ऑक्सीकरण:-

-        किसी तत्त्व या यौगिक से ऑक्सीजन का जुड़ना, ऑक्सीकरण कहलाता है।   

-        किसी तत्त्व या यौगिक से हाइड्रोजन का पृथक् होना, ऑक्सीकरण कहलाता है।

-        किसी विद्युतऋणी तत्त्व (F, O, N, Cl आदि) का जुड़ना, ऑक्सीकरण कहलाता है।

          C+O2  CO2

          C6H12O6  6CO2+6H2O

अपचयन:-

-        जब किसी तत्त्व या यौगिक से ऑक्सीजन (O2) पृथक् होता है तो वह अभिक्रिया, अपचयन कहलाती है।

-        जब किसी तत्त्व या यौगिक से हाइड्रोजन जुड़ता है तो अभिक्रिया, अपचयन कहलाती है।

-        विद्युतधनी तत्त्व (धातु) का जुड़ना अपचयन कहलाता है।

          CaCO3 CaO+CO2

रेडॉक्स अभिक्रिया:-

-        जब किसी अभिक्रिया में ऑक्सीकरण एवं अपचयन अभिक्रिया साथ-साथ हो तो इसे रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।


कार्बन एवं इसके यौगिक:-

-        कार्बन आवर्त सारणी में संख्या 6 पर स्थित तत्त्व है।

-        कार्बन में प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन तथा न्यूट्रॉन की संख्या 6 होती है।

-        कार्बन चतु:संयोजी तत्त्व होता है।

-        इसमें शृंखलन का गुण पाया जाता है।

-        कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 होता है एवं द्रव्यमान संख्या 12 (6C12) होती है।

कार्बनिक यौगिक:-

-        कार्बन एवं कार्बन के साथ अन्य तत्त्वों से मिलकर बने यौगिक, कार्बनिक यौगिक कहलाते हैं।

-        बर्जिलियस के जैव शक्ति सिद्धान्त के अनुसार, कार्बनिक पदार्थों का निर्माण केवल जीवित जीवों के शरीर में ही होता है।

-        ह्वोलर (Wholer) ने सर्वप्रथम प्रयोगशाला में अमोनियम सायनेट (NH4CNO) को गर्म कर कार्बनिक पदार्थ यूरिया का संश्लेषण किया। यह प्रथम संश्लेषित कार्बनिक यौगिक था जो कि पुन: व्यवस्थापन प्रक्रिया से बना।

-        वर्तमान में कार्बनिक यौगिक हजारों की संख्या में पाए जाते हैं। इतनी संख्या में कार्बनिक यौगिक पाए जाने के दो मुख्य कारण है-
1. कार्बन की चतु:संयोजकता:-

 

-        कार्बन में चार संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। अत: अष्टक पूरा करने के लिए कार्बन अन्य तत्त्वों के साथ चार इलेक्ट्रॉन का साझा कर सहसंयोजी यौगिक (Covalent Compounds) बनाता है।
2. शृंखलन:-
-        कार्बन परमाणु आपस में जुड़कर लम्बी शृंखलाएँ बनाते हैं जिससे विभिन्न कार्बनिक यौगिक का निर्माण होता है।
खुली शृंखला वाले कार्बनिक यौगिक:-

1. एल्केन (C-C) (पैराफिन्स):-

-        यह खुली शृंखला वाले, संतृप्त कार्बनिक यौगिक है जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल बंध पाया जाता है।

-        इसका सामान्य सूत्र CnH2n+2 होता है। जैसे- प्रोपेन (C3H8), ब्यूटेन (C4H10)।

          1C = मेथ

          2C = ऐथ

          3C = प्रोप

          4C = ब्यूट

          5C = पेण्ट

          6C = हैक्स

          7C = हैप्ट

          8C = ऑक्ट

          9C = नॉन

          10C = डेक

-        मेथेन (CH4) एल्केन श्रेणी का प्रथम यौगिक है। यह दलदली स्थानों से प्राकृतिक रूप से निकलती है अत: इसे ‘मार्श गैस’ कहा जाता है।

-        प्राकृतिक गैस में लगभग 85 प्रतिशत मेथेन होती है।

-        LPG (Liquified Petroleum Gas) में मुख्य रूप से प्रोपेन एवं ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होता है।

2. एल्किन (ऑलिफिन्स):-
-        यह असंतृप्त कार्बनिक यौगिक है जिनमें कार्बन परमाणु के मध्य द्विबंध (C = C) पाया जाता है।

-        इसका सामान्य सूत्र CnH2n होता है।

-        इसका प्रथम यौगिक C2H4 ऐथीन या इथाईलिन होता है जो कि फलों को पकाने में प्रयुक्त किया जाता है।

3. एल्काइन:-
-        यह असंतृप्त कार्बनिक यौगिक होते हैं जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच त्रिबंध पाया जाता है। उदाहरण- प्रोपाइन (C3H4), एसीटिलीन अथवा ऐथाईन (C2H2)

-      इसका सामान्य सूत्र CnH2n-2 होता है।
बंद शृंखला वाले कार्बनिक यौगिक:-

-      इन कार्बनिक यौगिकों में कार्बन शृंखला के सिरे के परमाणु आपस में जुड़कर वलय संरचना का निर्माण करते हैं।

-      यदि वलय में कार्बन एवं हाइड्रोजन परमाणु के अलावा अन्य तत्त्व जैसे- N, O, S आदि हो तो इन्हें विषमचक्रीय कार्बनिक यौगिक कहते हैं।

 

-      यदि वलय संरचना में केवल कार्बन व हाइड्रोजन के परमाणु ही हो तो इन्हें समचक्रीय कार्बनिक यौगिक कहते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं-

        1. एलिसाइक्लिक- उदाहरण- साइक्लो ब्यूटेन (C4H8) तथा साइक्लो हेक्सेन (C6H12)
                     
2. एरोमेटिक- ये यौगिक विशेष गंध वाले कार्बनिक यौगिक होते हैं जो अनुनाद (Resonance) जैसी विशेषताएँ दर्शाते हैं। उदाहरण- बेन्जीन, फिनॉल, टॉलूईन आदि।

 

कार्बन के अपररूप:-
-      कार्बन के विभिन्न रूप जिनके रासायनिक गुणों में समानता किन्तु भौतिक गुणों में अंतर होता है, कार्बन के अपररूप कहलाते हैं।

-      कार्बन के अपररूप दो प्रकार के होते हैं-
1. क्रिस्टलीय:-
-      कार्बन के क्रिस्टलीय रूप के उदाहरण हैं- हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन।
2. अक्रिस्टलीय:-
-      कार्बन के अक्रिस्टलीय रूप के उदाहरण हैं- कोयला, चारकोल, कोक तथा काजल।
हीरा:-

-      हीरा कार्बन का क्रिस्टलीय अपररूप है।

-      शुद्ध हीरा पारदर्शक एवं रंगहीन होता है किन्तु अशुद्धियों की उपस्थिति के कारण यह भिन्न-भिन्न रंगों का होता है।

-      यह काँच को आसानी से काट देता है एवं पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण हीरा चमकता है।

-      यह ताप और विद्युत का कुचालक होता है।

ग्रेफाइट:-

         

-      ग्रेफाइट कार्बन का एक उपयोगी क्रिस्टलीय अपररूप है।

-      ग्रेफाइट की संरचना जालक सतह के रूप में होती है।

-      ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है क्योंकि इसमें एक मुक्त इलेक्ट्रॉन पाया जाता है।

-      ग्रेफाइट का उपयोग पेंसिल में किया जाता है एवं ग्रेफाइट चूर्ण का उपयोग मशीनों में शुष्क स्नेहक के रूप में किया जाता है।
फुलरीन:-

       

-      यह कार्बन का नवीनतम खोजा गया अपररूप है।

-      स्मेली, क्रोटो व कर्ल इन तीन वैज्ञानिकों ने ग्रेफाइट को पिघलाकर इसका निर्माण किया था।

-      इसमें कार्बन के कम से कम 60 परमाणु आपस में बंध बनाते हुए फुटबॉल जैसी पिंजरेनुमा संरचना बनाते हैं। इसे C-60 भी कहते हैं।

-      फुटबॉल जैसी संरचना के कारण इसे बकीबॉल भी कहते हैं।

-      बकमिन्स्टर फुलर के नाम के आधार पर इसे फुलरीन कहा गया है।

-      ग्रेफाइट को निष्क्रिय गैसों की उपस्थिति में इलेक्ट्रिक आर्क द्वारा गर्म करने पर फुलरीन का निर्माण।

-      इसमें कार्बन SP2 संकरित होता है।
चारकोल:-
-      यह कार्बन का अशुद्ध रूप है।

-      लकड़ी को हवा की अपर्याप्त मात्रा में जलाकर कास्ट चारकोल प्राप्त किया जाता है।

-      कास्ट चारकोल का उपयोग वस्तुओं को जलाने में, बारूद बनाने में, गैस को अवशोषित करने में आदि में किया जाता है।
काजल:-
-      काजल कार्बनिक पदार्थों को हवा की अपर्याप्त मात्रा में जलाकर प्राप्त धुएँ को कंबलों पर एकत्रित किया जाता है।

-      जूते की पॉलिश, काला रंग बनाने, प्रिंटिग की स्याही एवं आँख में लगाने हेतु इसका उपयोग किया जाता है।
कोयला:-
-      यह कार्बन के यौगिकों का मुक्त मिश्रण होता है।

-      यह ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत होता है।

-      कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयला चार प्रकार का होता है।

-      बिटुमिनस सामान्य किस्म का कोयला होता है।

-      एन्थ्रासाइट उच्च कोटि का कोयला होता है।

-      लिग्नाइट भूरा कोयला होता है।

-      पीट कोयला सबसे निम्न स्तर का होता है।