ऑपरेटिंग सिस्टम (OPERATING SYSTEM)
ऑपरेटिंग सिस्टम, सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है जिसे प्राय: OS कहते हैं।
OS कम्प्यूटर को कार्य करने योग्य बनाता है।
OS कम्प्यूटर हार्डवेयर और यूजर के बीच मध्यस्थता का कार्य करता है।
OS कम्प्यूटर पर उपस्थित हार्डवेयर को नियंत्रित करता है।
OS हमारे द्वारा प्रयोग में लिये जाने वाले सभी प्रोग्राम को चलाने में सहयोग करता है।
बिना OS कोई भी कम्प्यूटर नहीं चलाया जा सकता।
OS ऐसा व्यवस्थित निर्देशों का समूह है जो कम्प्यूटर के सम्पूर्ण क्रियाकलापों को नियंत्रित करता है।
OS एक प्रकार से कम्प्यूटर मैनेजर माना जा सकता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर पर एक आवश्यक सॉफ्टवेयर होता है।
यह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाता है।
जैसे – Microsoft Windows, Ms-Dos, Unix, Linux, Macos,

मोबाइल के OS:- Android, Windows, ios, आदि।
जिस प्रकार कम्प्यूटर सिस्टम को संचालित करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम प्रयोग किए जाते हैं ठीक उसी प्रकार स्मार्ट फोन, टेबलेट्स आदि को ऑपरेट करने के लिए भी विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग किया जाता है जो निम्न हैं –
एंड्राॅइड – एंड्राॅइड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम का पहला वर्जन Android 1.0 गूगल कम्पनी के द्वारा वर्ष 2008 में लॉन्च किया गया। Android का नवीनतम वर्जन Android 10, सितम्बर 2019 में लॉन्च किया गया, यह एन्ड्रॉइड का 17वाँ वर्जन था।
एन्ड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम गूगल द्वारा बनाया गया है।
HTC Dream - एन्ड्रॉइड का उपयोग करने वाला प्रथम मोबाइल फोन था।
IOS- यह एप्पल कम्पनी द्वारा बनाया गया ऑपरेटिंग सिस्टम है, इसका पहला वर्जन Iphone OSI नामक जनवरी, 2007 में लॉन्च किया गया था। इसका नवीनतम वर्जन 13.5.1 है जो कि 2019 में लॉन्च किया गया।
Win OS— यह माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी के द्वारा बनाया गया इसका पहला वर्जन 2010 में लॉन्च किया गया, इसका नवीनतम वर्जन Win 10 है।
Symbian- इस ऑपरेटिंग सिस्टम का निर्माण सिम्बियन कम्पनी के द्वारा 1998 में किया गया, यह मोबाइल फोन में प्रयोग किया जाने वाला ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर ऑपरेटिंग सिस्टम है।
Blackberry - यह 1999 में पब्लिश किया गया। सुरक्षा की दृष्टि से यह ऑपरेटिंग सिस्टम सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसका नवीनतम वर्जन जनवरी 2013 में पब्लिश किया गया।

OS यूजर इण्टरफेस:-
CUI – Character user interface
GUI – Graphical user interface
कम्प्यूटर (मशीन) और मानव (यूजर) के मध्य जिस माध्यम से संचार किया जाता है उसे इण्टरफेस कहा जाता है। यह मुख्यत: दो प्रकार का होता है-
CUI – Character user interface कैरेक्टर यूजर इन्टरफेस-
इस इण्टरफेस में कैरेक्टर (अक्षर व शब्दों) के माध्यम से कमाण्ड देकर कार्य किया जाता है कैरेक्टर यूजर इण्टरफेस कहते हैं।
इस OS को कमाण्ड लाइन इण्टरफेस भी कहा जाता है जहाँ कमाण्ड देकर कार्य किया जाता है।
इस OS में माउस का प्रयोग नगण्य होता है।
Ex. Unix, Ms Dos
UNIX यूनिक्स:- यह CUI OS है जिसे 1969 में केन थॉमस व डेनिस रिची द्वारा बनाया गया। यह मल्टीयूजर OS है। इस OS में कर्नेल के द्वारा CPU के कार्यों को निर्देशित किया जाता है। कर्नेल Unix OS का प्रबन्धक की तरह होता है।
UNIX – Uniplex information computer system
MS Dos – Microsoft Disk Operating system:- यह CUI, OS होता है जिसमें कमाण्ड देकर कार्य किया जाता है।

GUI- Graphical user interface ग्राफिक्ल यूजर इण्टरफेस:-
इस OS में ग्राफिक्स का प्रयोग करके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को जोड़ा जाता है।
इस OS से माउस का प्रयोग करके कार्य को आसानी से किया जा सकता है।
इस OS में कार्य करना बहुत आसान होता है जिसमें मल्टीमीडिया का भी प्रयोग किया जा सकता है।
Ex. – windows, Linux, Mac Os आदि।
Windows - Microsoft Company द्वारा इसे विकसित किया गया।

इसे 1985 में Release किया गया।
इसका प्रथम Version windows 1.0 था।
Windows 1.0 – 1985
Windows 2.03 – 1988
Windows 3.0 – 1990
Windows 05 – 1995
Windows NT 4.0 – 1996
Windows 98 - 1998
Windows ME – 2000
Windows XP – 2001
Windows XP professional– 2005
Vista – 2007
Window 7 – 2009
Window 8 – 2012
Window – 10 – 2015
Linux- इस OS को 1991 में लीनस टोरवेल्ड द्वारा विकसित किया गया था। यह Open source operating system है। यह मल्टीयूजर मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसके मुख्य भाग है –
1. कर्नेल – ये लिनक्स सिस्टम का कोर है जो सिस्टम के स्टार्ट होते ही मेमारी में लोड हो जाता है तथा मेमोरी, फाइल व पेरीफरेल डिवाइस को मैनेज करता है।
2. शैल – यह एक प्रोग्राम होता है जो यूजर द्वारा दी जानी वाली कमाण्ड को इंटरप्रिट करता है यह कमाण्ड लाइन पर टाइप किए जाते हैं या एक फाइल में रखे जाते हैं जिसे शैल स्क्रिप्ट कहते हैं।
3. सिस्टम यूटिलिटी
4. सिस्टम लाइब्रेरी

Mac os- Apple कम्पनी ने 1984 में इस GUI OS को बनाया जिसका नाम मैकिनटोश OS है।
ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) – यह कम्प्यूटर का सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है, जो कम्प्यूटर पर उपस्थित हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर एवं यूजर के मध्य सम्प्रेषण का कार्य करता है।
Operating System के दो मुख्य Interface होते हैं-
1. CUI-Character User Interface
2. GUI - Graphical User Interface
Operating System के मुख्य कार्य -
1. स्मृति प्रबन्धन (Memory Management) -
ऑपरेटिंग सिस्टम यह ध्यान रखता है कि वर्तमान में मेमोरी का कौन-सा हिस्सा किस प्रोसेस द्वारा उपयोग में लिया जा रहा है तथा जब मेन मेमोरी का स्पेस खाली हो जाती है तो अगले प्रोग्राम के लिए स्पेस उपलब्ध कराना ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य होता है।
2. फाइल प्रबन्धन (File Management) - कम्प्यूटर पर बनाई गयी फाइल को प्रबन्ध करना। फाइल कम्प्यूटर की मेमोरी में सेव होती है उसे व्यवस्थित करना जैसे- फाइल को क्रिएट करना, डिलीट करना एवं फोल्डर को बनाना व डिलीट करना आदि। फाइल का बैकअप लेना, फाइल को नाम देना, फाइल में डेटा सुरक्षित करना इत्यादि कार्य OS के द्वारा फाइल प्रबन्धन से संबंधित किये जाते हैं।
3. प्रोसेस प्रबन्धन (Process Management) - कम्प्यूटर पर होने वाली किसी भी प्रकार की प्रोसेस का प्रबन्धन OS के द्वारा किया जाता हैं। OS के द्वारा इसमें जॉब शेड्यूलिंग एवं टास्क मैनेजमेन्ट का कार्य किया जाता है।
4. इनपुट आउटपुट डिवाइस प्रबन्धन (Input Output Device Management) - कम्प्यूटर से जुडे इनपुट व आउटपुट डिवाइस को आपस में को-ऑर्डिनेट करता है तथा साथ ही उनको कार्य भी सौंपता है। कम्प्यूटर से जुड़े डिवाइस का प्रबन्धन OS के द्वारा ही किया जाता है।
5. सम्प्रेषण (Communication) - कम्प्यूटर से जुड़े हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और मानव व मशीन के मध्य सम्प्रेषण का कार्य भी ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा किया जाता है।
6. सुरक्षा सिक्योरिटी - Operating System द्वारा computer और computer network की सुरक्षा प्रदान की जाती है। OS के द्वारा युटिलिटी सॉफ्टवेयर व तकनीकों का भी प्रयोग किया जाता है। जिससे कम्प्यूटर पर होने वाली क्षति से बचा जा सके।
Operating System की विशेषताएँ एवं प्रकार (Types of Operating System)
(1) एकल उपयोगकर्ता (Single user operating system)- इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में एक बार में केवल एक ही व्यक्ति कार्य कर सकता है। हमारे द्वारा उपयोग में लिए जाने वाले पी. सी. सामान्यत: सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम को सपोर्ट करते हैं। जैसे - Windows आदि।
(2) बहुल उपयोगकर्ता (Multiuser Operating System) – इस OS में एक समय में एक से अधिक व्यक्ति एक साथ कार्य कर सकते हैं। यह OS सभी डिवाइस को व्यवस्थित तरीके से प्रोसेस करता हैं। जैसे – Unix आदि।
(3) मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multitasking OS) – यह OS एक समय में एक से अधिक कार्य एक साथ कर सकता है, इसलिए इसे बहुल कार्य OS कहा जाता है। इस OS में एक कार्य से दूसरे कार्य को आसानी से बदला भी जा सकता है। जैसे – Unix, Linux, Windows आदि।
(4) मल्टीप्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multi processing OS) – इस OS में एक से अधिक CPU का प्रयोग अथवा एक से अधिक प्रोसेसर का प्रयोग एक साथ किया जा सकता है, इसलिए इसे मल्टी प्रोसेसिंग OS कहा जाता है। जैसे – Linux, Unix आदि।
(5) बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Processing OS) – बैच का सामान्य अर्थ समूह होता है इस OS में एक जैसे एक से अधिक कार्यों को एक बैच के रूप में इस ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा किया जाता है। इस OS में यूजर का हस्तक्षेप नगण्य होता है। जैसे- किसी संस्था में पेरोल सिस्टम में उपयोग करना।
(6) रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Real Time Operating System) - रियल टाइम OS का उपयोग रियल टाइम अनुप्रयोग के लिए किया जाता है अर्थात् ऐसे एप्लीकेशन के लिए जहाँ डेटा की प्रोसेसिंग एक निश्चित और बहुत छोटे समय में पूरी हो जाती है। इसमें वास्तविक समय में किया जाने वाला कार्य व समय दर्शाया जाता है। यह OS प्रोसेस को एक्जीक्यूट करने के लिए प्रायोरिटी का प्रयोग करता है। यह OS बहुत तेज होते है और वास्तविक समय में रेस्पॉन्स देते हैं। इनका उपयोग जैसे – न्यूक्लीयर पॉवर प्लांट, फ्यूल सिस्टम आदि में किया जाता है।
(7) टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Time Sharing OS) – इस OS में प्रत्येक प्रोसेस को एक्जीक्यूट करने के लिए एक फिक्स टाइम दिया जाता है। इस OS में आसानी से टास्क को स्विच किया जाता है।
इस OS में एक साथ एक से अधिक प्रोसेस और एक से अधिक उपयोगकर्ता कम्प्यूटर संसाधनों का प्रयोग कर सकते हैं। इस OS में प्रत्येक कार्य को करने के लिए सीपीयू को एक समय दिया जाता है, जिसे टाइम स्लाइस या क्वांटम टाइम भी कहते हैं। जैसे – Mac Os आदि।
(8) डिस्ट्रीब्यूटेड (Distributed OS) -
जब कई सारे Computer किसी नेटवर्क के माध्यम से आपस में इन्टरकनेक्टेड होकर एक-दूसरे से टास्क शेयर करते हैं तो इसे डिस्ट्रीब्यूटेड OS कहा जाता है। जैसे :- फ्लाइड सर्वर सिस्टम, पियर टू पियर सिस्टम।
Operating System के प्रोग्राम
System Calls – सिस्टम कॉल एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस के माध्यम से यूजर के कार्यों के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम से सेवा करता है। कम्प्यूटिंग में सिस्टम कॉल एक ऐसा प्राग्रामेटिक तरीका है जिसके द्वारा कोई कम्प्यूटर प्रोग्राम ऑपरेटिंग सिस्टम के कर्नेल से किसी सर्विस का निवेदन करता है अर्थात् सिस्टम कॉल वो तरीका है जिसका प्रयोग करके कोई प्रोग्राम ऑपरेटिंग सिस्टम से संवाद करता है।
POST – Power on Self Test
Computer चालू होते ही सबसे पहले स्वयं को जाँचता है इस प्रक्रिया को Post कहते हैं।
Booting बुटिंग – OS के Secondary Memory से Primary Memory में Load होने की प्रक्रिया Booting कहलाती है।
1. Cold Booting कोल्ड बुटिंग – कम्प्यूटर की शुरुआती बुटिंग कोल्ड बुटिंग कहलाती है।
2. Warm Booting वॉर्म बुटिंग – कम्प्यूटर के रिस्टार्ट होने पर होने वाली बुटिंग वॉर्म बुटिंग कहलाती है ।
Important Features of Windows 10 -
Cortana कोरटाना – PDA
- यह Personal Digital Assistant पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट होता है।
- स्टोर की गई फाइलों को व्यवस्थित करने, ढूँढने में मदद करता है।
- सूचना/नोटिस को याद दिलाता है।
- जो Appointment आप भूल गए है उन्हें याद दिलाता है।
Windows Defender (विंडोज़ डिफेन्डर) – यह एक एंटी वायरस प्रोग्राम है जो कम्प्यूटर पर वायरस को आने से रोकता है। यह Anti Malware Program होता है जो पृष्ठभूमि में स्वत: ही चलता है। उपयोगकर्ता द्वारा खोली जाने वाली फाइल की जाँच करता है।
यह Real time Antivirus होता है। इसमें "विंडोज़ डिफेंडर इज टेकिंग एक्शन टू क्लीन डिटेक्टेड मालवेयर" या "डिटेक्टेड थ्रेट आर बीइंग क्लीनड" की सूचना को दिखाता है।
स्नेप एसीस्ट (Snap Assist) – एक स्क्रीन पर 4 विंडोज़ को दर्शाने का कार्य करता है। एक समय में एक ही स्क्रीन पर एक से अधिक प्रोग्राम चलाने में मदद करता है।
Screen Cast (स्क्रीन कास्ट) – Microsoft के द्वारा मीरा कास्ट (MirraCast) तकनीक का प्रयोग करते हुए हमारे कम्प्यूटर की स्क्रीन को दूसरे कम्प्यूटर पर दर्शाया जा सकता है। जिसे रिमोट लॉगिन भी कहते है।
Windows Hello – यह पासवर्ड / पहचान का एक तरीका है जिसमें हम स्पर्श करके या देखकर कम्प्यूटर पर पासवर्ड देकर लॉगिन कर सकते हैं। जैसे- फेस स्कैन, फिंगर प्रिन्ट, आइरिस स्कैन आदि का प्रयोग करते हुए व्यक्तिगत रूप से पहचान करता है।
Wifi – Wireless fidelity – इसमें रेडियो सिग्नल का प्रयोग करके डिवाइस को नेटवर्क से कनेक्ट किया जाता है।
Wifi Sense –यह Windows 10 में एक सुविधा है जिसके द्वारा Wifi network से कनेक्ट कर सकते हैं, जिनसे पहले कनेक्ट किया जा चुका हो।
Lifi – Light Fidelity इसमें विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के प्रकाश भाग के माध्यम से डेटा एवं सूचनाओं का संचार किया जाता है। यह Wifi से भी तेज गति से कार्य करता है।
Hotspot हॉटस्पॉट – हॉटस्पॉट एक एक्सेस पॉइन्ट Physical Location/स्थान है जिससे अन्य उपकरण जोड़े जाते हैं या उस स्थान से जुड़े होते हैं जैसे – मोबाइल में हॉटस्पॉट का प्रयोग करना।
माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ MICROSOFT WINDOWS
परिचय
माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ माइक्रोसॉफ्ट कंपनी की तरफ से दिया गया एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जो सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है जिसके द्वारा यूजर और कम्प्यूटर के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है वर्तमान में विंडोज़ के कई वर्जन कम्प्यूटरों के अंदर उपयोग में लिए जा रहे हैं जैसे विंडोज़ एक्सपी, विंडोज़ 7, विंडोज़ 8, विंडोज़ 10 आदि ।
विंडोज़ के गुणधर्म एवं विशेषताएँ-
1. GUI (graphical user interface) - विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम जी यू आई पर आधारित होता है जिसमें ग्राफिक्स, मेनू दिखाई एवं आइकन दिखाई देते हैं जिस पर माउस के द्वारा क्लिक करके आसानी से कार्य किया जाता है इस प्रकार इनमें किसी कमांड को याद रखने की आवश्यकता नहीं होती है।
2. Plug and Play - प्लग एंड प्ले -वर्तमान के विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसे इनबिल्ट प्रोग्राम होते हैं जो डिवाइस को कम्प्यूटर पर जोड़ने से वह डिवाइस स्वयं ही चल जाती है इसे प्लग एंड प्ले कहा जाता है।
3. hardware support - हार्डवेयर सपोर्ट वर्तमान में ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर पर उपयोग में लिए जाने वाले उपकरण जैसे प्रिंटर, पेनड्राइव, स्कैनर आदि अलग-अलग प्रकार के डिवाइस को सीधा सपोर्ट करती है इसके लिए अलग से ड्राईव की जरूरत नहीं होती है।
4. Multitasking - मल्टीटास्किंग में मल्टी का मतलब एक से अधिक है और टास्क का मतलब कार्य से होता है अर्थात् ऑपरेटिंग सिस्टम एक समय पर एक से अधिक कार्य करने की इजाज़त देता है जैसे एक साथ एप्लीकेशन पर कार्य करते हुए म्यूजिक को सुनना आदि।
5. User Friendly - यूजर फ्रेंडली- विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर फ्रेंडली होते हैं अर्थात् आइकन को देख कर आसानी से कार्य किया जा सकता है जैसे कॉपी ,पेस्ट, डिलीट आसानी से करना आदि।

Desktop
कम्प्यूटर को स्टार्ट करने के पश्चात मॉनिटर पर दिखाई देने वाले स्क्रीन को डेस्कटॉप कहा जाता है इस डेस्कटॉप पर वॉलपेपर, टास्क बार और आइकन दिखाई देते हैं इन आइकॉन के माध्यम से हम कम्प्यूटर पर अलग-अलग कार्यों को आसानी से कर सकते हैं।

My computer
My computer यह एक आइकन होता है जिसकी सहायता से कम्प्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की जानकारी के लिए हम इस आइकन का प्रयोग करते हैं। इस My computer में हार्डवेयर सॉफ्टवेयर की जानकारी के साथ हमें मेमोरी और मेमोरी location की जानकारी भी प्राप्त होती है अर्थात् यदि हम कम्प्यूटर के किसी फाइल को ,फोल्डर या हार्ड डिस्क के लोकेशन पर ले जाना हो तो हम My computer का उपयोग कर सकते हैं। इस My computer को स्टार्ट मैन्यू और डेस्कटॉप पर आइकन के द्वारा उपयोग में ले सकते हैं। सबसे पहले माई कम्प्यूटर को हम ओपन करेंगे और उस पर दिखाई देने वाले फोल्डर या फाइल को सेलेक्ट करेंगे विंडोज़ एक्सपी में टास्क पेन नामक एक नया फीचर्स दिया है जिसकी सहायता से हम किसी भी कंटेस्ट को चुनते हैं तो वह विंडो में उपलब्ध हो जाता है।
Recycle bin
रिसाइकिल बिन कम्प्यूटर का वह स्थान होता है जहाँ डिलीट की गई फाइल या फोल्डर रिसाइकिल बिन में दिखाई देते है। इसका आकार डेस्कटॉप पर एक टोकरीनुमा होता है । यदि गलती से हमने किसी फाइल को डिलीट कर दिया है तो वह रिसाइकल बिन में दिखाई देती है जिसे वापस प्राप्त करने के लिए रिस्टोर कमांड का प्रयोग किया जाता है । रिसाइकिल बिन को खाली कर देने पर (Empty) या उसमें उपस्थित फाइलों को डिलीट कर देने पर फाइलें वापस से प्राप्त नहीं होती है वह हमेशा के लिए डिलीट हो जाती है फाइलों को वापस प्राप्त करने के लिए अर्थात् रिस्टोर करने के लिए रिसाइकिल बिन ओपन करके जिस भी फाइल या फोल्डर को वापस अपने अपने मूल स्थान पर लाना चाहते हो वहाँ रिस्टोर बटन पर क्लिक करके प्राप्त किया जा सकता है । रिसाइकिल बिन को खाली करने के लिए Empty Recycle Bin उपयोग किया जाता है ।
Taskbar
टास्कबार कम्प्यूटर की स्क्रीन जिसे डेस्कटॉप कहा जाता है उस डेस्कटॉप के नीचे की ओर स्थित लाइन को टास्कबार कहा जाता है इस टास्कबार के बाएँ ओर स्टार्ट बटन होता है जिसका उपयोग प्रोग्राम को स्टार्ट करने के लिए किया जाता है तथा टास्कबार के दाएँ ओर समय व दिनांक दिए होते हैं । टास्क का अर्थ कार्य से होता है अर्थात् कम्प्यूटर पर जो भी कार्य या प्रोग्राम चलाए जाते हैं उनके आइकन या उनका नाम इस टास्कबार पर उपलब्ध होता है । यह मल्टीटास्किंग विशेषता को दर्शाती है ।
Start Button
इसकी सहायता से कम्प्यूटर में उपस्थित प्रोग्राम को या सॉफ्टवेयर को स्टार्ट करने के लिए स्टार्ट बटन का प्रयोग किया जाता है स्टार्ट बटन कम्प्यूटर के डेस्कटॉप के नीचे स्थित टास्कबार पर बायीं ओर स्थित होता है इस पर क्लिक करने पर स्टार्ट मैन्यू दिखाई देता है इसमें प्रोग्राम की लिस्ट होती है जिस पर क्लिक करने से प्रोग्राम रन हो जाता है।
समय व दिनांक को बदलना
टास्क बार का उपयोग करके समय व दिनांक को आसानी से बदला जा सकता है । माई कम्प्यूटर आइकन को ओपन करके उसमें उपस्थित कंट्रोल पैनल के द्वारा डेट और टाइम विकल्प चुनकर कम्प्यूटर के समय व दिनांक को बदला जा सकता है । कम्प्यूटर की स्क्रीन पर दिखाई देने वाले समय या दिनांक को टास्क बार पर स्थित डेट एंड टाइम पर क्लिक करके समय व दिनांक को बदला जा सकता है
फोल्डर निर्माण करना
कम्प्यूटर में फोल्डर का निर्माण करने के लिए माउस का उपयोग करके आसानी से नया फोल्डर बनाया जा सकता है। कम्प्यूटर डेस्कटॉप स्क्रीन पर माउस के द्वारा राइट क्लिक करके जो पॉपअप मैन्यू दिखाई देता है उस पॉपअप मैन्यू में न्यू फोल्डर विकल्प का चयन करके फोल्डर आसानी से बना सकते हैं ।
विंडो को मिनिमाइज करना
मिनिमाइज करने के लिए विंडो के टाइटल बार पर मिनीमाइज वाले बटन पर माउस का क्लिक किया जाता है मिनीमाइज होने के बाद एप्लीकेशन की विंडो डेस्कटॉप के टास्कबार पर दिखाई देती है जिसे स्क्रीन पर लाने के लिए टास्क बार पर एप्लीकेशन पर क्लिक किया जाता है ।
मैक्सिमाइज विंडो के लिए टाइटल बार पर स्थित मैक्सिमाइज बटन होता है जिसका उपयोग करके विंडो को स्क्रीन पर या पूरी स्क्रीन पर देखा जा सकता है। विंडो को अपने सामान्य स्थिति में लाने के लिए टाइटल बार के ऊपर दिए गए बटन में बीच वाले बटन को दबाकर विंडो को रिस्टोर किया जा सकता है अर्थात् एप्लीकेशन विंडो की स्क्रीन को छोटा या बड़ा किया जा सकता है।
माइक्रोसॉफ्ट पेंट
कम्प्यूटर पर पेंटिंग या कलाकृति बनाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट पेंट का प्रयोग किया जाता है। इस पेंट एप्लीकेशन के द्वारा कई रंगों का और टूल्स का उपयोग करके आसानी से कलाकृति बनाई जा सकती है। शुरुआती दौर में कम्प्यूटर पर हाथ जमाने के लिए भी एमएस पेंट का प्रयोग किया जाता है ताकि हम माउस को आसानी से चलाना सीख सकें । पेंटिंग टूल्स का इस्तेमाल करके हम पेंटिंग बना सकते हैं ।
1. ब्रश टूल यह सबसे मुख्य पेंटिंग टूल है जिसके द्वारा हम चित्रकारी कर सकते हैं।
2. इरेज़र टूल इसका उपयोग रबर की तरह लाइनों या रंगों को हटाने के लिए किया जाता है ।
3. पेंसिल टूल इसका उपयोग हम चाहे जैसी रेखाएँ बनाने के लिए कर सकते हैं ।
4. एयर ब्रश इसके द्वारा स्प्रे पेंटिंग के लिए इस एयरब्रश का उपयोग किया जाता है ।
5. लाइन टूल इसका उपयोग सीधी रेखा खींचने के लिए किया जाता है
6. कर्व टूल- कर्व टूल इसका उपयोग कर्व अर्थात् गोला बनाने के लिए किया जाता है हम टूल का उपयोग एक-दूसरे से विपरीत दिशा में करके गोला बना सकते हैं।
7. बॉक्स टूल इसका उपयोग बॉक्स बनाने के लिए किया जाता है यह बॉक्स, केवल बॉर्डर वाला, भरा हुआ बॉर्डर वाला या बिना बॉर्डर वाला भी बनाया जा सकता है ।
8. राउंड बॉक्स इसका उपयोग गोलाकार बॉक्स बनाने के बजाय आयताकार बनाने के लिए किया जाता है ।
9 टेक्स्ट टूल यदि हम चित्रों में, पेंटिंग में या नक्शों में कुछ शब्द लिखना चाहते हो तो टेक्स्ट टूल का उपयोग किया जाता है।
Notepad:- नोटपेड
नोटपेड को ओपन करने के लिए सबसे पहले स्टार्ट बटन पर क्लिक करके स्टार्ट मैन्यू से प्रोग्राम पर क्लिक करने के बाद एसेसीरिज के द्वारा नोटपेड को ओपन किया जा सकता है।
नोटपेड एक टेक्स्ट एडिटर होता है जिसका उपयोग HTML, SQL आदि प्रोग्रामिंग भाषा के कोड को लिखने के लिए किया जाता हैं।
इसमें 4 मुख्य मैन्यू होते हैं- फाइल , एडिट , सर्च और हेल्प।
फाइल मैन्यू में फाइल से संबंधित सभी कार्य किये जा सकते हैं जैसे- न्यू , ओपन, सेव प्रिन्ट आदि कमांड का उपयोग कर सकते हैं ।
एडिट मैन्यू के द्वारा कट , कॉपी , पेस्ट आदि कमांड का प्रयोग किया जाता है ।

Word pad वर्डपेड:-
वर्डपेड की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले स्टार्ट बटन पर क्लिक करके स्टार्ट मैन्यू से प्रोग्राम पर क्लिक करने के बाद एसेसीरिज के द्वारा वर्डपेड को ओपन किया जा सकता है।
इसका उपयोग डॉक्यूमेंट बनाने के लिए किया जाता है इसमें फाइल ,एडिट, व्यू , इन्सर्ट ,फॉर्मेट और हेल्प मैन्यू स्थित होता है ।
वर्डपेड में मैन्यू बार के साथ साथ टूलबार भी स्थित होती है जिसके द्वारा टूल्स का उपयोग करके कार्य को जल्दी से व आसानी से किया जाता है ।
इसमें फोर्मटिंग के लिए फॉन्ट, फॉन्ट साइज़ , बोल्ड, इटैलिक, अंडरलाइन आदि का उपयोग किया जाता है ।
इसके पेज के उपर रूलर दिखायी देता है जिसके द्वारा पेज के मार्जिन को सेट किया जा सकता है ।

कैलकुलेटर
कैलकुलेटर की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले स्टार्ट बटन पर क्लिक करके स्टार्ट मैन्यू से प्रोग्राम पर क्लिक करने के बाद एसेसीरिज के द्वारा कैलकुलेटर को ओपन किया जा सकता है ।
गणितीय गणना के लिए कैलकुलेटर का उपयोग किया जाता है इसमें कैलकुलेटर 2 प्रकार के होते हैं-
1) सामान्य गणना के लिए
2) वैज्ञानिक गणनाओं के लिए
इसमें 3 मैन्यू होते हैं- एडिट , व्यू और हेल्प

शटडाउन :- कम्प्यूटर को बंद करने के लिए स्टार्ट बटन का उपयोग किया जाता है उस पर दिए गये शटडाउन कमांड का उपयोग करके कम्प्यूटर को बंद किया जा सकता है ।
