मानव विकास सूचकांक (HDI)

- विभिन्न देशों के विकास के स्तर की गणना करने हेतु मानव विकास सूचकांक जारी किया जाता है।

- किसी भी देशों में निवास करने वालों की विकास की स्थिति जानने हेतु मानव विकास सूचकांक जारी किया जाता है।

- UNO की एजेन्सी (UNDP) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा मानव विकास सूचकांक जारी किया जाता है।

- UNDP – Union development programme

 स्थापना – 1965

 मुख्यालय – न्यूयॉर्क

- UNDP द्वारा पहली बार HDI 1990 में भारत के अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन तथा पाकिस्तान के अर्थशास्त्री महबूत-उल-हक की सिफारिश पर जारी किया गया।

विकास का मापन - मानव विकास

- यूएनडीपी की मानव विकास रिपोर्ट (1997) के अनुसार मानव विकास वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जनसामान्य के विकल्पों का विस्तार किया जाता है और इनके द्वारा उनके कल्याण के उन्नत स्तर को प्राप्त किया जाता है। ऐसे सिद्धांत न तो सीमाबद्ध होते हैं और न ही स्थैतिक। परन्तु विकास के स्तर को दृष्टि में रखते हुए जनसामान्य के पास तीन विकल्प हैं-

 a. एक लम्बा और स्वास्थ्य जीवन व्यतीत करना

 b. ज्ञान प्राप्त करना

 c. अच्छा जीवन स्तर प्राप्त करने हेतु आवश्यक संसाधनों तक अपनी पहुँच बढ़ाना।

- इसके अलावा कई और विकल्प हैं जिन्हें बहुत से लोग महत्वपूर्ण मानते हैं। इनमें उल्लेखनीय हैं-राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता से सृजनात्मक और उत्पादक बनने के अवसर और स्वाभिमान एवं गारंटीकृत मानवीय अधिकारों का लाभ उठाना।

मानव विकास सूचकांक निम्न आधारों पर जारी किया जाता है:

- जीवन प्रत्याशा: जीवन प्रत्याशा का अर्थ है व्यक्ति के जिन्दा रहने की क्षमता अर्थात् किसी देश में लोगों की औसत आयु क्या है। इसका निर्धारण इससे होगा कि किसी राष्ट्र में खाद्य सुरक्षा का स्तर क्या होगा, स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर किस प्रकार होगा आदि।

- शिक्षा: शिक्षा न केवल व्यक्ति को स्थायी एवं गुणवत्ता परक रोजगार देती है बल्कि उसे राजनीतिक-सामाजिक सांस्कृतिक रूप से उसकी क्षमता का विस्तार भी करती है।

- प्रतिव्यक्ति आय (क्रयशक्ति समता) : प्रति व्यक्ति आय (क्रयशक्ति समता) का बढ़ना यह प्रदर्शित करता है कि किसी राष्ट्र में लोगों के वस्तुओं एवं सेवाओं तक पहुँच बढ़ रही है और उनके भौतिक जीवन का विकास हो रहा है।

- तकनीकी विकास: यह किसी देश में औद्योगिक संरचना में होने वाले परिवर्तनों का सूचकांक है।

- तकनीकी प्रगति: तकनीकी प्रगति का आश्य उत्पादन क्रिया में उन्नत तकनीक के प्रयोग से जिसमें निम्न तत्त्वों को शामिल किया जाता है-

1. मशीनों का प्रयोग

2. मानव कुशलता

3. संगठनात्मक ढाँचा

4. इनफारमेशन अर्थात् तकनीक से संबंधित सूचनाएँ

  इन तत्त्वों के आधार पर तकनीकी विकास निम्न प्रकार से होता हैं :-

1. शोध तथा उद्योगों में बहुत अत्पधिक विनियोग

2. कुशल उद्यमी जो नव प्रवर्तित टेक्नोलाजी की व्यापारिक संभावना तथा जोखिम का अनुमान लगा सकें।

3. विस्तृत बाजार

- तकनीक हस्तांतरण: विकासशील तथा अल्पविकसित देश पूँजी की कमी के कारण नव प्रवर्तन तथा शोध पर बहुत कम व्यय कर पाते हैं, इसलिये वे अपनी स्वयं की उन्नत तकनीकी विकसित नहीं कर पाते हैं। अत: वे अपने आर्थिक विकास के लिए बहुत हद तक विकसित देशों द्वारा किये गये तकनीकी हस्तान्तरण पर निर्भर रहते हैं।

- तकनीकी हस्तांतरण की कुछ विधियाँ इस प्रकार हैं-

1. संयुक्त उद्यम: जिसमें स्वामित्व तथा नियंत्रण में हिस्सेदारी होती है।

2. लाइसेंसिंग: जिसमें स्वामित्व तथा प्रबंधन की जिम्मेदारी तकनीकी प्राप्त करने वाले देश के पास होगी पर लाइसेंस के साथ जुड़ी शर्तों के कारण प्रबंधन तथा स्वामित्व में होने के बावजूद भी तकनीक प्राप्तकर्ता देश के द्वारा स्वतंत्र निर्णय नहीं लिया जा पाता है। यह शर्त तकनीक देने वाला देश ही तय करता है।

3. फ्रेन-चाइजिंग: इसके अंतर्गत तकनीकी हस्तांतरण करने वाला देश अपनी ब्रांड नाम बेचता है तथा साथ में प्रबंधकीय तथा तकनीकी सहायता भी देता है।

4. टर्न की कान्ट्रैक्टसः इसके अंतर्गत पूर्णतया तैयार फैक्ट्री कम्पनी क्रेता को दी जाती है।

 इण्टरमीडिएट टेक्नॅालाजी: प्रसिद्ध पुस्तक स्मॉल इज़ ब्यूटीफुल: के लेखक जर्मन में जन्मे ब्रिटिश अर्थशास्त्री ई. एफ. शूमाकर है।

इस तकनीक की निम्न विशेषताएँ बताते हैं-

1. ऐसी तकनीक जो उन दशाओं के लिए उचित हो जिसमें विश्व के सभी लोग रहते हो।

2. इतनी सरल हो कि जिनके पास उच्च प्रशिक्षण तथा शिक्षा का अभाव है

3. कम लागत वाली तकनीक

4. कुशल तथा कम कठिनाइयाँ उत्पन्न करने वाली हो

5. स्थानीय माल की पूर्ति तथा छोटे स्तर पर विपणन के अनुरूप हो।

 मानव विकास प्रतिमान (Parading) के चार अनिवार्य घटक हैं-

1. औचित्य (Equity) – अवसरों तक पहुँच न्यायोचित होना चाहिए।

2. धारणीयता – देश के भीतर और विभिन्न देशों के बीच जीवन स्तर संबंधी विषमताओं पर ध्यान देना चाहिए।

3. उत्पादकता – यह विकास का एक घटक मात्र है।

4. सशक्तीकरण – इसका अर्थ है कि लोग अपनी इच्छा से निर्णय ले सकें।

- मानव विकास सूचकांक - 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने अपनी पहली Human Report में मानव विकास सूचकांक की संकल्पना प्रस्तुत की। HDI मानव विकास का माप है। वह किसी भी देश की मानव विकास के संदर्भ में तीन मूलभूत आयामों/सूचकों के क्षेत्र में उपलब्धियों की माप करता है।

  यूएनडीपी की मानव विकास रैंकिंग (2020) में भारत का 131वाँ स्थान

- संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की वर्ष 2020 की मानव विकास रिपोर्ट (Human Development Report-2020) विश्वभर में 15 दिसंबर, 2020 को जारी की गई, विश्व के कुल 189 देशों के लिए मानव विकास सूचकांक (Human Development Index- HDI) इसमें आकलित किए गए है जिनमें भारत का 131वाँ स्थान  है, इससे पूर्व, वर्ष 2019 की मानव विकास रिपोर्ट में मानव विकास सूचकांक के मामले में इतने ही देशों में 129वाँ स्थान भारत को दिया गया था। मानव विकास सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा व आय के स्तर के आधार पर तैयार किया जाने वाला यूएनडीपी का सूचकांक है जिसका उच्चतम मान 1-0 तक हो सकता है। वर्ष 2020 की मानव विकास रिपोर्ट में प्रदर्शित सूचकांक वर्ष 2019 के लिए है। भारत के लिए 2019 के लिए यह सूचकांक 0.645 वर्ष 2020 की मानव विकास रिपोर्ट में आकलित किया गया है। पिछले वर्ष 2019 की रिपोर्ट में भारत के लिए मानव विकास सूचकांक (HDI) 0.647 आकलित था तथा 189 देशों की सूची में 129वाँ स्थान भारत को दिया गया था, जिन देशों के लिए मानव विकास सूचकांक का मान 0.550 से कम है, उन्हें मानव विकास (Low Human Development) वाले देश के रूप में 2020 की मानव विकास रिपोर्टस में वर्गीकृत किया गया है, जबकि 0.550 या इससे अधिक, किन्तु 0.700 से कम सूचकांक वाले देश मध्यम विकास (Medium Human Development) वाले तथा इससे अधिक, किन्तु 0.800 से कम सूचकांक वाले देश उच्च मानव विकास (High Human Development) वाले देशों के रूप में वर्गीकृत है, जिन देशों के लिए मानव विकास सूचकांक 0.800 या इससे अधिक है, उन्हें बहुत ऊँचे मानव विकास (Very High Human Development) वाला देश रिपोर्ट में बताया गया है। बहुत ऊँचे मानव विकास वाले देशों में मुख्यतः विकसित देशों के अतिरिक्त चैक गणराज्य, ब्रूनेई, साइप्रस, कतर, पौलेण्ड, लिथुआनिया, चिली, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अर्जेन्टीना, क्रोएशिया, रूस व कुवैत आदि कुल 51 देश शामिल है, इनमें से सर्वोच्च सूचकांक नार्वे का (0.954) है। इस दृष्टि से उसे सर्वोच्च मानव विकास वाला देश स्वीकार किया गया है, पिछले वर्ष 2019 की मानव विकास रिपोर्ट में भी शीर्ष स्थान नार्वे का ही था।  वर्ष 2020 की मानव विकास रिपोर्ट में सबसे नीचा मानव विकास सूचकांक 0.377 नाइजर का है ।

- मानव विकास रिपोर्ट 2020 में मानव विकास सूचकांक की दृष्टि से भारत का स्थान जहाँ 131 वाँ है, वही उसके पड़ोसी देशों में बांग्लादेश (133वाँ स्थान), पाकिस्तान (154), श्रीलंका (72) व चीन (85 वाँ स्थान) के स्थान पर स्थित है।

देश

रैंक

मानव  विकास सूचकांक

स्थिति

श्रीलंका

72

0.780

उच्च मानव विकास

चीन

85

0.758

उच्च मानव विकास

भारत

131

0.645

मध्यम मानव विकास

बांग्लादेश

133

0.614

मध्यम मानव विकास

पाकिस्तान

154

0.560

मध्यम मानव विकास

अफगानिस्तान

170

0.496

निम्न मानव विकास

- यूएनडीपी की मानव विकास रिपोर्ट में विभिन्न राष्ट्रों की तुलना विकास मानव सूचकांक  (HDI) के साथ-साथ जेंडर इनीक्वेलिटी इंडेक्स (GII) व मल्टी डाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) के आधार पर भी की जाती है, मल्टी डाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स में जहाँ एक ही परिवार में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रहन सहन के स्तर के वंचन (Deprivations) का आकलन किया जाता है, जेंडर इनीक्वेलिटी इंडेक्स के आकलन में मातृत्व मृत्यु दर व किशोर मृत्यु दर महिला सशक्तीकरण (संसदीय सीटों में महिलाओं के प्रतिशत तथा माध्यमिक शिक्षा में दोनों लिंगों की सहभागिता पर आधारित) एवं आर्थिक गतिविधियों (श्रम शक्ति में पुरुषों व महिलाओं के अनुपात पर आधारित) आदि का समावेश किया जाता है।

- HDI अनुसार किसी देश के विकास का आंकलन वहाँ के लोगों तथा उनकी क्षमताओं को अंतिम मापदण्ड को माना जाना चाहिए न कि केवल उस देश की आर्थिक विकास को।

HDI निकालने का सूत्र

- अर्थात् गुणोत्तर माध्य विधि से HDI ज्ञात किया जाता है।

 HDI का मान 0 से 1 होता है

- 0 का अर्थ किसी देश का HDI कमजोर है और 1का अर्थ है किसी देश का HDI अच्छा है।

 HDI प्राप्तांक आधार पर देशों का वर्गीकरण

1. अति उच्च HDI वाले देश – 800-1

2. उच्च HDI वाले देश – .700-0.799

3. मध्यम HDI वाले देश – .551-.699

4. निम्न HDI वाले देश – 0-.550 से कम

UNDP द्वारा जारी H.D.I- 2020:- शामिल देश- 189

 प्रथम स्थान- नार्वे

अन्तिम स्थान:- नाइजर (अफ्रीका)

भारत- 131 वीं जो कि गत वर्ष की रैंक 129 वीं से 2 अंक/पायदान नीचे

2020 में प्राप्तांक:- 645 जो कि गत प्राप्तांक 647 से कम।

H.D.I 2020 में भारत की जीवन प्रत्याशा- 69.7 वर्ष।

औसत स्कूल वर्ष – 12.2 वर्ष

प्रतिव्यक्ति आय:- 6681 डॉलर

 ब्रिक्स समूह  देशों में भारत का प्रदर्शन खराब रहा है।

- BRICS – ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका- सार्क देशों में श्रीलंका व मालदीव का प्रदर्शन भारत से अच्छा  रहा।

-  सार्क देश - श्रीलंका, मालदीव, भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, अफगानिस्तान, पाकिस्तान

- 2010 में मानव विकास सूचकांक में परिवर्तन किया गया-

चार प्रकार के सूचकांक जारी किये जाते हैं :-

1. मानव विकास सूचकांक (HDI)

 HDI तीन आधार पर निकाला जाता है-

1.  जीवन प्रत्याशा

2. शिक्षा–स्कूल जाने योग्य वर्ष और स्कूल में बिताये गये   वर्ष

3.  जीवन स्तर

- गणना का आधार समांतर माध्य की जगह गुणोत्तर माध्य को माना गया।

- P.C.I की गणना हेतु GDP की जगह GNP को स्वीकार किया गया।

2. असमानता समायोजन मानव विकास सूचकांक (IHDI) :-

- मानव विकास सूचकांक के तीनों आधारों पर प्राप्त अर्थात् जीवन स्तर, जीवन प्रत्याशा, व शिक्षा।

 असमानता का आकलन करने के लिए I.H.D.I जारी किया जाता है।

3. G.I.I:- लैंगिक असमानता सूचकांक आधार =4

  1. प्रजनन दर (15 वर्ष की आयु)
  2. शिक्षा (उच्च माध्यमिक स्तर)
  3. स्वास्थ्य (मातृ मृत्युदर) (आधार- प्रतिलाख जीवित जन्म)
  4. श्रम भागीदारी दर (L.P.R)

4.   बहुआयामी गरीबी सूचकांक (M.P.I.)

- गरीबी के कारण प्राप्त होने वाली वंचना की गणना की जाती है।

- हाउसहोल्ड सर्वे के आधार पर गणना में M.P.I 2020 में शामिल देश 107 थे जिसमें भारत की रैंक 62वीं रही।

अन्य सूचकांक :-

- भारत का कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन (उत्पादन) सूचकांक 0.972 था, जबकि इसका भौतिक पदचिह्न सूचकांक 0.970 था।

- भारत की सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति 2019 में क्रय शक्ति समता (PPP) (Purchasing Power Parity) के आधार पर ($)6,681 दर्ज की गई थी।

-  सूचकांक के अनुसार, 2019 में भारत में जीवन प्रत्याशा में असमानता 19.7 थी, जबकि असमानता सूचकांक 0.488 था।

विश्व भुखमरी सूचकांक (W.H.I):- 2020

जारीकर्ता:- कंसर्न वर्ल्ड वाइड- आयरलैण्ड की संस्था है

हंगर लाइफ- जर्मनी

शामिल देश:- 107

आधार:- 4

  1. अल्प पोषण
  2. बाल दुबलापन
  3. बाल ठिगनापन/बौनापन
  4. बाल मृत्यु दर

प्राप्तांक:- 0- सबसे अच्छा,  100 तक- सबसे खराब

9.9 या कम – लो (अल्प)

10.0 – 19.9 तक – मध्यम भुखमरी

20.0 – 34.9 तक- सीरियस (गंभीर भुखमरी)

35.0 – 49.9 – अलार्मिग (भयावह भुखमरी)

50 या अधिक – एक्सट्रीमली अनलार्मिग भुखमरी

भारत की रैंक – 94 (107 देशों में से)

प्राप्तांक भारत:- 27.4 (गंभीर स्थिति में)

 वैश्विक नवाचार सूचकांक:- 2020

जारीकर्ता:- विश्व भौतिक संपदा संघटन (W.I.P.O)

सूचकांक 2020 में शामिल देश= 131

आधार:

  1.  बुनियादी ढ़ाँचा
  2. व्यवसायी कृत्रिमता
  3. बाजार कृत्रिमता
  4. प्रोद्योगिकी उत्पादन
  5. रचनात्मक उत्पादन

वैश्विक शांति सूचकांक:- 2020

जारीकर्ता:- इंस्टीट्‌यूट ऑफ इकोनोमिकस एण्ड पीस

आधार:- 23 आधार

प्रथम स्थान:- आइसलैण्ड, अशांत देश- अफगानिस्तान

भारत का स्थान:-139, कुल देश- 163 शामिल

Note:-उत्तरी व उत्तरी-पूर्वी अफ्रीका सबसे ज्यादा अशांत क्षेत्र तथा यूरोप शांत क्षेत्र है।

विश्व प्रतिस्पर्धा सूचकांक:- 2020

जारीकर्ता:- इंस्टीट्‌यूट फॉर मैनेजमेंट डवलपमेंट

कुल 63 अर्थव्यवस्थाओं की सूची में भारत की रैंक- 43 वी

आधार:-

  1.  आर्थिक प्रदर्शन
  2. बुनियादी ढ़ाँचा
  3. व्यापार दक्षता
  4. सरकारी दक्षता

प्रथम स्थान:- सिंगापुर, अंतिम स्थान:- वेनेजुएला

लैंगिक समता रिपोर्ट:- 2020

जारीकर्ता:- W.E.F (word economy form)

आधार:- 4 सूचकांक

i. आर्थिक भागेदारी

ii. शैक्षिण उपलब्धियाँ

iii. स्वास्थ्य व उत्तर जीविता

iv. राजनैतिक सशक्तीकरण

प्राप्तांक – 0- अपूर्ण समानता 1- पूर्व समानता

करप्सन- परसेप्शन इण्डेक्स:-(Corruption Perception Index)

शामिल देश- 180

प्रथम स्थान:- आइसलैण्ड इन्टरनेशनल

जारीकर्ता:- ट्रांसपेरेंशी इन्टरनेशनल( Transparency International)

प्रथम स्थान- डेनमार्क अंतिम:- सोमालिया

भारत का स्थान:- 86 वाँ

Note:- गत वर्ष भारत की रैंक 80 थी इस बार 6 अंकों की गिरावट हुई है।

व्यापार सुगमता सूचकांक:- 2020

जारीकर्ता:- विश्व बैंक

आधार:- 10

(i) व्यापार शुरू करना

(ii) निर्माण या उत्पादन परमिट

(iii) परिसम्पत्ति का पंजीकरण

(iv) विद्युत

(v) ऋण उपलब्धता

(vi) अल्पसंख्यक निवेशकों की सुरक्षा

(vii) करों का भुगतान

(viii) सीमा पार व्यापार

(ix) अनुबंध लागू करना

(x) दिवालियापन होने पर समाधान

शामिल देश – 190

प्राप्तांक:– 0-100 0-1 सबसे खराब

100- सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

प्रथम स्थान:- न्यूजीलैण्ड

अंतिम स्थान:- सोमालिया

भारत – 63

Note:-2014-19 तक भारत के प्रदर्शन में 79 रेंक का सुधार हुआ है।

विश्व निवेश रिपोर्ट:- 2020

जारीकर्ता:- अंकटॉड [यूनीयन नेशन कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एड डवलपमेंट]

अंकटॉड द्वारा जारी की है ये  30 वीं रिपोर्ट थी ।

लोगन:- “महामारी से परे अन्तर्राष्ट्रीय उत्पादन”

महामारी के दौर में वैश्विक स्तर पर F.D.I प्रवाह में 40% की गिरावट हुई है।

  भारत 51 बिलियन  डॉलर के निवेश के साथ विश्व का 9 वाँ सबसे बड़ा निवेश प्राप्तकर्ता देश।

 रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक अन्तरगमन inflow अमेरिका में तथा निवेश का सर्वाधिक Out Flow जापान से।