पर्यटन
पर्यटन:-
- राजस्थान को पर्यटन के क्षेत्र में न केवल देश में अपितु विश्व पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से जाना जाता है।
- राजस्थान को सदियों से अपनी गौरव गाथा, कला एवं संस्कृति, तीर्थ स्थल, प्राकृति सौन्दर्य, पशु पक्षी अभयारण्य एवं ऐतिहासिक स्थलों के कारण देश विदेश में पहचाना जाता है।
- विदेशी आय कमाने वाला दूसरा सबसे बड़ा उद्योग पर्यटन है।
- यह बिना प्रदूषण वाला उद्योग कहलाता है।
- अन्तर्राष्ट्रीय स्तर-पर पर्यटन विकास हेतु UNO (संयुक्त राष्ट्र संघ) संस्था कार्य करती है।
- प्रतिवर्ष 27 सितम्बर को अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- वर्ष 2017 को अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन वर्ष घोषित किया गया था।
राष्ट्रीय स्तर:-
- प्रतिवर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
राजस्थान के पर्यटन विकास:-
- वर्ष 1955 में पर्यटन निदेशालय की स्थापना की गई।
- वर्ष 1956 में पर्यटन विभाग की स्थापना की गई।
- 1 अप्रैल, 1979 को RTDC का गठन किया गया। (राजस्थान पर्यटन विकास निगम)
RTDC कार्य:-
1. पर्यटकों के लिए होटल सुविधा उपलब्ध करवाना।
2. राजस्थान में मेलें व उत्सवों का आयोजन करना।
3. राजस्थान में पर्यटन स्थलों की देख-भाल का कार्य करना।
4. राजस्थान में पर्यटन विकास हेतु कार्यक्रम, नीतियाँ और योजनाएँ तैयार करना।
पर्यटन को उद्योग का दर्जा:-
- 4 मार्च, 1989 को दिया गया।
- मुहम्मद युनुस की सिफारिश पर इसको उद्योग का दर्जा दिया गया।
- देश का पहला राज्य जिसने अपने यहाँ पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया।
- 27 सितम्बर, 1991 को राज्य में Paying guest योजना का संचालन शुरू किया गया। ये वर्तमान में 12 जिलों में संचालित है।
- 1 अगस्त, 2000 को पर्यटन पुलिस बल का गठन किया गया ।
- राज्य में पर्यटन पुलिस की सर्वप्रथम तैनाती जयपुर के जन्तर-मन्तर व आमेर में की गई।
- वर्ष 2004-2005 में पर्यटन उद्योग को जन-उद्योग का दर्जा दिया गया।
- राजस्थान में शिल्पग्राम योजना की शुरुआत वर्ष 1989 में हुई।
RITTMAN (राजस्थान इन्स्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एवं ट्रेवल मैनेजमेंट) की स्थापना 29 अक्टूबर, 1996 को जयपुर में की गई।
- राजस्थान में तीन होटल मैनेजमेंट इन्स्टीट्यूट की स्थापना की गई।
1. जयपुर में वर्ष 1989 में की गई।
2. उदयपुर में वर्ष 1989 में की गई।
3. जोधपुर में वर्ष 1996 में की गई।
- पैलेस ऑन एयर योजना दिल्ली, जयपुर व आगरा शहर में शुरू की गई।
रोप-वे का संचालन:-
1. सुंधा माता मंदिर रोप-वे की स्थापना जालोर में 20 दिसम्बर, 2006 को की गई। यह सबसे लम्बा (800 मीटर) रोप-वे है।
2. इच्छापूर्णी करणी माता रोप-वे जो उदयपुर में स्थित है जिसकी लम्बाई 387 मीटर तथा यह 8 जून, 2008 से संचालित है।
3. सावित्री माता – यह पुष्कर (अजमेर) में स्थित है जिसकी लम्बाई 700 मीटर है तथा यह 3 मार्च, 2016 से संचालित है।
4. सामोद बालाजी – यह शाहपुरा (जयपुर) में में स्थित है तथा यह 25 मई, 2019 से संचालित है।
प्रस्तावित रोप-वे:-
- जयपुर में कनक-वृन्दावन व जल महल से जयगढ़-नाहरगढ़ तक 1.5 किमी लम्बा रोप-वे स्थापित करने की परियोजना प्रस्तावित है।
- माउण्ट आबू के रघुनाथ मंदिर से टॉड रॉक तक रोप-वे स्थापित करने की परियोजना प्रस्तावित है।
- जोधपुर में पर्यटन को बढ़ावा देने की दृष्टि से कायलाना क्षेत्र में सिद्धनाथ मंदिर से माचिया सफारी पार्क तक रोप-वे को स्थापित करने की परियोजना प्रस्तावित है।
- जालोर किले पर भी रोप-वे स्थापित करने की परियोजना प्रस्तावित है।
शाही रेलगाड़ी:-
- पर्यटन हेतु राजस्थान में शाही ट्रेन का संचालन किया जा रहा है।
- इन ट्रेनों का संचालन RTDC व भारतीय रेलवे द्वारा किया जाता है।
1. पैलेस ऑन व्हील्स:-
- इसे हैरिटेज पैलेस ऑन व्हील्स के नाम भी जाना जाता है।
- इसकी शुरुआत 26 जनवरी, 1982 को हुई।
- ये 7 दिन व 8 रात में एक फैरा पूरा करती है।
- इसका रूट दिल्ली से जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर, आगरा तक जाती है।
2. विलेज ऑन व्हील्स:-
- इसकी शुरुआत 29 नवम्बर, 2004 में हुई।
3. हैरिटेज ऑन व्हील्स:-
- इसकी शुरुआत वर्ष 2006 में हुई।
4. रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स:-
- वर्तमान मे रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स को पैलेस ऑन व्हील्स के नाम से परिवर्तित कर दिया गया है।
- इसकी शुरुआत जनवरी 2009 में की गई।
- यह रेल दिल्ली रूट से शुरू होकर आगे ये जयपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, रणथम्भौर, खजुराहो, वाराणसी, सारनाथ, आगरा तक चलती है।
5. फेयरी क्वीन:-
- इसकी शुरुआत वर्ष 2003 में की गई।
- ये शेखावाटी के भित्ति चित्रण व हवेली देखने हेतु चलाई गई।
6. भादगार एक्सप्रेस:-
- ये मारवाड़ से पाली के मध्य चलती है।
7. द ग्रेट अरावली ट्रेन:-
- अजमेर से माउण्ट आबू तक चलती है।
पर्यटन सर्किट:-
निर्मित सर्किट:-
1. मरु त्रिकोण:-
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नवीनतम मरु त्रिकोण में बाड़मेर जिले को शामिल किया गया है।
2. शेखावाटी सर्किट:-

3. भरतपुर सर्किट-

- तीन स्थानों को जोड़ा गया है।
4. ढूँढाड सर्किट-
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- चार स्थानों को जोड़ा गया है।
5. अलवर सर्किट:-

- तीन स्थानों को जोड़ा गया है।
6. हाड़ौती सर्किट:-

- चार स्थानों को जोड़ा गया है।
7. मेरवाड़ा सर्किट:-

- चार स्थानों को जोड़ा गया है।
8. मेवाड़ सर्किट:-
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- चार स्थानों को जोड़ा गया है।
9. रणथम्भौर सर्किट:-

- तीन स्थानों को जोड़ा गया है।
- वर्तमान में इसको हटा दिया गया है।
10. माउण्ट आबू (सिरोही) सर्किट:-

- तीन स्थानों को जोड़ा गया है।
निर्माणाधीन सर्किट:-
1. स्वर्णिम त्रिकोण:-

- ये केन्द्र सरकार का सर्किट है।
- राजस्थान द्वारा दिल्ली से जयपुर मार्ग पर बैराठ सभ्यता व सरिस्का को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है।
- जयपुर व आगरा के मार्ग पर मेहन्दीपुर बालाजी व केवलादेव विहार को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है।
2. कृष्णा सर्किट:-
- श्रीनाथजी, गोविन्द देव जी, कनक वृंदावन, चरण मंदिर, गलताजी मंदिर और खाटू श्याम जी (सीकर) को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है।
3. बालाजी सर्किट:-
- राज्य में स्थित बालाजी के महत्त्वपूर्ण स्थानों को जोड़कर एक सर्किट तैयार किया जिसमें सामोद बालाजी (जयपुर), घाट का बालाजी (जयपुर), बंधे का बालाजी (जयपुर), पाण्डुपोल का बालाजी (अलवर), सालासर बालाजी (चूरू), मेहन्दीपुर बालाजी (दौसा) शामिल हैं।
4. ट्राईबल सर्किट:-
- राज्य में जनजाति जिलों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ट्राईबल सर्किट तैयार किया गया है जिसमें सिरोही, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर को शामिल किया गया है।
5. बौद्ध सर्किट:-
- राज्य में भगवान बुद्ध से संबंधित महत्त्वपूर्ण स्थानों को जोड़कर बौद्ध सर्किट तैयार किया गया जिसमें बैराठ (जयपुर) और झालरापाटन (झालावाड़) को शामिल किया गया है।
राजस्थान राज्य पर्यटन का आदर्श वाक्य (ध्येय वाक्य):-
- सर्वप्रथम वर्ष 1978 में ‘ढोला मारू’।
- वर्ष 1993 में ‘डॉ ललित के.पंवार’ द्वारा (जो वर्तमान में राजस्थान कौशल विश्वविद्यालय जयपुर के कुलाधिपति) ‘पधारो म्हारे देश’ रखा गया।
- वर्ष 1998 में ‘रंगीलों राजस्थान’ रखा गया।
- वर्ष 2007 में ‘अतुल्य राजस्थान’।
- 15 जनवरी, 2016 में ‘जाने क्या दिख जाए‘।
- वर्तमान राज्य सरकार द्वारा 29 जनवरी, 2019 को ‘पधारो म्हारे देश’ कर दिया गया।
- राजस्थान में वर्तमान में चार पर्यटन संभाग (जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर) हैं।
- राजस्थान में पुरातात्विक पर्यटन संभाग सात हैं।
राजस्थान पर्यटन नीति:-
पर्यटन नीति 2001-
- प्रथम पर्यटन नीति की स्थापना सितम्बर, 2001 में की गई।
- इस नीति का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को जन उद्योग के रूप में स्थापित कर इसे राज्य के सामाजिक आर्थिक विकास के साधन के रूप में विकसित करना है।
नई पर्यटन नीति 2015-
- नई पर्यटन नीति वर्ष 2015 को जारी की गई जिसके प्रमुख बिंदु निम्न हैं-
- इस नीति में पर्यटन क्षेत्र की विभिन्न इकाइयों को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है, जिनमें अब होटल, मोटेल, हैरिटेज होटल, पार्क, रोप-वे, ट्यूरिस्ट लग्जरी कोच, केरावेन एवं क्रूज पर्यटन सम्मिलित हैं।
- नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन पर्यटन इकाइयों का भूमि सम्परिवर्तन नि:शुल्क होगा। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में नई पर्यटन इकाइयों से विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा।
- नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान हैरिटेज सम्पत्तियों एवं हैरिटेज होटलों को भू-सम्परिवर्तन शुल्क से मुक्त किया गया है।
पारिस्थितिकीय पर्यटन नीति, 2010-
- राजस्थान में पारिस्थितिकीय पर्यटन (इको ट्यूरिज्म) नीति मार्च, 2010 में बनाई गई थी। इसी नीति के तहत राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्यों एवं अन्य पारिस्थितिकीय क्षेत्रों में पारिस्थितिकीय पर्यटन का विकास करना था।
- इस नीति को लागू करने के लिए “राजस्थान इको ट्यूरिज्म डवलपमेंट सोसायटी” का गठन किया गया।
- राजस्थान विरासत संरक्षण अधिनियम, 2014 में लाया गया।
- राजस्थान झील संरक्षण अधिनियम, 2015 में लाया गया।
राजस्थान फाउण्डेशन:-
- देश-विदेश में बसे अप्रवासी राजस्थानियों से निरन्तर सम्पर्क एवं संवाद बनाए रखने हेतु राजस्थान फाउण्डेशन की स्थापना 30 मार्च, 2001 को की गई ताकि राज्य के विकास की गतिविधियों में उनकी सहभागिता को बढ़ाया जा सके। राजस्थान का मुख्यमंत्री इसका अध्यक्ष होता है।
राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण:-
- राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण का गठन राजस्थान की समृद्ध संस्कृति की धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक के पहलुओं के परिपेक्ष्य में लोक जीवन को सरस बनाने के लिए आयोजित किए जाने वाले मेलों का आयोजन पूर्ण सुरक्षा तथा सुविधाओं की परिपूर्णता के साथ सम्पन्न कराने के उद्देश्य से राज्य स्तरी निकाय/संगठन के रूप में किया गया है, राजस्थान राज्य में प्राधिकरण विभाग ‘पर्यटन विभाग’ है। इसके अध्यक्ष पर्यटन मंत्री होते हैं।
- प्राधिकरण द्वारा दिसम्बर, 2019 तक 42 मेलों को पंजीकृत किया गया है।
विभाग द्वारा वर्ष 2019 में विदेश में भाग लिए गए प्रदर्शनी/कॉन्फ्रेस/सेमीनार/व्यापार मेले
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क्र.सं. |
कार्यक्रम |
स्थान |
दिनांक |
|
1. |
फितूर मेड्रीड |
स्पेन |
23-27 जनवरी, 2019 |
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2. |
थाई इन्टरनेशनल ट्रेवल फेयर |
बैंकॉक |
13-17 फरवरी, 2019 |
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3. |
आई.टी.बी. बर्लिन |
बर्लिन |
6-10 मार्च, 2019 |
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4. |
पाटा |
अस्ताना, कजाकिस्तान |
18-20 सितम्बर,2019 |
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5. |
आई.एफ.टी.एम.टॉप रेजा |
पेरिस फ्रांस |
1-4 अक्टूबर, 2019 |
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6. |
डब्ल्यू.टी.एम. |
लंदन |
4-6 नवम्बर, 2019 |
यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने वाले स्थल-
1. प्राकृतिक स्थल:-
- केवला देव घना पक्षी विहार को वर्ष 1985 में शामिल किया गया।
2. ऐतिहासिक स्थल:-
- जन्तर-मन्तर को वर्ष 2010 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
- वर्ष 2013 में 6 दुर्गों को शामिल किया गया। (जैसलमेर, आमेर, रणथम्भौर, चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, गागरोन)।
- जयपुर परकोटे को वर्ष 2019 में शामिल किया गया।
3. सांस्कृतिक
- कालबेलिया नृत्य को वर्ष 2010 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।
राज्य में जियो हैरिटेज साइट:-
- रामगढ़ (बाराँ) भारत की प्रथम जियो हैरिटेज साइट है।
- दूसरी जियो हैरिटेज साइट सावर (उदयपुर) में स्थित है।
ट्यूरिज्म रेलवे स्टेशन का दर्जा सवाई माधोपुर को दिया गया है।
पर्यटक:-
स्वदेशी पर्यटक:-
- वे पर्यटक जो भारत के हैं और भारत में विचरण करते हैं, स्वदेशी पर्यटक कहलाते हैं।
- स्वदेशी पर्यटकों की दृष्टि से राजस्थान का देश में 10वाँ स्थान है।
- स्वदेशी पर्यटक सर्वाधिक अजमेर, माउण्ट आबू स्थान पर घूमने आते हैं।
- स्वदेशी पर्यटक सर्वाधिक सितम्बर माह में आते हैं।
- स्वदेशी पर्यटक न्यूनतम जनवरी माह में आते हैं।
विदेशी पर्यटक:-
- वे पर्यटक जो दूसरे देशों से भारत के राज्यों में घूमने आते हैं, विदेशी पर्यटक कहलाते हैं।
- विदेशी पर्यटकों की दृष्टि से राजस्थान का देश में 5वाँ स्थान है।
- राजस्थान में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक जयपुर, उदयपुर में आते हैं।
- राजस्थान में सर्वाधिक पर्यटक फ्राँस, ब्रिटेन देश से आते हैं।
- राजस्थान में सर्वाधिक पर्यटक नवम्बर व मार्च माह में आते हैं।
- राजस्थान में न्यूनतम पर्यटक जून माह में आते हैं।
बोर्डर ट्यूरिज्म:-
- हिन्दुमलकोट श्रीगंगानगर।
- बीकानेर- खरूला, मारूति व खाजुवाला।
महत्त्वपूर्ण तथ्य:-
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क्र.सं. |
संग्रहालय व पैनोरमा |
स्थान |
|
1. |
गोगाजी का पैनोरमा |
गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) |
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2. |
जम्भेश्वर जी का पैनोरमा |
पीपासर (नागौर) |
|
3. |
करणी माता का पैनोरमा |
बीकानेर |
|
4. |
लोकदेवता बाबा रामदेव जी |
जैसलमेर |
|
5. |
संत पीपा |
झालावाड़ |
|
6. |
राजा भर्तृहरि |
अलवर |
|
7. |
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय |
धानक्या (जयपुर) |
|
8. |
स्वामी दयानन्द सरस्वती |
अजमेर |
|
9. |
महात्मा गाँधी |
जयपुर |
|
10. |
आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम |
मानगढ़धाम (डूँगरपुर) |
|
11. |
गुरु गोविन्द गिरि |
मानगढ़धाम (डूँगरपुर) |
|
12. |
हाड़ी रानी |
सलूम्बर (उदयपुर) |
|
13. |
महाराणा सांगा |
खानवा (भरतपुर) |
|
14. |
अमर सिंह राठौड़ |
नागौर |
|
15. |
संत लिखमी दास |
नागौर |
|
16. |
संत सुन्दर दास |
दौसा |
|
17. |
संत रैदास |
चित्तौड़गढ़ |
|
18. |
संत नागरीदास |
किशनगढ़ (अजमेर) |
|
19. |
महाकवि माघ |
भीनमाल (जालोर) |
|
20. |
गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त |
भीनमाल (जालोर) |
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21. |
कृष्णभक्त अलीबख्श |
मुण्डावर (अलवर) |
|
22. |
संत मावजी |
डूँगरपुर |
|
23. |
शौर्य उद्यान (वार मेमोरियल) |
झुंझुनूँ |
|
24. |
काली बाई |
मांडवा (डूँगरपुर) |
|
25. |
संत धन्ना |
टोंक |
|
26. |
युद्ध संग्रहालय |
जैसलमेर |
|
27. |
गुरु गोविन्द सिंह |
बुढ़ाजोहड़ |
|
28. |
चालकनेची |
चालकना (बाड़मेर) |
|
29. |
निम्बार्काचार्य |
सलेमाबाद (अजमेर) |
|
30. |
सुगाली माता मूर्ति स्वतंत्रता संग्राम |
आऊवा (पाली) |
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31. |
हसन खाँ मेवाती |
अलवर |
|
32. |
महाराणा कुंभा |
माल्यावास मदारिया (राजसमंद) |
|
33. |
जसनाथ जी का पैनोरमा |
कतरियासर (बीकानेर) |
|
34. |
लोकदेवता पाबूजी का पैनोरमा |
कोलु गाँव, फलोदी (जोधपुर) |
|
35. |
बप्पा राव का पैनोरमा |
मठाठा (उदयपुर) |
|
36. |
भक्त शिरोमणि मीरां बाई |
मेड़ता सिटी (नागौर) |
|
37. |
महाराजा सूरजमल |
भरतपुर |
|
38. |
भक्त शिरोमणि करमेती बाई |
खण्डेला (सीकर) |
|
39. |
राव शेखाजी |
अमरसर (जयपुर) |
|
40. |
झालामन्ना |
बड़ी सादड़ी (चित्तौड़गढ़) |
जयपुर प्राइड:-
- जयपुर शहर में रात्रिकालीन भ्रमण हेतु डबल डेकर बस सेवा की शुरुआत 1 जनवरी, 2003 को की गई।
पर्यटन विभाग द्वारा अयोजित महोत्सव:-
|
क्र.सं. |
उत्सव |
स्थान |
|
1. |
ऊँट महोत्सव |
बीकानेर |
|
2. |
थार महोत्सव |
बाड़मेर |
|
3. |
मरु महोत्सव |
जैसलमेर |
|
4. |
मारवाड़ महोत्सव |
जोधपुर |
|
5. |
मेवाड़ महोत्सव |
उदयपुर |
|
6. |
पतंग महोत्सव |
जयपुर व जैसलमेर |
|
7. |
कांठल महोत्सव |
प्रतापगढ़ |
|
8. |
विंटेज कार रेली |
जयपुर |
|
9. |
बेणेश्वर महोत्सव |
डूँगरपुर |
|
10. |
धुलण्डी महोत्सव |
जयपुर |
|
11. |
गणगौर महोत्सव |
जयपुर |
|
12. |
ग्रीष्म व शीत महोत्सव |
माउण्ट आबू |
|
13. |
महावीर जी महोत्सव |
करौली |
|
14. |
जगन्नाथ मेला महोत्सव |
अलवर |
|
15. |
तीज महोत्सव |
जयपुर |
|
16. |
कजली तीज महोत्सव |
बूँदी |
|
17. |
दशहरा महोत्सव |
कोटा |
|
18. |
खलखाणी माता महोत्सव |
जयपुर |
|
19. |
पुष्कर मेला महोत्सव |
अजमेर |
|
20. |
किन्नू महोत्सव |
श्रीगंगानगर |
|
21. |
मीरा महोत्सव |
चित्तौड़गढ़ |
|
22. |
चन्द्रभागा महोत्सव |
झालावाड़ |
|
23. |
हाथी महोत्सव |
जयपुर |
|
24. |
केलादेवी महोत्सव |
करौली |
|
25. |
बृज महोत्सव |
भरतपुर |
राज्य में प्रथम हैरिटेज:-
- प्रथम तीर्थ हैरिटेज पुष्कर (अजमेर) में स्थित है।
- प्रथम हैरिटेज नगर बृज नगर (झालावाड़) में स्थित है।
- प्रथम हैरिटेज होटल अजीत भवन (जोधपुर) में स्थित है।
हैरिटेज डेस्टिनेशन पुरस्कार:-
- 6-10 मार्च, 2019 तक बर्लिन (जर्मनी) में आयोजित पर्यटन सम्मेलन – आई.टी.बी. में राजस्थान पर्यटन को सर्वश्रेष्ठ ‘हैरिटेज डेस्टिनेशन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
- यह सम्मेलन विश्व का सबसे बड़ा पर्यटन मेला है जिसमें 180 देशों के प्रतिनिधियों द्वारा भाग लिया जाता है।
टाइगर सफारी पार्क:-
- रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के बढ़ते दबाव को देखते हुए रणथम्भौर के बफर एरिया में आने वाले टोंक जिले के आमली गाँव के पास एक नया ‘टाइगर सफारी पार्क’ विकसित किया जा रहा है।
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य:-