- मानव ने विभिन्न रसायनों की सहायता से दैनिक जीवन में उपयोगी वस्तुओं जैसे- संश्लेषित रेशे (Synthetic Fibres), प्लास्टिक आदि का निर्माण किया है, इन मानव उपयोगी पदार्थों का निर्माण बहुलकीकरण (Polymerisation) क्रिया द्वारा किया जाता है अत: यह बहुलक (Polymers) भी कहलाते हैं।
बहुलक (Polymers) :-
- सहसंयोजी बंध (Covalent Bond) के द्वारा जब सरल एकलक इकाइयाँ या अणु आपस में पुनरावृती करते हुए जुड़ते हैं तो ऐसी संरचनाएँ बहुलक कहलाती है।
- एकलक ईकाइयाँ आपस में जुड़कर बहुलकों का निर्माण करती है, यह क्रिया बहुलकीकरण (Polymerisation) कहलाती है।
- बहुलक निर्माण के दौरान आपस में जुड़ने वाली एकलक ईकाइयाँ एक समान हो तो ऐसे बहुलक समबहुलक (HomoPolymers) कहलाते हैं।
समबहुलकों के उदाहरण :-
1. पॉलिइथाइलीन :-
- यह इथाइलीन (H2C=CH2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग बैग्स, इंसुलेटर वायर, पॉलिथीन, खिलौने आदि के निर्माण में किया जाता है।
2. पॉलिविनायल क्लोराइड (PVC) :-
- यह विनायल क्लोराइड (H2C=CH–Cl) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग बैग्स, पर्स, कृत्रिम लेदर, हॉज पाईप, तारों की कोटिंग तथा बरसाती कोट बनाने में किया जाता है।
3. पॉलिस्टाईरीन (Styrine) :-
- यह स्टायरीन (C6H5–CH=CH2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग दृढ़ प्लास्टिक केबिनेट, पाईप, खिलौने तथा कंघे आदि के निर्माण में किया जाता है।
4. पॉलिएक्रिलो नाईट्राईल (PAN/Orlon) :-
- यह एक्रिलो नाईट्राईल (H2C=CH–CN) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग ऑरलोन रेशे से कृत्रिम ऊन के रूप में कंबल बनाने व कपड़ों के निर्माण में किया जाता है।
5. टेफ़्लॉन (पॉलिटेट्रा फ़्लोरो इथायलीन) :-
- यह टेट्रा फ़्लोरो इथायलीन (F2C=CF2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग गैस्केट, इंसुलेटर्स तथा नॉन-स्टिक बर्तनों के अंदर की जाने वाली कोटिंग के रूप में किया जाता है।
6.ब्यूना रबर (Buna Rubber) :-
- यह 1, 3-ब्यूटा डाईईन (H2C=CH–CH=CH2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग टायर, हॉज पाईप आदि के निर्माण में किया जाता है।
7.पॉलि विनायल एसीसेट :-
- यह विनायल एसीटेट (H2C=CHOOCCH3) नामक एकलक इकाईयों से बना होता है।
- इसका उपयोग लेटेक्स पेंट (Paint) के निर्माण में किया जाता है।
- बहुलक निर्माण के दौरान आपस में जुड़ने वाली एकलक इकाइयाँ अलग-अलग हो तो बनने वाले बहुलक ‘सहबहुलक’ (Copolymers) कहलाते हैं।
सहबहुलक के उदाहरण :-
1.स्टायरीन ब्यूटाडाईईन रबर/संश्लेषित रबर (SBR/Buna-s Rubber) :-
- यह स्टायरीन (C6H5–CH=CH2) तथा 1, 3- ब्यूटाडाईईन (CH2=CH–CH=CH2) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग हल्के टायर बनाने, मशीनों में रोटेटिंग बेल्ट, हॉज पाईप आदि के निर्माण में किया जाता है।
2. डेक्रॉन/ टेरीलीन :-
- यह इथायलिन ग्लायकॉल (HO–CH2–CH2–OH) तथा डाई मेथिल टरफ़्थैलेट (CH3OOC(C6H4)COOCH3) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग रेशों व मेग्नेटिक रिकॉर्डिंग स्ट्रिप के निर्माण में किया जाता है।
3. गिलप्टल :-
- यह एथिलीन ग्लायकॉल (HO–CH2–CH2–OH)
तथा थैलिक अम्ल
नामक
एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग पेंट एवं वॉर्निश के निर्माण में किया जाता है।
4. नायलॉन-6, 6 :-
- यह हैक्सा मेथिलीन डाई एमीन(H2N–(CH2)6–NH2) तथा एडिपिक अम्ल (HOOC–(CH2)4–COOH) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग टायर, फाईबर, रस्सियों, कपड़े आदि के निर्माण में किया जाता है।
5. बेकेलाईट :-
- यह फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) तथा फीनॉल (C6H5OH) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग इंसुलेटर पदार्थ के रूप में, इलेक्ट्रिक स्विच निर्माण, कठोर प्लास्टिक के रूप में किया जाता है।
6.मेलामाईन-फॉर्मेल्डिहाईड रेजिन (मेलामाईन) :-
- यह फार्मेल्डिहाइड (HCHO) तथा मेलेमीन
नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग मेलामाईन क्रॉकरी के रूप में बर्तन निर्माण में किया जाता है।
7. पॉलियूरिथेन :-
- यह इथायलीन ग्लायकॉल (HO–CH2–CH2–OH) तथा इथायलीन डाई आइसोसायनेट(O=C=N–HC=CH–N=C=O) नामक एकलक इकाइयों से बना होता है।
- इसका उपयोग रेशा निर्माण, इंसुलेटर, पेंट आदि बनाने में किया जाता है।
रेशों अथवा बहुलकों का वर्गीकरण :-
1. उत्पत्ति/स्रोत के आधार पर :-
A. प्राकृतिक रेशे/बहुलक
(Natural Polymers) :-
- यह प्राकृतिक रूप में पाए जाने वाले बहुलक होते हैं, जैसे- सेल्युलोज, प्रोटीन, एंज़ाईम्स, हीमोग्लोबिन सिल्क, ऊन, प्राकृतिक रबर आदि।
B.अर्धसंश्लेषित रेशे
(Semi-Synthetic Fibres) :-
- यह प्राकृतिक रेशों के साथ विभिन्न रसायनों के प्रयोग से निर्मित बहुलक होता है, जैसे- नाइट्रोसेल्युलोज, गनकॉटन/सेलुलोज ट्राईनाइट्रेट, SBR (संश्लेषित रबर) आदि।
C. संश्लेषित रेशे/बहुलक
(Synthetic Fibres) :-
- यह मानव निर्मित रेशे/बहुलक होते हैं, जैसे- PVC, ‘नायलॉन-6, 6’, टेफ़्लॉन, पॉलिइथायलिन आदि।
2. संरचना के आधार पर :-
A. रेखीय बहुलक (Linear Polymers) :-
- इनमें एकलक इकाइयाँ सीधी रेखीय संरचना दर्शाती है तथा यह एक विमीय होते हैं, जैसे- PVC, नायलॉन, पॉलीएस्टर आदि।
- इनके गलनांक, तनन सामर्थ्य तथा घनत्व उच्च होते हैं।
B. शाखित बहुलक (Brached Polymers) :-
- यह द्विविमीय (Two-Dimensional) बहुलक होते हैं जिनमें सीधी शृंखला से कुछ शाखाएँ भी जुड़ी होती है, जैसे- ग्लायकोजन, एमायलोपेक्टिन।
- इनके गलनांक, तनन सामर्थ्य, घनत्व कम होते हैं।
C. जटिल बहुलक
(Cross Linked Polymers) :-
- यह त्रिविमीय तथा जटिल संरचना वाले बहुलक होते हैं, जैसे- बेकेलाईट, मेलामाईन, फार्मेल्डिहाईड रेज़िन आदि।
- इसे ताप दृढ़ बहुलक भी कहते हैं।
3. आण्विक बलों के आधार पर :-
- बहुलकों का निर्माण उनके विशिष्ट भौतिक एवं रासायनिक गुणों के लिए किया जाता है।
- इन बहुलकों की एकलक (Monomers) इकाइयाँ आपस में सहसंयोजी बंध (Covalent Bonds) द्वारा जुड़ी रहती है। इन रासायनिक बंधों के अलावा बहुलकों के अणुओं के बीच कुछ भौतिक बंध भी इनके भौतिक गुणों में वृद्धि करते हैं।
- हाइड्रोजन बंध, वॉन्डर-वॉल बंध तथा द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्तक्रिया (Dipole-Dipole Interaction) के कारण इनके भौतिक गुणों में परिवर्तन देखा जाता है।
आण्विक बलों के आधार पर 4 प्रकार के बहुलक :-
A. इलास्टोमर्स (Elastomers) :-
- इन बहुलकों में दुर्बल आण्विक बलों के प्रभाव में एकलक इकाइयाँ इस प्रकार जुड़ी रहती है कि इन्हें इलास्टिक की तरह खींचा जा सकता है तथा क्रॉस-लिंकिग के कारण यह पुन: अपने प्रारम्भिक आकार में आ जाते हैं, जैसे- प्राकृतिक रबर, संश्लेषित रबर/SBR, वल्कनीकृत रबर।
B. रेशेदार बहुलक (Fibres) :-
- इनमें प्रबल अंतरआण्विक बल जैसे- H-बंध, द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्तक्रिया के कारण यह बहुलक उच्च गलनांक, उच्च तनन सामर्थ्य दर्शाते हैं, जैसे- ‘नायलॉन-6, 6’, पॉलीएस्टर (टेरीलीन/डेक्रॉन), पॉलीएक्रिलोनाईट्राइल आदि।
- यह रेखीय बहुलक (Linears Polymers) के रूप में रेशेदार (Fibrous) संरचना दर्शाते हैं।
C. थर्मोप्लास्टिक (Thermoplastics) :-
- यह बहुलक ताप सुनम्य बहुलक है क्योंकि एक बार किसी आकार में ढालने के बाद इन्हें गर्म कर के पिघलाया जा सकता है तथा किसी नए आकार में ढाल सकते हैं।
- इनमें रेशों से दुर्बल तथा इलास्टोमर्स से प्रबल अंतरआण्विक बल पाए जाते हैं, जैसे- PVC (पॉलिविनायल क्लोराईड), पॉलिइथायलीन, टेफ़्लॉन आदि।
D. थर्मोसेटिंग बहुलक (Thermosetting) :-
- इन त्रिविमीय बहुलकों को ताप दृढ़ बहुलक भी कहते हैं, क्योंकि एक बार किसी निश्चित आकृति में ढाल देने के बाद इन्हें गर्म करके पिघलाया नहीं जा सकता, जैसे- बेकेलाईट, टेरीलीन, यूरिया-फार्मेल्डिहाईड रेज़िन, मेलामाईन-फार्मेल्डिहाईड रेज़िन आदि।
प्लास्टिकारक (Plastcizers) :-
- थर्मोप्लास्टिक बहुलकों को नरम बनाने, उनके प्लास्टिक गुणों में वृद्धि करने हेतु उनमें प्लास्टिकारक पदार्थ मिलाए जाते हैं, जैसे- n-ब्यूटिल थैलेट, ऑक्टिल थैलेट, एल्केन सल्फोनिल क्लोराईड, क़पूर (Comphor), ग्लिसरॉल आदि।
रबर (Rubber) :-
- रबर इलास्टोमर श्रेणी का बहुलक है, जो बाह्य दबाव के प्रभाव में विकृति दर्शाता है तथा अपने इलास्टिक गुण के कारण पुन: प्रारंभिक अवस्था प्राप्त कर लेता है।
- रबर हमें प्राकृतिक रूप से रबर वृक्ष से प्राप्त होते हैं जो कि अत्याधिक नरम व इलास्टिक होता है।
- कृत्रिम/संश्लेषित रबर को बहुलकीकरण द्वारा बनते हैं, जैसे- SBR/ब्यूना-s रबर, ब्यूना-n रबर, थायोकॉल आदि।
- रबर निम्न प्रकार के होते हैं :-
1. प्राकृतिक रबर :-
- रबर के वृक्ष से गाढ़े, चिपचिपे लगभग अर्ध-ठोस के रूप में प्राकृतिक रबर प्राप्त होता है जो कि लेटेक्स के समान मृदु/Soft एवं लचीला होते हैं। सूखने पर कठोर लेकिन लचीला बना रहता है।
- प्राकृतिक रबर को सामान्य सूत्र (C5H8)n के रूप में दर्शाते हैं।
- जब इसका भंजक आसवन/Destructive Distillation करते हैं तो हमें आइसोप्रीन/Isoprene प्राप्त होता है अर्थात् यह आइसोप्रीन ही रबर का एकलक/Monomer है।

वल्कनीकरण (Vulcanisation) :-
- इसके बारे में ‘चार्ल्स गुडईयर’ ने बताया।
- प्राकृतिक रबर को सल्फर से उपचारित करने पर इसके तनन सामर्थ्य, भौतिक गुणों में वृद्धि होती है, ऐसा कठोर एवं ज्यादा क्षमता वाला रबर वल्कनीकृत रबर कहलाता है।
- वल्कनीकृत रबर का प्रयोग टायर बनाने, रबर बैण्ड, कन्वेयर बेल्ट आदि में किया जाता है जबकि प्राकृतिक रबर का उपयोग जूते के सॉल बनाने, जलरोधी कपड़े बनाने एवं गोल्फ बॉल के निर्माण में भी करते हैं।
2. संश्लेषित रबर (Synthetic Rubber) :-
A. Buna-रबर :-
- यह ब्यूटा-1, 3-डाईईन का समबहुलक (Homopolymers) होता है।
- यह ज़िगलर-नाटा अभिकर्मक की उपस्थिति में Buna-रबर का निर्माण करता है।
- यह प्राकृतिक रबर के समान गुण दर्शाता है।
B. नीयोप्रीन :-
- इसे ‘डाईप्रीन’ भी कहते हैं।
- इसका निर्माण क्लोरोप्रीन में बहुलकीकरण (Polymerisation) से होता है।

- यह प्रथम संश्लेषित रबर था जिसका उत्पादन बड़े स्तर पर किया गया।
- यह ऑक्सीकरण व कार्बनिक पदार्थों की क्रियाओं से प्रतिरोधकता दर्शाने के कारण ऑटोमोबाइल पार्टस्, रेफ्रीजरेटर पार्टस् तथा कार्बनिक पदार्थों, ईंधन आदि के भण्डारण में प्रयुक्त होते हैं।
C.थायोकॉल :-
- यह इथाइलीन ग्लायकॉल
तथा
सोडियम पॉलिसल्फाईड (Na–S–S–Na) का सहबहुलक (Copolymers) होता है।
- यह हॉज पाईप, गैस्केट निर्माण तथा ऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
D. Buna-s रबर :-
- यह स्टायरीन तथा ब्यूटा 1, 3-डाईईन का सहबहुलक है।
- इसका प्रयोग टायर निर्माण एवं यांत्रिक कार्यों में प्रयुक्त दृढ़ रबर के रूप में किया जाता है।
E. Buna-n रबर :-
- यह ब्यूटाडाईईन एवं एक्रिलोनाईट्राईल का सहबहुलक है।
- यह अत्यधिक कठोर एवं कार्बनिक पदार्थों के प्रति अक्रियाशील होने के कारण इसका उपयोग पेट्रोल आदि पदार्थों के भंडारण हेतु ईंधन-टैंक निर्माण में किया जाता है।
साबुन एवं अपमार्जक (Soap and Detergent) :-
- यह धुलाई की क्रिया में प्रयुक्त होने वाले मानव निर्मित रासायनिक पदार्थ है।
- यह किसी सतह, मानव शरीर एवं कपड़ों से धूल-मिट्टी, चिकनाई को हटाने के लिए जल में मिसेल/माइसेल (Micelle) का निर्माण करते हैं।

साबुन (Soap) :-
- सोडियम एवं पोटेशियम के उच्चतर वसीय अम्लों (Fatty Acids) जैसे- लॉरिक अम्ल (C11H23COOH), पामिटिक अम्ल (C15H31COOH) व स्टीएरिक अम्ल (C17H35COOH) के साथ बने लवण ही साबुन कहलाते हैं।
- सोडियम के वसीय अम्लों के साथ लवण कठोर साबुन का निर्माण करते हैं, इनमें अतिरिक्त क्षार (Alkali) पाया जाता है तथा इसे सामान्यतया धुलाई के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
- जब अच्छे स्तर के तेलों या वसीय अम्लों की क्रिया KOH के साथ कराते हैं तो पोटेशियम के लवणों के रूप में मृदु साबुन (Soft Soap) प्राप्त होते हैं, इनमें अतिरिक्त क्षार नहीं होते हैं, जैसे- नहाने में प्रयुक्त साबुन (Bathing Soap), टॉयलेट सोप, शेविंग क्रीम आदि।
- पारदर्शी (Transperent) साबुन का निर्माण करते समय कुछ समय के लिए इथेनॉल में डूबा कर रखते हैं, जिससे अतिरिक्त विलायक (Solvent) वाष्पित हो जाते हैं।
- मेडिकेटेड साबुनों में कुछ मात्रा में एंटीसेप्टिक मिलाए जाते हैं।
- शेविंग क्रीम में कुछ मात्रा में ग्लिसरीन व रोज़िन (Rosin) मिलाए जाते हैं ताकि त्वचा में नमी बनी रहे।
- साबुन कठोर जल के साथ झाग उत्पन्न नहीं करते हैं क्योंकि कठोर जल में उपस्थित Ca व Mg आयन्स साबुन के साथ अभिक्रिया कर अघुलनशील अवक्षेप (Precipitation) बना लेते हैं।
- अम्लीय जल में साबुन क्रिया नहीं करते हैं।
अपमार्जक (Detergent) :-
- यह कार्बन की लम्बी शृंखला वाले कार्बनिक पदार्थों पर सल्फोनीकरण क्रिया से प्राप्त सल्फेट लवण है जो कि धुलाई में प्रयुक्त होते हैं।

अपमार्जक को शुष्क बनाए रखने के लिए सोडियम सिलिकेट व सोडियम सल्फेट मिला देते हैं।
- अपमार्जकों में सोडियम कार्बोनेट भी उपस्थित होते हैं जो इसमें क्षारीयता बनाए रखता है।
- धुलाई के समय कपड़ों में चमक के लिए सोडियमपरबोरेट मिलाते हैं।
- अपमार्जक कठोर जल व अम्लीय प्रकृति के जल में भी भरपूर झाग देते हैं एवं धुलाई की क्रिया करते हैं।
- इनका जलीय विलयन उदासीन होता जिसके कारण धुलाई के समय यह कपड़े के रेशों पर विपरीत प्रभाव नहीं डालते।
अपमार्जक (Detergent) व साबुन (Soap) की धुलाई क्रिया :-
- साबुन एवं अपमार्जक जल में घुलकर “मिसेल” (Micelle) का निर्माण करते हैं, जो कपड़ों या सतह पर उपस्थित दाग-धब्बों की पकड़ कम कर देते हैं तथा इससे धुलाई क्रिया होती है।

सीमेंट :-
- यह Ca व Al के सिलिकेट लवणों का विभिन्न ऑक्साइड्स एवं जिप्सम के साथ तैयार किया गया, गहरे स्लेटी/धूसर रंग का मिश्रण है।
- इसे सर्वप्रथम “जोसेफ ऐस्पिडीन” ने तैयार किया।
कैल्सियम ऑक्साइड :- 60-70%
सिलिका :- 20-25%
एलुमिना :- 5-10%

जिप्सम (CaSO4.2H2O) :- 5%
- जल में सीमेंट कोलाइडी विलयन का निर्माण करता है।
- जिप्सम सीमेंट के जमने के समय को नियंत्रित करता है।
- रेत, बज़री, जल के साथ सीमेंट मिलाकर ऐसा पेस्ट/मिश्रण करते हैं, जिसका उपयोग भवन निर्माण, पत्थर-ईंटों को जोड़ने में करते हैं।
- जब इस मिश्रण को लोहे के सरियों से निर्मित जाल के प्रयुक्त करते हैं तो इसे प्रबलित कंकरीट सीमेंट (RCC/Reinforced Concrete Cement) भी कहते हैं।