भारतीय राज्यों के प्रति ब्रिटिश नीति
- B.T.C कंपनी भारत में अपने विशाल साम्राज्य की स्थापना निम्न चरणों पूर्ण की:
1. कंपनी द्वारा सफलता के लिए संघर्ष (1740-1765 ई.)
2. घेरे की नीति (1765-1813 ई.)
3. अधीनस्थ पार्थक्य की नीति (1813-1857 ई.)
4. अधीनस्थ संघ की नीति (1858-1935 ई.)
5. बराबरी की नीति (1935-1947 ई.)
1. रियासतों के समक्ष आने की नीति: (1740-1765 ई.)
- भारत में व्यापारिक कंपनी से – राजनैतिक कंपनी बनाने का प्रयास डुप्ले द्वारा किया गया।
- इलाहाबाद संधि यह संधि रॉबर्ट क्लाइव और शाहआलम द्वितीय के बीच हुई। इस संधि के तहत बंगाल, बिहार व उड़ीसा के दीवानी अधिकार अंग्रेजों को प्राप्त हो गए।
2. घेरे की नीति: (1765-1813 ई.)
- इस नीति का निर्माता – वॉरेन हेस्टिंग्स
- मुख्य उद्देश्य – बफर स्ट्टे बनाना
- 1798 ई. लॉर्ड वेलेजली जब गवर्नर जनरल बनकर आया तब इसी नीति के तहत उसने सहायक संधियाँ की
- सर्वप्रथम – 1798 ई. में हैदराबाद के निजाम ने सहायक संधि की वही 1809 ई. की राजस्थान की समस्त रियासतों ने भी सहायक संधि स्वीकार कर ली।
- इस नीति तहत विशाल ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना हुई।
3. अधीनस्थ पार्थक्य की नीति: (1813-1857 ई.)
- इस नीति के तहत् B.T.C का लक्ष्य – साम्राज्य स्थापित कर सर्वश्रेष्ठता की ओर अग्रसर होना था।
- इसके तहत रियासतों के – ब्राहा मामले कंपनी के अधीन जबकि आंतरिक मामलों में उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की गई।
- इसके तहत रियासतों को एक अंग्रेजी रेजिमेंट रखना अनिवार्य
- इस रेजिमेंट ने रियासतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना प्रारंभ
* 1833 के चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के व्यापारिक अधिकारों को समाप्त कर अब केवल राजनैतिक मामलों में पूर्ण अधिकार प्रदान किया।
- इस नीति के तहत – 1834 ई. में कंपनी के डायरेक्ट्रर्स ने रियासतों के विलय करने का निश्चित
- लॉर्ड विलयम बैंटिग सम्पूर्ण भारत का प्राम गवर्नर जनरल के आने बाद रियासतों का विलय प्रारंभ
जैसे –
- मैसूर - 1831 ई., कचार - 1832 ई., कुर्ग - 1834 ई., जयन्तिया - 1835 ई. बैंटिग के द्वारा इन रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय
- करनूल व माण्डवी - 1839 ई., कोलाबा - 1840 ई., जालोर - 1840 ई. इनका विलय – ऑकलैण्ड के समय – ब्रिटिश साम्राज्य में
3. अधिनस्थ पार्थक्य नीति:
- बैंटिग व ऑकलैण्ड – रियासतों ब्रिटिश साम्राज्य में विलय
लार्ड इलहौजी की व्यपगन नीति
- राज्य हड़प नीति
- गोद निषेध प्रथा
- डॉक्टरीन सिद्धांत
गोद निषेध प्रथा – राजा की उत्तरजीवी संतान नहीं होने पर – राज्य ब्रिटिश सत्ता में विलय
- लॉर्ड डलहौजी को ही आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में जाना जाता है।
- डलहौजी के शासन काल में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की स्थापना हुई थी।
भारत में तीन प्रकार की रियासतें
1. ऐसी रियासतें जो कभी किसी के अधीन नहीं रही और न ही किसी प्रकार का कर अदा किया।
- ऐसी रियासतें को अनुमति का अधिकार नहीं था
2. ऐसी रियासतें जो मुगल सम्राट के अधीन या पेशवा के अधीन रही उन्हें अग्रेंजों से अनुमति आवश्यक थी।
3. जो अंग्रेजों ने शासकों द्वारा प्रदत्त सनद (आज्ञा पत्र) द्वारा स्थापित की हो। यहाँ पर अंग्रेजों ने गोद लेने की अनुमति प्रदान नहीं की अपितु सीधे ही हड़प लिया।
- सर्वप्रथम डलहौजी ने 1848 ई. में सतारा को हड़पा था।
- 1856 में अवध पर कुशासन का आरोप लगाकर 13 फरवरी, 1856 को इसका ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया।
Note: 1849 ई. में पंजाब का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में किया गया।
अधीनस्थ संघ का नीति: (1858-1935 ई.)
- 1857 ई. की क्रांति के बाद- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हो गया था।
- भारत का शासन सीधे ब्रिटिश ताज के अधीन कर दिया गया।
- वायसराय का पद सृजित किया गया। गवर्नर जनरल के पद के स्थान पर।
- लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वायसराय बने:
- 1858 ई. में ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया की घोषणा के साथ ही भारतीय रियासतों हेतु अधीनस्थ संघ की नीति प्रारंभ
Note:- कम्पनी के समस्त अधिकार छीन लिए गए।
- 1876 ई. के राजकीय उपाधि अधिनियम द्वारा – महारानी विक्टोरिया को ‘केसर-ए-हिंद’ की उपाधि व उसे भारत की सम्राज्ञी कर दिया गया।
- इसी कारण अब सरकार को रियासतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार मिल गया।
लॉर्ड कर्जन (1899-1905 ई.) ने रियासतों के संरक्षण व अनाधिकार नीति का प्रारंभ किया- प्रजा के प्रशासन की तरफ ध्यान देने का निर्देश दिया
- लॉर्ड कर्जन ने सिंचाई विभाग, पुलिस आयोग और विश्व विद्यालय आयोग की स्थापना की।
- रेलवे बोर्ड की स्थापना (1905 ई.) का गठन
- “भारतीय पुरातत्व विभाग” की स्थापना भी लॉर्ड कर्जन का काल में हुई थी।
1905 ई. नरेन्द्र मंडल - अधीनस्थ संघ नीति पर जोर दिया
उद्धाटन – फरवरी, 1921
- इसके तहत रियासतों का तीन श्रेणियाँ में विभक्त किया गया।
1. पूर्ण वैधानिकता प्राप्त रियासतें - इन्हें सीधा प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया - कुल 109 रियासतें थी।
2. ऐसी रियासतें जिनके वैधानिक व क्षेत्राधिकार सीमित वह आपस में सहमति से 12 प्रतिनिधियों का चयन करें = 127 रियासतें
3. जागीर रियासत या सामन्तराही रियासतें = 326 रियासतें
Note:- नरेन्द्र मण्डल सलाहकारी व परामर्शवादी निकाय था।
- इसके असफल होने पर - 1927 ई. में बटलर समिति की स्थापना की गई- इस समिति ने रियासतों के मामलों में क्राउन को सर्वश्रेष्ठ माना तथा उनके रीति– रिवाजों की तरफ ध्यान देने की सिफारिश की
बराबर की नीति (1935-1947 ई.)
- 1919 ई. में प्रांतों अद्वैध शासन
- 1935 ई. के अधिनियम द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर कैन्द्र में द्वैध शासन की व्यवस्था की गई।
- इस अधिनियम द्वारा भारतीय संघ की विधानसभा में भारतीय शासकों को 125 स्थान तथा विधान परिषद् में 104 स्थान प्रदान किए गया।
Note:- यह संघ अस्तित्व में नहीं आ पाया।