मुद्रा (Money)

विनिमय का माध्यम है जिसमें क्रय शक्ति क्षमता है।

- 'वह वस्तु जो विनिमय का माध्यम तथा जिसमें खरीदने की क्षमता विद्यमान है मुद्रा कहलाती है'

भारतीय मुद्रा- ₹

विशेषता :-

1.  मुद्रा विनिमय का माध्यम है।

2.  मुद्रा की स्वीकृति व मूल्यमान एक साथ होना चाहिए।

3.  मुद्रा सामान्य व स्वतंत्र स्वीकृति होती है।

4.  भुगतानों का मान होती है।

वस्तु विनिमय (कमियाँ)

1.  विनिमय प्रणाली को जटिल बनाता है।

2.  दोहरे संयोग की समस्या।

3.  मूल्य मापन की समस्या।

मुद्रा के कार्य :-

1.  प्राथमिक कार्य

1.विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करना।

2. मुद्रा मूल्य का मापन करती है।

द्वितीयक कार्य (गौण कार्य)

1. संग्रहण का माध्यम।

2. भविष्य के भुगतान की गणना।

3. मूल्य क्रयशक्ति हस्तान्तरण का कार्य करती है।

मुद्रा के प्रकार (Types of Money)

1.  प्रतीक मुद्रा (Token Money)

2.  वस्तु मुद्रा (Commodity Money)

3.  प्लास्टिक मुद्रा (Plastic Money)

4.  वैकल्पिक मुद्रा (Alternative Money)

5.  वैध मुद्रा (Valid Money)

6.  ई-मुद्रा (E-Money)

प्रतीक मुद्रा (Token Money)

वह मुद्रा जिसका मूल्य उस वस्तु से ज्यादा है जो उसे बनाने में काम में ली गई है जैसे-

 100 रुपये नोट

 2000 रुपये नोट

वस्तु मुद्रा (Commodity Money)

यदि किसी मुद्रा का मूल्य वही हो जो उसे बनाने में काम में ली गई वस्तु का मूल्य है जैसे- सोने व चाँदी का सिक्का।

वैकल्पिक मुद्रा (Alternative Money)

वह वस्तु जो मुद्रा तो नहीं है परन्तु मुद्रा की तरह कार्य करती है वैकल्पिक मुद्रा कहलाती है। जैसे- डी.डी. चैक, चालान।

प्लास्टिक मुद्रा (Plastic Money)

ए.टी.एम. कार्ड अर्थात् डेबिट तथा क्रेडिट कार्ड प्लास्टिक के बने होने के कारण इन्हें प्लास्टिक मुद्रा कहा जाता है।

वैध मुद्रा (Fiat/ valid Money):-

उच्च प्राधिकार द्वारा जारी की जाने वाली मुद्रा वैध मुद्रा कहलाती है जिसकी सामान्य स्वीकृति व मांग प्रत्येक समय बनी रहती है।

  जैसे  - डॉलर व SDR (IMF)

-मुद्राआभासी मुद्रा:-

इन्टरनेट की सहायता से तैयार तथा उसी आधार पर काम में ली जाने वाली मुद्रा ई-मुद्रा कहलाती है। इसका भौतिक अस्तित्व नहीं होता है। अत: किसी प्राधिकार द्वारा नियंत्रित नहीं  होती। जैसे bitcoins

 भारतीय मुद्रा प्रणाली

-    भारत में मुद्रा की इकाई ‘₹’ है।

-     कागजी मुद्रा व सिक्कों के रूप में मुद्रा प्रचलन में है।

-     1950 में अन्ना शृंखला के सिक्के जारी किये गये।

-      वर्ष 1957 से मुद्रा प्रणाली में दशमलव व्यवस्था को लागू किया गया है। की इकाई को 100 भागों में बाँटा गया तथा इसे नया पैसा कहा गया (पूर्व में रुपये 16 आने में विभाजित)

-    भारत में आर.बी.आई. अधिनियम 1934 के अनुसार 2  रुपये से दस हजार रुपये तक के नोट छापने का अधिकार आर.बी.आई. के पास है।

एक रुपये का नोट व सिक्के भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) द्वारा जारी किये जाते हैं जिन पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।

- 1969 में भारतीय रिजर्व बैंक ने महात्‍मा गांधी के चित्र वाला पहला 100 रुपए का नोट जारी किया, जिसमें गांधी जी को सेवाग्राम आश्रम के आगे बैठा हुआ दिखाया गया था।

-  इसके बाद 1987 में राष्‍ट्रपिता की तस्‍वीर बैंक नोटों पर नियमित तौर पर छापी जाने लगी, इसी साल अक्‍टूबर में 500 रुपए के नई श्रृंखला में मुस्‍कुराते हुए गांधी जी की फोटो छापी गई। इसके बाद महात्‍मा गांधी की तस्‍वीर का इस्‍तेमाल  नियमित रूप से विभिन्‍न मूल्‍य के नोटों पर किया जाने लगा।

- आरबीआई ने 1996 में अतिरिक्‍त फीचर्स और नई महात्‍मा गांधी श्रृंखला के तहत नोटों को जारी किया।

-  2016 (नवंबर) में नए सीरीज के नोटों पर महात्मा गांधी के साथ स्वच्छ भारत का लोगो दर्शाया गया है।

1.  नोट प्रिंटिंग प्रेस

1.  देवास (मध्य प्रदेश)

2.  मैसूर (कर्नाटक)

3.  नासिक (महाराष्ट्र)

4.  साज्ञानी (पं.बंगाल)

2.  टकसाल (mint)

1.  कलकत्ता (पश्चिमी बंगाल)

2.  मुम्बई (महाराष्ट्र)

3.  हैदराबाद (तेलंगाना)

4.  नोएडा (उत्तर प्रदेश)

-   होशंगाबाद(मध्य प्रदेश)  सिक्योरिटी पेपर मील में नोट छापने व स्टाम्प हेतु कागज तैयार किया जाता है।

-   नोट छापने की स्याही का कारखाना देवास में स्थित है।

-   वर्ष 2010 में रुपये का प्रतीक चिह्न- '₹' स्वीकार किया गया।

-   यह चिह्न उदय कुमार द्वारा तैयार किया गया।

-   प्रतीक चिह्न स्वीकार करने वाली विश्व की पाँचवीं मुद्रा।

 डॉलर, येन, यूरो, पौण्ड के बाद।

-   अब तक तीन बार भारत में विमुद्रीकरण किया जा चुका है (वर्ष  1946, वर्ष 1978, वर्ष 2016)

मुद्रा प्रवाह (Money flow)

-      एक निश्चित समय पर अर्थव्यवस्था में संचरण करने वाली मुद्रा की मात्रा मुद्रा प्रवाह कहलाता है। मुद्रा प्रवाह मांग को प्रभावित करता है।

 मुद्रा प्रवाह ज्यादा होने पर मांग ज्यादा तथा मुद्रा प्रवाह कम होने पर मांग कम होगी।

मुद्रा की तरलता (liquidity of money):-

- मुद्रा की तरलता से तात्पर्य मुद्रा की क्रय शक्ति क्षमता से है। जिस मुद्रा की क्रय शक्ति ज्यादा वह ज्यादा तरल मुद्रा जिसकी क्रय शक्ति कम वह कम तरल मुद्रा है।

तरलता का क्रम:-

- तरलता के आधार पर आर.बी.आई. द्वारा मुद्रा के प्रकार

- M1 = नगद नोट व सिक्के + बैंक की मांग जमा + आर.बी.आई. की जमा।

- M2 = M1+ डाकघर की बचत जमा

- M3 = M1+ बैंक की सावधि जमा

- M4 = M3 + डाकघर की समस्त जमा (राष्ट्रीय विकास पत्रों को छोड़कर)

वाई.वी. रेड्डी समिति द्वारा

उच्चाधिकार प्राप्त मुद्रा (High Powered Money)

   नगद नोट व सिक्के + बैंक की आर.बी.आई. जमा + आर.बी.आई. की अन्य जमाएँ

नोट-

(1) M1 सबसे ज्यादा तरल तथा M4 सबसे कम तरल मुद्रा है।

 (2)  M1+ M2 संकुचित मुद्रा तथा M3+ M4 व्यापक मुद्रा है।

भारतीय रिज़र्व बैंक

-  भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है। केंद्रीय बैंक से तात्पर्य उस बैंक से है जो देश की मुद्रा तथा बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करता है।

-  भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को RBI एक्ट-1934 के तहत की गई थी।

-  रॉयल कमीशन ऑन मनी & फाइनेंस ने इस बैंक की स्थापना की सिफारिश की थी। रॉयल कमीशन के अध्यक्ष हिल्टन यंग थे इसलिए रॉयल कमीशन को हिल्टन यंग समिति भी कहा जाता है।

-  भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना के समय इसका मुख्यालय कलकत्ता में था जिसे वर्ष 1937 में मुबंई में स्थापित कर दिया गया।

-  वर्ष 1947 तक RBI द्वारा बर्मा (म्यांमार) के लिए तथा वर्ष 1948 तक पाकिस्तान के लिए केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य किया गया।

-  1 जनवरी, 1949 को रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था।

RBI की संरचना :

 RBI के मुख्यालय में 21 सदस्यीय निदेशक मण्डल होता है।

 

 

RBI गवर्नर:

- RBI के प्रथम गवर्नर सर ऑसबॉर्न स्मिथ थे।

- स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद RBI के प्रथम गवर्नर C.D देशमुख थे।

- वर्तमान में RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास हैं। ये RBI के 25 वें गवर्नर हैं जिन्होंने उर्जित पटेल का स्थान लिया है।

RBI के उपगवर्नर:

- RBI के उप गवर्नर की नियुक्ति भारत सरकार द्वारा की जाती है।

- वर्तमान में RBI के उप गवर्नर निम्न हैं- माइकल देवव्रत पात्रा, महेश कुमार जैन, B.P.कानूनगो तथा राजेश्वर राव

RBI के उप कार्यालय

वर्तमान में RBI के उप कार्यालय चार है- मुंबई, दिल्ली, चेन्नई व कोलकाता।

इन क्षेत्रीय कार्यालयों में 5 सदस्यीय निदेशक मंडल होता है। जिनकी नियुक्ति भारत सरकार द्वारा की जाती है। इन सदस्यों का कार्यकाल 4 वर्ष होता है।

RBI के कार्य:

RBI के कार्यों को मुख्यतया दो भागों में विभाजित किया जाता है-

RBI के कार्य


परम्परागत कार्य :- R.B.I के परम्परागत कार्य निम्नलिखित हैं-

(i) R.B.I का सरकार के बैंक के रूप में कार्य करना:

 (a) R.B.I केंद्र तथा राज्य सरकारों को बैंकिंग सुविधा अर्थात् जमा व उधारी की सुविधा उपलब्ध करवाता है।

 (b) सरकार को वित्तीय मामलों में सलाह प्रदान करता है।

 (c) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। IMF के बोर्ड ऑफ गवर्नर में RBI के गवर्नर उपगवर्नर के रूप में हिस्सा लेते हैं।

(ii) बैंकों का बैंक: R.B.I बैंकों को जमा तथा ऋण सुविधा उपलब्ध करवाता है तथा बैंकों का विनियमन करता है

(iii) नोट निर्गमन करना/नोट छापने का कार्य: R.B.I एक्ट 1934 के अनुसार 2 रुपये से 10,000 रुपये तक के नोट छापने का अधिकार R.B.I का है जिस पर R.B.I गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।

वर्ष 1956 से नोट छापने हेतु न्यूनतम कोष आरक्षित प्रणालीका उपयोग किया जाता है।

-  न्यूनतम कोष आरक्षित प्रणाली:- न्यूनतम कोष आरक्षित प्रणाली के अनुसार नोट निर्गमित करते समय RBI के पास 200 करोड़ की सम्पत्ति होनी चाहिए जिसमें से 115 करोड़ रुपये का स्वर्ण तथा 85 करोड़ रुपये की विदेशी पूँजी होनी चाहिए।

(iv) अंतिम ऋणदाता के रूप में कार्य करना: R.B.I बैंकों में तरलता संकट के समय वित्तीय सुविधा उपलब्ध करता है।

(v) विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक: विदेशी मुद्रा भंडार के कारक के रूप में विदेशी मुद्रा, स्वर्ण, विशेष आहरण अधिकार (SDR), तथा IMF ट्रेन्च को सम्मिलित किया जाता है। R.B.I द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार की सहायता से विदेशी विनिमय दरों को नियंत्रित किया जाता है।

  विनिमय दर: एक देश की मुद्रा की कीमत दूसरे देश की मुद्रा में जैसे:- 1$ = 75 रु

(vi)  RBI समाशोधन एजेंसी के रूप में कार्य करता है:- बैंकों द्वारा आपस में किए गए लेन-देन के खातों का समाधान करने का कार्य RBI द्वारा किया जाता है।

(vii)  साख नियंत्रण का कार्य करना: इसके तहत RBI द्वारा अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मात्रा का निर्धारण किया जाता है। यह कार्य RBI अपनी मौद्रिक नीति की सहायता से करता है।

- साख संतुलन (Credit Balance): साख संतुलन हेतु RBI द्वारा मौद्रिक नीति जारी की जाती है। इस मौद्रिक नीति के तहत RBI द्वारा दो उपकरणों का प्रयोग किया जाता है-

  (i) मात्रात्मक उपाय  

  (ii) गुणात्मक उपाय

(i)   मौद्रिक नीति के मात्रात्मक उपाय- बैंक दर, नकद आरक्षित अनुपात (CRR), LAF (रेपो दर व रिवर्स रेपो दर), MSF व खुले बाजार की प्रक्रिया

(ii)   मौद्रिक नीति के गुणात्मक उपाय- मार्जिन आवश्यकता का निर्धारण, साख स्वीकृति, साख राशनिंग, नैतिक दबाव तथा प्रत्यक्ष कार्यवाही

बैंक दर: जिस दर पर RBI अन्य बैंकों को दीर्घकालीन ऋण सुविधा उपलब्ध कराती है वह बैंक दर कहलाती है।

नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio): बैंकों की शुद्ध मांग जमा का वह हिस्सा जो RBI के पास बैंकों को जमा करवाना पड़ता है नकद आरक्षित अनुपात कहलाता है।

सांविधिक/वैधानिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio): बैंक की मांग जमा का वह हिस्सा जिसे बैंक ऋण के रूप में नहीं दे सकता है वैधानिक तरलता अनुपात कहलाता है।

रेपो दर: वह दर जिस पर RBI अन्य बैंकों को अल्पकालीन ऋण उपलब्ध करवाता है रेपो दर कहलाती है।

रिवर्स रेपो दर: वह जिस पर RBI अन्य बैंकों से अल्पकालीन ऋण लेता है रिवर्स रेपो दर कहलाती है।

सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility):

जब RBI द्वारा अन्य बैंकों को तरलता समायोजन के लिए अल्पकालीन सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है जो कि बैंक कुल जमा का 1% होती है।

खुले बाजार की प्रक्रिया: इस प्रक्रिया के अंतर्गत RBI अर्थव्यवस्था में बॉण्ड्स का क्रय व विक्रय करती है।

  गुणात्मक उपाय - गुणात्मक उपाय के अंतर्गत RBI द्वारा मुद्रा की गुणवत्ता का निर्धारण किया जाता है।

(2)   R.B.I के प्रोत्साहन कार्य/प्रवर्तन के कार्य:

(i) कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहित करने हेतु संस्थागत व्यवस्था करना- जैसे नाबार्ड (12 जुलाई, 1982)

(ii) औद्योगिक क्षेत्र में वित्तीय उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु बैंकों की स्थापना करना: जैसे IDBI (1964)

(iii) बैंकों के पर्यवेक्षण व निरीक्षण का कार्य करना

(iv) विकासशील देशो में बैंकिंग सुधार हेतु प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराता है।

(v) वित्तीय आँकड़ों का संतुलन तथा प्रकाशन व वित्तीय रिपोर्ट जारी करने का कार्य RBI द्वारा किया जाता है।

(vi) मुद्रा स्फीति को नियंत्रित करना व काले धन पर काबू पाने का कार्य करना।

वह वित्तीय संगठन जो लोगों की जमा स्वीकार करते हैं तथा ऋण सुविधा उपलब्ध कराते हैं, बैंक कहलाते हैं।

(Bank) बैंक शब्दइटालियन शब्द ‘Banco’ तथा Bank, जर्मन शब्द Bancke से बना है।

-  बैंक वह संगठन है जो जनता से जनता के मध्य कार्य करता है।

-  जनता के जमाओं को स्वीकार करता है तथा वही जमाओं को ऋण के रूप में उपलब्ध करवाता है। बैंक द्वारा जनता के मध्य एक एजेन्ट के रूप में कार्य किया जाता है।

बैंक के कार्य:

-   बैंक के कार्यों को मुख्यतया: दो भागों में विभाजित किया जाता है

 

 

प्राथमिक कार्य:

(1)  जमा स्वीकार करना:- बैंक द्वारा बचत खाता, चालू खाता, आवर्ती जमा, सावधि जमा (F.D) इत्यादि के माध्यम से जनता की जमाओं को स्वीकार किया जाता है।

(2)  ऋण सुविधा उपलब्ध कराना:- बैंकों द्वारा अग्रिम ऋण सुविधा, अधिनिकासी (Over Draft), होम लॉन, गोल्ड लॉन इत्यादि द्वारा ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

(3)  साख सृजन करना:-

(4)  विदेशी मुद्रा की खरीद बिक्री करना:-

(5)  गोल्ड की खरीद बिक्री का कार्य करना:-

द्वितीयक कार्य:

(1)  चैकों के भुगतान का कार्य करना।

(2)  भुगतान एजेन्ट के रूप में कार्य करना।

(3)  कम्पनी के शेयर तथा बॉण्ड की खरीद से वित्तीय सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

(4)  लॉकर सुविधा उपलब्ध कराना।

(5)  ATM कार्ड सुविधा डेबिट तथा क्रेडिट कार्ड सुविधा उपलब्ध करना।

(6)  -बैंकिंग मोबाइल बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराना।

(7)  विदेशों से किए गए आयात पर भुगतान गारंटी सुविधा उपलब्ध करवाना।

(8)  बीमा सुविधा उपलब्ध कराना।

 

 

(A)  अनुसूचित बैंक:- वे बैंक जो R.B.I एक्ट 1934 की धारा – 2 में उल्लिखित है तथा जिनकी कुल या प्रदत्त पूँजी का कम से कम 5 लाख रुपये RBI में जमा हो अनुसूचित बैंक कहलाते हैं। ये बैंक ग्राहकों के हित तथा संगठित क्षेत्र में कार्य  करते हैं।

(B)  गैर अनुसूचित बैंक:-वह बैंक जोR.B.I एक्ट 1934 की धारा – 2 में शामिल नहीं किये गये हैं अनुसूचित बैंक कहलाते हैं। इन बैंकों को RBI से कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं होता है। RBI इन बैंकों को कम्पनी अधिनियम द्वारा नियंत्रित करता है।

(A)  अनुसूचित बैंक:-

1.    वाणिज्यिक या व्यापारिक बैंक:- वे बैंक जिनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। वह व्यापारिक बैंक कहलाता है।या बैंकिंग एक्ट 1949 के तहत जो बैंक लाभ के उद्देश्य से लोगों की जमा स्वीकार करते हैं व ऋण सुविधा उपलब्ध कराते हैं, व्यापारिक बैंक कहलाते हैं

इकाई बैंक:-

जिसमें एक ही कार्यालय द्वारा सम्पूर्ण बैंक का संचालन किया जाता है।

शाखा बैंक:-

-  इस प्रक्रिया में 1 मुख्यालय तथा कई शाखाओं के माध्यम से बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

 

सार्वजनिक बैंक:

वह बैंक जिस पर सार्वजनिक क्षेत्र का स्वामित्व होता है। ये बैंक दो प्रकार के होते हैंराष्ट्रीयकृत बैंक गैर राष्ट्रीयकृत बैंक।

निजी बैंक:

वह बैंक जिस पर निजी क्षेत्र का स्वामित्व होता है। ये बैंक दो प्रकार के होते हैं- देशी निजी बैंक तथा विदेशी निजी बैंक

  देशी निजी बैंक: HDFC, Yes Bank

  विदेशी निजी बैंक – HSBC

राष्ट्रीयकृत बैंक:

वे बैंक जो अपनी स्थापना के समय निजी क्षेत्र में तथा बाद में सरकार द्वारा जिन्हें अधिगृहीत कर लिया गया वे राष्ट्रीयकृत बैंक कहलाते हैं।

  वर्तमान में राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या – 11 है

  भारत सरकार द्वारा बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाता है।

-  19 जुलाई, 1969 को भारत सरकार द्वारा 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया जिनकी पूँजी 50 करोड़ रुपये थी। ये 14 बैंक थे

  (i) सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया

  (ii) बैंक ऑफ इंडिया

  (iii) पंजाब नेशनल बैंक

  (iv) केनरा बैंक

  (v) सिंडीकेट बैंक

  (vi) बैंक ऑफ बड़ौदा

  (vii) यूनाइटेड कॉमर्शियल बैंक

  (viii) यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया

  (ix) यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

  (x) देना बैंक

  (xi)इलाहाबाद बैंक

  (xii) इंडियन बैंक

  (xiii) इंडियन ओवरसीज बैंक

   (xiv) बैंक ऑफ महाराष्ट्र

-  15 अप्रैल, 1980 को 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया जिनकी पूँजी 200 करोड़ रुपये से अधिक थी। ये बैंक निम्न थे

  (i) आन्ध्रा बैंक

  (ii) पंजाब एंड सिन्ध बैंक

  (iii) न्यू इंडिया बैंक

  (iv) विजया बैंक

  (v) कॉर्पोरेशन बैंक

  (vi) ऑरिएन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स

  नोट:  वर्ष 1993 में न्यू इंडिया बैंक का विलय पंजाब नेशनल बैंक में करने से राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या 19 रह गयी।

पी.जे. नायक समिति (2014) की सिफारिश से बैंक विलय के परिणाम स्वरूप वर्तमान में राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या 11 है।

अप्रैल, 2019 में बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक तथा देना बैंक का विलय कर दिया गया।

-  अप्रैल, 2020 में 10 बैंकों का विलय किया गया

(i)    पंजाब नेशनल बैंक में ऑरिएन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स तथा
यूनाइटेड बैंक का विलय।

(ii)   केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक का विलय।

(iii)  इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक का विलय।

(iv)  यूनियन बैंक में कॉर्पोरेशन बैंक आंध्रा बैंक का विलय कर दिया गया।

गैर राष्ट्रीयकृत सार्वजनिक बैंक:

वे बैंक जो स्थापना के समय से ही सार्वजनिक स्वामित्व में थे।

वर्तमान में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) गैर राष्ट्रीयकृत सार्वजनिक क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक है।

-  1806 . में बैंक ऑफ बंगाल, 1840 . में बैंक ऑफ बोम्बे तथा 1843 . में बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना की गई थी।

इन तीनो बैंकों को मिलाकर वर्ष 1921 में इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना की गई।

इसी इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया का नाम बदलकर 1 जुलाई 1955 को भारतीय स्टेट बैंक कर दिया गया।

भारतीय स्टेट बैंक के अधीन कई आनुषंगिक बैंक स्थापित कर दिये गए जो कि निम्न हैंस्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र, स्टेट बैंक ऑफ इन्दौर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर तथा स्टेट बैंक ऑफ पटियाला।

स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र का 2008 में तथा स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का 2009 में भारतीय स्टेट बैंक में विलय कर दिया गया।

अप्रैल, 2017 में भारतीय स्टेट बैंक ने 5 आनुषंगिक बैंक तथा भारतीय महिला बैंक का विलय कर दिया गया।

-  (वर्तमान में देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक तथा दूसरे स्थान पर पंजाब नेशनल बैंक है)

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB):

ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तथा कृषि क्षेत्र में वित्तीय सुविधा उपलब्ध करवाने हेतु 2 अक्टूबर, 1975 को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना की गई। इन बैंकों की स्थापना आर.जी.सरैया समिति (1972) की सिफारिश पर की गई थी।

इन बैंकों में 50% हिस्सेदारी केन्द्र सरकार की, 35% हिस्सेदारी व्यापारिक बैंक की तथा 15% हिस्सेदारी राज्य सरकार की होती है।

-  1975 में 5 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना की गई थी जो कि निम्न है-

भिवानी (हरियाणा), मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), जयपुर (राजस्थान), माल्दा (पश्चिम बंगाल)

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या बढ़कर 196 तक पहुँच गई थी जिसे घटाकर वर्तमान में 38 कर दी गई है।

वित्त मंत्रालय द्वारा इनकी संख्या घटाकर 35 करने का प्रावधान किया गया है।

गोवा सिक्किम में एक भी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक नहीं है।

सहकारी बैंक:-

सहकारी बैंक सहकारी सिद्धांत पर आधारित है। ये बैंक राज्य सरकार के कानूनों के अधीन कार्य करते हैं।

इस बैंक के शेयर धारक मिलकर निदेशक मंडल का गठन करते हैं।

- सहकारी बैंक दो प्रकार के होते हैं

 (i) शहरी सहकारी बैंक

 (ii) ग्रामीण सहकारी बैंक

ग्रामीण सहकारी बैंक:-
ग्रामीण सहकारी बैंक का ढाँचा दो प्रकार का होता है-


प्राथमिक सहकारी समितियों की स्थापना सहकारी समिति अधिनियम 1912 के तहत की गई थी।

शहरी सहकारी बैंक:-

उपनगरीय कस्बा क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करवाने तथा वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इन बैंकों की स्थापना की गई।

सहकारी समिति अधिनियम 1912 तथा बहुराज्य सहकारी समिति अधिनियम-2002 के तहत इन बैंकों का गठन किया गया।

हाल ही में बैंक विनियमन संशोधन अधिनियम-2020 पारित किया गया जिसके तहत बैंक विनियमन अधिनियम-1949 की सभी धाराएँ शहरी सहकारी बैंकों पर लागू होंगी।

राज्य सहकारी बैंक:-

वे बैंक जो एक ही राज्य में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराते है।

बहु-राज्य शहरी सहकारी बैंक:-

वे बैंक जो एक से अधिक राज्यों में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराते हैं।

नचिकेत मोर समिति की सिफारिश के आधार पर सूक्ष्म क्षेत्रों में वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने हेतु दो नए प्रकार के बैंकों की स्थापना की गई है-

-  लघुवित्त बैंक (Small finance Bank) – 10

भुगतान बैंक (Payment Bank) – 11

लघु वित्त बैंक (Small finance Bank):-

इन बैंकों की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये की पूँजी की आवश्यकता होती है।

ये जमा सुविधा उपलब्ध कराता है।

ये अधिकांश ऋण सुविधा सूक्ष्म क्षेत्रों में उपलब्ध करवाता है।

-  ATM कार्ड अर्थात् क्रेडिट डेबिट कार्ड सुविधा उपलब्ध करवाता है।

इनकी 25% शाखाएँ ग्रामीण क्षेत्र में होनी चाहिए।

भुगतान बैंक (Payment Bank):-

100 करोड़ रुपये की पूँजी आवश्यक होती है।

-  ये बैंक 1 लाख रुपये तक की जमा सुविधा उपलब्ध कराते हैं।

-  ये बैंक ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं कराते हैं।

-  डेबिट कार्ड सुविधा उपलब्ध कराता है परन्तु क्रेडिट कार्ड सुविधा नहीं।

-  ये बैंक पूँजी सहकारी परिसम्पत्ति में निवेश करता है।

  घरेलू महत्व के महत्वूपर्ण बैंक:-(Domestic Systemically Important Banks – D - SIB)

वे बैंक जो वित्तीय रूप से मजबूत हों तथा जिनकी कुल पूँजी सकल घरेलू उत्पाद का 2% या उससे ज्यादा हो या जो Too big to fail अर्थात् जिनका डूबना संभव नहीं हो तथा जिनका संगठन स्थिर हो वे इस श्रेणी के अन्तर्गत आते हैं।

  वर्तमान में तीन बैंकों को यह दर्जा प्राप्त है-

  (1) भारतीय स्टेट बैंक (2016)

  (2) ICICI (2016)

  (3) HDFC (2017)

गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनी:-

(NBFC – Non-Banking financial campanies)

इनकी स्थापना कम्पनी अधिनियम – 1956 के अधीन की गई है।

ये मांग जमा स्वीकार नहीं करते हैं।

ये निपटान प्रणाली का हिस्सा नहीं होते हैं अर्थात् चैक जारी नहीं करते हैं।

ये जमा पर बीमा सुविधा की उपलब्धता नही प्रदान करते हैं।

  मुद्रा बैंक (Micro Unit development and refinance agency Mudra Bank):

मुद्रा बैंक की स्थापना अप्रैल, 2015 में की गई थी।

  पूँजी 20000 करोड़ रुपये

  गारन्टी पूँजी 3000 करोड़ रुपये

ये बैंक SIDBI के आनुषंगिक रूप में कार्य करते हैं।

प्रमुख कार्य:-

सूक्ष्म क्षेत्रों में वित्तीय सुविधा की उपलब्धता बढ़ाना।

सूक्ष्म इकाई को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने वाले संगठनों को वित्त सुविधा उपलब्ध करना।

सूक्ष्म क्षेत्रों के ऋणों को गारन्टी प्रदान करना।

  (यह एक पुनर्वित निकाय है)

बैड बैंक:-

गैर निष्पादनकारी परिसम्पत्तियों (NPA) की समस्या के निराकरण के लिए जिस बैंक की स्थापना की गई वह बैड बैंक कहलाता है।

- गैर निष्पादन कारी परिसम्पत्तियाँ (Non-performing assets):- वह ऋण जिसकी पुनर्वापसी 90 दिनों तक नही हो।

उद्देश्य बैंक:-

-  वे वित्तीय संगठन जिनका उद्देश्य लाभ अर्जित करना नहीं होकर किसी विशेष क्षेत्र को प्रोत्साहित करना होता है, उद्देश्य बैंक कहलाते हैं।

 

राष्ट्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक (NABARD):

NABARD एक्ट -1981 के तहत 12 जुलाई 1982 को राष्ट्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक की स्थापना की गई थी।

-  नाबार्ड की स्थापना शिवरमन समिति की सिफारिश पर की गई थी।

-  इसका मुख्यालयमुम्बई में स्थित है।

-  नाबार्ड की प्रारम्भिक पूँजी 100 करोड़ रुपये थी जो कि वर्तमान में 5000 करोड़ रुपये है। वर्तमान में नाबार्ड की 1% हिस्सेदारी रिजर्व बैंक के पास 99% हिस्सेदारी केन्द्र सरकार के पास है।

वर्तमान में नाबार्ड के अध्यक्ष जी.आर. चिन्ताला हैं।

कार्य:-

1.  यह कृषि क्षेत्र का शीर्ष बैंक है।

2.  यह व्यापारिक बैंकों, ग्रामीण तथा सहकारी बैंकों को दीर्घकालीन मध्यकालीन ऋण सुविधा उपलब्ध कराता है।

3.  सहकारी तथा ग्रमीण बैंकों को बीज, उर्वरक कीटनाशक हेतु अल्पकालिक ऋण सुविधा उपलब्ध कराता है।

4.  नाबार्ड एक पुनर्वित संगठन है जिसके द्वारा कृषकों को प्रत्यक्ष रूप से ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती बल्कि वित्तीय संगठनों की सहायता से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

5.  नाबार्ड द्वारा व्यापारिक बैंक, ग्रामीण बैंक सहकारी बैंकों का निरीक्षण पर्यवेक्षण किया जाता है।

6.  यह ग्रामीण विकास रोजगार सृजन हेतु वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराता है।

किसान क्रेडिट कार्ड:

नाबार्ड द्वारा कृषि में अल्पकालिक सहायता हेतु 1998 में किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की गई।

भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI):

इस बैंक की स्थापना वर्ष 1964 में की गई थी।

  नोट: वर्ष 2004 में इसे व्यापारिक बैंक का दर्जा दे दिया गया था।

हाल ही में IDBI की हिस्सेदारी को बेचकर इसे निजी क्षेत्र को सौंप दिया गया है।

प्रमुख कार्य:

- औद्योगिक इकाईयों को ऋण सुविधा उपलब्ध करवाना।

- औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करना।

- उद्योगों में प्रशिक्षण सुविधा की उपलब्धता को सुनिश्चित करना (यह शीर्ष औद्योगिक बैंक है)

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI):

- स्थापना – 19 अप्रैल, 1990

- मुख्यालयलखनऊ

कार्य:

1. लघु तथा सूक्ष्म उद्योगों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।

2. कस्बों तथा उपनगरीय क्षेत्रों में उद्योगों का विकास करना।

3. उन वित्तीय संगठनों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करना जो उद्योगों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराते हैं।

 आयातनिर्यात बैंक (Exim Bank):

- स्थापनाजनवरी, 1982

कार्य:

1. आयात-निर्यात व्यापार में संलग्न व्यापारियों को वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराना।

2. विदेशी मुद्रा में ऋण सुविधा उपलब्ध करना।

3. आयात-निर्यात को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाले संगठनों को ऋण सुविधा प्रदान करना।

राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB):-

- स्थापनाजुलाई, 1988

कार्य:

- आवास सुविधा की उपलब्धता हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।

-  आवास कीमत सूचकांक (HPI) NHB द्वारा वर्ष 2007 से जारी किया जा रहा है

बैंकिंग सुधार

- जुलाई, 1969 को 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण जिनकी पूँजी 50 करोड़ रुपये से ज्यादा थी।

- सन् 1969 लीड बैंक योजना लायी गयी जो जिला स्तरीय कार्य योजना थी अर्थात् जिले के सबसे बड़े बैंक को प्रमुख बनाया गया

- 15 अप्रैल, 1980- 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण जिनकी पूँजी 200 करोड़ रुपये थी।

- 2 अक्टूबर, 1975 को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना।

नरसिम्हन समिति-I- 1991 प्रावधान

-   SLR की दर 38 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत तक की जाए

-   CRR की दरों को 15 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत तक किया जाएं।

-   PSL की सीमा 40 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक की जाए।

-   ब्याज दरों का निर्धारण बाजार के आधार पर।

-   एन.पी.ए. (गैर निष्पादन परिसम्पत्ति) को कम करने हेतु DRT

-   विदेशी व निजी क्षेत्र को बैंक क्षेत्र में प्रवेश

-   बेसल नियमों को लागू किया जाए।

नरसिम्हन समिति II-1997

- बैंक परिसम्पत्ति गुणवत्ता में सुधार करके बैंक जोखिम को कम करना।

प्रावधान

1.   बैंक विलय की प्रक्रिया पर जोर

2.  सार्वजनिक बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से कम की जाए।

3.  व्यावसायिक कुशलता के आधार पर नियुक्ति।

4.  एन.पी.ए. की समय सीमा 180 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दी गई।

5.  सार्वभौमिक बैंकिंग की कल्पना तथा कम्प्यूटरीकरण पर जोर।

मालेगांव समिति-2010

- सूक्ष्म क्षेत्रों में वित्तीय सुधार हेतु

दामोदरन समिति-2010

- (ग्राहक सेवा स्तर में सुधार हेतु)

उषा थारोट समिति-2010

- (एन.बी.एफ.सी कम्पनियों में सुधार हेतु)

उर्जित पटेल समिति-2013

- (मौद्रिक नीति में सुधार हेतु)

सिफारिश

1.  मुद्रा स्फीति गणना करने का आधार थोक मूल्य सूचकांक (W.P.I) की जगह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (C.P.I) को माना जाए।

2.  मुद्रा स्फीति की दर 4 प्रतिशत के स्तर पर जिसमें 2 प्रतिशत का उतार-चढ़ाव सम्भव।

विमल जालान समिति-2014

- नये बैंकों को लाइसेंस प्रदान करना

- दो नए बैंक (वर्ष 2015)

 1. आई.डी.एफ.सी.

 2. बंधन फाइनेंस

नचिकेता मोरे समिति-2014

- सूक्ष्म क्षेत्रों में बैंकिंग सुधार रिपोर्ट 2014

दो नए प्रकार के बैंक

विभेदीत बैंकिंग

- पेमेन्ट बैंक भुगतान बैंक के लिए पूँजी की आवश्यकता-100 करोड़

-  1 लाख तक की जमा स्वीकार

-  ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं

-  डेबिट कार्ड सुविधा उपलब्ध कराता परन्तु क्रेडिट कार्ड सुविधा नहीं

-  कुल सम्पत्ति का 75 प्रतिशत सरकारी परिसम्पत्ति में निवेश तथा 25 प्रतिशत बैंक को उपलब्धता

स्मॉल फाईनेंस (लघु वित्त बैंक)

- पूँजी आवश्यकता 100 करोड़

-  1 लाख से अधिक की जमा स्वीकार्य

- ऋण सुविधा उपलब्ध कराता है

-  क्रेडिट तथा डेबिट दोनों प्रकार के कार्ड की उपलब्धता

-  75 प्रतिशत वित्तीय सुविधा की सूक्ष्म क्षेत्रों में उपलब्धता

पी.जे. नायक समिति

 बैंक प्रबंधन में सुधार हेतु बैंक विलय प्रस्ताव दिया गया।

1.  एस.बी.आई. में मार्च, 2017 में 5+1 बैंकों का विलय

- स्टेट बैंक पटियाला

-  स्टेट बैंक मैसूर

-  स्टेट बैंक दावनकोर

-  स्टेट बैंक हैदराबाद

-  बीकानेर व जयपुर

2.  2018 में बैंक ऑफ बडौदा में देना बैंक तथा विजया बैंक का  विलय किया गया।

 अप्रैल, 2020 में 10 बैंकों को मिलाकर 4 बैंक

-  पी.एन.बी. = ओ.बी.सी. + यूनाइटेड बैंक

-  केनरा बैंक + सिंडीकेट बैंक

-  इण्डियन बैंक + इलाहाबाद बैंक

-  यूनियन बैंक + आंध्रा बैंक + कॉर्पोरेशन बैंक

 घरेलू महत्वपूर्ण बैंक (Domestic Systematically Important Bank)

-  ये बैंक बड़े आकार वाले होते हैं।

-  इनकी पूँजी जी.डी.पी. का लगभग 2 प्रतिशत है।

-  विस्तृत ग्राहक आधार

-  टू बिग टू फेल

    बेसल मानक-3 लागू करना

- बैंक आफॅ इंटरनेशनल सेटलमेंट (बी.आई.एस)

- 1930 मुख्यालय बेसल (स्विट्जरलैण्ड)

- विश्व के केन्द्रीय बैंकों का समूह है। (60 बैंक)

- विभिन्न देशों के केन्द्रीय बैंक इसके सदस्य हैं।

इसका उद्देश्य

- विश्व में वित्तीय स्थिरता लाना।

- विनियमन के मानकों का निर्धारण करना।

 इस समिति द्वारा निर्धारित मानक 'बेसल नियम' तीन बार निर्धारण

बेसल प्रथम-1998

बेसल द्वितीय-2004

बेसल तृतीय-2011

- भारत में 31 मार्च, 2019 तक बेसल तृतीय लागू किए गए

- जिनका परिसम्पत्ति जोखिम अनुपात 9 प्रतिशत है।

उद्देश्य :-

बैंकिंग लोकपाल (banking Lokpal)

- ग्राहक सेवा स्तर में सुधार व शिकायत निवारण हेतु

- सुविधा युक्त व पारदर्शी व भेदभाव रहित बैंक सुविधा उपलब्ध कराना।

अर्द्ध न्यायिक प्राधिकारी

- बैंकिंग लोकपाल वर्ष 1995, 2002, 2006

- बैंकिंग लोकपाल-2006

 शिकायत प्रक्रिया, डाक, -मेल, ऑनलाइन भी भेजी जा सकती है। जिनका निवारण किसी भी आधार पर 30 दिनों के भीतर होता है।

- शामिल- ग्रामीण, व्यापारिक व सहकारी बैंक क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-पेमेंट- बैंकिंग लोकपाल की नियुक्ति RBI द्वारा

कोर बैंकिंग :-

- कोर बैंकिंग से तात्पर्य उच्च स्तर की सूचना प्रौद्योगिकी की सहायता से बैंक तंत्र को एक सूत्र में पिरोकर बैंक लेन-देन को पारदर्शी व लचीला बनाना।

C.B.S. (Core Banking Solution)

- बैंक शाखाओं की एक केन्द्रीकृत व्यवस्था जिसके तहत एक बैंक शाखा का खाताधारक उस बैंक के किसी भी शाखा में सुविधा प्राप्त करता है।

- सार्वभौमिक बैंकिंग व्यवस्था अर्थात् बैंक से जुडी़ सभी सुविधा जैसे क्रेडिटकार्ड, ऑनलाइन बैंकिंग।

.टी.एम. ATM

1.  बैंक .टी.एम.  

 (बैंक द्वारा स्थापित तथा संचालित ए.टी.एम.)

2.  व्हाइट .टी.एम.

 (गैर बैंकिंग कम्पनियों द्वारा स्थापित तथा संचालित)

3.  ब्राउन .टी.एम.

 (गैर बैंकिंग कम्पनियों द्वारा अवसंरचना निर्माण तथा बैंक द्वारा संचालित)