-  रासायनिक प्रकृति के आधार पर विभिन्न यौगिक 3 प्रकार के होते हैं:-

1. अम्ल (Acid) :-
-  ‘स्वांते आरेनियस’ के अनुसार वे यौगिक जो अपने जलीय विलयन में वियोजित होकर हाइड्रोजन आयन (H+) देते हैं, ‘अम्ल’ (Acid)  कहलाते हैं, जैसे:- 
\(\mathrm{H}_{2} \mathrm{SO}_{4} \longrightarrow 2 \mathrm{H}^{+}+\mathrm{SO}_{4}^{-2}\)
  \(\mathrm{HCl} \longrightarrow \mathrm{H}^{+}+\mathrm{Cl}^{-}\)

- आरेनियस की ये परिभाषा केवल जल में घुलनशील यौगिकों के लिए है।
- ब्रान्स्टेड-लॉरी’ ने हाइड्रोजन आयन/प्रोटॉन/H+ विनिमय सिद्धान्त प्रस्तुत करते हुए बताया कि वे पदार्थ जो H+ आयन्स देते हैं, अम्ल कहलाते हैं, जैसे-  \(\mathrm{HCl}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O} \longrightarrow \mathrm{Cl}^{-}+\mathrm{H}_{3} \mathrm{O}^{+}\)

- ‘लुईस संकल्पना’ के अनुसार वे पदार्थ जो e- युग्म (lone pair) ग्रहण करने की प्रवृत्ति दर्शाते हैं, लुईस अम्ल कहलाते हैं, जैसे- \(\mathrm{K}^{+}, \mathrm{Ca}^{+2}, \mathrm{Fe}^{+3}, \mathrm{BF}_{3}, \mathrm{CO}_{2}, \mathrm{RMgx}\)  (ग्रीन्यार अभिकर्मक), \(\mathrm{AlCl}_{3}\) इत्यादि।

अम्लों के सामान्य गुण :-

- अम्ल स्वाद में खट्टे (Sour) होते हैं।
- अम्ल नीले लिटमस को लाल लिटमस में परिवर्तित कर देते हैं।
- अम्ल मिथाइल ऑरेंज को भी लाल कर देते हैं।
- जल में हाइड्रोजन आयन (H+) मुक्त करते हैं, अत: इनके जलीय विलयन विद्युत के चालक होते हैं।
- अम्ल, धातु ऑक्साइड्स (क्षारीय प्रकृति) के साथ क्रिया कर लवण एवं जल देते हैं, जैसे-
 \(\mathrm{CaO}+2 \mathrm{HCl} \longrightarrow \mathrm{CaCl}_{2}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\)
- अम्ल, धातु कार्बोनेट के साथ क्रिया कर लवण, जल तथा CO2 प्रदान करते हैं, जैसे-
  \(\mathrm{Na}_{2} \mathrm{CO}_{3}+2 \mathrm{HCl} \longrightarrow 2 \mathrm{NaCl}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}+\mathrm{CO}_{2}\)
- अम्ल, क्षार के साथ क्रिया कर के लवण व जल प्रदान करते हैं, ये अभिक्रिया उदासीनीकरण (Neutralisation) भी कहलाती है, जैसे-
​​​​​
 \(\mathrm{HCl}+\mathrm{NaOH} \longrightarrow \mathrm{NaCl}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\)
- अम्ल धातुओं (Metals) के साथ क्रिया कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं।
- अम्लों की pH 7 से कम होती है।
- सांद्र अम्ल (Concentrate Acid) अन्य पदार्थों या सतहों पर क्रिया कर उन्हें गला (Melt) देते हैं, इसे संक्षारण (Corroison) कहते हैं, अत: सांद्र अम्लों को काँच की बोतलों में रखते हैं।

प्रबल अम्ल :-
- ये ऐसे अम्ल है जो पूर्ण रूप से आयनीकृत हो कर अत्यधिक मात्रा H+ आयन्स देते हैं, जैसे-\(\mathrm{H}_{2} \mathrm{SO}_{4}, \mathrm{HCl}, \mathrm{HNO}_{3}\) (अधिकांश अकार्बनिक अम्ल)

 दुर्बल अम्ल :-
-  ये ऐसे अम्ल है, जो कम मात्रा में आयनीकृत हो कर, बहुत कम H+ आयन्स देते हैं, जैसे- \(\mathrm{HCOOH}, \mathrm{CH}_{3} \mathrm{COOH}, \mathrm{H}_{2} \mathrm{CO}_{3}\) (अधिकांश कार्बनिक अम्ल)

अम्लों के उपयोग :-
- मैलिक अम्ल, सेव (Apple) में पाया जाता है।
- टार्टरिक अम्ल, ईमली (Tamarind) में पाया जाता है।
- सिट्रिल अम्ल, खट्टे फलों नींबू, आँवला, संतरा आदि में पाया जाता है।
- ऑक्ज़ेलिक अम्ल, टमाटर में पाया जाता है।
- लैक्टिक अम्ल, दही में पाया जाता है।
- एक्वारेज़िया (अम्लराज) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल से मिलकर बना होता है इसमें \(\mathrm{HCl}\) तथा \(\mathrm{HNO}_{3}\) का अनुपात 1 : 3 होता है।
- बेंजोइक अम्ल तथा एसीटिक अम्ल खाद्य पदार्थों के परिरक्षण (Preservation) में उपयोगी है।
- विनेगर (Vinegar) या सिरका, एसीटिक अम्ल का जलीय रूप होता है इसमें एसीटिक अम्ल 5 से 7 प्रतिशत होता है।
- फॉर्मिक अम्ल \(\text { (HCOOH) }\), लाल चींटियों से प्राप्त होता है तथा यह कृत्रिम रबर के निर्माण में प्रयुक्त किया जाता है।
-  कार्बोनिक अम्ल \(\left(\mathrm{H}_{2} \mathrm{CO}_{3}\right)\), मृदुपेय (Soft drink) बनाने में प्रयुक्त किया जाता है।

2.  क्षार (Base/Alkali) :-

- ‘आरेनियस’ के अनुसार वे पदार्थ जो अपने जलीय विलयन में OH- (हाइड्रॉक्सिल आयन्स) देते हैं, क्षार कहलाते हैं, जैसे-
 \(\mathrm{NaOH} \longrightarrow \mathrm{Na}^{+}+\mathrm{OH}^{-}\)
- ब्रॉन्स्टेड-लॉरी’ के हाइड्रोजन आयन विनिमय (H+) सिद्धान्त के आधार पर वे पदार्थ जो H+ आयन्स ग्रहण करते हैं, क्षार (Bases) कहलाते हैं, जैसे-
\(\mathrm{NH}_{3}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O} \longrightarrow \mathrm{NH}_{4}^{+}+\mathrm{OH}^{-}\)
- ‘लुईस संकल्पना’ के अनुसार वे पदार्थ जो e- युग्म (Pair) दान करते हैं, लुईस क्षार (Lewis Base) कहलाते हैं, जैसे- \(\mathrm{OH}^{-}, \mathrm{F}^{-}, \mathrm{H}_{2} \mathrm{O}, \mathrm{CO}, \mathrm{NH}_{3}, \quad \mathrm{R}-\mathrm{OH}, \mathrm{H}^{-}\)(हाईड्राईड आयन्स), \(\mathrm{C}_{6} \mathrm{H}_{6}\)

क्षारों (Alkali) के गुण :-    

- क्षार, स्वाद में कड़वे व छूने पर साबुन के समान चिकने होते हैं।
- इनका pH 7 से ज्यादा होता है।
- क्षार, लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।
- क्षार, फिनॉफ़्थैलीन को गुलाबी तथा मिथाईल ऑरेंज को पीला कर देते हैं।
- जल में वियोजित होकर हाइड्रॉक्सिल आयन्स (OH-आयन्स) देते हैं, अत: इनके जलीय विलयन भी विद्युत धारा का प्रवाह कर सकते हैं।
- क्षार (NaOH या KOH) की क्रिया वसीय अम्लों के एस्टर व्युत्पन्नों से कराने पर ग्लिसरॉल एवं साबुन (Soap) प्राप्त होते हैं। ये क्रिया साबुनीकरण (Saponification) कहलाती है।

 


क्षार, धातुओं (Metals) के साथ क्रिया करने पर लवणों का निर्माण करते हैं तथा H2 गैस मुक्त करते हैं, जैसे-
\(2 \mathrm{NaOH}+\mathrm{Zn} \longrightarrow \mathrm{Na}_{2} \mathrm{ZnO}_{2}+\mathrm{H}_{2} \uparrow\)
-  अधातु ऑक्साइडों के साथ क्रिया कर लवण व जल बनाते हैं।
- क्षार, अम्ल के साथ क्रिया कर लवण व जल का निर्माण करते हैं, यह उदासीनीकरण अभिक्रिया है।

क्षार के प्रकार :-

प्रबल क्षार :-
- ऐसे क्षार जो जलीय विलयन में लगभग पूर्ण वियोजित हो कर ज्यादा मात्रा OH- आयन (हाइड्रॉक्सिल आयन्स) देते हैं, प्रबल क्षार कहलाते हैं, जैसे- \(\text { NaOH, KOH }\) आदि।
दुर्बल क्षार :-
- ये जलीय विलयन में कम मात्रा में OH- आयन (हाइड्रॉक्सिल आयन्स) देते हैं, जैसे- \(\mathrm{NH}_{4} \mathrm{OH}, \mathrm{Ca}(\mathrm{OH})_{2}, \mathrm{Mg}(\mathrm{OH})_{2}\)

क्षारों के उपयोग :-

- \(\mathrm{NaOH}\) साबुन निर्माण (कठोर साबुन), रेशों के संश्लेषण, चर्म उद्योग आदि में उपयोगी होता है।
- \(\text { KOH }\) साबुन निर्माण (मृदु साबुन) में उपयोगी होता है।
- \(\mathrm{Mg}(\mathrm{OH})_{2}\) (Milk of Magnesia) का उपयोग  पेट की अम्लता को अम्लता को दूर करने में किया जाता है
- \(\text { Ca }(\mathrm{OH})_{2}\) ये ब्लीचिंग पाउडर के निर्माण में प्रयुक्त किया जाता है।

लवण (Salt) :-

- अम्ल (Acid) एवं क्षार (Base) की अभिक्रिया से लवणों का निर्माण होता है, इस क्रिया में जल भी बनता है तथा इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया भी कहते हैं।
\(\mathrm{NaOH}+\mathrm{HCl} \longrightarrow \mathrm{NaCl}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\)
-  ये सामान्यतया ठोस अवस्था में होते हैं, जिनके गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं।
- ये जल में वियोजित होकर आयन प्रदान करते हैं, अत: इनका जलीय विलयन विद्युत धारा का प्रवाह करता है।
 \(\mathrm{NaCl} \longrightarrow \mathrm{Na}^{+} \mathrm{Cl}^{-}\)
 - ये लवण आयनिक यौगिक होते हैं, जिनमें धनायन व ऋणायन आपस में आयनिक बंध द्वारा बंधे रहते हैं।

लवणों के प्रकार :-

साधारण लवण (Normal Salt) :-
-  ये प्रबल अम्ल व प्रबल क्षार की क्रिया से बने होते हैं, जैसे-
 \(\mathrm{HCl}+\mathrm{NaOH} \longrightarrow \mathrm{NaCl}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\)
-  इसके अन्य उदाहरण :- \(\mathrm{KCl}, \mathrm{Na}_{2} \mathrm{SO}_{4}, \mathrm{CaSO}_{4}\) आदि।

अम्लीय लवण (Acidic Salt) :-
-  प्रबल अम्ल व दुर्बल क्षार की क्रिया से बने होते हैं, जैसे-
 \(\mathrm{HCl}+\mathrm{NH}_{4} \mathrm{OH} \longrightarrow \mathrm{NH}_{4} \mathrm{Cl}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\)
-  इसके अन्य उदाहरण :- \(\mathrm{NaHCO}_{3}, \mathrm{NaHSO}_{4}\) आदि।

क्षारीय लवण :-
-  दुर्बल अम्ल व प्रबल क्षार की क्रिया से बने होते हैं, जैसे-
 
 \(2 \mathrm{NaOH}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{CO}_{3} \longrightarrow \mathrm{Na}_{2} \mathrm{CO}_{3}+\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\)
-  इसके अन्य उदाहरण :- \(\mathrm{CuCO}_{3}, \mathrm{Cu}(\mathrm{OH})_{2}\) आदि।

लवण के उपयोग :-
- \(\mathrm{NaCl}\) साधारण नमक, बनाने में उपयोगी होता है।
- \(\mathrm{Na}_{2} \mathrm{CO}_{3} .1 \mathrm{OH}_{2} \mathrm{O}\)सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा) बनाने में उपयोगी।
- \(\mathrm{NaHCO}_{3} 3\) सोडियम बाई कार्बोनेट (खाने का सोडा) बनाने में उपयोगी।                                                       ​