतलुज नदी पर भाखड़ा-नांगल परियोजना स्थित है।
पंजाब + हिमाचल प्रदेश
जलाशय – गोविन्द सागर (हिमाचल प्रदेश)
2. गंगा नदी तंत्र :

भारत का सबसे बड़ा तथा सबसे महत्त्वपूर्ण नदी बेसिन क्षेत्र है।
इस नदी की कुल लंबाई 2,525 किमी. है जिसमें से उत्तर प्रदेश में 1,450 किमी., बिहार में 445 किमी. तथा पश्चिम बंगाल में 520 किमी. है।
गंगा उत्तरांचल के हिमालय क्षेत्र से निकलती है।
इस नदी का नाम गंगा देवप्रयाग के बाद पड़ता है, जहाँ अलकनंदा तथा भागीरथी आपस में मिलती हैं।
दाहिने तट की मुख्य नदियाँ यमुना, सोन, पुनपुन तथा टोंस है।
गंगा के बाएँ तट से मिलने वाली प्रमुख नदियाँ हैं - रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी तथा महानंदा।
फरक्का के बाद गंगा की मुख्यधारा पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहाँ इसे पद्मा के नाम से जाना जाता है।
यहाँ से गंगा कई धाराओं में बँटकर डेल्टाई मैदान में दक्षिण की ओर बहती हुई समुद्र से मिल जाती है।
इस हिस्से में यह नदी भागीरथी-हुगली के नाम से जानी जाती है तथा छोटी-छोटी पठारी नदियाँ जैसे-द्वारका, अजय, रूपनारायण तथा हल्दी आदि इससे आकर मिलती हैं।
बांग्लादेश में चाँदपुर के पास बंगाल की खाड़ी से मिलने से पहले पद्मा से ब्रह्मपुत्र आकर मिलती हैं जिसे यहाँ जमुना तथा दक्षिणी बांग्लादेश में मेघना के नाम से पुकारा जाता है।
प्रयाग नदी :-
1. विष्णु प्रयाग - अलकनंदा नदी + धौली गंगा
2. नंद प्रयाग - अलकनंदा नदी + नंदाकिनी नदी
3. कर्ण प्रयाग - अलकनंदा नदी + पिण्डार गंगा
4. रूद्र प्रयाग - अलकनंदा नदी + मंदाकिनी नदी
5. देव प्रयाग - अलकनंदा नदी + भागीरथी नदी
- गंगा नदी - उत्तराखण्ड - उ.प्रदेश - बिहार - झारखण्ड - पश्चिम बंगाल
- गंगा नदी के तट पर स्थित शहर
UK - ऋषिकेश, हरिद्वार
UP - कन्नौज, कानपुर, इलाहाबाद, बनारस
बिहार - बक्सर, छपरा, पटना, भागलपुर
W.B - मुर्शिदाबाद, फरक्खा, बैराज
कोलकाता - हुगली
ढाका - पद्मा
- गंगा नदी की सहायक नदी –
- बाएँ तट पर मिलने वाली सहायक नदी – रामगंगा - गोमती - घाघरा नदी - गण्डक नदी - कोसी नदी - महानंदा नदी
- दाएँ तट पर मिलने वाली सहायक नदियाँ –
यमुना - टोंस/तमशा - कर्मनाशा नदी - सोनदी - पुनपुन नदी
गंगा नदी की सहायक नदियाँ:-

- रामगंगा नदी गंगा की सबसे पहली हिमालयी सहायक नदी है।
- रामगंगा नदी उत्तराखण्ड में नैनीताल जिले से निकलती है।
- जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क/हेली राष्ट्रीय पार्क – रामगंगा नदी के पट पर स्थित है।
- भारत का पहला राष्ट्रीय पार्क – टाइगर रिजर्व
- रामगंगा नदी मुरादाबाद (पीतल नगरी) – बरेली – बदायू जिलों से बहती हुई उत्तर प्रदेश (कन्नौज) में गंगा नदी में मिल जाती है।
- कन्नौज को छत्र नगरी भी कहते हैं।
- ब्रह्मगंगा नदी जल परियोजना – उत्तराखण्ड में स्थित है।
- गोमती नदी उत्तर प्रदेश के पीलीभीत्ति जिले में फुल्हर झील से निकलती है।
- पीलीभीत्ति (तराई क्षेत्र)
- गोमती नदी लखनऊ - सुल्तानपुर - (जौनपुर) से बहती हुई उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में गंगा नदी में मिलती है।
- घाघरा नदी तिब्बत में कैलाश पर्वत के समीप से निकलती है।
- घाघरा नदी को नेपाल में कसैली नदी कहा जाता है।
- घाघरा नदी बिहार के छपरा में गंगा नदी में मिलती है।
काली/शारदा/चौका
ताप्ती नदी - गोरखपुर
सरयु नदी - अयोध्या
- उत्तराखण्ड में मिलान हिमनद से निकलती है।
- उत्तराखण्ड तथा नेपाल की सीमा बनाती है।
- काला-पानी – लिपुलेख विवाद
- भारत-नेपाल के मध्य इसी नदी से सबंधित विवाद है।
- गण्डक नदी नेपाल हिमाचल प्रदेश से निकलती है।
- नेपाल में इसे नारायणी नदी कहते हैं।
- बिहार के सोनपुर में गंगा नदी में मिल जाती है।
- कोसी नदी नेपाल में गोसाई धाम पर्वत से निकलती है।
- कोसी नदी को नेपाल में सप्तकोसी नदी कहते हैं।
- कोसी नदी मार्ग परिवर्तन के लिए कुख्यात है। इसलिए इसे विश्वासघाती नदी भी कहते हैं।
- कोसी नदी बिहार के कुरूसेला में गंगा नदी में मिल जाती है।
- गंगा की अंतिम हिमालयी सहायक नदी है।
- महानंदा नदी दार्जिलिंग हिमालय से निकलती है तथा पश्चिम बंगाल में फरक्खा के समीप गंगा नदी में मिल जाती है।
- गंगा नदी भारत की सबसे लम्बी (2525) तथा सबसे बड़ी (अपवाह क्षेत्र) नदी है।
- गंगा नदी भागीरथी के नाम से उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में गंगौत्री हिमनद के समीप गौमुख से निकलती है।
- हरिद्वार से गंगा मैदानी भागों में प्रवेश करती है।
- गंगा नदी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से प्रवेश करती है तथा बलिया जिले से बिहार में प्रवेश करती है।
- इलाहाबाद (प्रयागराज) में गंगा से यमुना नदी आकर मिल जाती है।
- फरक्खा (पश्चिम बंगाल) के बाद गंगा नदी दो धाराओं में विभाजित हो जाती है।
1. हुगली
2. भागीरथी (बांग्लादेश में पद्मा नाम से जानी जाती है।)
- गंगा में दाएँ तट पर मिलने वाली सहायक नदी –
1. यमुना नदी
2. टोंस/तमसा नदी
3. कर्मनाशा नदी
4. सोन नदी
5. पुनपुन नदी
- यमुना नदी गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
- यमुना नदी उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में बन्दर पूँछ चोटी पर स्थित यमुनोत्री हिमनद से निकलती है।
- यमुना नदी – उत्तराखण्ड – हिमाचल प्रदेश – हरियाणा – दिल्ली – उत्तरप्रदेश में इलाहाबाद में गंगा नदी से मिल जाती है।
- दिल्ली – मथुरा – आगरा शहर यमुना नदी के तट पर स्थित है।
बाएँ तट पर – टोंस, हिण्डन
दाएँ तट पर – चम्बल, सिंध, बेतवा, केन
- चम्बल नदी यमुना नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
- चम्बल नदी मध्य प्रदेश में ‘जानापाओ पहाड़ियों’ से निकलती है।
- चम्बल नदी मध्यप्रदेश – राजस्थान – उत्तर प्रदेश तीन राज्यों से होकर बहती है।
- उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में यमुना नदी में मिल जाती है।
- चम्बल नदी मालवा पठार की सबसे प्रमुख नदी है।
- चम्बल नदी बुन्देलखण्ड पठार में उत्खात भूमि (बीहड़) Ban land topography तथा अवनालिका अपरदन (Gully Erosion) के लिए प्रसिद्ध है।
- चम्बल नदी की सहायक नदियाँ – क्षिप्रा नदी, पार्वती नदी, कालीसिंध नदी, बनास नदी।
- सिंध नदी मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में मालवा पठार से निकलती है।
- मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश राज्यों में बहती है।
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में यमुना नदी में मिल जाती है।
- मध्य प्रदेश में विंध्याचल से निकलती है।
- बेतवा नदी मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती है।
- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में यमुना नदी में मिल जाती है।
- माता टीला बाँध बेतवा नदी (मध्य प्रदेश + उत्तर प्रदेश) की एक संयुक्त परियोजना है।
- केन नदी मध्य प्रदेश में कैमुर पहाड़ियों से निकलती है।
- मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में बहती हुई। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में यमुना नदी में मिल जाती है।
- बाएँ तट की सहायक नदी।
- गाजियाबाद जिला – हिण्डन नदी के तट पर स्थित है।
- तमसा नदी मध्य प्रदेश में विंध्याचल से निकलती है तथा उत्तर की ओर बहती हुई। इलाहाबाद के समीप सिरसा नामक स्थान पर गंगा नदी में मिल जाती है।
- कर्मनाशा नदी मध्य प्रदेश त्रिशंकु पहाड़ियों से निकलती है तथा बिहार के चौसा में गंगा में मिल जाती है।
- सोन नदी घाटी में स्वर्ण के कण पाए जाते हैं। इसलिए इस नदी को सोन नदी कहते हैं।
स्वर्ण के कण - प्लेसर भण्डार
- सोन नदी मध्य प्रदेश में अमरकंटक पहाड़ियों से निकलती है।
- सोन नदी बिहार के दानापुर में गंगा नदी में मिल जाता है।
- बाण सागर परियोजना – सोन नदी पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा बिहार की एक संयुक्त परियोजना है।
- सोन नदी की सहायक नदी है।
- रिहन्द बाँध :- उत्तरप्रदेश के सोन भद्र जिले में स्थित है।
- जलाशय/झील :- गोविन्द वल्लभ पंत सागर,
भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम या मानव निर्मित झील है।
- गंगा में दाएँ तट पर मिलने वाली अंतिम सहायक नदी है।
- यह नदी झारखण्ड के पलामु जिले से निकलती है तथा बिहार के गया में गंगा नदी में मिल जाती है।
3. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र :

यह दक्षिण-पश्चिम तिब्बत में मानसरोवर झील एवं कैलाश पर्वत के पूर्व में शुरू होकर दक्षिण तिब्बत में पश्चिम से पूर्व की ओर 916 किमी. तक बहकर असम हिमालय को पार करती है।
तिब्बत में यह सांग्पो नाम से जानी जाती है।
ब्रह्मपुत्र जिस स्थान पर हिमालय को काटती है वहाँ इसे ‘दिहांग’ कहते हैं।
बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र को जमुना कहते हैं।
सुरमा नदी के मिलान के बाद इसको मेघना कहते हैं।
अन्त में पद्मा और जमुना दोनों नदियाँ इसमें चाँदपुर के निकट आकर मिलती है।
ये संयुक्त धाराएँ बहुत चौड़ी होकर एक बड़ी एश्चुरी बनाती है, जिसमें बहुत से प्रसिद्ध द्वीप हैं।
इसकी सम्पूर्ण लंबाई 2,900 किमी. है। ब्रह्मपुत्र गंगा में मिलने वाली नदियों में सबसे बड़ी नदी है।
सुबनसिरी, जिया भोरेली, मानस से उत्तर की ओर से आकर ब्रह्मपुत्र में मिलती है।
बूढ़ी दिहांग, मोरा, गंगाधर, धनसिरी, कोपिल्ली (कपिली), तिस्ता, जलढाका, तोरसा, बराक दक्षिण की ओर से आकर इसमें मिलती है।
एशिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली है, जो ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित है।
प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ :
प्रायद्वीपीय क्षेत्र का मुख्य जल-विभाजक पश्चिमी घाट है।
इस क्षेत्र की नदियाँ वर्षा पर निर्भर करती हैं।
नदियाँ कम गहरी हैं, इसलिए नौकागम्य भी नहीं है।
यहाँ की प्रमुख नदियाँ इस प्रकार हैं -
(A)बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ :
महानदी :
यह 851 किमी. लम्बी है एवं इसका अपवाह क्षेत्र 1,32,050 वर्ग किमी. है।
यह छत्तीसगढ़, ओडिशा से होकर बहती है।
शिवनाथ, हंसदेव, मांड तथा बाएँ तट पर, जोंक, उग तथा तेल इसके दाहिने तट पर मिलने वाली सहायक नदियाँ हैं।
गंगा तथा महानदी के मध्य अंतरास्थापित सुवर्णरेखा तथा ब्राह्मणी के दो छोटे बेसिन हैं।
इनका अपवहन बेसिन झारखंड, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल तथा छत्तीसगढ़ में विस्तृत है।
हीराकुण्ड बाँध का निर्माण महानदी पर किया गया है।
गोदावरी :

प्रायद्वीप की यह सबसे बड़ी तथा देश में गंगा के बाद दूसरी सबसे बड़ी नदी है। जिसकी लंबाई 1465 किमी. है।
यह महाराष्ट्र के नासिक जिले से निकलती है।
इसका संपूर्ण अपवहन क्षेत्र 312,812 वर्ग किमी. है, जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत महाराष्ट्र में स्थित है।
महाराष्ट्र के अतिरिक्त इसका अपवहन क्षेत्र यह मध्यप्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ एवं आंध्रप्रदेश में भी पाया जाता है।
इसके विशाल आकार एवं विस्तार के कारण गोदावरी को वृद्धगंगा के नाम से भी पुकारा जाता है।
उत्तर में इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ प्रणाहिता, पेनगंगा, वर्धा, वेनगंगा तथा इन्द्रावती हैं।
दक्षिण में मंजीरा नदी प्रमुख है, जो हैदराबाद के निकट इसमें मिलती है।
कृष्णा :

कृष्णा नदी का उद्गम महाबलेश्वर के निकट पश्चिमी घाट के उदग्र पार्श्व में है।
यह प्रायद्वीपीय भारत की दूसरी बड़ी नदी है। इसकी कुल लंबाई 1401 किमी. है।
यह महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश से होकर बहती है।
कोयना, धाटप्रथा, मालाप्रथा, भीमा, तुंगभद्रा, मूसी तथा मुनेरु आदि अपनी सहायक नदियों समेत कृष्णा का कुल अपवहन क्षेत्र 258,948 वर्ग किमी. है।
हैदराबाद मूसी नदी के किनारे स्थित है।
ये नदियाँ गहरी घाटियों में बहती हैं।
कावेरी :
कावेरी नदी दक्षिण की गंगा कहलाती है।
यह कुर्ग जिले में 1,341 मी. की ऊँचाई से निकलती है और दक्षिण-पूर्व की ओर कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों में 800 किमी. की लम्बाई में बहती है।
इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ उत्तर में हेमावती, लोकपावनी, शिमसा व अरकावती तथा दक्षिण में लक्ष्मण, तीर्थ, कबबीनी, सुवर्णवती, भवानी और अमरावती हैं।
यह शिवासमुद्रम नामक प्रसिद्ध जलप्रपात बनाती है।
कावेरी तथा कृष्णा के मध्य पेन्नार बेसिन है, जिसका अधिकांश भाग कर्नाटक में हैं।
कावेरी जल विवाद तमिलनाडु, कर्नाटक, पुडुचेरी और केरल चार पक्षों के बीच में था।
मैसूर से 20 किमी. ऊपर से नदी पर बाँध बनाकर कृष्णा सागर जलाशय का निर्माण किया गया है।
(B) अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ
सिंधु नदी तंत्र-
सिंधु और इसकी पाँच सहायक नदियाँ
झेलम :-
यह सिंधु की महत्वपूर्ण सहायक नदी है।
यह बेरीनाग झरने से निकलती है, जो कश्मीर घाटी के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है।
चिनाब :-
चिनाब का उद्गम हिमाचल प्रदेश के बारालाचा दर्रे से होता है।
भारत में इसकी लम्बाई 1180 किमी. है।
चिनाब नदी पर सलाल, दुलहस्ती, बगलियार जैसी महत्त्वपूर्ण पन-बिजलीघर परियोजनाएँ हैं।
रावी :-
रावी का उद्गम दर्रे से होता है।
भारत में इसकी लम्बाई 725 किमी. है, जो 6957 वर्ग किमी. के जल को अपवाहित करती है।
गुरुदासपुर एवं अमृतसर में भारत-पाक सीमा बनाती हुई लाहौर की ओर प्रस्थान करती है।
व्यास :-
हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे स्थित व्यास कुण्ड से उद्गम होता है।
यह पंजाब के कपूरथला एवं अमृतसर के जनपदों में बहती हुई हरिके स्थान पर सतलज नदी में मिल जाती है।
व्यास नदी की कुल लम्बाई 465 किमी. है।
सतलज :-
सतलज नदी का उद्गम तिब्बत में कैलाश पर्वत के दक्षिण में स्थित राक्षस झील से होता है।
यह एक पूर्ववर्ती नदी है, जिसकी आयु हिमालय पर्वत से अधिक है।
तिब्बत में सतलज नदी को लांगचेन खम्बाब कहते हैं।
इस नदी पर भाखड़ा गाँव के पास बहुउद्देशीय भाखड़ा बाँध का निर्माण किया गया है।
सतलज नदी की लम्बाई 1050 किमी. है, जो 28090 वर्ग किमी. क्षेत्र को अपवाहित करती है।
राजस्थान की नदियाँ -
लूणी :-
लूणी नदी का उद्गम स्थान अजमेर (राजस्थान) के पास नाग पहाड़ है।
लूणी नदी की लम्बाई 495 किमी. है, जो कच्छ के रण में जाकर समाप्त होती है।
लूणी नदी का पानी बालोतरा से आगे खारा हो जाता है।
बाण्डी, सुकड़ी, जवाई, जोजड़ी, मिठड़ी, खारी, सागी आदि सहायक नदियाँ हैं।
पश्चिम बनास :-
यह नदी माउण्ट आबू से निकलकर कच्छ के रण में जाकर फैल जाती है।
साबरमती :-
इसका उद्गम स्थल उदयपुर के पास स्थित जयसमंद झील है।
यह नदी अरावली के दक्षिण ढलान को अप्रवाहित करती हुई, खंभात की खाड़ी में जाकर गिरती है।
माही :-
माही मध्यप्रदेश के विंध्याचल पहाड़ से निकलती है, जिसकी लम्बाई 576 किमी. है।
माही कर्क रेखा को दो बार काटती है।
सोम, जाखम, चाप, अनास, मोरेन तथा इरु इसकी सहायक नदियाँ हैं।
11. नर्मदा :
नर्मदा मध्य प्रदेश में अमरकंटक की पहाड़ियों से निकलती है तथा पश्चिम-दक्षिण की ओर 1,312 किमी. बहने के बाद भड़ोच के पास अरब सागर में गिरती है।
इसका अधिकांश भाग मध्य प्रदेश में पाया जाता है।
इसके कुल अपवहन क्षेत्र का केवल दसवां भाग गुजरात में है।
नर्मदा का महत्वपूर्ण लक्षण इसकी सहायक नदियों की कमी है।
इसकी कोई भी सहायक नदी 200 किमी. से अधिक लंबी नहीं है।
केवल ओरसन एक अपवाद है, जिसकी लंबाई 300 किमी. है।
मध्यप्रदेश में संगमरमर की चट्टानों में नर्मदा का रमणीक प्रपात धुआंधार प्रपात प्रसिद्ध है।
नर्मदा के उत्तर में विन्धयाचल और दक्षिण में सतपुड़ा पर्वत है।
12. ताप्ती :
यह मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से निकलकर पश्चिम की ओर 724 किमी. की लंबाई में नर्मदा के लगभग समानांतर एक द्रोणी बेसिन में बहती है।
यह मध्य प्रदेश महाराष्ट्र तथा गुजरात से होकर बहती है।
ताप्ती के बाएँ तट पर मिलने वाली नदियों में पूर्णा, बेघर, गिरना, बोरी, तथा पंझरा एवं दाहिने तट पर मिलने वाली नदी मनेर मुख्य है।
इसके मुहाने पर सूरत नगर स्थित है।
1. ब्रह्यपुत्र नदी
→ ब्रह्यपुत्र नदी विश्व की बड़ी नदीयों मे से एक है।
→ कुल लम्बाई = 2900 कि.मी.
→ भारत में लम्बाई = 916 कि.मी.
→ ब्रह्यपुत्र नदी कैलाश पर्वत के समीप चेमांग युग दुंग हिमनद से निकलती है।
→ ब्रह्यपुत्र नदी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
→ झांग्पो नदी (तिब्बत)
→ यारलंग जांग्बो नदी (चीन)
→ दिहांग सियाग नदी (अरुणाचल प्रदेश)
→ ब्रह्यपुत्र नदी (असम)
→ जमुना नदी (बांग्लादेश)
→ पदमा + जमुना = मेघना नदी (बांग्लादेश) तीन देशो में बहती है
→ ब्रह्यपुत्र नदी विश्व की सबसे ऊँची नोकागम्य नदी है।
→ ब्रह्यपुत्र नदी भारत मे नामचा बरवा पर्वत चोटी से यू-टर्न लेकर यंग्यय दर्रे से प्रवेश करती है।
→ ब्रह्यपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश में हिमालय मे दिहांग गाज का निर्माण करती है।
→ ब्रह्यपुत्र नदी असम मे सदिया से धुबरी तक नौकागम्य नदी है। इसलिए इसे राष्ट्रीय जलमार्ग स. 2 घोषित किया गया है।
1 → गंगा – हुगली नदी इलाहबाद में हल्दीया
2 → सदिया से धुबरी तक असम में ब्रह्यपुत्र नदी पर
3 → कोल्लम से कोटरापुरम
→ ब्रह्यपुत्र नदी असम में एक रैम्प घाटी से होकर बहवी है।
→ असम राज्य ब्रह्यपुत्र नदी के कारण भारत का सर्वाधिक बाढ़ग्रस्त राज्य है।
→ ब्रह्यपुत्र नदी जिससे नदीय द्वीपों का निर्माण होता है।
→ मांजुली द्वीप विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप है। बराक तथा तिस्ता नदी जल विवाद भारत – बांग्लादेश क मध्य है
RBT → सुवनसिरी जियाभरेली
दाएँ तट पर – मानस, सकोष, तिस्ता नदी
LBT → धनसिरी, कोपिली तथा बराक नदी
प्रायद्वीपीय नदियाँ
→ प्राचीनतम नदियाँ
→ प्रौढावस्था में
→ चौड़ी तथा कम गहरी घाटियों का निर्माण
→ पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ
→ अरब सागर में गिरती है।
→ ज्वारनदमुख का निर्माण करती है।
→ पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ
→ बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
→ डेल्टा बनाती है।
→ छोटा नागपुर
पठार से तीन नदियाँ निकलती है।
1. दामोदर नदी
दामोदर नदी एक भ्रंश घाटी से बहती हैं। दामोदर नदी घाटी को भारत रूहर घाटी भी कहते हैं।
2. स्वर्ण रेखा नदी
3. ब्राह्यमणी नदी
→ दामोदर घाटी परियोजना स्वतंत्र भारत की पहली परियोजना है (1948) नेहरू जी द्वारा भारत की नदी घाटी परियोजनाओं को आधुनिक भारत का मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा कहा गया।
→ दामोदर नदी हुगली नदी की सहायक है जबकि हुगली नदी गंगा नदी को वितरिका हैं।
स्वर्ण रेखा नदी
→ छोटा नागपुर पठार से निकलती हैं।
→ इस नदी में स्वर्ण के प्लेसर भण्डार, पाएँ जाते है।
→ स्वर्ण रेखा नदी पर झारखंड में हुण्डरू जलप्रपात स्थित है।
→ जमशेदपुर इस्पात उद्योग झारखण्ड में स्वर्ण रेखा नदी पर स्थित है।
→ दामोदर नदी तथा स्वर्ण रेखा नदी अत्यंत रसायनिक प्रदूषण के कारण जैविक मरुस्थल कहलाती हैं।
→ मयूराक्षी नदी
→ पश्चिम बंगाल में मयूर बाँध स्थित है।
→ मचकुण्ड नदी
→ ओडिशा में डुडुमा जल प्रपात है।
→ वैतरणी नदी
→ ओडिशा के क्योझर जिले से निकलती है।
→ ब्राह्मणी नदी
→ छोटा नागपुर पठार से निकलती है तथा ओडिशा के तट पर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
1. राउरकेला इस्पात उद्योग
→ ओडिशा
→ जर्मनी
2. भिलाई इस्पात उद्योग
→ छत्तीसगढ़
→ रूस
3. दुर्गापुर इस्पात उद्योग
→ पं. बंगाल
→ ब्रिटेन
4. बोकारो इस्पात उद्योग
→ झारखंड
→ रूस