पृष्ठभूमि-

स्थापना-

Note-

संरचना-

नियुक्ति-

  1. प्रधानमंत्री
  2. लोकसभा में विपक्ष का नेता
  3. प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनट मंत्री

त्यागपत्र-

पद से हटाया जाना-

वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्तें-

आयोग का नोडल विभाग-

शक्तियाँ एवं कार्य –

केन्द्रीय सूचना आयोग के कार्य एवं शक्तियाँ इस प्रकार हैं

1.   आयोग का यह दायित्व है कि वे किसी व्यक्ति से प्राप्त निम्न जानकारी एवं शिकायतों का निराकरण करें :
(क)  जन सूचना अधिकारी की नियुक्ति न होने के कारण किसी सूचना को प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा हो।
(ख)  उसे चाही गयी जानकारी देने से मना कर दिया गया हो।
(ग)  उसे चाही गयी जानकारी निर्धारित समय में प्राप्त न हो पायी हो।
(घ)  यदि उसे लगता हो कि सूचना के एवज में मांगी फीस सही नहीं है।
(ड़)  यदि उसे लगता है कि उसके द्वारा मांगी गयी सूचना अपर्याप्त, झूठी या भ्रामक है, तथा
(च)  सूचना प्राप्ति से संबंधित कोई अन्य मामला।

2.  यदि किसी ठोस आधार पर कोई मामला प्राप्त होता है तो आयोग ऐसे मामले की जाँच का आदेश दे सकता है।

3.  जाँच करते समय, निम्न मामलों के संबंध में आयोग को दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
(क)  वह किसी व्यक्ति को प्रस्तुत होने एवं उस पर दबाव डालने के लिये सम्मन जारी कर सकता है तथा मौखिक या लिखित रूप से शपथ के रूप में साक्ष्य प्रस्तुत करने का आदेश दे सकता है।
(ख)  किसी दस्तावेज को मंगाना एवं उसकी जाँच करना।
(ग)   शपथ-पत्र के रूप में साक्ष्य प्राप्त करना।
(घ)  किसी न्यायालय या कार्यालय से सार्वजनिक दस्तावेज को मांगना।
(ड़)  किसी गवाह या दस्तावेज की जाँच करने के लिये सम्मन जारी करना तथा
(च)  कोई अन्य मामला जो निर्दिष्ट किया जाए।

4. शिकायत की जाँच करते समय, आयोग लोक प्राधिकारी के नियंत्रणाधीन किसी दस्तावेज या रिकार्ड की जाँच कर सकता है तथा इस रिकार्ड को किसी भी आधार पर प्रस्तुत करने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

5.  आयोग को यह शक्ति प्राप्त है कि वह लोक प्राधिकारी से अपने निर्णयों का अनुपालन सुनिश्चित करें, इसमें सम्मिलित
(क)  किसी विशेष रूप में सूचना तक पहुँच।।
(ख)  जहाँ कोई भी जन सूचना अधिकारी नहीं है वहाँ ऐसे अधिकारी को नियुक्त करने का आदेश देना।
(ग)  सूचनाओं के प्रकार या किसी सूचना का प्रकाशन
(घ)  रिकार्ड के प्रबंधन, रख-रखाव एवं विनिष्टीकरण की रीतियों में किसी प्राकार का आवश्यक परिवर्तन।
(ड़)  सूचना के अधिकार के बारे में प्रशिक्षण की व्यवस्था।
(च)  इस अधिनियम के अनुपालन के संदर्भ में लोक प्राधिकारी से वार्षिक प्रतिवेदन प्राप्त करना।
(ज)  इस अधिनियम (आयोग लोक सूचना अधिकारी पर 250 रु. प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगा सकता है, जो अधिकतम 25000 रु. हो सकता है। यह दोषी अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की सिफारिश कर सकता है।) के अंतर्गत अर्थदण्ड लगाना।
(झ)  किसी याचिका को अस्वीकार करना।

6. इस अधिनियम के क्रियान्वयन के संदर्भ में आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन केन्द्र सरकार को प्रस्तुत करता है। केन्द्र सरकार इस प्रतिवेदन को प्रस्तुत करती है। केन्द्र सरकार इस प्रतिवेदन को दोनों सदनों को पटल पर रखती है।

7.  जब कोई लोक प्राधिकारी इस अधिनियम का पालन नहीं करता तो आयोग इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही कर सकता है। ऐसे कदम उठा सकता है जो इस अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करें।

8. भारत का कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी प्राधिकरण से सूचना प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकता है, यह सूचना 30 दिनों के अंदर उपलब्ध कराई जाने की व्यवस्था की गई है। यदि सूचना 30 दिन की अवधि में उपलब्ध नहीं करवाई गयी या गलत सूचना दी गयी है तो अपीलीय अधिकारी के पास अपील की जा सकती है और इस अपील का 90 दिन में निपटारा किया जाना जरूरी होगा।

9.   यदि सूचना जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है तो ऐसी सूचना को 48 घंटे के भीतर ही उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

10. सभी सार्वजनिक प्राधिकरण अपने दस्तावेज़ों का संरक्षण करते हुए उन्हें कंप्यूटर में सुरक्षित रखेंगे।

11.  प्राप्त सूचना की विषयवस्तु के संदर्भ में असंतुष्टि, निर्धारित अवधि में सूचना प्राप्त न होने आदि जैसी स्थिति में स्थानीय से लेकर राज्य एवं केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की जा सकती है।