आयोजना/नियोजन/Planning
आयोजना-
- लक्ष्य प्राप्ति हेतु अपनायी जाने वाली प्रक्रिया अर्थात् आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता का आकलन कर प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ विकल्प का चयन करते हुए आर्थिक संवृद्धि व विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रक्रिया को आयोजना/नियोजन/Planning कहते हैं।
भारत में नियोजन
स्वतंत्रता से पूर्व-
- वर्ष 1934 में सर एम.विश्ववेश्वरैया ने ‘भारत के लिये नियोजित अर्थव्यवस्था’ नामक पुस्तक लिखी। यह नियोजन की दिशा में प्रथम प्रयास था।
- 1938 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में भी भारत के आर्थिक विकास हेतु आर्थिक विकास समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू थे।
- 1944 में महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर श्रीमन्नारायण ने ‘गांधी वादी योजना’ नाम से योजना बनाई।
- 1944 में ही मुंबई के प्रमुख 8 व्यापारियों ने 15 सूत्रीय योजना ‘बॉम्बे प्लान’ प्रस्तुत किया।
- 1945 में एम.एन.राय द्वारा जनवादी योजना का निर्माण किया गया।
- 1946 में के.सी. नियोगी समिति द्वारा एक स्वायत्तनिकाय की आवश्यकता महसूस की गई।
स्वतंत्रता पश्चात्
- जनवरी 1950 में जयप्रकाश नारायण ने ‘सर्वोदय योजना’ प्रस्तुत की।
- भारत में नियोजित आर्थिक विकास के सूत्रधार जवाहरलाल नेहरू थे।
- भारत में आर्थिक नियोजन की अवधारणा सोवियत संघ से प्रभावित होकर अपनायी गयी।
योजना आयोग
- 15 मार्च 1950 को के.सी. नियोगी समिति की सिफारिश पर केन्द्र सरकार द्वारा योजना आयोग की स्थापना की गयी।
- योजना आयोग की प्रकृति गैर संवैधानिक व गैर वैधानिक है।
- योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष प्रधानमंत्री को बनाया गया।
- योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष – जवाहरलाल नेहरू
- योजना आयोग के अंतिम अध्यक्ष – नरेन्द्र मोदी
- योजना आयोग का उपाध्यक्ष प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किया जाता है।
- प्रथम उपाध्यक्ष – गुलजारी लाल नंदा
- अंतिम उपाध्यक्ष –मोंटेक अहलूवालिया
- योजना आयोग में 4 – 7 सदस्य तथा वित्त मंत्री तथा योजना मंत्री पदेन सदस्य थे।
- योजना आयोग द्वारा 12 पंचवर्षीय योजना बनायी गयी
- 1966-69 (योजना अवकाश)
- 1978-80 – अनवरत योजना (रोलिंग प्लान)
- 1990-92 – योजना विहिन काल
योजना आयोग के कार्य-
1. देश में उपलब्ध संसाधनों का आकलन व प्राथमिकता के आधार पर संसाधनों का आवंटन करना।
2. आर्थिक समस्याओं की पहचान करना तथा समाधान हेतु उपाय या योजनाएँ बनाना।
3. पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण व क्रियान्वन करना।
4. लागू की गयी योजनाओं का मूल्यांकन व पुनर्निधारण करना।
5. गरीबी व बेरोजगारी को समाप्त करना तथा मानव संसाधानों का विकास करना।
6. आर्थिक संवृद्धि को बढ़ाना व आर्थिक असमानताओं में कमी करना।
राष्ट्रीय विकास परिषद्
- राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की स्थापना 6 अगस्त 1952 को की गयी। इसकी प्रकृति गैर संवैधानिक तथा गैर वैधानिक है।
- राष्ट्रीय विकास परिषद में योजना आयोग के सभी सदस्य शामिल होंगे।
संरचना
- अध्यक्ष – प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष होगा।
सदस्य
- राज्यों के मुख्यमंत्री व केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल व प्रशासक होंगे।
- केन्द्रीय मंत्रिमंडल के सभी सदस्य होंगे।
कार्य
- राष्ट्रीय विकास परिषद का मुख्य कार्य योजना आयोग द्वारा तैयार की गई पंचवर्षीय योजनाओं पर सहमति प्रदान करना है।
नीति आयोग
- N. I.T.I. National Institution for Transforming India (भारत के परिवर्तन हेतु संस्थान)
- वर्ष 2015 में योजना आयोग को समाप्त कर इसके स्थान पर 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग की स्थापना की गयी।
- नीति आयोग की प्रकृति गैर संवैधानिक तथा गैर वैधानिक है।
नीति आयोग की संरचना
- अध्यक्ष
- प्रधानमंत्री (पदेन अध्यक्ष)
- प्रथम अध्यक्ष – नरेन्द्र मोदी
- उपाध्यक्ष
- प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
- प्रथम – अरविंद पनगड़िया
- वर्तमान – राजीव कुमार
- पदेन सदस्य (केन्द्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य - 4)
- वित्त मंत्री – निर्मला सीतारमण
- गृह मंत्री – अमित शाह
- रक्षा मंत्री – राजनाथ सिंह
- कृषि मंत्री – नरेन्द्र सिंह तोमर
- पूर्णकालिक सदस्य
- 1. पी.के. सारस्वत
2. विनोद पॉल
3. रमेश चंद
- आमंत्रित सदस्य – अधिकतम दो
1. नितिन गडकरी
2. थावरचन्द गहलोत
- मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
- केन्द्र में सचिव स्तर का अधिकारी
- प्रथम – सिन्धु श्री खुल्लर
- वर्तमान – अमिताभ कांत
- गर्वनिंग काउंसिल
- राज्यों के मुख्यमंत्री व केन्द्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल व प्रशासक
- क्षेत्रीय परिषद
- किसी भी मामले से सम्बन्धित राज्यों के मुख्यमंत्री व केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल व प्रशासक।
- विशेषज्ञ
आवश्यकता के आधार।
नीति आयोग के कार्य
1. राष्ट्रीय एजेण्डा के अनुसार कार्यनीति का निर्माण व आर्थिक विकास को प्रोत्साहन।
2. केन्द्र व राज्यों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देकर सहकारी संघवाद को बढा़ना।
3. ग्रामीण स्तर पर विकास प्रक्रिया को पहुँचना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास करना।
4. आर्थिक विकास की प्रक्रिया से वंचित वर्गों का विकास करना।
5. राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों व विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श व कार्य योजना को तैयार करना।
6. कृषि तथा उद्योग में तकनीक व अनुसंधान को बढ़ाना।
7. सूचना प्रौद्योगिकी का विकास करना तथा नवाचार को बढ़ाना।
8. नीति आयोग द्वारा मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया आदि कार्यक्रम लागू कराए जा रहे हैं।
9. नीति आयोग द्वारा – 15 वर्षीय दृष्टिकोण, 7 वर्षीय रणनीति, 3 वर्षीय कार्य योजना बनायी गयी है।
योजना आयोग व नीति आयोग में अंतर
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योजना आयोग |
नीति आयोग |
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1. योजना निर्माण करना |
1. थिंक टैंक के रूप में कार्य करना |
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2. परियोजनाओं को वित्त आवंटन करना |
2. वित्त मंत्रालय द्वारा आवंटन |
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3.आयोग की प्रकृति केंद्रीकरण की |
3. सहकारी संघवाद की प्रकृति |
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4. विकास की प्रक्रिया ऊपर से नीचे की ओर (UP - Bottom) |
4. विकास की प्रक्रिया नीचे से उपर की ओर |
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5. राज्यों के बीच विवाद निपटान हेतु संगठन का अभाव |
5. क्षेत्रीय परिषदों का गठन |
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6. सचिव की नियुक्ति |
6. CEO की नियुक्ति |
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7. पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना |
7. 15 वर्षीय विजन, 7 वर्षीय रणनीति तथा 3 वर्षीय एक्शन प्लान बनाये |
नीति आयोग के नवाचार
1. स्वास्थ्य सुधार सूचकांक – 2019
- हाल ही में नीति आयोग ने स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत रिपोर्ट में राज्य स्वास्थ्य सूचकांक का दूसरा संस्करण जारी किया।
- रैंकिंग का आधार 23 कारकों को मानकर किया गया।
- प्रथम स्थान पर केरल तथा अंतिम स्थान पर उत्तर प्रदेश रहा।
- राजस्थान को 16वीं रैंक प्राप्त हुई।
2. जल प्रबन्धन सूचकांक – 2019
- राज्यों में जल स्थिति में सुधार हेतु नीति आयोग द्वारा जल प्रबन्धक सूचकांक का दूसरा संस्करण जारी किया जिसमें प्रथम रैंक गुजरात तथा राजस्थान को 11 वीं रैंक प्राप्त हुई।
- गत वर्ष राजस्थान का सूचकांक में 10 वाँ स्थान था।
3. S.D.G. India Index – 2.0 – 2019
- सतत विकास लक्ष्य (S.D.G) जो कि संयुक्त राष्ट्र संघ UNO द्वारा 17 लक्ष्य निर्धारित किये गये थे, जिसमें 169 कार्य शामिल थे।
- 17 में से 16 के आधार गणना की जाती है।
- 17 वां लक्ष्य ‘अन्तर्राष्ट्रीय भागीदारी’ गणना में शामिल नहीं है।
- राज्यों को 0-100 अंक प्रदान किये जाते हैं-
- प्राप्तांक आधार पर 4 श्रेणियाँ में विभक्त –
1. आकांक्षी – 0-49 अंक
2. परफार्मर – 50.64 अंक
3. फ्रन्टरनर – 65.99 अंक
4. अचीवर – 100 अंक
Note: - केरल 70 अंक के साथ प्रथम स्थान पर है। राजस्थान 57 अंक के साथ परफार्मर की श्रेणी में है।
4. अभिनव भारत कार्यनीति a 75
New India Strategy a 75 – 2018
- नीति आयोग द्वारा तैयार की गई कार्य योजना जिसमें स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने पर अर्थात् 2022-23 के निम्न लक्ष्यों का निर्धारण किया गया।
1. अगले 5 वर्षों में विकास दर 8% प्राप्त करना।
2. निवेश दर 29% से बढ़ाकर 36% करना।
3. सभी के लिये 2022 तक आवास।
4. 2022 तक किसानों की आय को दुगुना करना।
सम्पूर्ण कार्य योजना 41 अध्यायों में 4 क्षेत्र
पंचवर्षीय योजना -
- पंचवर्षीय योजना के अवधारणा को
- पंचवर्षीय योजना को USSR से अपनाया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् 12 पंचवर्षीय योजना बन चुकी है।
1. प्रथम पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 1 अप्रैल 1951 – 31 मार्च 1956 (1951-1956)
- मॉडल – हेराल्ड डोमर मॉडल
- लक्ष्य – कृषि तथा सिंचाई संसाधानों का विकास करना।
- विकास दर – लक्षित – 2.1%
- प्राप्त – 3.6%
कार्यक्रम –
- हीराकुण्ड, दामोदर घाटी तथा भाखड़ा नागल नदी घाटी परियोजना।
- 1952 सामुदायिक विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया।
- 1953 राष्ट्रीय प्रसार योजना शुरू की गई।
- 1953 U.G.C. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना की हुई।
- 1955 इंट्रीगल कोच फैक्ट्री स्थापित (चेन्नई)
2. द्वितीय पंचवर्षीय योजना –
- अवधि –(1956 - 1961)
- मॉडल – पी.सी महालनोबिस
- लक्ष्य – उद्योगों का विकास व तीव्र औद्योगिकीकरण
- विकास दर – लक्ष्य – 4.5%
- प्राप्त – 4.2%
कार्यक्रम
- तीन इस्पात संयंत्रों की स्थापना की गई
1. राउलकेला (उड़ीसा) – जर्मनी की सहायता से
2. भिलाई (छत्तीसगढ़) – USSR सोवियत संघ की सहायता से
3. दुर्गापुर (पश्चिमी बंगाल) – ब्रिटेन की सहायता से
- अखिल भारतीय खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड – 1958 में स्थापना
- 2 अक्टूबर 1959 को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले से पंचायती राज कार्यक्रम की शुरूआत की गयी।
- I.I.T. कानपुर, I.I.T. दिल्ली, मद्रास तथा बॉम्बे स्थापित किये गये।
3. तृतीय पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 1961 – 66
- मॉडल – सुखमय चक्रवर्ती का आगत निर्गत मॉडल
- विकास दर – लक्षित - 5.6%
- प्राप्त – 2.4%
कार्यक्रम
- 1961 – बोकारो संयंत्र झारखण्ड में स्थापित किया गया।
- 1964 – यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (U.T.I) की स्थापना की गयी।
- 1964 – भारतीय औद्योगिक विकास बैंक की स्थापना (I.D.B.I)
- 1965 – भारतीय खाद्य निगम (F.C.I.) की स्थापना
- 1965 – कृषि कीमत आयोगस्थापना
- 1985 में कृषि कीमत आयोग को कृषि कीमत व लागत आयोग (CACP) बना दिया गया।
नोट:- यह योजना सर्वाधिक असफल रही।
योजना की असफलता के कारण
1. 1962 का भारत चीन युद्ध
2. 1965 का भारत पाक युद्ध
3. 1965-66 का भयंकर अकाल
योजना विहिन काल (1966-69)
- 1962 में भारत का चीन के साथ तथा 1965 में पाकिस्तान से युद्ध होने के कारण तीसरी पंचवर्षीय योजना असफल रही जिसके कारण चौथी योजना के स्थान पर तीन एक वर्षीय योजनाएँ लागू की गयी।
- 1966-69 तक वार्षिक योजनाएँ लागू की गयी।
- 1966 में भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन भी हुआ।
- 1966-67 में हरित क्रांति हुई जिसके प्रणेता भारत में M.S. स्वामीनाथन थे।
- हरित क्रांति में प्रभावित फसलें – गेहूँ, चावल, थी।
4. चतुर्थ पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 1969 – 74
- मॉडल – अशोक रूद्र व एल.एस. माने मॉडल (योजना आयोग के उपाध्यक्ष डी.आर.गाडगिल द्वारा प्रारूप तैयार)
- लक्ष्य – स्थिरता के साथ आर्थिक विकास व आत्मनिर्भरता को प्राप्त करना।
- विकास दर – लक्षित 5.5%
- प्राप्त – 3.3% प्राप्त 3.3%
कार्यक्रम:-
- जुलाई 1969 में 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया जिसकी पूँजी 50 करोड़ से ज्यादा थी।
- 1969 में MRTP Act लाया गया जिसके तहत पूँजी के केन्द्रीकरण को रोकना था।
- बफर स्टॉक की स्थापना की गयी अर्थात् भविष्य की आवश्यकता पूर्ति हेतु अनाज रखना।
- 1970 में ऑपरेशन फ्लड अर्थात श्वते क्रांति इसी योजना के तहत हुई। जिसके जनक वर्गीस कुरियन थे।
- 1973-74 में सूखा प्रवण-क्षेत्र कार्यक्रम अपनाया गया।
- परिवार नियोजन कार्यक्रम भी इसी कार्यक्रम में अपनाए गए।
5. पंचम पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 1974 – 78
- मॉडल – डी.पी. धर
- लक्ष्य – गरीबी उन्मूलन के साथ आत्मनिर्भरता को प्राप्त करना।
- विकास दर – लक्ष्य 4.4%
प्राप्त – 4.8%
कार्यक्रम:-
- मई 1974 में परमाणु परीक्षण किया गया।
- 1974 – न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम चलाया गया।
- 1975 – बीस सूत्रीय कार्यक्रम की शुरूआत की गयी।
- 1977 -78 – गरीबी निवारण हेतु अंत्योदय कार्यक्रम चलाया गया।
- 1977-78 काम के बदले अनाज योजना प्रारंभ की गयी।
- ‘गरीबी हटाओ का नारा’ दिया गया।
- 25 जून 1975 को आंतरिक विद्रोह के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा भी इसी योजना के तहत की गयी।
- आपात प्रतिस्थापन तथा निर्यात संवर्धन को बढ़ाया गया।
नोट:- अपने कार्यकाल से पूर्व समाप्त होने वाली एकमात्र योजना है।
अनवरत प्लान - Ralling Plan
- जनता पार्टी की सरकार आने से वर्ष 1978-79 और 1979-80 में अनवरत योजना (रोलिंग प्लॉन) बनाया गया।
- अनवरत योजना के जनक – डा. गुर्नार मिडाल थे, भारत में लागू डी.डी. लकड़वाला ने की।
- 1979 – ग्रामीण युवा स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम (ट्रायसेम) की शुरूआत अनवरत योजना के दौरान ही की गयी।
6. छठी पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 1980-85
- मॉडल – आगत निर्गत मॉडल अर्थात संरचनात्मक परिवर्तन व संवृद्धि उन्मुख मॉडल
- लक्ष्य – रोजगार सृजन व गरीबी – उन्मूलन
- विकास दर – लक्ष्य – 5.2%
प्राप्त 5.7%
कार्यक्रम:-
- 15 अप्रैल 1980 को 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया जिनकी पूंजी 200 करोड़ से ज्यादा थी।
- 12जुलाई 1982 को नाबार्ड की स्थापना की गयी-
- 1982 में ही Exim बैंक की स्थापना की गये
- मानक व्यक्ति वर्ष रोजगार के लिये स्वीकार किया गया।
- 15 वर्षों को ध्यान में रखकर perspective planning बनायी गयी।
- जनसंख्या संबंधी संरक्षण व सुधार को प्रथम बार स्वीकार किया गया।
- रोजगार हेतु निम्न कार्यक्रम /योजनाएँ चलायी गयीं-
- IRDP - समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम
- DWACRA - ग्रामीण महिला तथा बाल विकास
- TRYSEM - ग्रामीण युवाओं हेतु स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम
- NREP - राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम
- RLEGP - ग्रामीण भूमिहीनों के लिये रोजगार गारन्टी कार्यक्रम
7. सातवीं पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 1985 – 90
- मॉडल – आगत निर्गत मॉडल यह दीर्घकालीन विकास व उदारीकरण मॉडल
- लक्ष्य – आधुनिकीरण के साथ सामाजिक न्याय
- विकास दर – लक्षित - 5%
प्राप्त 6.1%
कार्यक्रम:-
- रोजगार में प्रतिवर्ष 4% की दर से विकास।
- खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि करना।
- ‘रोजी-रोटी उत्पादकता का नारा’ दिया गया।
- 1986 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया गया। वर्तमान में संशोधित उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 लाया गया है।
- 1986 स्पीड पोस्ट की शुरूआत की गयी।
- 12 अप्रैल 1988 को भारतीय प्रतिभूति व विनियम बोर्ड (SEBI) स्थापना की गयी।
- 1985 – 86 को इंदिरा आवास योजना प्रारंभ की गयी।
- 1987 – को ट्राइफेड (अनुसूचित जनजातियों से संबंधित) की स्थापना की गयी।
- अप्रैल 1989 – जवाहर रोजगार योजना – प्रारंभ की गई।
- अक्टूबर 1989 – नेहरू रोजगार योजना प्रारंभ की गई।
योजना विहिन कार्य 1990-90
- देश में आर्थिक अस्थिरता, प्रतिकूल भुगतान संतुलन के कारण 8 वीं पंचवर्षीय योजना को लागू नहीं किया जा सका अत: 1990-92 तक के काल को योजना विहिन काल कहा गया।
- जुलाई 1991 में आर्थिक सुधार लागू किये गये। जिसे राव-सिंह सुधार भी कहते हैं जिसके तहत (LPG) उदारीकरण, निजीकरण, वैश्ववीकरण की नीति अपनाई गयी।
- 1991 में ही भारतीय मुद्रा का तीसरी बार अवमूल्यन किया गया।
8. आठवीं पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 1992-1997
- मॉडल – जॉन डब्ल्यू मिलर मॉडल
- लक्ष्य – मानव संसाधनों का विकास करना।
- विकास दर – लक्षित – 5.6%
प्राप्त – 6.8%
कार्यक्रम-
- 15 अगस्त 1995 में राष्ट्रीय पोषाहार कार्यक्रम चलाया गया।
- पूर्ण रोजगार प्राप्ति हेतु रोजगार सृजन पर बल दिया गया।
- 15 से 35 वर्ष तक आयुवर्ग में निरक्षता का पूर्ण उन्मूलन किया गया।
- 1993 – प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम चलाया गया।
- 1 जनवरी 1995 भारत WTO का संस्थापक सदस्य बना।
- कृषि में विविधता के साथ आत्मनिर्भरता तथा निर्यात में वृद्धि करना भी इस योजना का उद्देश्य था-
- आठवीं पंचवर्षीय योजना के तहत ही 73 वें तथा 74 वें संविधान संशोधन द्वारा स्थानीय स्वशासन की स्थापना की गयी।
9. नौवीं पंचवर्षीय योजना-
- अवधि – 1997 – 2002
- मॉडल – आगत निर्गत मॉडल
- लक्ष्य – सामाजिक न्याय व समता के साथ आर्थिक संवृद्धि।
- विकास दर – लक्षित – 6.5%
प्राप्त – 5.4%
कार्यक्रम-
- 1992 में कारगिल युद्ध भी इसी योजना के समय हुआ।
- 1998 सफल परमाणु परीक्षण (शक्ति 98) पोकरण रेंज राजस्थान में किया गया।
- 1999-2000 राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम (NHDP) चलाया गया।
- 5 करोड़ नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा।
- नवम्बर 2000 को सर्वशिक्षा अभियान अर्थात् सभी के लिये प्राथमिक शिक्षा उपलब्धता का प्रावधान किया गया।
- दिसम्बर 2000 प्रधानमंत्री सड़क योजना प्रारंभ की गई।
10. दसवीं पंचवर्षीय योजना-
- अवधि – 2002-2007
- मॉडल – व्यापक आगत निर्गत मॉडल
- लक्ष्य – सामाजिक न्याय व समता के साथ आर्थिक विकास
- विकास दर – लक्षित 8%
प्राप्त – 7.7%
कार्यक्रम-
- विगत उपलब्धियों को अक्षुण्ण बनाए रखना।
- 5 करोड़ नए रोजगार सृजन करना।
- शिक्षा व मजदूरी में लिंग आधार पर अंतर को 50% कम करना।
- प्राथमिक शिक्षा का 2007 तक सार्वजनिकरण करना।
- कर GDP अनुपात को बढ़ाकर 10.3% करना।
- शिशु मृत्यु दर 2007 तक 45-प्रति हजार जीवित जन्म दर
- माह मृत्यु दर 2012 तक 100-प्रति लाख जीवित जन्म दर
- फरवरी – 2006 में नरेगा योजना लागू की गयी।
11. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 2007 – 12
- लक्ष्य – तीव्र व समावेशी निवास
- विकास दर – योजना में 9% की विकास दर का लक्ष्य रखा था जिसे घटाकर 8.1% कर दिया गया। प्राप्त दर 8% रही।
- कार्यक्रम:-
- निर्धनता अनुपात 2012 तक 15% के स्तर पा लाना।
- शैक्षिक बेरोजगारी में 5% की कमी लाना।
- साक्षरता दर को 75% से उपर लाना।
- जनसंख्या वृद्धि दर 16.2% के स्तर पर लाना।
- मातृ मृत्यु दर – 100 प्रति लाख जीवित जन्म स्तर पर
- शिशु मृत्यु दर – 28 प्रति हजार जीवित जन्म स्तर पर
- ग्रामीण क्षेत्रों में टेली घनत्व को बढ़ाना।
- 1 अक्टूबर 2009 को साक्षर भारत कार्यक्रम चलाया गया।
- 2 फरवरी 2009 को नरेगा को मनरेगा नाम कर दिया गया।
- 2011-12 में स्वाभिमान योजना चलायी गयी।
12. बारहवीं पंचवर्षीय योजना
- अवधि – 2012 – 17
- लक्ष्य – तीव्र, सतत् व ज्यादा समावेशी विकास
- विकास दर – विकास दर का लक्ष्य 9% रखा, बाद में घटाकर 8.2% की गयी, पुन: घटाकर 8% की गयी।
नोट:- इस योजना में लक्ष्य दर में दो बार कमी की गयी।
- 12 वीं योजना में सर्वाधिक प्रावधानसामाजिक सेवाओं पर 34.74% रखा।
कार्यक्रम:-
- गरीबी अनुपात को 10% से कम करना।
- गैर कृषि क्षेत्र में 5 करोड़ नए रोजगार सृजन करना।
- वनाच्छादित क्षेत्रफल में वृद्धि करना।
- स्कूल में ठहराव अवधि – 7 वर्ष करना।
- सब्सिडी योजना प्रत्यक्ष लाभ – हस्तान्तरण लागू की।
- नामांकन में लिंग आधारित अंतर को समाप्त करना।
- शिशु मृत्यु दर – 25-हजार जीवित जन्म पर
- प्रजनन दर – 2.1 के स्तर पर लाना
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 लागू किया गया।
- प्रधानमंत्री जनधन योजना – 2014
- मेक इन इंडिया – 2015
- स्किल इंडिया - 2015
- डिजीटल इंडिया - 2015