pH एवं रासायनिक यौगिक

- pH मूल्य किसी पदार्थ की अम्लीयता और क्षारीयता का माप है।

- pH स्केल वह स्केल है, जो किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

- pH स्केल सारेन्सन ने प्रस्तुत की। इस स्केल से सामान्यत: शून्य (अधिक अम्लता) से चौदह (अधिक क्षारीय) तक PH को ज्ञात कर सकते है।

- हाइड्रोनियम आयन की सान्द्रता जितनी अधिक होगी उसका pH उतना ही कम होगा।

- किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता (मोल प्रति लीटर में) के ऋणात्मक 10 आधारीय लघुगुणकीय मान को PH कहते हैं।

            pH = - log [H+] = log \(\frac{1}{H^{+}}\)  

                           या

            pH = log \(\frac{1}{H_{3} O^{+}}\)

(क्योंकि H+ सामान्य H3O+ (हाइड्रोनियम आयन) के रूप में रहता है।)

उदासीन विलयन का pH = 7

अम्लीय विलयन का pH < 7

क्षारीय विलय का pH > 7

- अम्ल तथा क्षारक की शक्ति विलयन में क्रमश: H+ आयन तथा OH- आयन की संख्या पर निर्भर करती है।

-  कुछ सामान्य PH के मान :-

- प्रबल (अम्ल/क्षार) – दुर्बल/अम्ल/क्षार :

PH                    अम्ल/क्षार           उदाहरण

0-3.5                प्रबल अम्ल      (H2SO4, HCl)

3.5 -7               दुर्बल अम्ल      (H2CO3, HCOOH)

7 – 10.5           प्रबल अम्ल      (NH4OH)           

10.5 – 14         दुर्बल अम्ल      (NaOH, KOH)

दैनिक जीवन में pHका महत्व :

-  विभिन्न विलयन जिनका हम दैनिक जीवन मे उपयोग करते है, जिनका pH नियत बना रहे  तो वे पदार्थ या विलयन अपनी सामान्य क्रियाएँ कर पाते है।

- pH मे परिवर्तन होने के बाद रासायनिक गुणों मे भी परिवर्तन होता है।

- पौधे और पशु pH के प्रति संवेदनशील होते हैं। हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है।

- नदी के जल का pH अम्लीय वर्षा के कारण घट जाता है।

- उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा अम्लीय हो जाती है, जो पौधों की वृद्धि के लिए अच्छा नहीं है।

- पौधों की वृद्धि के अनुरूप बनाने के लिए इसमें उचित मात्रा में कुछ क्षारक जैसे क्विक लाइम (चूना, कैल्शियम ऑक्साइड) अथवा  बुझा चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) मिला दिया जाता है। जो मृदा में उपस्थित अम्ल को उदासीन कर देते है।

- कारखानों से निकलने वाले वाहित जल में अनेकों अम्ल होते हैं, जो नदी या झील में मिलकर उसे प्रदूषित करते हैं।

- हमारा उदर भोजन के पाचन के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न करता है। अपच स्थित में अत्यधिक अम्ल उत्पन्न से जलन/दर्द का अनुभव होता है, जिसके लिए प्रति अम्ल ‘मिल्क ऑफ मैग्नीशिया’ का उपयोग किया जाता है।

- मुँह का pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय आरंभ हो जाता है, जो दाँतो के इनैमल कैल्शियम फॉस्फेट को संक्षारित करता है दन्तमंजन क्षारीय होते है जो इसे उदासीन बनाते है।

- मधुमक्खी या चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल होता है, प्रभावित अंग पर बैकिंग सोडा या कैलेमाइन (जिंक कार्बोनेट) जैसे क्षारक से आराम मिलता है।

- केलों की प्रकृति क्षारीय होती है।

- दूध की pH 6.7 होती है,यदि दूध को कुछ समय तक बिना उबाले रखा जाये तो  कुछ समय बाद pH कम होने लगती है, जिससे कुछ समय बाद दूध फट जाता है।इसे स्थिर रखने के लिए NaHCO3 मिलाया जाता है, जो बफर पदार्थ के रूप में कार्य करता है, जो कि विलयन की pH स्थिर बनाये रखते है।

- कोल्ड ड्रिंक मे भी कार्बोनिक अम्ल पाया जाता है जो pको अम्लीय बनाये रखता है।