- सामाजिक व आर्थिक सुधार कार्यक्रम सामान्यतया समाज के कमजोर वर्गों जैसे - महिलाओं, बच्चों, दिव्यांग, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति तथा वृद्धों इत्यादि के लिए चलाये जाते हैं।

बाल कल्याण:-
बाल –
18 वर्ष से कम उम्र आयु के बच्चों को ‘बाल’ की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है।

बाल कल्याण हेतु संवैधानिक प्रावधान –
(i) अनुच्छेद 15 (3) महिलाओं तथा बच्चों हेतु विशेष उपबंध का प्रावधान करता हैं।
(ii) अनुच्छेद 23 – मानव का दुर्व्यापार व बलात् श्रम में संरक्षण प्रदान करता है।
(iii) अनुच्छेद 24 – 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कारखानों, खदानों में कार्य पर प्रतिबंध का प्रावधान का उल्लेख करता है।
(iv) अनुच्छेद 21 (A) - शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
(v) अनुच्छेद (45) – 14 वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का प्रावधान करता हैं।
(vi) अनुच्छेद 51 (क) – माता – पिता के लिए बालकों को शिक्षा उपलब्ध कराने के कर्त्तव्य का प्रावधान करता है।

बाल – संरक्षण में सम्बन्धित अधिनियम:-
(1) अल्पवय व्यक्ति अधिनियम - 1956
(2) बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम - 2005
(3) बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम - 2006
(4) लैंगिक अपराधों से बालक का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) 2012
(5) किशोर न्याय (बालक देखरेख व संरक्षण अधिनियम - 2015)

बालक संरक्षण से सम्बन्धित संगठन:-
(i) बाल अधिकारिता संरक्षण निदेशालय
- स्थापना – 17 मई 2013
(ii) राजस्थान बाल संरक्षण आयोग
स्थापना – 23 फरवरी 2010
मुख्यालय – जयपुर
- इस आयोग की स्थापना बाल संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 के तहत की गई थी।
संरचना:- 1 अध्यक्ष तथा 6 सदस्य
वर्तमान अध्यक्ष – संगीता बेनीवाल

बाल संरक्षण नीति:-

राजस्थान राज्य बाल नीति 2013 – 26 अप्रैल 2013 को राजस्थान राज्य बाल नीति 2013 को लागू किया गया था। जिसका उद्देश्य बालकों का संरक्षण व सुविधायुक्त जीवन उपलब्ध कराना है।
- इस नीति में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को बालक की श्रेणी में शामिल किया गया है।

बाल संरक्षण से सम्बन्धित योजनाएँ:-
(i) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पोषण मिशन
(ii) समन्वित विकास कार्यक्रम (ICDC)
(iii) मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना
(iv) पालनहार योजना
(v) मुख्यमंत्री हुनर विकास योजना
(vi) खोया पाया पोर्टल

(i) प्रधानमंत्री पोषण मिशन:-
प्रारंभ – 2017 – 18
8 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री द्वारा झुँझुनूँ जिले से इस योजना का उद्घाटन किया गया।
समयावधि – 3 वर्ष
2017 – 18 –   315 जिले
2018 – 19 –   235 जिले
2019 – 20 –   सम्पूर्ण देश में
- प्रधानमंत्री पोषण मिशन में केन्द्र सरकार की भागीदारी 60% तथा राज्य सरकार की भागीदारी 40% है।
लक्ष्य:- “सही पोषण देश रोशन” के माध्यम से कुपोषण
मुक्त भारत का सपना साकार करना

उद्देश्य:-
(i) कुपोषण की समस्या में 2 % की कमी करना      
(ii) एनिमिया की समस्या में 2% की कमी करना
(iii) बौनेपन की समस्या 34% से घटाकर 25% करना
पोषण गान – पोषणम्- पोषणम्
पोषण पखवाड़ा – 8 मार्च से 22 मार्च 2019 तक पोषण पखवाड़ा मनाया गया।
पोषण माह – प्रतिवर्ष सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाता है।

(ii) I C D S (समन्वित बाल विकास स्कीम)
- प्रारंभ – 1975
इस योजना के तहत लाभार्थी:
0 – 6 वर्ष आयु तक के बच्चे
गर्भवती महिलाएँ
किशोरी बालिकाएँ

समन्वित बाल विकास योजना में शामिल सेवाएँ:-
समन्वित बाल विकास योजना में 6 सेवाओं को शामिल किया गया है जो कि निम्न हैं-

 

सेवा

लाभार्थी

(1)

पूरक पोषाहार

6 वर्ष तक के बच्चे, धात्री महिलाएँ व किशोरी बालिकाएँ

(2)

शाला पूर्व शिक्षा

3 से 6 वर्ष तक के बच्चें

(3)

स्वास्थ्य व पोषण सम्बन्धी शिक्षा

15 से 45 वर्ष की महिला व किशोरियाँ

(4)

टीकाकरण

0-6 वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिला

(5)

स्वास्थ्य परीक्षण

0-6 वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिला व धात्री महिला

(6)

रेफरल सुविधा

0-6 वर्ष तक के बच्चे, व गर्भवती महिला

ICDS के तहत आँगन बाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जाता है-
वर्तमान आँगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या – 62020

आँगनबाड़ी कर्मचारी
- आँगनबाड़ी कार्यकर्ता - वेतन 7500 ₹/ माह
- उपकार्यकर्ता - वेतन 5750 ₹/ माह
- सहायिका - वेतन 4250 ₹/ माह

नन्द घर:- ये आधुनिक सुविधा युक्त आँगनबाड़ी केन्द्र हैं।

खिलौना बैंक:-
प्रारम्भ – 2016 (अजमेर से)
- बच्चों के लिए खेल सामग्री व खिलौनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

आँगनबाड़ी में निम्न वर्ग हैं-
3 – 4 वर्ष आयु वर्ग ® किलकारी
4 – 5 वर्ष आयु वर्ग ® उमंग
5 – 6 वर्ष आयु वर्ग ® तरंग

केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहायता
पूरक पोषाहार        केन्द्र           राज्य
वेतन                     50%          50%

                            25%          75%
अन्य सेवा               60%          40%

 

समेकित बाल संरक्षण योजना (ICPS):-
इस योजना को वर्ष 2009 – 10 में प्रारंभ किया गया था वर्तमान में योजना को इस बाल संरक्षण सेवा नाम दिया गया है।

उद्देश्य:-
- खतरनाक/ विपरीत परिस्थितियों में फंसे बच्चों को वैधानिक व सेवा अवसंरचना सुरक्षा कवच की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना।
- इस योजना में केन्द्र सरकार की हिस्सेदारी 60% तथा राज्य सरकार की हिस्सेदारी 40 % है।

इस योजना के तहत कार्यक्रम:-
(i) राजस्थान राज्य बाल संरक्षण सोसायटी - 2011
(ii) राजस्थान दत्तक ग्रहण संसाधन एजेन्सी (कारा) - 2011
(iii) चाइल्ड हैल्प लाइन:- बच्चों की देखभाल व संरक्षण हेतु चाइल्ड हैल्प लाइन नंबर 1098 की शुरूआत की गई थी।

बाल अधिकार सप्ताह:-
13 से 20 नवम्बर 2020 के मध्य बाल अधिकार सप्ताह का आयोजन किया गया।
उद्घाटन:- मुख्यमंत्री द्वारा

इस सप्ताह के दौरान 2 योजनाओं की घोषणा की गई
(i) वात्सल्य योजना:-
13 नवम्बर 2020 को इस योजना का शुभारंभ किया गया।
लाभार्थी:-
संस्थाओं व संरक्षण केन्द्रों में रहने वाले बच्चे
लाभ:-
- इस योजना के तहत बच्चोंं की देखभाल हेतु वैकल्पिक परिवार की सुविधा प्रदान की जाएगी।
- वैकल्पिक माता – पिता को निश्चित अवधि के लिए प्रतिमाह 2000 ₹ की सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।

(ii) समर्थ योजना:-
- 13 नवम्बर 2020 को इस योजना का शुभारंभ किया गया।
उद्देश्य:-
18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ना।
योजना:-
- संस्थागत देखभाल से बाहर निकले बच्चों को व्यावसायिक व कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना तथा परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराना।

(3) मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना:-
प्रारंभ – अक्टूबर – 2018
लाभार्थी – आँगनबाड़ी केन्द्रों पर 6 वर्ष तक के बच्चे, किशोरी तथा गर्भवती महिलाएँ
- इस योजना के तहत लाभार्थियों को पोषाहार के साथ सप्ताह में दिन 3 दिन दुग्ध की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।

(4) पालनहार योजना:-
प्रारंभ – 8 फरवरी 2005 से
उद्देश्य:-
अनाथ बच्चों की देखभाल तथा शिक्षा व्यवस्था समाज में निकटतम रिश्तेदार व इच्छुक व्यक्ति द्वारा कराना।
पात्रता:-
(i) अनाथ बच्चे
(ii) न्यायिक कार्यवाही के तहत कारागार में कैद माता – पिता के बच्चे,          
(iii) विधवा पेंशन प्राप्त महिला के बच्चे             
(iv) पुनर्विवाह व नाते पर गई महिला के बच्चे      
(v)  एड्स व सिलिकोसिस पीड़ित के बच्चे
(vi) परित्यक्ता तलाकशुदा महिला के बच्चें
शर्त:-
(i) पालनहार के परिवार की आय वार्षिक 1, 20,000 ₹ तक  होनी चाहिए।        
(ii) बच्चे की आयु 18 वर्ष से कम होनी चाहिए।
लाभ:-
0–6 वर्ष आयु – प्रतिमाह 500 ₹ (आँगनबाड़ी जाना आवश्यक)
- 6 वर्ष–16 वर्ष आयु – प्रतिमाह 1000 ₹ (स्कूल जाना अनिवार्य)
Note:- प्रतिवर्ष 2000 ₹ जूते, वस्त्र तथा स्वेटर हेतु अतिरिक्त प्रदान किये जाएंगे।

(4) मुख्यमंत्री हुनर विकास योजना:-
- प्रारंभ – 19 जनवरी 2012
- लाभार्थी – सरकारी व अनुदानित संरक्षण केन्द्र व पालनहार योजना में शामिल बालक
योजना:-
17 से 21 वर्ष तक के आयु वर्ग का कौशल विकास करना।
इस योजना के तहत राजस्थान आजीविका मिशन के अन्तर्गत तकनीकी व व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा उच्च शिक्षा उपलब्ध करवाई जाएगी।
सहायता:-
- इसके तहत 50,000 ₹ या प्रशिक्षण लागत जो भी कम हो प्रदान की जाएगी।

(5) पहल योजना:-
प्रारंभ – 2013 से
उद्देश्य:-
(i) समाज के बाल अधिकार तथा कल्याण को सुनिश्चित करना।
(ii) बालकों के अधिकारों का हनन करने वाली संस्थाओं व व्यक्तियों पर कार्यवाही करना।

(6) खोया – पाया पोर्टल:-
प्रारंभ – 2 जून 2015
यह एक नागरिक सूचना आधारित पोर्टल है जो खोये हुये बच्चोंं को ढूढ़ने में मदद करता हैं।

विशेष योग्य जन कल्याण

-  विशेष योग्य जन को पूर्व में नि:शक्त जन नाम से जाना जाता था। नि:शक्त जन का तात्पर्य है शारीरिक रूप से किसी प्रकार से सक्षम नहीं होना।
- वर्तमान में विशेष योग्य जन को दिव्यांग जन के नाम से सम्बोधित किया जाता है।

संवैधानिक प्रावधान:-
- नि:शक्ता राज्य सूची का विषय है।
- अनुच्छेद 41 के अन्तर्गत विकलांगों के सम्बन्ध में विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है।

दिव्यांग जन से सम्बन्धित कानून:-
(i) दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम 2016:- इस अधिनियम के तहत दिव्यांगों की श्रेणी 16 से बढ़ाकर 21 कर दी गई।
(ii)  ट्रांसजेन्डर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण अधिनियम - 2019
(iii) नि:शक्ता व्यक्ति समान अवसर अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम - 1995

दिव्यांग जनों से सम्बन्धित संगठन:-
(i) नि:शक्त जन निदेशालय –
- स्थापना – 19 अक्टूबर 2011
- 1 मार्च 2012 से इस निदेशालय का नाम परिवर्तित कर विशेष योग्य जन निदेशालय कर दिया गया

(ii) राजस्थान ट्राँसजेण्डर कल्याण बोर्ड – 2016
कार्य:-
ट्राँसजेण्डर हितों की रक्षा करना तथा अधिकारों का संरक्षण करना
नीति:-
राजस्थान राज्य विशेष योग्यजन नीति 2012
22 जून 2012 को इस नीति को लागू किया गया था।
इस नीति के मुख्य उद्देश्य निम्न हैं-
(i) विशेष योग्य जनों को समान अवसर, स्वतंत्रता, स्वाभिमान प्रदान कराना।
(ii) सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सहभागिता को सुनिश्चित करना।
(iii) सामाजिक, आर्थिक पुनर्वास में नवाचार सुविधा उपलब्ध करना।

दिव्यांग कल्याण से संबंधित योजनाएँ:-

(1) मुख्यमंत्री नि:शक्त जन स्वरोजगार योजना
- प्रारंभ – 2013 – 14
लाभार्थी:-
व्यक्ति में नि:शक्तता 40% या 40% से ज्यादा हो,
आयु 18 वर्ष से 55 वर्ष तक तथा
परिवार की वार्षिक आय 2 लाख ₹ से ज्यादा नहीं हो।
लाभ:-
इस योजना के तहत 5 लाख ₹ तक का ­ऋण स्वरोजगार हेतु प्रदान किया जाता है। जिसमे 50,000 ₹ या 50% जो भी कम हो सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है तथा समय से भुगतान पर 5% की छूट प्रदान की जाती है।

(2) नि:शक्त जन सुखद दाम्पत्य जीवन योजना – 1997
लाभार्थी के लिए आवश्यक पात्रता:-
(i) 40% से अधिक नि:शक्तता प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
(ii) माता-पिता की आय – 2.50 लाख ₹ से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(iii) वर की आयु 21 वर्ष तथा वधु की आयु 18 वर्ष से ज्यादा होनी चाहिए।
लाभ:-
इस योजना के तहत दम्पत्ति को सुखद जीवन हेतु 50000 ₹ की सहायता प्रदान की जाती है तथा परिचय सम्मेलन आयोजित कराने वाली संस्था को 20000 ₹ सहायता राशि दी जाती है।

(3) आस्था योजना:-
प्रारंभ – 2004 – 05
लाभार्थी:-
वह परिवार जिसमें 2 या अधिक सदस्य 40% या इससे ज्यादा नि:शक्त हो तथा परिवार की आय 1.20 लाख ₹ से कम हो
लाभ:-
इस योजना के अन्तर्गत आस्था कार्ड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इस आस्था कार्ड के तहत B.P.L परिवारों के समान लाभ उपलब्ध कराए जाते हैं।

(4) विशेष योग्य जन छात्रवृत्ति योजना – 1981
लाभार्थी:- 40% या ज्यादा नि:शक्तता तथा परिवार की आय 2 लाख ₹ से कम हो।
लाभ:-
इस योजना के अन्तर्गत निम्न प्रकार से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है-
कक्षा 1 से 4 तक – 40 ₹ प्रतिमाह
कक्षा 5 से 8 तक – 40 ₹ प्रतिमाह

(5) सुगम्य भारत अभियान:
प्रारंभ – 3 दिसम्बर 2015
उद्देश्य:-
- दिव्यांग जनों की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना।

सुगम्य भारत अभियान तीन स्तम्भों पर आधारित है जो कि निम्न है-
(i) निर्मित वातावरण                     
(ii) परिवहन व सूचना उपलब्धता
(iii) सूचना प्रौद्योगिकी
- इस योजना के तहत दिव्यांगों हेतु सुगम्यता के लिए सार्वजनिक स्थल यथा स्कूल, कॉलेज, बस डिपो, रेलवे स्टेशन आदि स्थलों पर रैंप सुविधा, सुगम्य लिफ्ट, तथा ब्रेल सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।

(6) एडिप योजना – 1981
- लाभार्थी – दिव्यांजन
- उद्देश्य – दिव्यांगों को सशक्त करना
लाभ:-
इस योजना के तहत दिव्यांगों को कृत्रिम अंग, उपकरण, वैशाखी, ट्राइसाइकिल व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ब्लाइंड स्टिक उपलब्ध कराये जाते हैं।।

(7) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय नि:शक्तजन पेंशन योजना:-
प्रारंभ – फरवरी 2009
- पात्रता - नि:शक्त जन
परिवार B.P.L श्रेणी में तथा आयु 18 वर्ष से ज्यादा हो
- इस योजना के प्रतिमाह पेंशन सुविधा निम्न प्रकार से प्रदान की जाती है-


- 75 वर्ष से अधिक आयु होने पर 1250 ₹ प्रतिमाह पेंशन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
- आयु 18 वर्ष से अधिक होने व कुष्ठ रोग से ग्रसित होने पर प्रतिमाह 1500 ₹ पेंशन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

वृद्ध जन कल्याण

वरिष्ठ नागरिक:-
60 वर्ष से अधिक की आयु वर्ग के व्यक्तियों को वरिष्ठ नागरिकों की श्रेणी में सम्मिलित किया जाता है।
संवैधानिक प्रावधान:-
- अनुच्छेद 41 के तहत वृद्धावस्था के समय राज्य द्वारा सहायता का प्रावधान किया गया है।

वृद्ध जन कल्याण से संबंधित कानूनी प्रावधान:-
(i) राजस्थान सरकार माँ – बाप वरिष्ठ नागरिक भरण – पोषण नियम 2012
(ii) माँ-बाप व वरिष्ठ नागरिक देखभाल व कल्याण अधिनियम – 2007

वृद्ध जन कल्याण से संबंधित संगठन:-

(i) राजस्थान राज्य वरिष्ठ नागरिक कल्याण बोर्ड-
गठन – 5 जून 2002
कार्य – वृद्धजनों हेतु आधारभूत सुविधाओं का विकास करना।

(ii) राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक परिषद:
गठन – 1999
अध्यक्ष – केन्द्रीय सामाजिक कल्याण व अधिकारिता मंत्री
कार्य – वृद्धजन कल्याण हेतु नीतियों व कार्यक्रमों को तैयार करना।

वृद्ध जन नीति:-
(i) राजस्थान राज्य वृद्ध जन नीति 2004:- 8 दिसंबर 2004 को वृद्धजन नीति लायी गई।
(ii) राष्ट्रीय वृद्ध जन नीति – 1999

वृद्धजन कल्याण से संबंधित योजनाएँ

(1) राष्ट्रीय वयोश्री योजना:- इस योजना को वर्ष 2016 से प्रारंभ किया गया।
उद्देश्य:-
वरिष्ठ नागरिकों के लिए शारीरिक सहायता व जीवन यापन हेतु आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना।
- यह वरिष्ठ नागरिक कल्याण निधि द्वारा वित्त पोषित योजना है। जिसमें सहायक उपकरण जैसे – छड़ी, वॉकर्स, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग तथा दृश्य यंत्र इत्यादि उपलब्ध कराये जाते हैं।

(2) प्रधानमंत्री वय वंदन योजना:
4 मई 2017 को इस योजना को प्रारंभ किया गया था।
Note:- हाल ही में इस योजना की अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च 2023 तक कर दी गई हैं।
संचालन:- L.I.C द्वारा
लाभार्थी:- 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति
- इस योजना के तहत जमा पर पेंशन प्रदान की जाती है।


- पेंशन – प्रति 1.5 लाख के गुणक में प्रतिमाह 1000 ₹ उपलब्ध कराई जाती है।
- इस योजना के तहत पेंशन राशि न्यूनतम 1000 ₹ से अधिकतम 10,000 ₹ तक प्रतिमाह उपलब्ध कराई जाती है।
Note:- इस योजना के अन्तर्गत ब्याज दर घटाकर 7.4% की दी गई है अत: अब 1000 ₹ की पेंशन हेतु न्यूनतम जमा 1,62,162 ₹ की आवश्यकता है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना-
- प्रारंभ – 19 नवम्बर 2007
यह भारत सरकार द्वारा संचालित योजना है।
लाभार्थी:
60 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति जो बी.पी.एल परिवार से सम्बन्धित हो।
लाभ:-
- इस योजना के तहत प्रतिमाह पेंशन सुविधा निम्न प्रकार से उपलब्ध कराई जाती है-
60 वर्ष से 75 वर्ष तक आयु – 750 ₹ प्रतिमाह
75 वर्ष से अधिक – 1000 ₹ प्रतिमाह

मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना
Note:- जनवरी 2019 से इस योजना की नई दरों को लागू कर दिया गया है।

लाभार्थी:-
- 55 वर्ष से अधिक आयु की महिला तथा 58 वर्ष से अधिक आयु का पुरुष जिनकी पारिवारिक आय 48000 ₹ वार्षिक से कम हों
- इस योजना के तहत 55 वर्ष से अधिक आयु की महिला तथा 58 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष को 75 वर्ष की आयु तक 750 ₹ प्रतिमाह तथा 75 वर्ष से अधिक आयु होने पर 1000 ₹ प्रतिमाह पेंशन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना:
प्रारंभ – 12 सितम्बर 2019
लाभार्थी – 18 से 40 वर्ष आयु का किसान
लाभ – 60 वर्ष की आयु होने पर प्रतिमाह 3000 ₹ की पेंशन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
इस योजना की प्रीमियम राशि 55 ₹ से 200 ₹ तक है।

संचालन – L.I.C द्वारा

प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना:-
प्रारंभ – 22 जुलाई 2019
लाभार्थी – लघु व्यापारी जिसका टर्न ऑवर 1.5 करोड़ ₹ प्रतिवर्ष हो
उम्र 18 – 40 वर्ष
लाभ:-
इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद 3000 ₹ प्रतिमाह पेंशन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
- प्रीमियम राशि: 55 से 200 रुपये मासिक
संचालन – L.I.C द्वारा

सामाजिक व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का कल्याण

(1) अम्बेडकर फैलोशिप योजना:-
प्रारंभ - 28 मार्च 2017 से
उद्देश्य:- S.C वर्ग को P.H.D हेतु प्रोत्साहित करना।
लाभार्थी:-
अनुसूचित जाति वर्ग का विद्यार्थी जिसके परास्नातक प्राप्तांक 55% से ज्यादा हो तथा जिसकी आयु 35 वर्ष से कम हो।
लाभ:-
- इस योजना के तहत P.H.D हेतु प्रतिछात्र 5.40 लाख ₹ छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी प्रतिमाह अधिकतम – 15000 ₹
- इस योजना के तहत तीन वर्ष हेतु छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
Note: - इस योजना के तहत प्रतिवर्ष 6 लोगों का चयन किया जाता है। एक परिवार के अधिकतम 2 सदस्यों की इस छात्रवृत्ति की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

(2) अम्बेडकर अन्तर्राष्ट्रीय P.H.D योजना:
प्रारंभ – 28 मार्च 2017 से
उद्देश्य:-
S.C वर्ग के छात्रों को विदेशों से P.H.D हेतु प्रोत्साहित करना।
लाभार्थी:
S.C वर्ग का छात्र जिसकी अधिकतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए तथा परास्नातक में प्राप्तांक 55% से अधिक हों।
इस योजना के तहत प्रति वर्ष 5 छात्रों का चयन किया जाता है।
- प्रतिछात्र विदेश से P.H.D हेतु तीन वर्षों के लिए 25 लाख ₹ की सहायता जो निम्न प्रकार से प्रदान की जाती है-
प्रथम वर्ष – 10 लाख ₹
द्वितीय वर्ष – 10 लाख ₹
तृतीय वर्ष – 5 लाख ₹

(3) अनुप्रति योजना:-
प्रारंभ – 2005 – 06
वर्ष 2012 से इस योजना का पुनर्गठन किया गया।
- लाभार्थी:- SC, ST, MBC, अल्पसंख्यक वर्ग, B.P.L व दिव्यांग
यह एक छात्रवृत्ति योजना है जिसके अन्तर्गत निम्न प्रकार से सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है।

 

प्रारम्भिक परीक्षा

मुख्य परीक्षा

साक्षात्कार

कुल

आई.ए.एस

65000 ₹

30000 ₹

5000 ₹

1 लाख ₹

आर.ए.एस.

25000 ₹

20000 ₹

5000 ₹

50,000 ₹

- I I T, IIM, AIMS, BHU, NITS, I.I.I.T आदि में प्रवेश पर 40,000 – 50,000 ₹ छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

(4) मुख्यमंत्री निशुल्क कोचिंग योजना:-
प्रारंभ – वर्ष 2017 – 18
- इस योजना का संचालन सामाजिक अधिकारिता विभाग द्वारा किया जाता है।
- इस योजना के अन्तर्गत I.I.T व मेडिकल की तैयारी करने हेतु छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
- वर्ष 2017 – 18 में इस योजना को जयपुर व कोटा में संचालित किया गया।
- वर्ष 2019 – 20 में इसे राज्य के सभी संभागों + सीकर + नागौर जिले के कुचामन सिटी में इस योजना को संचालित कर दिया गया।

(5) अम्बेडकर पुरस्कार योजना:-
प्रारंभ – 2005 से
इस योजना के तहत प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। जैसे-
(i) अम्बेडकर शिक्षा पुरस्कार:-
S.C/ST वर्ग के छात्र जिन्होंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं व 12वीं कक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त किये हैं, उन्हें अम्बेडकर शिक्षा पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
पुरस्कार राशि – 51000 ₹

(ii) अम्बेडकर सामाजिक सेवा पुरस्कार:-
लाभार्थी- SC/ST वर्ग को मुख्य धारा में लाने हेतु कार्य करने वाला व्यक्ति
पुरस्कार राशि – 1, 00,000 ₹    

(iii) अम्बेडकर महिला कल्याण पुरस्कार:-
लाभार्थी:- महिला उत्थान हेतु कार्य करने वाला व्यक्ति
पुरस्कार राशि – 51000 ₹

(iv) अम्बेडकर न्यायिक पुरस्कार:-
लाभार्थी:- S.C/ST वर्ग को नि:शुल्क न्यायिक सुविधा उपलब्ध कराने वाला अधिवक्ता
पुरस्कार राशि – 51000 ₹

(6) अम्बेडकर सम्बल पुरस्कार योजना:-
प्रारंभ – 14 अप्रैल 2016
उद्देश्य:-
दलित समाज को आर्थिक रूप से सशक्त करना।
इस योजना के अन्तर्गत आजीविका सुधार, उच्च शिक्षा सुविधा, नवाचार उद्यमिता इत्यादि की सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही हैं।
नवाचार:- अम्बेडकर स्टार्ट अप योजना

(7) डॉ. सविता बेन अन्तरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना:
उद्देश्य:- अन्तरजातीय विवाह को प्रोत्साहन करना।
लाभार्थी:- ऐसी दम्पत्ति जिनमें 1 SC वर्ग से तथा दूसरा सवर्ण वर्ग से हो। जिनकी अधिकतम आयु 35 वर्ष हो
पुनर्विवाह नहीं हो।
राजस्थान के मूल निवासी हो
लाभ:-
इस योजना के अन्तर्गत सवर्ण वर्ग के युवक व युवती के S.C वर्ग की युवती व युवक का विवाह होने पर 5 लाख ₹ की सहायता राशि प्रदान की जाती है। (1 अगस्त, 2017 से प्रभावी) यह सहायता राशि निम्न प्रकार से प्रदान की जाती है-
2.50 लाख ₹ - विवाह के समय
2.50 लाख ₹ - कुछ समय दाम्पत्य जीवन व्यतीत करने के बाद

(8) सम्बल ग्राम विकास योजना:
2001 की जनगणना के अनुसार जिस गांव में SC वर्ग की आबादी 40% से ज्यादा हो उसे सम्बल ग्राम कहा जाता है।
- इस योजना में अन्तर्गत गांव में आधारभूत अवसंरचना निर्माण, सिंचाई व सड़क, पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

(9) स्टैण्ड अप इंडिया:-
प्रारंभ -2016
उद्देश्य:- उद्यमिता व विनिर्माण को मजबूत करना।
लाभार्थी:- SC, ST व महिला
लाभ:-
इस योजना में अन्तर्गत उद्यम स्थापना हेतु 10 लाख ₹ से 1 करोड़ ₹ तक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
स्टैण्ड अप इंडिया योजना को प्रोत्साहित करने हेतु 10 हजार करोड़ रुपये का स्टैण्ड अप फण्ड स्थापित किया गया है।
बजट 2021 – 22 में स्टैण्ड अप योजना के तहत आय कर में 1 वर्ष की ओर छूट प्रदान की गई है।

(10) भैरोसिंह शेखावत स्वरोजगार योजना:-
प्रारंभ – 13 मई 2018
लाभार्थी:- ST, SC, MBC, OBC
लाभ:-
इस योजना के तहत स्वरोजगार हेतु 50 हजार ₹ की ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।