विश्व के विभिन्न राज्यों में राजतंत्र, श्रेणी तंत्र, अधिनायक तंत्र व लोकतंत्र आदि शासन प्रणालियाँ प्रचलित रही हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से अवलोकन करें तो भारत में लोकतंत्रात्मक शासन प्रणाली का आरंभ पूर्व वैदिक काल से ही हो गया था। प्राचीनकाल में भारत में सुदृढ़ लोकतांत्रिक व्यवस्था विद्यमान थी। इसके साक्ष्य हमें प्राचीन साहित्य, सिक्कों और अभिलेखों से प्राप्त होते हैं। विदेशी यात्रियों एवं विद्वानों के वर्णन में भी इस बात के प्रमाण हैं। वर्तमान संसद की तरह ही प्राचीन समय में परिषदों का निर्माण किया गया था, जो वर्तमान संसदीय प्रणाली से मिलती-जुलती थी। गणराज्य या संघ की नीतियों का संचालन इन्हीं परिषदों द्वारा होता था। इसके सदस्यों की संख्या विशाल थी। उस समय के सबसे प्रसिद्ध गणराज्य लिच्छवि की केंद्रीय परिषद् में 7,707 सदस्य थे वहीं यौधेय की केंद्रीय परिषद् के 5,000 सदस्य थे। वर्तमान संसदीय सत्र की तरह ही परिषदों के अधिवेशन नियमित रूप से होते थे। प्राचीन गणतांत्रिक व्यवस्था में आजकल की तरह ही शासक एवं शासन के अन्य पदाधिकारियों के लिए निर्वाचन प्रणाली थी। योग्यता एवं गुणों के आधार पर इनके चुनाव की प्रक्रिया आज के दौर से थोड़ी भिन्न जरूर थी। सभी नागरिकों को वोट देने का अधिकार नहीं था। ऋग्वेद तथा कौटिल्य साहित्य ने चुनाव पद्धति की पुष्टि की है, परंतु उन्होंने वोट देने के अधिकार पर रोशनी नहीं डाली है।
भारत में लोकतंत्र
लोकतंत्र का अर्थ :- आधुनिक समय में लोकतंत्र विश्व की सर्वश्रेष्ठ शासन प्रणाली के रूप में स्थापित है क्योंकि इसके अन्तर्गत शासन की अन्तिम शक्ति का निवास स्थान जनता में होता है, जिसका प्रयोग जनता प्रत्यक्ष अथवा अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से करती है।
डेमोक्रेसी शब्द की उत्पत्ति यूनानी भाषा के दो शब्दों से मिलकर हुई है-
- डेमोस (जनता)
- क्रोशिया (शासन)
अर्थात् जनता का शासन।
- अब्राहम लिंकन – लोकतंत्र जनता का जनता के लिए जनता के द्वारा शासन है।
- इस प्रकार लोकतंत्र एक विशेष प्रकार का शासन, सामाजिक व्यवस्था, जीवन पद्धति, आर्थिक तंत्र तथा सर्वश्रेष्ठ मानवीय मूल्य है।
लोकतंत्र के लक्षण तथा विशेषताएँ :-
- नागरिक तथा राजनीतिक समानता
- निष्पक्ष तथा नियमित चुनाव
- व्यस्क मताधिकार
- विधि का शासन
- सीमित तथा संवैधानिक सरकार
- न्याय की स्वतंत्रता
- विभिन्न राजनीतिक दल तथा दबाव समूहों की उपस्थिति
- जनता की संपूर्ण और सर्वोच्च भागीदारी,
- उत्तरदायी सरकार,
- जनता के अधिकारों एवं स्वतंत्रता की हिफाजत सरकार का कर्तव्य होना,
- सीमित तथा सांविधानिक सरकार,
- भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने, सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का वादा,
- निष्पक्ष तथा आवधिक चुनाव,
- वयस्क मताधिकार,
- सरकार के निर्णयों में सलाह, दबाव तथा जनमत द्वारा जनता का हिस्सा,
- जनता के द्वारा चुनी हुई प्रतिनिधि सरकार,
लोकतंत्र के गुण :-
- उत्तरदायी शासन
- जनकल्याण पर आधारित शासन
- सार्वजनिक शिक्षण अर्थात नागरिकों में जागरूकता
- उच्च आदर्शो पर आधारित शासन
- अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति की स्थापना में सहायक
- क्रान्तियों से सुरक्षा
लोकतंत्र की कमियाँ अथवा दोष :-
- अरस्तू :- इन्होंने लोकतंत्र को निकृष्टतम शासन की संज्ञा दी है।
- कारलाईक :- इनके अनुसार प्रजातंत्र मूर्खों का शासन तथा संसद बातों की दुकान है।
- लुडोविसी :- प्रजातंत्र नागरिकों को मृत्यू की ओर ले जा रहा हैं।
- महात्मा गांधी :- इन्होने लोकतंत्र के मन्दिर अर्थात् संसद को दास महिला तथा वैश्या की संज्ञा दी है।
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में निम्न कमियां विद्यमान है-
- अयोग्य व्यक्तियों का शासन
- अस्थिर कार्यकाल
- भ्रष्ट शासन व्यवस्था
- सार्वजनिक धन तथा समय का अपव्यय
- दल-बदल का दोष
- मतदाता की उदासीनता
- युद्ध एवं संकट के लिए उपयुक्त नहीं।
- अशिक्षित जनता
सफलता हेतु शर्ते/सुझाव :-
- शिक्षित तथा जागरूक जनता
- नागरिकों का नैतिक उत्थान
- आर्थिक समानता की स्थापना
- स्थानीय स्व-शासन को प्रोत्साहन
- न्यायपालिका को और अधिक स्वतंत्रता प्रदान की जाए
लोकतंत्र के प्रकार :- लोकतंत्र दो प्रकार के होते हैं
- प्रत्यक्ष लोकतंत्र :-
- इसके अन्तर्गत जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से शासन कार्यों में सहभागिता करती है। नीतियों के निर्धारण तथा कनूनों के निर्माण में जनता प्रत्यक्ष रूप से भगीदारी करती है।
- प्राचीन यूनानी नगर राज्यों में प्रत्यक्ष लोकतंत्र प्रचलित था।
- वर्तमान समय में जनसंख्या तथा क्षेत्रफल तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़े देशों का अस्तित्व विद्यमान है जिसमें प्रत्यक्ष लोकतंत्र सम्भव नहीं है लेकिन प्रत्यक्ष लोकतंत्र के निम्न साधन विभिन्न शासन प्रणालियों में विद्यमान है।
- जनमत संग्रह/लोक-निर्णय :- इसके अनतर्गत प्रस्तावित कानून पर सीधे जनता की राय ली जाती है।
- आरम्भक/उपक्रम :- इसके अन्तर्गत जनता स्वयं शासन के समक्ष कानून निर्माण का प्रस्ताव रख सकती है।
- प्रत्यावर्तन :- इसके अन्तर्गत यदि जनता अपने प्रतिनिधियों की भूमिका से सन्तुष्ट नहीं है तो वह उन्हे वापस बुलाकर उनके स्थान पर दूसरे प्रतिनिधियों को चुन कर भेज देती है।
- अप्रत्यक्ष या प्रतिनिधि लोकतंत्र :- इसके अन्तर्गत जनता स्वयं शासन कार्यों मे भागीदारी ना करके अपनी शक्ति का प्रयोग प्रतिनिधियों के माध्यम से करती हैं तथा चुनाव के द्वारा इन प्रतिनिधियों को बदलती रहती है। ये प्रतिनिधि अपनी नीतियों तथा कार्यों के लिए जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
- वर्तमान समय में विश्व के अधिकांश बड़े देशों में जैसे – भारत, अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस आदि में अप्रत्यक्ष या प्रतिनिधि लोकतंत्र विद्यमान है।
भारतीय लोकतंत्र का दुर्बल पक्ष :-
- सशक्त एवं उत्तरदायी विपक्ष का अभाव
- भ्रष्टाचार की बढ़ती प्रवृत्ति
- हिंसा एवं आन्दोलन की राजनीति
- राजनीति का अपराधीकरण
- राजनीतिक अस्थिरता
- साम्प्रदायिकता, भाषावाद, क्षेत्रीयता आदि की प्रवृत्ति
- संवैधनिक संस्थाओं में घटता विश्वास
- नैतिक मूल्यों का ह्रास
भारतीय लोकतंत्र का दुर्बल पक्ष :- यद्यपि भारतीय लोकतंत्र में अनेक कमियाँ विद्यमान है परन्तु उसके बावजूद भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है तथा उसके सकारात्मक पक्ष निम्न प्रकार हैं-
- पंथ निरपेक्षता की भावना
- सत्ता का विकेन्द्रीकरण
- न्यायपालिका की बढ़ती भूमिका
- महिला सशक्तीकरण पर बल
- आरक्षण के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को मुख्य धारा में शामिल करना।