- केंद्र सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा की उपलब्धता को सुनिश्चित करने हेतु तीन तरह के कार्यक्रम चलाये गये थे-
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली- PDS-1960
एकीकृत बाल विकास योजना- ICDS-1975

मिड डे मिल- MDM-1995

- मिड डे मिल योजना
- MDM कक्षा एक से पाँचवी तक के बच्चों को पूरक पोषाहार की सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु था।
- 15 अगस्त 1995 से प्रारंभ की गई

-   MDM का उद्देश्य
- पूरक पोषाहार सुविधा उपलब्ध करवाना
- विद्यालयों में बालकों की उपस्थिति बढ़ाना
- विद्यालयों में बालकों का नियमित रूप से आगमन तथा विद्यालय में ठहराव सुनिश्चित करना
- स्कूल बीच में छोड़ने की प्रक्रिया समाप्त करना
- यह विश्व का सबसे बड़ा पोषाहार कार्यक्रम है।
- वर्ष 2008-09 से MDM को दायरे को बढ़ाते हुये सरकारी विद्यालय, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय तथा सर्वशिक्षा अभियान संबंधित विद्यालयों के कक्षा एक से आठ तक के अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया।
- वर्तमान में  66496 विद्यालयों में- 
कक्षा 1 से 5 - 41.03 लाख विद्यार्थी
कक्षा 6 से 8 - 21.62 लाख विद्यार्थी अर्थात 62.65 लाख विद्यार्थी लाभार्थी हैं।

MDM में लाभ

कक्षा 1 से 5

 कैलोरी

 450 ग्राम

 प्रोटीन

 12 ग्राम

 खर्च 

 4.48 रू. प्रतिदिन

 

कक्षा 6 से 8

700 ग्राम

20 ग्राम

6.71 रू प्रतिदिन

- भोजन पकाने का कार्य राज्य स्कूल निगरानी समिति, अन्नपूर्णा सहकारी समितियों या केंद्रीय रसोई द्वारा किया जाएगा।

- राजस्थान में केंद्रीय रसोईयाँ
- राजस्थान में 12 केंद्रीय रसोईयाँ वर्तमान में 10 जिलों में संचालित हो रही है।
- जिनके द्वारा अलवर, अजमेर, जयपुर, जोधपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा,झालवाड़, उदयपुर, बीकानेर, चित्तौड़ में  MDM का भोजन तैयार किया जा रहा है।
- जब योजना शुरू हुई थी तब पूरा हुआ भोजन नहीं दिया जाता था। प्रति बालक प्रतिमाह 3 kg. गेहूँ दिया जाता था। प्रतिदिन 100 gm. गेहूँ की सुविधा उपलब्ध थी। बाद में 3 माह में एक बार 9 kg. गेहूँ दिया जाने लगा। वर्तमान में बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जाता है।

 अन्नपूर्णा सहकारी समिति
- 1204 विद्यालयों में MDM की आपूर्ति अन्नपूर्णा  सहकारी समितियों द्वारा की जा रही हैं।

 रसोई सहायक
- विद्यालयों में भोजन पकाने हेतु रसोई सहायक को 1320 रू. प्रतिमाह वेतन दिया जाता है।

 उत्सव भोज योजना
- इस योजना में जन सहभागिता व निजी क्षेत्र को भोजन सुविधा हेतु अनुमति दी गई।
- जन्म दिवस, सालगिरह, उत्सव पर भोजन, भोजन सामग्री व बर्तन भेंट करना आदि हैं।
- MDM के तहत 1 अगस्त 2016 से निगरानी व्यवस्था को लागू कर दिया गया हैं। जिससे इस योजना के तहत भोजन की गुणवत्ता जाँची जाती है।

 लंच विथ लाडो
- झुंझुनूँ के तत्कालीन जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने सहकारी स्कूलों में अचानक से पहुँच कर बालिकाओं के साथ MDM के तहत भोजन करना प्रारंभ किया जिससे भोजन की गुणवत्ता पता चले।

 इंदिरा रसोई योजना

- 20 अगस्त 2020 से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा इस योजना को प्रारंभ किया गया।

- स्लोगन- ‘कोई भूखा ना सोए’
 रसोई योजना में थाली खर्च-20 रू जिसमें 8 रू. लाभार्थी द्वारा तथा 12 रू राज्य सरकार द्वारा अनुदान दिया जाएगा।
- इस योजना में प्रतिवर्ष 100 करोड़ रू. खर्च का प्रावधान रखा गया है।
- NGO, ट्रस्ट, संस्था रसोई संचालित करने पर 12 रू. प्रति थाली अनुदान राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
- एक स्थान पर रसोई संचालित की जा रही है जहाँ बैठकर 8 रू में भोजन की थाली प्राप्त होती है जिसमें 100 gm दाल, 100 gm सब्जी, 250 gm रोटी तथा अचार दिया जाता है।
- यह योजना 213 नगर निकायों में संचालित है जिनमें 10 निगम निगम, 34 नगर परिषद तथा 169 नगर पालिका क्षेत्र

- Note-इस योजना ने अन्नपूर्णा रसोई योजना की जगह इंदिरा रसोई योजना ले लिया है।