गरीबी बेरोजगारी

गरीबी  :

  सीमित संसाधनों की स्थिति और जीवन की वह अवस्था जिसमें व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम नहीं होता है अर्थात् मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाता है तो गरीबी तथा व्यक्ति गरीब कहलाता है।

गरीबी मापन हेतु विभिन्न संगठन

–  नीति आयोग ने न्यूनतम दैनिक कैलोरी उपभोग को आधार माना

–  कैलोरी उपभोग आधार पर

– ग्रामीण क्षेत्र में - 2400 कैलोरी प्रतिदिन

– शहरी क्षेत्र में -   2100 कैलोरी प्रतिदिन

N.S.S.O.

–  23 मई, 2019 को NSSO को NSO (National Statistical Organization) में परिवर्तन कर दिया गया।

इसका आधार परिवार उपभोग खर्च तथा प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन उपभोग खर्च रखा है।

अब तक की गई समितियाँ:

1.  रथ तथा दाण्डेकर आयोग – 1971 – रिपोर्ट -1973

2.  Y.K. अलघ समिति – 1977 – रिपोर्ट 1979 में

3.  डी.डी. . लकड़ावाला आयोग – 1989–रिपोर्ट–1993 में

 [इसमें कुछ संशोधनों के साथ गरीब लोगों की अन्य बुनियादी आवश्यकताओं पर किया गया, जिनमें आवास, वस्त्र, शिक्षा, स्वच्छता, वाहन ईंधन, मनोरंजन आदि शामिल किये गये ताकि गरीबी रेखा की परिभाषा को और अधिक यथार्थवादी बनाया जा सकें। यह कार्य यू़पीए सरकार के कार्य काल के दौरान सुरेश तेंदुलकर (2009) और          सी. रंगराजन ने (2014) में  किया।]

4.  सुरेश तेन्दुलकर समिति 2004-05-रिपोर्ट-2009 में

 सुरेश तेंदुलकर समिति (2004 - 05) ने नए मापक किये जिसके अनुसार गरीबी गणना का आधार MRP को माना गया है।

 ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 27 रु. प्रतिमाह 816 रु.

 शहरी क्षेत्रों में  – प्रतिदिन 33 रु. प्रतिमाह -1000 रु.

 (इस मानक के अनुसार गरीबी लेखा वाली आबादी में 22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह काफी विवादस्पद  रहा क्योंकि संख्यों को वास्तविकता से परे माना गया)

 वर्ष 2011-12 के अनुसार

 भारत में गरीबी –21.9%

5.  सी. रंगराजन समिति – 2012 रिपोर्ट 2014 में

 इन्होंनें गरीबी गणना का आधार MMRP (संशोधित मिश्रित संदर्भ अवधि)को माना

 कैलोरी आधार :

 ग्रामीण – 2155 कैलोरी

  शहरी  – 2090 कैलोरी

 खर्च आधार :

–  ग्रामीण प्रतिदिन 32 रु. एवं प्रतिमाह 972 रु.

शहरी प्रतिदिन 47 रु. एवं प्रतिमाह 1407 रु.

 भारत में गरीबी –29.5%

6.  सक्सेना समिति (2009) हासिम समिति – (2013)

–  ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2009 में सक्सेना समिति की स्थापना की।

– उसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में BPL जनगणना के संचालन के लिए कार्य प्रणाली की समीक्षा करना।

–  हसिम समिति केवल शहरी गरीबी की गणना करने के लिए 2013 में इसकी स्थापना की गई। यह शहरी क्षेत्रों में BPL परिवारों के आकलन के लिए कार्य प्रणाली का अध्ययन करेगी।

-  केवल शहरी गरीबी की गणना करने के लिए।

7.  अरविन्द पनगड़िया आयोग– 2015:

-  नीति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति भारत के प्रधानमंत्री करते हैं। 2015 में अरविन्द पनगड़िया को उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था,जिन्होंने अगस्त, 2017 तक इसके उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

गरीबी रेखा:

- नीति आयोग हर वर्ष के लिए समय-समय पर गरीबी रेखा और गरीबी अनुपात का सर्वेक्षण करता है,जिसके सांख्यिकी और कार्यक्रम मंत्रालय का राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) बड़े पैमाने पर घरेलू उपभोक्ता व्यय के सेम्पल सर्वे लेकर कार्यान्वित करता है।

- गरीबी रेखा के आंकलन का पुराना फॉर्मूला वांछित कैलोरी आवश्यकता पर आधारित है।

- कैलोरी की जरूरत उम्र लिंग और कार्य पर निर्भर करती है जो एक व्यक्ति करता है।

- ग्रामीण क्षेत्र में 2400 व शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी।

- चूँकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग स्वयं को ज्यादा शारीरिक कार्यों में व्यस्थ रखते हैं। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में कैलोरी की आवश्यकताओं और शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रखा गया है।

- BPL जनसंख्या में भारतीय  राज्यों की स्थिति  NSSO वर्ष 2011-12


गरीबी रेखा
गरीबी के प्रकार (Type of Poverty)

- समय के आधार पर

(1) दीर्घकालिक-सदैव गरीब और सामान्य गरीब

(2) अल्पकालिक –चक्रीय गरीब और अनियमित गरीब

(3) गैरनिर्धन-जो कभी गरीब न हो

गणना प्रक्रिया के आधार पर सापेक्ष गरीबी

-  जब अर्थव्यवस्था में एक निश्चित जीवन स्तर को प्राप्त कर लिया जाता है तो उस जीवन स्तर को आधार मानकर तुलनात्मक रूप से प्राप्त होने वाली गरीबी सापेक्ष गरीबी कहलाती है।

-  सापेक्ष गरीबी की गणना लॉरेन्ज वक्र तक गिन्नी गुणांक के माध्यम से की जाती है।

निरपेक्ष गरीबी

-  संसाधनों की कम उपलब्धता की स्थिति में मूल भूत आवश्यकता की पूर्ति होने या ना होने के आधार पर की गई गरीबी की गणना निरपेक्ष गरीबी कहलाती है अर्थात् गणना स्वतंत्र आधार पर की जाती है

-  गणना – Head Count Method के आधार पर प्रतिव्यक्ति गणना की जाती है

-  वर्ष 2015 में नीति आयोग द्वारा गरीबी गणना का आधार – निरपेक्ष गरीबी को स्वीकार किया गया

गरीबी के कारण :

(i) सामाजिक कारण 

-  सामाजिक रीतिरिवाज व परम्पराएँ

-  सामाजिक अन्धविश्वास व कुप्रथाएँ

-  सामाजिक – बहिष्कार

-  सामाजिक ऋणग्रस्तता

(ii) आर्थिक कारण

-  उत्पादन का निम्न स्तर

-  अर्थव्यवस्था में व्याप्त मुद्रास्फीति

-  शिक्षा व स्वास्थ्य का निम्न स्तर

-   जनसंख्या वृद्धि

-  आधारभूत अवसंरचना का अभाव

-  वित्तीय संगठनों की कमजोर स्थिति

-  सरकारी योजनाओं का पूर्ण क्रियान्वयन नही होना

-  आय हेतु कृषि पर निर्भरता तथा कृषि की निम्न उत्पादकता

-  अर्थव्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार व लालफीता शाही

लॉरेंज वक्र (Lorenz curve)

-  लॉरेन्ज द्वारा जनसंख्या तथा आय वितरण के मध्य असमान सम्बन्ध प्रस्तुत किया गया।

-   इस वर्ग का प्रत्येक बिन्दु उन व्यक्तियों  को प्रदर्शित करता है जो एक निश्चित आय के प्रतिशत के नीचे होते हैं।

-  इसे पूर्ण समता रेखा या निरपेक्ष समता रेखा भी कहते हैं।

-  लॉरेंज वक्र का गणितीय प्रदर्शन गिनी-गुणांक कहलाता है। 

गरीबी मापन का प्रमुख आधार

- 0-1  तक विचलन होता है

-  0 पर पूर्ण समानता तथा 1 पर पूर्ण असमानता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

गरीबी दूर करने के लिए प्रमुख योजनाएँ

 

अन्त्योदय अन्न योजना :- 2000

-  भोजन या खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना।

लाभार्थी :- BPL परिवार

लाभ/योजना:- प्रतिमाह प्रति परिवार 35 किग्रा अनाज 2 रु. प्रति किग्रा की दर से उपलब्ध कराना।

  Note : राज्य सरकार द्वारा प्रति किग्रा 1 रु. की अतिरिक्त सब्सिडी

अन्नपूर्णा अन्न योजना (2000):-

उद्देश्य  :- खाद्य सुरक्षा की उपलब्धता

लाभार्थी  :- वरिष्ठ नागरिक

-  लाभ  :- प्रति व्यक्ति प्रति माह 10 किग्रा अनाज की उपलब्धता निशुल्क

अन्नपूर्णा भंडार :- 31 अक्टूबर, 2015

-  प्रथम :- भांभौरी (जयपुर)

-  राशन की आधुनिक दुकान 1 ऑनलाइन आवंटन

संचालन :-  

 

 

 

 

 

 

 

 

सुविधा :- 150 उत्पाद – 450 प्रकार उपलब्धता

अन्नपूर्णा रसोई योजना

इंदिरा रसोई

15 अगस्त, 2016

20 अगस्त, 2020

उद्देश्य :- पोषक तत्त्व युक्त भोजन की उपलब्धता

उद्देश्य :- पौष्टिक आहार की उपलब्धता

लाभार्थी:- श्रमिक, छात्रा प्रवासी, ऑटो – रिक्शा, दिव्यांग चालक वृद्धि

योजना :- 213 निकायों में 358 रसोई संचालित की जा रही हैं।

स्लोग्न :- ‘’सबको भोजन सबको सम्मान’’

भोजन सुविधा :- 8 रु. प्रतिप्लेट सब्जी – 100 ग्राम, दाल = 100 gm

लाभ :- 3 रु. पौष्टिक नाश्ता

8 रु. :- पौष्टिक भोजन

चपाती :- 250 ग्राम

संचालन :- जीवन संबंध ट्रस्ट

प्रति प्लेट लागत 20 रु., राज्य सरकार द्वारा 12 रु. की सब्सिडी

तहसील स्तर तक उपलब्धता:- 2017

राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 100 करोड़ रु. के खर्च का प्रावधान

-  इस योजना के तहत धार्मिक संगठन या किसी ट्रस्ट के द्वारा संचालित भोजन वितरण कार्यक्रम को शामिल किया जा सकता है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम – 2013 :- N.F.S.A

-  अक्टूबर, 2013 से यह अधिनियम लागू किया गया।

  प्रावधान :- प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किग्रा अनाज की उपलब्धता

-  ग्रामीण क्षेत्र की 75%, शहरी  क्षेत्र  की 50%, देश की कुल आबादी का 67% हिस्सा योजना के तहत या अधिनियम में शामिल किया गया है।

-  गेहूँ, चावल, व मोटा अनाज क्रमश: 2 रु., 3 रु. व 1रु. प्रति किग्रा की दर से उपलब्धता।

-  वितरण प्रक्रिया का संचालन PDS व्यवस्था के माध्यम से (PDS – सार्वजनिक वितरण प्रणाली)

-  बेघरों के लिए लंगर व्यवस्था का प्रावधान

-  आपदा प्रभावित राज्यों में निशुल्क अनाज उपलब्धता

-  गर्भवती महिला को 6000 रु. की नगद सहायता।

-  केन्द्र तथा राज्य स्तर पर खाद्य सुरक्षा आयोगों की स्थापना

-  जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में निगरानी समिति की स्थापना।

अन्नपूर्णा दुग्ध वितरण योजना :- 2 जुलाई 2018 (जयपुर)

उद्देश्य :- पूर्ण पोषण की सुविधा उपलब्ध करना।

लाभार्थी :- कक्षा – 1 से 8 तक सरकारी स्कूल में

लाभ :-  दुग्ध वितरण       = सप्ताह में 6 - दिन

संचालन :- स्कूल प्रबंधन समिति योजना का संचालन करेगी द्दुग्ध की  खरीद प्राथमिक सहकारी दुग्ध समितियों के माध्यम से।

पहल योजना  :-  जनवरी – 2015

उद्देश्य :- L.P.G सब्सिड़ी लीकेज समाप्त करना

लाभार्थी :- गैस कनेक्शन धारक

लाभ/योजना :- L.P.G गैस सिलेण्डर सब्सिड़ी सीधे ग्राह खाते में ट्रांसफर करना।

Give it up और Think about Subsidy, सब्सिडी छोड़ने के लिए चलाया गया अभियान।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना :- 1 मई, 2016

उद्देश्य :- स्वच्छ ईंधन और महिला सशक्तीकरण

लाभार्थी :- B.P.L परिवार की महिलाएँ

लाभ :- नि:शुल्क L.P.G गैस कनेक्शन

प्रति कनेक्शन सब्सिडी = 1600 रु.

1600 x 5 = 8000 करोड़ (2018 में) 1 करोड़ अतिरिक्त कनेक्शन 2021-22

Note :- उन्नत चूल्हा योजना - 1993

प्रधानमंत्री आवास योजना  : 2015

 उद्देश्य :- 2022 तक सभी को आवास, 2 करोड़ अवास निर्माण इसे दो भागों में बाँटा गया है।

(i)  P.M ग्रामीण आवास योजना :- 23 मार्च, 2016

उद्देश्य    :- 1 करोड़ आवास निर्माण

लाभार्थी   :- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग

लाभ    :- 1.20 लाख रु , शौचालय  1200 रु.

गर्म स्थान  :- 1.30 लाख रु. 20 की नरेगा मजदूरी।

भागीदारी :- केन्द्र Þ 60%राज्य Þ 40%

(ii)  P.M शहरी आवास योजना :- 25 जून, 2016

उद्देश्य   :- 1 करोड़ नए आवास निर्माण

लाभार्थी  :- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग

लाभ   :- प्रति आवास 1.50 लाख रु. 

भागीदारी  :-  केन्द्र का  Þ 60% राज्य का Þ 40%

इन्द्रा आवास योजना :- 1985 – 1986

उद्देश्य :- ग्रामीण क्षेत्रों में आवास सुविधा उपलब्ध करना।

लाभार्थी :- S.C, S.T, B.P.L, दिव्यांग

लाभ :- प्रति आवास 70 हजार रूपये की सहायता

- दूरस्थ क्षेत्रों के लिए 5000 रु.अतिरिक्त या 75000 रु.

Note :- 2016 में इसे P.M आवास योजना में सम्मिलित कर दिया गया है.

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति

योजना :- दिसम्बर, 2014

उद्देश्य :- ग्रामीण विद्युतीकरण तथा 24 x 7 दिन विद्युत की उपलब्धता

योजना / लाभ :- विद्युत वितरण तन्त्र को 3 फेस घरेलू लाइनों में विभाजित करना।

- घरेलू वितरण तन्त्र लाइनों के लिए कोटेड़ तारों का प्रयोग।

I.P.D.S (Integrated  Power Distribution Scheme) :-

लागू :- 2014

उद्देश्य :- शहरी क्षेत्रों में विद्युतीकरण तथा 24 घण्टे विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करना।

उजाला योजना :- उन्नति ज्योति अर्फोडेबल L.E.D For All

लागू :- जनवरी, 2015

उद्देश्य :- विद्युत खपत में कमी करना।

लाभ :- नि:शुल्क L.E.D वितरण

Note :- राज्य सरकार द्वारा कम खपत वाले पंखे, ट्यूबलाट तथा 9 W की L.E.D को भी शामिल किया गया।

उदय योजना :-  नवम्बर, 2015

पूरा नाम :-  “उज्ज्वल Discom Assurance Yojana”

उद्देश्य :- विद्युत वितरण कम्पनियों की वित्तीय समावेशन ग्राहकों को सस्ते दरों पर विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

 लाभ :- सरकार द्वारा विद्युत वितरण कम्पनियों को उनकी कुल पूँजी का 75% हिस्सा वित्तीय सहायता के रूप में।

बजट 2021-22 में विद्युत सेवा में सुधार हेतु प्रीपेड़ मीट्रिंग तथा उपभोक्ता को वितरण कम्पनी चयन की सुविधा

सौभाग्य योजना :- 2017

स्लोगन :- “सहज बिजली हर घर बिजली”

लाभ :- मार्च, 2019 तक सभी परिवारों को विद्युत कनेक्शन उपलब्ध करवाने का लक्ष्य।

बेरोजगारी (Unemployment):-

-   श्रमशक्ति का वह हिस्सा जिसमें कार्य करने की क्षमता तथा कार्य इच्छाशक्ति विद्यमान हो परन्तु प्रचलित कीमतों पर रोजगार उपलब्ध नहीं होने की अवस्था बेरोजगारी तथा व्यक्ति बेरोजगार कहलाता है।,

-  श्रम शक्ति – वो व्यक्ति जो रोजगार में है तथा वे भी जो रोजगार की तलाश कर रहे हैं। (15 से 59 वर्ष) आयु वर्ग

बेरोजगारी दर

 बेरोजगारी के प्रकार - बेरोजगारी की परिभाषा हर देश में अलग-अलग होती है।

- विकसित देशों की बेरोजगारी :

- चक्रीय बेरोजगारी  (cyclical unemployment )-  इस प्रकार की बेराजगारी अर्थव्यवस्था में चक्रीय उतार-चढ़ाव  के कारण पैदा होती है, जब  अर्थव्यवस्था में समृद्धि का दौर होता है तो उत्पादन बढ़ता है रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।

- जब अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर आता है तो उत्पादन  कम होता है और कम लोगों की जरूरत होती है जिसके कारण बेरोजगारी बढ़ती है ।

- प्रतिरोधात्मक घर्षण जनित बेरोजगारी- (Frictional Un-employment) 

- एक रोजगार/उत्पादन प्रक्रिया से दूसरे रोजगार/उत्पादन प्रक्रिया में प्रवेश के दौरान जितने समय बेरोजगारी की स्थिति होती है इसे घर्षण जनित बेरोजगारी कहते हैं।

- विकासशील/अल्पविकसित देशों की बेरोजगारी :

 विकासशील तथा अल्प विकसित देशों में जो बेरोजगारी पायी जाती है वह समग्र मांग की  कमी के कारण नहीं बल्कि संरचनात्मक होती है।

 विकासशील देशों में पायी जाने वाली बेरोजगारी को दो भागों में बाँट सकते हैं।

शहरी बेरोजगारी

1. औ‌द्योगिक श्रमिकों में पायी जाने वाली बेरोजगारी- विकास के कम दर की वजह।

2. शिक्षित बेरोजगारी- मुख्यतया: शहरी क्षेत्रों में पाई जाती है।

 कारण - दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली जिसका व्यावसायिक पहलू कमजोर है।

 व्यावसायिक मांग या आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा का न होना

 रोजगार सृजन के अवसरों में धीमी वृद्धि है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पायी जाने वाली बेरोजगारी -

1. मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment) इस प्रकार की बेरोजगारी कृषि क्षेत्र में पायी जाती है।

- कृषि क्षेत्र में लगे लोगों को कृषि की तुताई, बोवाई, कटाई आदि कार्यों के समय को रोजगार मिलता है, लेकिन जैसे ही कृषि कार्य खत्म हो जाता है तो कृषि में लगे लोग बेरोजगार हो जाते हैं ।

2. प्रच्छत्र बेरोजगारी -  ऐसे लोग जिन्हें यदि खेत या कृषि से निकाल दिया जाए तो भी कृषि से प्राप्त कुल उत्पादन में कोई कमी नहीं होगी।

- ऐसे श्रमिक जो ऊपर से देखने में तो रोजगार में लगे रहते हैं पर वास्तव में रोजगार में नहीं होते हैं।

- कार्य करने पर भी सीमांत उत्पादकता शून्य।

3. संरचनात्मक बेरोजगारी मांग ज्यादा, उपलब्धता कम -  तब प्रकट होती है जब बाजार में दीर्घकालिक स्थितियों में बदलावा आता है।

 अन्य बेरोजगारी

1.ऐच्छिक बेरोजगारी :- ऐसा व्यक्ति अपनी इच्छा से काम करने को तैयार नहीं।

- प्रचलित मजदूरी दर पर काम न करके ज्यादा मजदूरी की मांग ।

2. खुली या अनैच्छिक बेरोजगारी: वह अवस्था जिसमें व्यक्ति कार्य की मांग करता है परन्तु रोजगार की उपलब्धता नहीं होती है।

- कोरोना वायरस के चलते भारत में बेरोजगारी दर 9.1% तक बढ़ गई है। (Dec.2020)

 मापक का आधार :- छठी योजना में रोजगार नापने के लिए "स्टेण्डर्ड वर्ष" Standard Year का प्रयोग हुआ था। जिसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन 8 घंटे  कार्य के साथ 273 दिनों तक रोजगार में है तो उसे पूर्ण रोजगार में कहेंगे।

- भगवती कमेटी (1973)ने बेरोजगारी के माप के लिए तीन धारणाओं की संस्तुति  की :-

1. सामान्य स्टेटस या स्थित (US) :  यदि कोई व्यक्ति वर्ष के अधिकांश 273 दिनों तक  कार्य नहीं करता है तो उसे सामान्य स्टेटस का बेरोजगार कहेगें।

2. चालू या वर्तमान साप्ताहिक स्टेटस (CWS) : इस स्थिति के अंतर्गत उस व्यक्ति को बेरोजगार कहा जाता है जो एक सप्ताह में 1 घंटे के लिये भी काम पाने में असफल रहा है।

3.चालू दैनिक वर्तमान दैनिक स्टेटस (CDS) : इसके अंतर्गत यदि किसी व्यक्ति को एक दिन में चार घंटे का काम उपलब्ध हो तो इसे अर्द्ध दिवस व आधे दिन का रोजगार माना जाता है।

4 घंटे  - अर्द्धदिवस

 5-8 घंटे  -  पूर्ण दिवस

- जहाँ सामान्य स्टेटस बेरोजगारी दर तथा साप्ताहिक स्टेटस बेरोजगारी व्यक्ति दर (person rate) है वहीं चालू दैनिक स्टेटस समय दर (time rate) प्रदर्शित करती है।

- 11वीं पंचवर्षीय योजना में CDS को ही देश में रोजगार व बेरोजगारी के अनुमान के लिए प्रयोग में लिया गया था।

बेरोजगारी की गणना

 N.S.S.O. राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन 1950 मुख्यालय – कलकत्ता

-  23 मई, 2019 को NSSO तथा C.S.O ने मिलकर N.S.O. (National Statistical Organization) बना दिया है, जो बेरोजगारी की गणना  करता है।

बेरोजगारी के कारण :

-  रोजगार विहिन आर्थिक संवृद्धि सेवा

-  अनुपयोगी उत्पादन प्रक्रिया DMIC

-  अनुपयोगी शिक्षा व्यवस्था

-  जनसंख्या वृद्धि – संसाधनों पर बढ़ता दबाव

- अवसंरचना का कमजोर स्तर

-  निवेश की कमी

-  सरकारी कानून व प्रतिबन्ध

-  वित्तीय संगठनों की अक्षमता

-  रोजगार हेतु कृषि पर निर्भरता निम्न उत्पादकता, छुपी बेरोजगारी।

-  कौशल व प्रशिक्षण सुविधा (Skill Indida) का अभाव

फिलिप्स वक्र :

-  फिलिप्स नामक अर्थशास्त्री द्वारा बेराजगारी तथा मुद्रास्फीति में विपरीत सम्बन्ध प्रस्तुत किया गया है।

-  फिलिप्स वक्र कुल मांग और कुल आपूर्ति के पारंपरिक व्यापक आर्थिक मॉडल पर आधारित है। 

-  मुद्रास्फीति वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती मांग का परिणाम है ।

- उपर्युक्त चित्र में - बेरोजगारी प्राकृतिक दर से कम है तो मुद्रास्फीति सकारात्मक होती है और बेरोजगारी प्राकृतिक दर से अधिक होती है तो मुद्रास्फीति नकारात्मक होती है।

 फिलिप्स वक्र सकारात्मक और नकारात्मक मुद्रास्फीति दर दोनों के लिए बेरोजगारी पर प्रभाव का वर्णन करता है।

योजनाएँ

 ग्रामीण  6 योजनाएँ

-  समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP/1978/79)

-  ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार हेतु प्रतिशक्षण (TRYSEM-1979)

-  ग्रामीण महिला तथा बाल विकास-1984

-  ग्रामीण दस्तकार उन्नत औजार वितरण (SITRA-1992)

-  दस लाख कुआँ योजना (MWS-1996)

-  गंगा कल्याण योजना (GKY -1997) -

  अप्रैल, 1999 को इन  6 योजनाओं को मिलाकर  स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना कर दिया गया।

- 3 जून, 2011 को स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना का नाम बदल कर  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) कर दिया गया ।

- 25 सितम्बर,2014 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) का विलय   पण्डित दीनदयाल उपाध्याय शहरी आजीविका कार्यक्रम  में कर दिया गया जिसमें केंद्र सरकार (60% ) व  राज्य सरकार  (40%) का  योगदान होगा।

शहरी :-

-  गरीबों हेतु शहरी बुनियादी सेवा

-  नेहरू रोजगार कार्यक्रम अप्रैल, 1989

- P.M. शहरी गरीबी निवारण योजना

   इन तीनों योजनाओं को मिला कर दिसम्बर, 1977 में स्वर्ण जयन्ती शहरी स्वरोजगार योजना कर  दिया गया।

-  दिसम्बर , 2013 में स्वर्ण जयन्ती शहरी स्वरोजगार योजना को   राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NUM) मे बदल दिया गया

- फरवरी, 2016 में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय शहरी आजीविका मिशन में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NUM) का विलय कर दिया गया । जिसमें केंद्र सरकार (60% ) व  राज्य सरकार  (40%) का  योगदान होगा।

मनरेगा :- महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम

नरेगा Act.  :- 2005

लागू किया :- 2 फरवरी 2006

सम्पूर्ण देश में लागू :- अप्रैल, 2008

मनरेगा :- 2 अक्टूबर ,2009