राष्ट्रपति

राष्ट्रपति की शक्तियाँ-

♦ कार्यपालिका शक्तियाँ:-
- अनुच्छेद-53 के अनुसार संघीय कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है। इसके कारण राष्ट्रपति संघीय कार्यपालिका का प्रमुख होता है।
अनुच्छेद 75 - मंत्रियों से संबंधित अन्य प्रावधान, जैसे- नियुक्त, कार्यकाल, वेतन इत्यादि।
- अनुच्छेद 76 – महान्यायवादी की नियुक्ति मंत्रिपरिषद् की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद-77 के अनुसार संघ सरकार का समस्त प्रशासन कार्य राष्ट्रपति के नाम से होता है।
- अनुच्छेद-78 के अनुसार राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री से प्रशासन के सन्दर्भ में सूचना प्राप्त करने का अधिकार है।
- अनुच्छेद-155 राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद-239 संघ शासित क्षेत्रों का प्रशासन राष्ट्रपति के नाम से सम्पादित किया जाता है।
- अनुच्छेद-239AA में यह उल्लिखित है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जायेगी तथा मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति द्वारा की जायेगी। [69वाँ संविधान संशोधन 1992]
- संघ शासित प्रदेश प्रशासन अधिनियम 1963 के अनुसार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद-338 के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद-338A के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद-338B के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

विधायी शक्तियाँ
- अनुच्छेद-80(3) के अनुसार राष्ट्रपति राज्य सभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करता है, जिनका संबंध साहित्य, कला, विज्ञान, समाजसेवा जैसे विषयों में विशेष ज्ञान से है।
- यह राष्ट्रपति का स्वविवेक नहीं है, गृहमंत्रालय की सलाह पर करता है।
अनुच्छेद-85 के अनुसार- राष्ट्रपति संसद के सत्र आहूत करता है, वह किसी सदन का सत्रावसान कर सकता है तथा लोकसभा को विघटित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है।
अनुच्छेद-86 के अनुसार- राष्ट्रपति संसद के किसी एक सदन में या दोनों सदनों को एक साथ समवेत कर अभिभाषण कर सकता है।
- अनुच्छेद-108 के अनुसार- संसद के दोनों सदनों में 6 माह से अधिक का गतिरोध होने की स्थिति में संयुक्त बैठक आहूत कराता है जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।
नोट- साधारण विधेयक या वित्त विधेयक के संबंध में ही संयुक्त बैठक का प्रावधान है।
- आज तक संसद की तीन संयुक्त बैठक हुई है।

क्रसं

समय

कारण

राष्ट्रपति

अध्यक्षता

प्रधानमंत्री

1

06-05-1961

दहेज विरोध अधिनियम

राजेन्द्र प्रसाद

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा

नेहरू

2

16-05-1978

बैंकिंग सेवा अधिनियम

एन.एस. रेड्डी

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा

मोरारजी देसाई

3

26-03-2002

आतंकवाद निरोधक अधिनियम

के.आर. नारायण

लोकसभा उपाध्यक्ष

अटल बिहारी वाजपेयी

अध्यादेश जारी करने की शक्ति
अनुच्छेद-123 के अनुसारराष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है। अध्यादेश की अधिकतम अवधि 6 माह तथा सदन की पुन: बैठक के बाद 6 सप्ताह तक बनी रहती है। राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश को किसी भी समय वापिस लिया जा सकता है। अध्यादेश का प्रभाव वैसा ही होता है जैसा कि संसद के किसी अधिनियम का होता है। 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के माध्यम से अध्यादेश को न्यायिक समीक्षा से बाहर कर दिया गया है परन्तु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम,1978 के माध्यम से इसे फिर से न्यायिक समीक्षा के अंतर्गत कर दिया गया है।

न्यायिक शक्तियाँ :-
- अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति द्वारा किसी व्यक्ति की सजा को कम या माफ करना।
- अनुच्छेद 124 इस अनुच्छेद के तहत‌ राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है। (अनुच्छेद 124 (2)) उन्हें पदमुक्त करता है (अनुच्छेद 124 (4) तथा उन्हें शपथ दिलाता है (अनुच्छेद 124 (6)
- अनुच्छेद 126 इस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय में कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद 217 इसके तहत राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है तथा उन्हें पद मुक्त करता है।
- अनुच्छेद 223 इसके तहत उच्च न्यायालय में कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद-143 के अनुसार राष्ट्रपति को दो श्रेणियों के मामले में उच्चतम न्यायालय से परामर्श लेने की शक्ति प्रदान की गई है।
- यदि राष्ट्रपति को यह प्रतीत होता है कि
1. विधि या तथ्यों का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ या होने की सम्भावना है,
2. ऐसी प्रकृति का और ऐसे सार्वजनिक महत्त्व का है कि उस पर उच्चतम न्यायालय की राय लेना आवश्यक है तो वह उस प्रश्न को विचारार्थ भेज सकता है।
- दूसरी श्रेणी में संविधान के प्रारम्भ में पहले अर्थात् 26 जनवरी, 1950 से पूर्व की गई सन्धियाँ, करारों, समझौतों आदि किसी विषयों से संबंधित विवाद आते हैं।

वित्तीय शक्तियाँ
- अनुच्छेद 109 इसके तहत धन विधेयक राष्ट्रपति की अनुमति से लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
- अनुच्छेद 112 भारत सरकार का वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) राष्ट्रपति के नाम से प्रस्तुत किया जाता है।
- अनुच्छेद-280 के अंतर्गत राज्य व केंद्र के मध्य राजस्व बँटवारे के लिए वित्त आयोग का गठन करता है।

Ist वित आयोग के अध्यक्ष – के.सी. नियोगी (1952-1957)

15th वित आयोग के अध्यक्ष – एन. के. सिंह (2020-2025)

- अनुच्छेद 267 भारत सरकार की आकस्मिक निधि कोष पर राष्ट्रपति का नियंत्रण होता है।

वीटो शक्ति
- वीटो (निषेधाधिकार) चार प्रकार के होते है-
1. आत्यंन्तिक निषेधाधिकार (Abosalute Veto)
2. निलम्बित निषेधाधिकार (Suspensive Veto)
3. जेबी निषेधाधिकार (Pocket Veto)
4. विशेषित निषेधाधिकार (Qulified Veto)

नोट: उपर्युक्त वीटो में आत्यंन्तिक निषेधाधिकार, निलम्बित निषेधाधिकार व जेबी निषेधाधिकार भारत के राष्ट्रपति को प्राप्त है।

1. आत्यंन्तिक निषेधाधिकार – व्यवस्थापिका द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति देने से इंकार करने हेतु। इस वीटो का प्रयोग किया जाता है।
(सन् 1954 में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने PEPSO विधायक के सन्दर्भ में इस वीटो का प्रयोग किया था।

2. निलम्बित निषेधाधिकार – इस वीटो के तहत व्यवस्थापिका द्वारा पारित विधयक को राष्ट्रपति पुन: विचार हेतु लौटा सकता है।

3. जेबी निषेधाधिकार – इस वीटो के तहत व्यवस्थापिका द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति न स्वीकृति दें, न अस्वीकृत करें तथा न ही पुन:विचार हेतु  लौटाये।
(सन 1986 ज्ञानी जैल सिंह द्वारा डाक विधेयक के सन्दर्भ में इस वीटो का प्रयोग किया था। )      
- अनुच्छेद-111 के अनुसार कोई विधेयक पारित किये जाने पर राष्ट्रपति के समक्ष अनुमति के लिए भेजा जाता है, संसद द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति प्रदान करने संबंधी शक्ति को ही राष्ट्रपति की वीटो शक्ति कहा जाता है। यह राष्ट्रपति की विधायी शक्ति का अंग है।
- संसद द्वारा पारित किसी विधेयक पर अनुमति रोकता है अथवा उसे संसद के दोनों सदनों या विधानमंडलों को पुनर्विचार के लिए लौटाता है तो उसे वीटो कहा जाता है।
- 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 के माध्यम से राष्ट्रपति को संविधान संशोधन विधेयक पर सहमति देने के लिए बाध्य कर दिया गया।

राष्ट्रपति की आपातकालिन शक्तियाँ
संविधान के भाग-18 में राष्ट्रपति को संकटकालीन अधिकार प्रदान किये गये हैं। जो निम्न हैं-

अनुच्छेद-352
- यह एक राष्ट्रीय आपात है जिसका प्रयोग राष्ट्रपति युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के दौरान करता है। राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा के लिए राष्ट्रपति को मंत्रिमण्डल की लिखित सहमति आवश्यक है व इसको एक माह के भीतर संसद द्वारा अनुमोदन किया जाना आवश्यक है।
- अब तक भारत में अनुच्छेद-352 का प्रयोग 3 बार किया गया है।

क्र.

सं.

समय

कारण

राष्ट्रपति

प्रधानमंत्री

1

26-10-1962

से 10-01-1968 तक

युद्ध व बाहरी आक्रमण

राधाकृष्ण

जाकिर हुसैन

नेहरू

लाल बहादुर शास्त्री

इन्दिरा गांधी

2

03-12-1971

से 17-03-1977 तक

युद्ध व बाहरी आक्रमण

वी.वी. गिरी

फखरुद्दीन अहमद

बी.डी. जत्ती

इन्दिरा गांधी

मोरारजी देसाई

3

25-06-1975 से 21-03-1977

आन्तरिक शांति

फखरुद्दीन अली अहमद

बी.डी. जत्ती

इन्दिरा गांधी

मोरारजी देसाई

- 44वें संशोधन अधिनियम द्वारा 1978 में आंतरिक अशांति के स्थान पर अनुच्छेद-352 में सशस्त्र विद्रोह नामक शब्द प्रतिस्थापित किया गया था।

अनुच्छेद-356
- यह एक राज्यीय आपात जिसे राष्ट्रपति शासन भी कहा जाता है। इसका प्रयोग किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता के बाद किया जाता है।
- इसका प्रयोग राष्ट्रपति संबंधित राज्य के राज्यपाल के प्रतिवेदन के बाद करता है। ऐसी उद‌्घोषणा की स्वीकृति संसद से दो माह के भीतर लेना आवश्यक है। इसका अधिकतम प्रयोग 3 वर्ष की अवधि तक किया जा सकता है।

अनुच्छेद-360
- यह एक वित्तीय आपात जिसका प्रयोग आर्थिक संकट के दौरान किया जाता है।
- इसका अभी तक भारत में प्रयोग नहीं हुआ है।

अब तक के राष्ट्रपति एवं उनका कार्यकाल

             

नाम

कार्यकाल

1.

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

26 जनवरी, 1950 से 13 मई, 1962 तक

2.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

1962 से 1967 तक

3.

डॉ. जाकिर हुसैन

1967 से 1969 तक

4.

वी.वी. गिरी

3 मई, 1969 से 20 जुलाई, 1969 तक

5.

न्यायमूर्ति एम हिदायतुल्लाह

20 जुलाई, 1969 से 24 अगस्त, 1969 तक

6.

वी.वी. गिरी

1969 से 1974 तक

7.

फखरुद्दीन अली अहमद

1974 से 1977 तक

8.

बी.डी. जत्ती

11 फरवरी, 1977 से 25 जुलाई,1977 तक

9.

नीलम संजीव रेड्डी

1977 से 1982 तक

10.

ज्ञानी जैल सिंह

1982 से 1987 तक

11.

आर. वेंकटरमन

1987 से 1992 तक

12.

डॉ. शंकरदयाल शर्मा

1992 से 1997 तक

13.

डॉ. के.आर. नारायणन

1997 से 2002 तक

14.

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

2002 से 2007 तक

15.

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल

2007 से 2012 तक

16.

प्रणव मुखर्जी

2012 से 2017 तक

17.

 रामनाथ कोविंद

25 जुलाई, 2017 से अब तक