-         केन्द्र में लोकपाल की नियुक्ति व राज्यों में एक साल के अंदर लोकायुक्त की नियुक्ति।

-         लोकपाल का चयन एक चयन समिति के माध्यम से किया गया जायेगा जिसमें- प्रधानमंत्री, लोकसभा का अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, विपक्ष का मान्यता प्राप्त नेता न होने पर सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता, मुख्य न्यायाधीश या उनकी अनुशंसा पर नामित सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश तथा राष्ट्रपति द्वारा नामित कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति इसके सदस्य होते हैं।

-         लोकपाल का अपना संविधान होगा, इसमें एक अध्यक्ष व आठ सदस्य होंगे। उनमें चार न्यायिक सदस्य होंगे अन्य चार सदस्यों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग एवं महिला वर्ग के सदस्य होंगे।

-         संसद सदस्य या किसी राज्य विधानसभा का सदस्य, ऐसा व्यक्ति जिसे किसी किस्म के नैतिक भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया हो, ऐसा व्यक्ति जिसकी आयु अध्यक्ष या सदस्य का पद ग्रहण करने तक 45 वर्ष न हुई हो, किसी पंचायत या निगम का सदस्य, ऐसा व्यक्ति जिसे राज्य या केन्द्र सरकार की नौकरी से बर्खास्त या हटाया गया हो, वह लोकपाल के सदस्यों में शामिल नहीं हो सकता है।

-         लोकपाल व उसके सभी सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष होगा, किन्तु अधिकतम 70 वर्ष की आयु तक ही वह इन पदों पर रह सकेंगे।

-         लोकपाल कार्यालय में नियुक्ति समाप्त होने के बाद अध्यक्ष और सदस्यों को काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया हैं। इसकी अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्ति नहीं हो सकती है। पद छोड़ने के 5 साल बाद तक ये राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, संसद के किसी सदन, किसी राज्य विधानसभा या निगम या पंचायत के रूप में चुनाव नहीं लड़ सकते।

          

क्षेत्राधिकार

-         प्रधानमंत्री भी लोकपाल के दायरे में होंगे, जबकि प्रधानमंत्री को लेकर होने वाली शिकायतों को निपटाने की विशेष प्रक्रिया होगी।

-         पूर्व प्रधानमंत्री, केन्द्रीय सांसद तथा सचिव पर लोकपाल जाँच कर सकेगा।

-         सरकारी कर्मचारी भी इस दायरे में लाए गए हैं तथा धार्मिक संस्थाओं को छोड़कर अन्य सभी स्वयंसेवी संस्थाओं को भी शामिल किया गया है, जो जनता से पैसे लेती हों या विदेशों से फण्ड लेती हों या जिसकी आय का स्तर निश्चित सीमा से ज्यादा हो।

-         पूछताछ 60 दिन के भीतर होगी और पूरी जाँच 6 महीनों में सम्पन्न होगी। जाँच के बाद चार्जशीट दाखिल होगी। लोकपाल की एक अभियोजना शाखा होगी या जाँच एजेंसियों को विशेष अदालत में अभियोजन चलाने के लिए भी अधिकार होगा।

-         लोकपाल में जुड़े मामलों में सीबीआई लोकपाल के अधीन होगी। जाँच से जुड़े सीबीआई अधिकारियों का ट्रांसफर नहीं होगा। सुनवाई बन्द कमरे में होगी।

-         विधेयक में झूठी या फर्जी शिकायतें करने वालों को 1 वर्ष की सजा तथा 2 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। सरकारी कर्मचारी के लिए 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है। आपराधिक, कदाचार या आदतन भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों को 10 वर्ष की सजा का प्रावधान होगा।