- केंद्रीय जाँच ब्यूरों (CBI) की स्थापना 1963 में गृहमंत्रालय के प्रस्ताव पर की गई थी। वर्तमान में यह कार्मिक मंत्रालय के अंतर्गत है और इसको संबद्ध कार्यालय का दर्जा प्राप्त है। 1941 में गठित विशेष पुलिस अवस्थापन (जो सतर्कता केमामले देखता था) को भी अब सीबीआई में मिला दिया गया। सीबीआई केंद्रीय सरकार की मुख्य जाँच एजेंसी है। भ्रष्टाचार रोकने ओर प्रशासन की ईमानदारी बनाए रखने में यह महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। यह केंद्रीय सतर्कता आयोग की भी सहायता करती है। विशेष पुलिस स्थापना (सीबीआई का प्रभाग) राज्य पुलिस बलों का संपूरक है। राज्य पुलिस बलों के साथ दिल्ली पुलिस अवस्थापन अधिनियम 1946 के अधीन विशेष पुलिस अवस्थापना (SPE) को अपराधों की जाँच करने और मुकदमा चलाने के अधिकार प्राप्त हैं। परंतु इन दो एजेंसियों के बीच मामलों की आवृत्ति और परस्पर व्यापन से बचने के लिए निम्नलिखित प्रबंध किए गए हैं-
- एसपीई उन मामलों को हाथ में लेगी जिनका संबंध मूलतया और बड़े तौर पर केंद्र सरकार या उसके कर्मचारियों से है, चाहे वे किसी राज्य सरकार के कर्मचारियों से भी संबंधित क्यों न हों।
- राज्य पुलिस वे मामले लेगी जिनका संबंध बड़े तौर पर राज्य सरकार या कर्मचारियों से है, चाहे इनमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों से है, चाहे इनमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों से भी क्यों जुड़े न हों।
- एसपीई केंद्र सरकार द्वारा स्थापित एंव वित्त पोषित सार्वजनिक उपक्रमों तथा वैधानिक निकायों के कर्मचारियों के विरूद्ध मामले लेगी।
सीबीआई के कार्य निम्नलिखित हैं-
- केंद्र सरकार के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, घूसखोरी और दुराचार के मामलों की जाँच करना।
- राजकोषीय एंव आर्थिक कानूनों के उल्लंघन, अर्थात आयात-निर्यात नियंत्रण, तटकर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, आयकर, विदेशी मुद्रा विनियम इत्यादि संबंधी कानूनों को तोड़ने से संबंधित मामलों की जाँच, परंतु ऐसे मामलों को या तो संबद्ध विभाग की सलाह से या उसके अनुरोध पर लिया जाएगा।
- पेशेवर अपराधियों के संगठित गिरोहों,जिनकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शाखाएँ हो, के गंभीर अपराधों की जाँच करना।
- भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियों तथा विभिन्न राज्यों के पुलिस बलों की गतिविधियों में तालमेल बिठाना।
- राज्य सरकार के अनुरोध पर किसी भी सर्वाजनिक महत्त्व के मामले की जाँच करना।
- अपराध के आंकड़ों का रख-रखाव और आपराधिक सूचनाओं को प्रसारित करना।