उद्योग :-
- कच्चे माल से निर्मित वस्तुएँ बनाने वाली इकाई उद्योग है।
भारत में उद्योगों का इतिहास :-
1. लौह इस्पात उद्योग :- भारत में प्रथम लौह इस्पात उद्योग की स्थापना 1874 में पं. बंगाल के कुल्टी नामक स्थान पर की गई।
2. एल्युमीनियम उद्योग :- भारत में प्रथम एल्युमीनियम उद्योग की स्थापना 1937 में जे.के. नगर (पं. बंगाल) में की गई।
3. सीमेण्ट उद्योग :- भारत में सीमेन्ट उद्योग की स्थापना सर्वप्रथम (1904 में) चेन्नई (तमिलनाडु) में की गई।
4. प्रथम रासायनिक उर्वरक उद्योग :- रासायनिक उर्वरक उद्योग की स्थापना (1906 में) रानीपेट (तमिलनाडु) में की गई।
- यहाँ पर सुपर फॉस्फेट संयत्र स्थापित किया गया है।
5. प्रथम जहाजरानी उद्योग :- भारत में जहाजरानी उद्योग की स्थापना (1941) में विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश में) की गई।
& जहाजरानी उद्योग इसे 'हिन्दुस्तान शिपयार्ड' भी कहा जाता है।
6. प्रथम कागज उद्योग :- भारत में प्रथम कागज उद्योग की स्थापना सिरामपुर (पं. बंगाल) में हुई, जो असफल रहा।
- कागज उद्योग का प्रथम सफल कारखाना-1879 (लखनऊ) वर्तमान में बंद है।
- 1881 (टीटागढ़) पं. बंगाल में सफल उद्योग चल रहा है।
सूती वस्त्र उद्योग :-
- भारत में प्रथम सूती वस्त्र मिल की स्थापना, 1818 में फोर्ट ग्लास्टर (कोलकात्ता) में की गई, लेकिन असफल रही।
- प्रथम सफल सूती वस्त्र मिल की स्थापना, 1854 में मुम्बई में कवास जी डाबर द्वारा की गई।
जूट उद्योग :- भारत में 1855 में कोलकात्ता के समीप रिसरा नामक स्थान पर प्रथम जूट मिल की स्थापना की गई।
ऊनी वस्त्र :- भारत में प्रथम ऊनी वस्त्र उद्योग की स्थापना 1876 में कानपुर में 'लाल इमली' के नाम से की गई।
खनिज आधारित उद्योग :-
खनिज आधारित उद्योग की विशेषता :-
1. वजन ह्रास उद्योग
2. कच्चे माल के स्त्रोत के समीप लगाये जाने वाले उद्योग है।
- 1. TISCO (टाटा आयरन एवं इस्पात उद्योग)
- TISCO की स्थापना, 1907 में झारखण्ड के जमशेदपुर शहर में की गई।
- भारत का सबसे बड़ा इस्पात उद्योग है।
- आदर्श स्थिति में स्थापित उद्योग है। यहाँ लौह अयस्क व कोयला क्षेत्र पाया जाता है।
2. IISCO (इण्डियन आयरन एवं इस्पात उद्योग)
- यह उद्योग पं. बंगाल में 1918 में तीन क्षेत्रों में स्थापित किया गया- कुल्टी, बर्नपुर, हीरापुर
3. VISCO- (VISCO) – (विश्वरैया आयरन एवं इस्पात उद्योग)
- VISCO की स्थापना, 1923 में कर्नाटक के भद्रावती नामक स्थान पर की गई है।
- यह लौह अयस्क आधारित इस्पात उद्योग है।
- यहाँ लौह अयस्क कुद्रेमुख तथा बाबा बदून गिरी की पहाड़ियों से मिलता है।
- यह लकड़ी के कोयलों पर आधारित उद्योग है।
- स्वतंत्रता के बाद स्थापित लौह इस्पात उद्योग
1. राउरकेला – 1959 – ओडिशा-जर्मनी के सहयोग से
2. भिलाई – 1959-छत्तीसगढ़-रूस की सहायता से
3. दुर्गापुर – 1962 – पं. बंगाल-ब्रिटेन की सहायता से
4. बोकारो-1974-झारखण्ड-रूस की सहायता से
5. सलेम – 1982 तमिलनाडु
6. विशाखापट्टनम – 1992-आंध्र प्रदेश – तटवर्ती इस्पात उद्योग
एल्युमिनियम के अयस्क का नाम-
बॉक्साइट – एल्युमिना – एल्युमीनियम
भारत में एल्युमिनियम का प्रथम कारखाना 1937 में पं.बंगाल के जे.के. नगर में स्थापित किया गया।
दूसरा उद्योग 1938 में इण्डियन एल्युमिनियम कम्पनी द्वारा निम्नलिखित स्थानों पर स्थापित किया गया-
मूरी (झारखण्ड)
अल्वाए (केरल)
बैलूर (बंगाल)
हीराकुण्ड (उड़ीसा)
भारत में एल्युमिनियम प्रमुख संयंत्र:-
HINDALCO, रेणुकूट (उत्तरप्रदेश),
INDALCO, J.K. Nagar (पं.बंगाल)
INDALCO, मुरी (झारखण्ड)
BALCO, कोरबा (छत्तीसगढ़)
NALCO, दामनजोड़ी (उड़ीसा)
INDALCO, हिराकुण्ड (उड़ीसा)
MALCO, चेन्नई (तमिलनाडु)
INDALCO, अल्वाए (केरल)
BALCO, कोयना (महाराष्ट्र)
वेदान्ता, झारसुगडा (उड़ीसा)
भारत में प्रमुख एल्युमिनियम उद्योग-
HINDALCO:- हिन्दुस्तान एल्युमिनियम कंपनी।
हिंडाल्को की स्थापना U.S.A. के सहयोग से रेणुकूट, सोनभद्र जिले (उत्तरप्रदेश) में की गई।
MALCO:- मद्रास एल्युमिनियम कंपनी।
इटली की सहायता से तमिलनाडु के चेन्नई, मैट्टूर में स्थापित की गई।
BALCO:- भारत एल्युमिनियम कंपनी।
सार्वजनिक क्षेत्र का भारत का पहला एल्युमिनियम संयंत्र जो सोवियत रूस के सहयोग से 1965 में सथापित।
NALCO:- नेशनल एल्युमिनियम कंपनी।
फ्रांस के सहयोग से दामनजोड़ी (उड़ीसा) में स्थापित।
कृषि आधारित उद्योग
सूती वस्त्र उद्योग:- भारत का सबसे प्राचीनतम उद्योग है। कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाला उद्योग है।
भारत में प्रथम सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना 1818 में कोलकाता के फोर्टग्लास्टर में की गई, जो असफल रही।
भारत में प्रथम सफल सूती वस्त्र मील की स्थापना 1854 में मुम्बई में कावस की डाबर द्वारा की गई।
महाराष्ट्र में सूती वस्त्र के सर्वाधिक 122 कारखाने है। इसी कारण मुम्बई को ‘सूती वस्त्र की राजधानी’ कहा जाता है।
गुजरात में सूती वस्त्र के लगभग 120 कारखाने हैं। अहमदाबाद इसका प्रमुख केन्द्र है, इसलिए इसे भारत का मैनचेस्टर या पूर्व का बोस्टन भी कहा जाता है।
दक्षिणी भारत में तमिलनाडु सूती वस्त्र उद्योग तथा धागा निर्माण में अग्रणी राज्य है। कोयम्बटूर इसका प्रमुख केन्द्र है, इसलिए कोयम्बटूर को दक्षिणी भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।
भारत का मैनचेस्टर पूर्व का बोस्टन – अहमदाबाद।
भारत की सूती वस्त्र राजधानी या भारत का कोटनपोलिस – मुम्बई।
दक्षिण भारत का मैनचेस्टर – कोयम्बटूर
उत्तर भारत का मैनचेस्टर – कानपुर
राजस्थान का मैनचेस्टर – भीलवाड़ा
जूट उद्योग:- जूट को सुनहरा रेशा (Golden Fibre) भी कहा जाता है।
भारत में जूट उत्पादन में प्रथम स्थान पं.बंगाल तथा दूसरा स्थान बिहार का आता है।
भारत में जूट का प्रथम कारखाना जॉर्ज आकलैण्ड द्वारा 1859 में ‘रिसरा नामक’ स्थान पर लगाया गया।
विश्व स्तर पर जूट के सामानों में भारत सबसे बड़ा उत्पादक तथा बांग्लादेश के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।
भारत में जूट के 83 कारखाने है, जिसमें से सर्वाधिक पं.बंगाल में 64 कारखानें स्थित है। पं.बंगाल में जूट उत्पादन के प्रमुख कारखाने- टीटागढ़, जगतदल, बजबज, हावड़ा, रिसरा, सिरामचुर, श्याम नगर आदि।
भारत में उद्योग
रेशमी वस्त्र उद्योग (Silk Textiles Industry)
-रेशम उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है। रेशम की पांच किस्में – इरी, मूँगा, मलबरी, ट्रापिकल, तसर, ओक टसर-सभी का उत्पादन भारत में होता है। मूँगा रेशम के उत्पादन में भारत का एकाधिकार प्राप्त है।
-रेशम का आधुनिक कारखाना 1832 में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा हावड़ा में लगाया गया।
-भारत में 41% रेशम उत्पादन के साथ कर्नाटक अग्रणी राज्य है तथा आंध्र प्रदेश (35%) उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर तथा तमिलनाडु (3%) का तीसरा स्थान है।
-झारखण्ड तसर रेशम एवं असम मूँगा रेशम के उत्पादन में अग्रणी है।
रेशम उद्योग के विकास के लिए कार्यक्रम
(Programs For Development of Silkind)
केंद्रीय रेशम बोर्ड – यह केंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 के अंतर्गत एक संवैधानिक इकाई है। रेशम कीट पालन सहित उद्योग देश में रेशम उद्योग के सर्वांगीण विकास का दायित्व बोर्ड पर है।
रेशम की विभिन्न किस्मों के विकास के लिए बोर्ड द्वारा अनुसंधान संस्थान स्थापित किए गए है।
1. मलबरी – मैसूर (कर्नाटक), बलरीमपुर (पश्चिम बंगाल) एवं पम्पोर (जम्मू और कश्मीर)
2. तसर – रांची (झारखंड)
3. मूँगा एवं एरी – लहहोईगढ़ (असम)
ऊनी वस्त्र उद्योग (Wollen Textiles Industry)
ऊन उत्पादन में भारत का विश्व में दसवाँ स्थान है, जो कुल उत्पादन का 1.8% योगदान करता है।
ऊन की लघु मात्रा पशमीना बकरियों एवं अगोरा खरगोश से प्राप्त की जाती है।
प्रथम आधुनिक ऊन कारखाना कानपुर (1876) एवं धारीवाल (1881) पंजाब में स्थापित किया गया।
भारत में पंजाब प्रथम एवं महाराष्ट्र द्वितीय स्थान पर है।
प्रमुख संस्थान/कार्यक्रम (Major Institutions/Programs)
एकीकृत ऊन विकास बोर्ड, जोधपुर।
एकीकृत ऊन विकास कार्यक्रम – ऊन एवं ऊनी वस्त्र उद्योग के वृद्धि एवं विकास के लिए।
इंजिनियरिंग उद्योग (Engineering Industrial)
-इस क्षेत्र में मुख्यत: पूँजीगत समान उद्योग शामिल है। इसके महत्वपूर्ण उपक्षेत्र मशीन, टूल्स, कपड़ा, मशीनरी, निर्माण एवं खान मशीन एवं अन्य भारी उद्योग मशीनरी शामिल है।
कुछ प्रमुख इंजीनियरिंग उद्योग इस प्रकार है-
a. भारी इंजीनियरिंग निगम लिमिटेड, राँची (1958)
b. खनन एवं संबंध मशीनरी निगम लिमिटेड, दुर्गापुरा (1965)
c. भारत हैवी प्लेट्स एण्ड वैसेल्स लिमिटेड, विशाखापट्टनम (1965)
d. हिन्दुस्तान मशीन टूल्स लिमिटेड (HMT), बेंगलुरू (1963)
-HMT स्विट्जरलैंड के सहयोग से 1963 में स्थापित हुआ। इसके अन्तर्गत पाँच कारखाने आते हैं- बंगलुरू, पिंजौर (हरियाणा), कालामसेरी (केरल), श्रीनगर एवं हैदराबाद।
e. नेशनल इंस्ट्रमेंट लिमिटेड, जादवपुर (कोलकात्ता)
f. तुगभद्रा स्टील प्रोडक्ट लिमिटेड (कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश का संयुक्त उपक्रम)
-भारत में भारी विद्युतीय उपकरणों का निर्माण 1956 में भोपाल में हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड की स्थापना के साथ हुआ।
-सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), 1964 में स्थापित हुआ। यह स्टीम टरबाइन, उच्च स्तरीय बायलर, टर्बो सेट, ट्रांसफार्मर, स्किचगियर आदि बनाता है।
-हिन्दुस्तान केबल्स फैक्ट्री, जो कि विद्युत केबल्स बनाती है, की स्थापना 1954 में रूपनारायणपुर (पश्चिम बंगाल) में हुई। इसकी दूसरी इकाई हैदराबाद में है।
उर्वरक उद्योग (Fertilizers Industry)
-जनसंख्या में तेजी से वृद्धि के कारण कृषि उत्पादों की माँग बढ़ रही है। भारत दुनिया में (चीन अमेरिका के बाद) तीसरा सबसे बड़ा नाइट्रोजन युक्त उर्वरक उत्पादक है।
-भारत का पहला सुपर फास्फेट संयंत्र रानीपेट (तमिलनाडु) में 1906 में स्थापित किया गया था।
-भारत में सहकारी स्वामित्व वाले पहले उर्वरक कारखाने की स्थापना 1951 में सिंदरी (बिहार) में की गई थी।
-कच्चा माल-उर्वरक उद्योग के लिए नेप्था, कोक, भट्ट टी गैस, हाइड्रोजन, प्राकृतिक गैस, रॉक फास्फेट, जिप्सम आदि कच्चा माल लगता है।
-भारत में 70 से अधिक नाइट्रोजन उर्वरक बनाने वाली इकाइयाँ नेप्था का कच्ची सामग्री के रूप में प्रयोग करते है।
-देश में चार शीर्ष उर्वरक उत्पादक राज्य है – क्रमश: गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र।
a. कोक आधारित उर्वरक इकाइयाँ –
तलचर (ओडिशा)
रामगुण्डम (आंध्रप्रदेश)
कोरबा (छत्तीसगढ़)
b. कोक भटि्टयों पर आधारित संयंत्र –
|
सिंदरी एवं जमशेदपुर |
झारखण्ड |
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राउरकेला |
ओडिशा |
|
भिलाई |
छत्तीसगढ़ |
|
दुर्गापुर |
पश्चिम बंगाल |
-देश की एकमात्र लिग्नाइट आधारित नेवली (तमिलनाडु में है।)
c.प्राकृतिक गैस पर आधारित संयंत्र –
थाल-वैशेत-महाराष्ट्र
हजीरा, विजयपुर, जगदीशपुर, आँवला, गडेपन, बबराला तथा शाहजहाँपुर, उत्तरप्रदेश।
d.सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इकाइयाँ –
i. नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL)
ii. फर्टिलाइजर्स कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया (FCI)
iii. राष्ट्रीय केमिकल्स एण्ड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF)
e.सहकारी सोसायटी –
i. इण्डियन फार्मर्स को-ऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO)-1967
ii. कृषक भारती को-ऑपरेटिव लिमिटेड (KRIBHCO)-1980
सीमेन्ट उद्योग (Cement Industry)
-सीमेन्ट उद्योग देश के तकनीकी रूप से सर्वाधिक उन्नत उद्योग में से एक है।
-1989 से सीमेन्ट पर से कीमत एवं वितरण संबंधी नियंत्रण को समाप्त कर दिया गया।
-भारत में विभिन्न प्रकार के सीमेन्ट का उत्पादन होता है जैसे –
a. साधारण पोर्टलैंड सीमेन्ट
b. पोर्टलैंड पोजोलाना सीमेन्ट
c. पोर्टलैंड ब्लास्ट फर्नेस स्लैग सीमेन्ट
d. आयल वेल सीमेन्ट
e. सफेद सीमेन्ट
-यह सभी किस्में भारतीय मानक ब्यूरों के मानदंडों के अनुसार बनाई जाती है।
-सीमेन्ट के उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है।
-31 मार्च, 2012 तक देश में 173 बड़े संयंत्र हैं, जिनकी स्थापित क्षमता 294.04 मिलियन टन प्रतिवर्ष है, जबकि 350 छोटे सीमेन्ट संयंत्र हैं, जिनकी स्थापित क्षमता 11.10 मिलियन टन प्रतिवर्ष है।
-भारत में सीमेन्ट का प्रथम संयंत्र 1904 में चेन्नई में स्थापित किया गया।
-प्रमुख निजी क्षेत्र की कम्पनियाँ – ए.सी.सी. लार्सेन एण्ड टुब्रो, नर्मदा सीमेन्ट, जे.के. समूह, बिड़ला समूह आदि।
-सार्वजनिक क्षेत्र की सीमेन्ट कम्पनियाँ में सीमेन्ट कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया सबसे बड़ी कम्पनी है।
-चूना पत्थर की स्थिति सीमेन्ट उद्योगों की स्थापना का प्रमुख कारक है।
कागज उद्योग (Paper Industry)
-कागज निर्माण की कला का विकास सबसे पहले चीन में सम्भवत: 300 ई.पू. हुआ था।
-आधुनिक ढंग से भारत में कागज का पहला कारखाना 1716 ई. में मद्रास (चेन्नई) के समीप ट्रंक वॉर नामक स्थान पर डॉ. विलियम केरी द्वारा स्थापित किया गया था, जो असफल रहा।
-कागज का पहला सफल कारखाना 1879 ई. में लखनऊ में लगाया गया था।
-भारत विश्व के सबसे तेज विकास करने वाले कागज बाजार के रूप में उभरा है।
-सर्वशिक्षा अभियान द्वारा समर्थित शिक्षा के अधिकार अधिनियम के माध्यम से निरक्षरता उन्मूलन नामक सरकार का महत्त्वपूर्ण सामाजिक लक्ष्य, कागज उद्योग की माँग में वृद्धि का एक प्रमुख कारक है।
-भारत में कागज का प्रथम आधुनिक कारखाना 1832 में बाकींगज (कोलकात्ता) में लगाया गया।
-लुग्दी, कागज, पेपर बोर्ड और न्यूजप्रिंट की 759 इकाइयाँ है।
-भारत में प्रति कागज की खपत 7.2 कि.ग्रा. है, जो 50 कि.ग्रा. प्रति व्यक्ति की विश्व औसत से काफी कम है।
-वर्तमान में भारतीय कागज उद्योग विश्व के कागज उत्पादक देशों में 15वें स्थान पर है।
-पहले पश्चिम बंगाल कागज उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य था- टीटागढ़, नैहाटी, त्रिवेणी बड़ा नगर, बाबोरिया आदि का प्रमुख केन्द्र है। वर्तमान में कागज के कारखाने महाराष्ट्र में स्थित है। दूसरा स्थान पश्चिम बंगाल का है।
-मध्य प्रदेश में नेपानगर में अखबारी कागज तथा होशंगाबाद में नोट छापने का कागज बनाने का सरकारी कारखाना है।
चीनी उद्योग (Sugar Industry)
-भारत चीनी सबसे बड़ा उपभोक्ता है, एवं ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।