राजस्थान में उद्योगों की स्थिति
- स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व राजस्थान में केवल सात सूती वस्त्र मिलें, दो सीमेंट फैक्ट्रियाँ व दो चीनी की मिलें थीं।
- राजस्थान के गठन के समय राजस्थान में 11 वृहद् उद्योग, 7 सूती वस्त्र इकाइयाँ, 2 सीमेंट इकाई तथा 2 चीनी मिलें और 207 पंजीकृत फैक्ट्रियाँ थीं।
- राजस्थान औद्योगिक विकास के मामले में पिछड़ा राज्य है।
- वर्ष 1978 में केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत जिला उद्योग केन्द्रों की स्थापना की गई।
- वर्तमान में 36 जिला उद्योग केन्द्र तथा आठ उप-जिला उद्योग केन्द्र हैं।
- 33 जिलों के अतिरिक्त 3 जिला उद्योग केन्द्र जयपुर ग्रामीण, भिवाड़ी (अलवर) तथा फलोदी (जोधपुर) में है।
- 8 उप-जिला केंद्र – नीमराना, मकराना, किशनगढ़, ब्यावर, फालना, बालोतरा, आबू रोड तथा सुजानगढ़ (चूरू) हैं।
- वर्ष 2020-21 राज्य के कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन (जी. एस. वी .ए) में प्रचलित कीमतों पर उद्योग क्षेत्र का योगदान 24.80% है।
- राज्य में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) हेतु आधार वर्ष 2004-05 से बदलकर 2011-12 कर दिया गया है।
- यह सूचकांक अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों के विकास का विवरण प्रस्तुत करता है। जैसे-खनन(125.60) विद्युत(135.15) , विनिर्माण(125.93) आदि।
- राज्य में थोक मूल्य सूचकांक (WIP) हेतु आधार वर्ष 1999-2000 को माना जाता है।
- श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में तीन जिलों को शामिल किया जाता हैं :-
अजमेर, भीलवाड़ा, जयपुर।
- राजस्थान में मई, 2019 से न्यूनतम मजदूरी कर दी गई है :-
अकुशल श्रमिक - 225 रुपये प्रतिदिन
अर्द्धकुशल श्रमिक - 237 रुपये प्रतिदिन
कुशल श्रमिक - 249 रुपये प्रतिदिन
उच्च कुशल श्रमिक - 299 रूपये प्रतिदिन
- 12वीं पंचवर्षीय योजा में राज्य में औद्योगिक विकास दर का लक्ष्य 8% था।
- वर्तमान में राज्य में सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों (MSME) की संख्या 1,05,334 उद्योग तथा इनमें कार्यरत श्रमिकों की संख्या 4,47,326 हैं।
- नीति आयोग द्वारा जारी औद्योगिक नवाचार सूचकांक-2019 में राजस्थान का स्थान 13वाँ रहा था। (प्रथम स्थान-कर्नाटक)
- राजस्थान से निर्यात की जाने वाली महत्वपूर्ण वस्तुएँ :
इंजीनियरिंग उत्पाद, कपड़ा, रसायन, आभूषण, हस्तकला उत्पाद।
- वर्ष 2019 में निर्यात वृद्धि हेतु
राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय निर्यात ‘एक्सपो’
Þराजस्थान अंतर्राष्ट्रीय निर्यात ‘एक्सपो’ का अयोजन जोधपुर में किया गया।
I-Start पोर्टल :
Þऑनलाइन पार्टल, जिसमें पंजीकरण करवाने से से स्टार्ट-अप को निवेशकों की जानकारी प्राप्त होती है।
राज संपर्क:
Þकिसी भी समस्या के निवारण हेतु यह एक ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र है। इसका हेल्प लाइन नंबर 181 है।
रिसर्जेन्ट राजस्थान 2015 :
- 19-20 नवंबर, 2015 में उद्योगों में निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु रिसर्जेन्ट राजस्थान नाम से एक सेमीनार जयपुर में आयोजित की गई, जहाँ सर्वाधिक निवेश प्रस्ताव ऊर्जा क्षेत्र में प्राप्त हुए।
उद्योगों के प्रकार
(A)पूँजी के आधार पर -
-वृहद उद्योग
-लघु उद्योग
-कुटीर उद्योग
-ग्रामोद्योग
(B)स्वामित्व के आधार पर -
-सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग - स्वामित्व एवं संचालन सरकार द्वारा
-निजी क्षेत्र के उद्योग – स्वामित्व एवं संचालन व्यक्ति एवं व्यक्तियों द्वारा
-सहकारी क्षेत्र के उद्योग – स्वामित्व एवं संचालन राज्य सरकार एवं व्यक्तियों द्वारा
(C)कच्चे माल के आधार पर -
-कृषि आधारित उद्योग
-खनिज आधारित उद्योग
-तकनीकी आधारित उद्योग
लघु उद्योग-
वर्ष 2006 में एस.पी. गुप्ता समिति की सिफारिश पर लघु उद्योगों को सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम इकाइयों (MSME) में वर्गीकृत कर दिया गया।

सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग नीति – 2015
राज्य सरकार द्वारा MSME को प्रोत्साहित करने हेतु MSME Policy 2015 लाई गई जिसके द्वारा MSME की परिभाषा में परिवर्तन किया गया और निवेश व टर्नओवर के आधार पर वर्गीकृत किया गया –
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उद्योग |
निवेश के आधार पर |
टर्नओवर के आधार पर |
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सूक्ष्म |
1 करोड़ रु. तक |
0 - 5 करोड़ रु. तक
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लघु |
1 करोड़ से 10 करोड़ रु. तक
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5 से 50 करोड़
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|
मध्यम |
10 करोड़ से 50 करोड़ तक |
50 - 200 करोड़ रु. तक |
वृहद उद्योग-
-वे उद्योग जिसमें अत्यधिक मात्रा में पूँजीं निवेश, मशीनीकरण तथा तकनीक की सहायता से उच्च उत्पादन किया जाता है जैसे – लोहा इस्पात तथा रिफाइनरी।
कुटीर उद्योग-
-कुटीर उद्योग से आशय एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा किए जाने वाले उत्पादन कार्य अर्थात् कुटीर उद्योग लगभग पूरी तरह घरेलू उद्योग होते हैं।
-इसमें उत्पादन कार्य मशीनों के बजाय हाथों से किए जाते हैं इसमें बाहरी श्रम का उपयोग नहीं होता।
-कुटीर उद्योगों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है – ग्रामीण कुटीर उद्योग तथा शहरी कुटीर उद्योग।
ग्रामोद्योग –
-दस हजार तक की आबादी वाले क्षेत्रों में कम पूँजी निवेश करके किए जाने वाले उत्पादन कार्य ग्रामोद्योग कहलाते हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम
-केन्द्र सरकार के उपक्रम।
1.हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड – उदयपुर
-स्थापना – 1966 – उदयपुर
-कार्य - जिंक शोधन
-एशिया का सबसे बड़ा जिंक शोधन कारखाना।
-वर्तमान में वेदान्ता रिसोर्सेज द्वारा उत्पादन।
-जिंक स्मेल्टर प्लांट – देबारी (उदयपुर) चंदेरिया (चित्तौड़गढ़)
2.हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड – खेतड़ी
-स्थापना – 1967 (संयुक्त राज्य अमेरिका की सहायता से)
यह खेतड़ी (झुंझुनूँ) के आस-पास ताम्र अयस्क के खनन एवं परिशोधन का कार्य करता है।
3.हिंदुस्तान मशीन टूल्स – (HMT) - अजमेर
-स्थापना – 1967 में अजमेर इकाई को प्रारंभ।
-HMT की स्थापना चेकोस्लोवाकिया की सहायता से की गयी।
-HMT द्वारा मशीनी उपकरण तैयार करने का कार्य किया जाता है।
4.इंस्ट्रमेंटेशन लिमिटेड – कोटा
-स्थापना – 1964 (रूस की सहायता से स्थापित)
-वर्तमान में यह इकाई बन्द है पर इसकी अन्य सहायक इकाई राजस्थान इलेक्ट्रानिक्स व इंस्ट्रमेंटेशन लिमिटेड – (REIL) है।
-REIL की स्थापना जयपुर में 1981 में की गई यह विद्युत उपकरण बनाने का कार्य करती है।
-इसे मिनी रत्न कम्पनी का दर्जा प्राप्त है।
5.सांभर साल्ट लिमिटेड – जयपुर
-स्थापना – 1964 – जयपुर
-हिंदुस्तान साल्ट लिमिटेड की सहायक इकाई के रूप में जयपुर में स्थापित जो सांभर झील से नमक उत्पादन का कार्य करती है।
-देश के कुल नमक का 8.7% उत्पादन सांभर झील से होता है।
6.मार्डन बेकरीज
-स्थापना – 1965 (वर्तमान में इकाई बंद।)
7.राजस्थान फार्मास्यूटिकल लिमिटेड
-स्थापना – 1978, जयपुर (वर्तमान में इकाई बंद)
8.राजस्थान पेट्रो केमिकल रिफाइनरी
-पचपदरा, बाड़मेर में 16 जनवरी 2018 को HPCL और राजस्थान सरकार की 74:26 की भागीदारी से रिफाइनरी का उदˎघाटन किया गया।
-2022 तक रिफाइनरी प्रारंभ करने की घोषणा की गई है।
-BS VI गुणवत्ता मानक द्वारा ईंधन उत्पादन करने वाली देश की प्रथम रिफाइनरी है।
राजस्थान में औद्योगिक नीतियाँ
-राजस्थान में अब तक पाँच बार औद्योगिक नीति बन चुकी है। जिसमें से चार नीतियाँ मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में और नई नीति मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में 19 दिसम्बर, 2019 को जारी हुई
प्रथम औद्योगिक नीति-
-प्रथम औद्योगिक नीति 24 जून, 1978 को घोषित की गयी।
-इस नीति के अर्न्तगत रोजगारोन्मुख उद्योग यथा-खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा व हस्तशिल्प के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई व असंतुलनों को दूर करने के प्रयास किए गए।
द्वितीय औद्योगिक नीति-
-द्वितीय औद्योगिक नीति दिसम्बर, 1990 को घोषित व अप्रैल, 1991 से लागू की गयी।
-इस नीति के अर्न्तगत द्वितीय नीति में खनन, कृषिगत व अन्य साधनों के अधिकतम उपयोग, रोजगार संवर्द्धन तथा औद्योगिकीकरण के माध्यम से राज्य के वित्तीय साधन बढ़ाने पर जोर दिया गया।
तृतीय औद्योगिक नीति-
-तृतीय औद्योगिक नीति 15 जून, 1994 को घोषित की गयी।
-इस नीति के अर्न्तगत राज्य का तीव्र गति से औद्योगिकीकरण का लक्ष्य रखा गया जिसमें मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए निजी क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया गया।
चतुर्थ औद्योगिक नीति-
-चर्तुथ औद्योगिक नीति 4 जून, 1998 को घोषित की गयी।
-इस नीति का उद्देश्य राज्य को कुछ चुने हुए क्षेत्रों में विनियोग की दृष्टि से सर्वोच्च प्राथमिकता वाला राज्य बनाना था। इस हेतु समूहों के विकास की रणनीति अपनाई गई।
-राज्य सरकार ने प्रदेश के लिए ‘नई औद्योगिक नीति’ तैयार करने के लिए डा. के.के. पाठक की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समीति बनाने की घोषणा 17 जनवरी, 2019 में की गई।
राजस्थान औद्योगिक नीति – 2019
-19 दिसम्बर, 2019 को घोषित
उद्देश्य:-
1.औद्योगिक आधारभूत अवसंरचना का विकास करना।
2.राज्य का विनिर्माण हब के रूप में विकसित करना।
3.रोजगार प्रोत्साहन प्रदान करना।
4.मानव संसाधन का विकास करना।
5.औद्योगिक क्रांति 4.0 का विकास करना।
प्रावधान:-
1.पिछड़े क्षेत्रों में कम दरों पर भूमि का आवंटन करना।
2.MSME की गुणवत्ता में सुधार तथा शोध के माध्यम से प्रोत्साहन देना।
3.स्टार्टअप हेतु नई स्टार्ट नीति का निर्माण करना।
4.SC, ST महिला कुटीर उद्योग, फुटकर व्यापारी व SHG उद्योगों को प्रोत्साहन प्रदान करना।
5.पैट्रोकेमिकल रिफायनरी के आस-पास औद्योगिक टाउनशिप का निवास करना।
6.भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लचीला बनाना।
7.रीको तथा निजी क्षेत्र की सहायता से PPP मॉडल पर औद्योगिक पार्क का निवास करना।
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS)
1.प्रथम राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना – 28, जुलाई 2003
2.राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना – 25 अगस्त, 2010
3.राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना – 8 अक्टूबर, 2014
4.राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना – 19 दिसम्बर, 2019
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) – 2019
राजस्थान में निवेश को प्रोत्साहन देने हेतु राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 19 दिसम्बर, 2019 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा लॉन्च की गई।
यह योजना 12 दिसम्बर, 2019 से 31 मार्च, 2026 तक लागू रहेगी।
इस योजना के प्रमुख प्रावधान निम्न हैं-
1.SGST में 7 वर्ष के लिए 75% निवेश अनुदान का प्रावधान।
2.रोजागार सृजन अनुदान के रूप में 7 वर्षों तक कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी बीमा हेतु दिए जाने वाले अंशदान की 50% राशि का पुन: भुगतान सरकार की ओर से किया जाएगा।
3.7 वर्षों के लिये विद्युत शुल्क, भूमि शुल्क, मंडी शुल्क स्टॉम्प शुल्क में 100% की छूट दी जाएगी।
4.भूमि रूपान्तरण शुल्क में 100% की छूट दी जाएगी।
5.थ्रस्ट सेक्टर के उद्यमों को विद्युत कर में अधिकतम 10 वर्षों के लिये 100% छूट होगी।
6.सेवा उद्यमों को 20% या 25% पूँजी अनुदान और 5% ब्याज अनुदान देय होगा।
औद्योगिक क्षेत्र
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)
-देश की सीमा में स्थित वे औद्योगिक क्षेत्र जिन पर सामान्य कानून लागू नहीं होते हैं। जो निर्यात प्रोत्साहन हेतु स्थापित किये जाते हैं।
राज्य की विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) नीति – 2003
-राज्य में निर्यातों को बढ़ावा देने हेतु 13 मार्च, 2003 को राज्य सरकार द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र नीति लायी गई। जिसके तहत राज्य में 5 विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित किये गए –
रीको और सरकार द्वारा संयुक्त रूप से –
-SEZ – 1 सीतापुरा जयपुर, जेम्स एण्ड ज्वैलरी
-SEZ – 2 सीतापुरा जयपुर, जेम्स एण्ड ज्वैलरी निजी क्षेत्र में।
-SEZ – महिन्द्रा वर्ल्ड सिटी, जयपुर – I.T.
-SEZ - महिन्द्रा वर्ल्ड सिटी, जयपुर – इंजीनियरिंग उत्पाद।
-SEZ – 3 महिन्द्रा वर्ल्ड सिटी, जयपुर – हैण्डी क्राफ्ट
सेज अधिनियम 2015
-6 अप्रैल, 2015 को विशेष आर्थिक क्षेत्र से संबंधित अधिनियम लाया गया जिसके तहत SEZ से संबंधित सभी अधिकार अलग-अलग एजेन्सियों के बजाय विकास आयुक्त के क्षेत्राधिकार में रखे गए।
प्रस्तावित SEZ
-सोमानी वर्स्टेड लिमिटेड खुशखेड़ा, भिवाड़ी अलवर SEZ
-वाटिका SEZ – जयपुर
-महिन्द्रा SEZ – जयपुर
-जेनपेक्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड SEZ – जयपुर
-RNB इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. SEZ – बीकानेर
-बोरानाडा जोधपुर से SEZ की मान्यता समाप्त करके इसे बोरानाडा इंडस्ट्रीयल पार्क कर दिया गया है।
-धौलपुर में सैनिक समूह द्वारा मल्टी सेज प्रोडक्ट स्थापित किया जाएगा।
शुष्क बंदरगाह
-देश का प्रथम शुष्क बंदरगाह सांचौर-जालोर।
औद्योगिक पार्क
1.जापानी पार्क – 1
नीमराना औद्योगिक क्षेत्र (अलवर) में जापानी कम्पनी जेट्रो के साथ मिलकर रीको द्वारा 2006 में जापानी जोन विकसित किया गया।
2.जापानी पार्क - 2
घिलोट – अलवर में दूसरा जापानी पार्क जेट्रो की सहायता से ही स्थापित किया गया है।
3.कोरियन पार्क –
रीको तथा कोरियन कम्पनी (कोट्रा) के साथ मिलकर घिलोट (अलवर) में ही कोरियन पार्क विकसित किया गया।
निर्यात संवर्द्धन औद्योगिक पार्क (EPIP)
1.सीतापुरा - जयपुर
2.बोरानाडा – जोधपुर
3.नीमराणा - अलवर
सूचना प्रौद्योगिकी पार्क
1.जयपुर
2.जोधपुर
3.उदयपुर
4.कोटा
स्टोन पार्क
1.मंडोर - जोधपुर
2.मंडाना - कोटा
3.सिकन्दरा - दौसा
4.विशनौदा – धौलपुर
5.मासलपुर – करौली
वस्त्र पार्क
1.भीलवाड़ा – इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क
2.अलवर – इंटीग्रेटेड अपेरल सिटी
3.दौसा – कारपेट पार्क
4.बाड़मेर – हिम्माड़ा टेक्सटाइल पार्क
5.बगरू – जयपुर
6.सिलोरा – किशनगढ़
7.पाली –
चर्म पार्क
1.मानपुरा माचेड़ी – (जयपुर)
2.सीतापुरा – जयपुर
3.भिवाड़ी – अलवर
वुलन पार्क
1.गोहना – ब्यावर
2.नर्बद खेड़ा - बीकानेर
सिरेमिक पार्क
1.खारा – बीकानेर
2.घिलोट – अलवर
पुष्प पार्क
1.खुशखेड़ा – अलवर
ऑटोमोबाइल पार्क
1.खुशखेड़ा – अलवर
2.टपूकड़ा – अलवर
एग्रोफूड पार्क
1.गंगानगर
2.जोधपुर
3.कोटा
4.अलवर
मेगा फूड पार्क
-रूपनगढ, किशनगढ़ (अजमेर)
जूट पार्क
-अजमेर
साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क
-सीतापुरा – जयपुर
साइबर पार्क
-जोधपुर
इन्फ्रास्ट्रक्चर पार्क
-अलवर
बायोटेक्नोलॉजी पार्क
-जयपुर
-अलवर
औद्योगिक वित्तीय संगठन
राज्य में उद्योगों के विकास हेतु निम्न संस्थाएँ कार्यरत हैं-
1.राजस्थान औद्योगिक विनियोग विकास निगम – RIICO
-28 मार्च, 1969 में राजस्थान उद्योग तथा खनिज निगम (RSIMDC) की स्थापना हुई जिसके बाद में खनिज तथा उद्योगों दोनों के लिये पृथक् निगम बना दिये गए।
-1979 में राजस्थान खनिज विकास निगम तथा 1 जनवरी, 1980 में रीको की स्थापना की गई। रीको राजस्थान में उद्योगों के लिए सबसे बड़ी संस्था है।
रीको के कार्य:-
1. राज्य का शीर्ष औद्योगिक वित्तीय संगठन है।
2.वृहद् तथा मध्यम इकाइयों को दीर्घकालीन ऋण सुविधा उपलब्ध करवाता है।
3.उद्योगों को प्रोत्साहन करने हेतु औद्योगिक अवसरंचना का विकास करता है।
4.औद्योगिक व्यापार तथा औद्योगिक निवेश संवर्द्धन का कार्य करता है।
5.रीको मर्चेन्ट बैंकर के रूप में कार्य करता है।
6.राज्य में औद्योगिक परियोजनाओं के प्रतिवेदन पर राज्य सरकार को सलाह प्रदान करता है।
7.उद्योगों को वित्तीय रियायतें प्रदान कर प्रोत्साहन देना।
रीको के विशेष कार्य:-
1. दिसम्बर, 2019 तक 348 औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा चुके हैं।
2.रीको द्वारा सीतापुरा जयपुर में जेम्स एण्ड ज्वैलरी के दो SEZ संचालित किये जा रहे हैं।
3.जापानी संस्था-जेट्रो के साथ मिलकर दो जापानी पार्क नीमराना और घिलोट (अलवर) में संचालित।
4.कोरियाई कम्पनी-कोट्रा के साथ मिलकर कोरियन इन्वेस्टमेंट जोन घिलोट (अलवर) में संचालित।
5.चार एग्रोफूड पार्क का निर्माण रीको द्वारा –
-श्रीगंगानगर
-कोटा
-जोधपुर
-अलवर
-सिरेमिक पार्क – घिलोट अलवर
-इलेक्ट्रानिक मेन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर – अलवर
2.राजस्थान वित्त निगम - (R.F.C)
स्थापना – 17 जनवरी, 1955 को ’राजस्थान वित्त निगम अधिनियम 1951’ के तहत 100 करोड़ की अंश पूँजी से की गई।
कार्य:-
1. अति लघु, लघु तथा मध्यम इकाइयों को मध्यकालीन व दीर्घकालीन ऋण सुविधा उपलब्ध करवाना।
2.राज्य में तीव्र औद्योगिकीकरण में सहयोग प्रदान करना।
3.यह सरकार के अभिकर्ता के रूप में कार्य करता है।
4.उद्योगों का नवीनीकरण तथा विस्तार हेतु सुविधा उपलब्ध करवाना।
5.अधिकतम 20 करोड़ तक के ऋण की सुविधा
6.यह केन्द्र सरकार, राज्य सरकार तथा IDBI व IFCI के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता हैं।
7.यह ऋणों की गारन्टी प्रदान करता है तथा यह पुनर्वित निगम है।
RFC द्वारा संचालित योजनाएँ
1.युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना – 2013-14
-राज्य के युवा उद्यमियों को अपना उद्योग स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए राजस्थान वित्त निगम द्वारा 19 अप्रैल, 2013 से यह योजना लागू की गई थी। जिसके तहत युवाओं को स्वरोजगार हेतु 25 लाख से 5 करोड़ तक की ऋण सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही है।
2.महिला उद्यम निधि-योजना
-महिलाओं को स्वरोजगार हेतु 10 लाख रुपये तक ऋण सुविधा तथा लोन भुगतान अवधि 5 से 10 वर्ष तक है।
3.सेमफेम्स योजना
-भूतपूर्व सैनिकों को स्वरोजगार हेतु।
4.टॉप अप योजना
-M.S.M.E हेतु ऋण सुविधा
5.फ्लेक्सी योजना
-आसान ऋण सुविधा
6.टेक्नोक्रेट योजना
-तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं को स्वरोजगार हेतु ऋण सुविधा
7.शिल्पबाड़ी –
-दस्तकारों व शिल्पकारों हेतु
Note:-ऋण प्रोत्साहन योजना के तहत उद्यमियों को सिल्वर कार्ड, गोल्ड कार्ड तथा प्लेटिनम कार्ड भी दिये जाते हैं।
3.राजस्थान लघु उद्योग विकास निगम – (RAJSICO)
-स्थापना – 3 जून, 1961
कार्य:-
-लघु औद्योगिक इकाइयाँ को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।
-सस्ती दरों पर कच्चा माल व विपणन सुविधा उपलब्ध करवाना।
-उद्योगों में आपसी ताल मेल स्थापित करना।
-ट्राइबल प्रशिक्षण केन्द्रों का संचालन।
-विपणन वृद्धि हेतु मेले, प्रदर्शनी तथा सेमीनार का आयोजन।
-‘राजस्थली एम्पोरियम’ के नाम से विपणन केन्द्रों का संचालन।
-राजसीको द्वारा एयरकार्गो (मालवाहक) का संचालन किया जाता है।
प्रथम एयर कार्गों – सांगानेर (जयपुर)
-राजसीको द्वारा शुष्क बंदरगाह (I.C.D) का संचालन किया जाता है।
-जयपुर (मानसरोवर)
-जोधपुर
-भीलवाड़ा
-अलवर
-बीकानेर
राजसीको द्वारा निम्न प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन किया जाता है-
1.फड़ चित्रण – भीलवाड़ा
2.कोटा बूँदी चित्रकला – कोटा
3.मारवाड़ चित्रकला - जोधपुर
4.मुनव्वती कला – बीकानेर
4.ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण – RUDA
-स्थापना – नवम्बर, 1995
उद्देश्य:-
-राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में गैर कृषि आजीविका के साधनों का विकास करना व स्वरोजगार को बढा़वा देना।
कार्य:-
-यह खादी, ग्रामोद्योग, चर्म उद्योग, सिरेमिक, पॉटरी, हस्तकला आदि उद्योगों के विकास को प्रोत्साहित करता है और वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाता है।
-ग्रामीण दस्तकारों को प्रशिक्षण देना, संगठित करना तथा ग्रामीण हस्तशिल्प तकनीकी का विकास करना।
-हस्तकला उद्योगों को आधुनिक डिजाइन उपलब्ध करना।
-ग्रामीण हथकरघा उद्योगों की विपणन व्यवस्था सुनिश्चित करना तथा इनके उत्पादों का विदेशों में प्रचार प्रसार करना।
-विपणन प्रोत्साहन हेतु मेले, प्रदर्शनी व सेमीनार का आयोजन करना।
RUDA के नवाचार/योजनाएँ
1.भौगोलिक संकेतक (G.I) पंजीकरण
-रूडा द्वारा भारत सरकार के सहयोग से भौगोलिक संकेतक (G.I.) के पंजीकरण की कार्यवाही क्रियान्वित की जा रही है।
1. कोटा डोरिया वस्त्र
2. ब्लू पॉटरी, जयपुर
3. सांगानेरी प्रिंट
4. बगरू हैण्ड ब्लॉक प्रिंटिंग
5. पोकरण पॉटरी
2.रूडा प्रमुख रूप से 3 क्षेत्रों के अंतर्गत अपनी गतिविधियाँ संचालित करता है-
1. चमड़ा उद्योग
2. ऊन व वस्त्र
3. लघु खनिज
3.हस्तकला प्रोत्साहन योजना –
तालछापर (चूरू)
4.कोटा डोरिया प्रशिक्षण केंद्र – कोटा
5.कोटा डोरिया हाड़ौती क्षेत्र क्लस्टर विकास परियोजना
6.चर्म क्लस्टर – रेनवाल (जयपुर)
प्रमुख उद्योग
सूती वस्त्र उद्योग
-यह कृषि आधारित परम्परागत उद्योग है जो अधिक मात्रा में रोजगार उपलब्ध करवाता है।
-देश में सूती वस्त्र का प्रथम कारखाना – 1854 में बम्बई में स्थापित किया गया इसी कारण से देश की वस्त्र नगरी मुम्बई को कहा जाता है।
-पूर्व का बोस्टन तथा भारत का मेनचेस्टर – अहमदाबाद
-उत्तर भारत का मेनचेस्टर – कानपुर
-दक्षिण भारत का मेनचेस्टर – कोयम्बटूर
-देश में सर्वाधिक सूती वस्त्र इकाइयाँ महाराष्ट्र तथा गुजरात में है।
-राज की प्रथम सूती वस्त्र मिल – 1889 में ब्यावर (अजमेर) में ‘दि कृष्णा मिल्स लिमिटेड’ के नाम से सेठ दामोदर दास द्वारा स्थापित की गयी।
-राज्य में 23 सूती वस्त्र इकाइयाँ है। जिनमें 17 निजी क्षेत्र 3 सरकारी क्षेत्र तथा 3 सहकारी क्षेत्र में है।
सरकारी क्षेत्र की सूती वस्त्र मिलें –
1.एडवर्ड कॉटन मिल्स
-स्थापना – 1906, ब्यावर (अजमेर)
-यह राज्य की दूसरी तथा सरकारी क्षेत्र की प्रथम सूती वस्त्र मिल हैं।
2.महालक्ष्मी कॉटन मिल्स लिमिटेड
-स्थापना – 1925, ब्यावर (अजमेर)
3.विजय नगर कॉटन मिल्स लिमिटेड
-स्थापना – 1932, विजय नगर (भीलवाड़ा)
नोट:-तीनों वर्तमान में बन्द (1973 -74) में इनका विलय भारत मिल्स में कर दिया गया।
सहकारी क्षेत्र की कताई मिलें–
1.1965 – गुलाबपुरा सहकारी कताई मिल्स लि. भीलवाड़ा
2.1978 – गंगानगर सहकारी कताई मिल्स लि. श्रीगंगानगर
3.1981 – गंगापुर सहकारी कताई मिल्स लि. श्रीगंगापुर, भीलवाड़ा
नोट:-1 अप्रैल, 1993 को तीनों कताई मिलों एवं गुलाबपुरा की सहकारी जिनिंग मिल को मिलावट राजस्थान राज्य सहकारी स्पिनिंग व जिनिंग मिल्स संघ लिमिटेड SPINFED की स्थापना की गई।
कार्य:-
-कपास उत्पादन को प्रोत्साहन देना।
-कताई तथा बुनाई उद्योग को बढ़ावा देना।
-सूती-वस्त्र विपणन को बढ़ाना।
-राजस्थान में सूती वस्त्र नगरी – भीलवाड़ा
-राजस्थान का मेनचेस्टर – भीलवाड़ा
-राज्य का वस्त्र अभियांत्रिकी महाविद्यालय माणिक्य लाल वर्मा टेक्सटाइल अंभियांत्रिकी कॉलेज भीलवाड़ा है।
-राज्य में सर्वाधिक वस्त्र उत्पादन करने वाली इकाई 1939 में स्थापित उम्मेद मिल (पाली) हैं।
चीनी उद्योग
-चीनी उद्योग परम्परागत कृषि आधारित उद्योग है। चीनी उद्योग हेतु कच्चा माल – गन्ना, चुकन्दर आदि चाहिए होते हैं।
-भारत चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता तथा दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
-ब्राजील चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
-क्यूबा को चीनी का कटोरा कहा जाता है।
-भारत में चीनी की मील सर्वाधिक उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र में है।
-राजस्थान में चीनी का उत्पादन बहुत कम मात्रा में होता है यहाँ तीन चीनी उत्पादक मिलें हैं-
1.वर्ष 1932 में भोपाल सागर चित्तौड़ में ‘द मेवाड़ शुगर मिल्स लि.’ राजस्थान की प्रथम तथा निजी क्षेत्र की चीनी मिल हैं।
2.वर्ष 1965 में बूँदी के केशोरायपाटन सहकारी में सहकारी क्षेत्र की शुगर मिल्स स्थापित की गई। वर्तमान में यह इकाई बंद है।
3.वर्ष 1945 में राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स लि. स्थापित की गई।
-वर्ष 1956 में राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण करने पर यह सार्वजनिक क्षेत्र में आ गई।
-वर्ष 1968 में इस मिल में चुकन्दर से चीनी बनाने का संयंत्र भी स्थापित किया गया।
अन्य चार इकाइयाँ-
1.दि गंगानगर शुगर मिल कमीनपुर, करणपुर, श्रीगंगानगर में चीनी उत्पादन हो रहा।
2.श्री गंगानगर तथा अटरू बाराँ में डिस्टलरीज इकाई स्थापित की गई है।
3.हाइटेक प्रिसीजन ग्लास फैक्ट्री – धौलपुर, यहाँ शराब की बोतलें बनायी जाती है।
4.शराब विपणन केन्द्र – उदयपुर, कोटा
सीमेंट उद्योग
-सीमेंट खनिज आधारित आधारभूत उद्योग है। सीमेंट उद्योग के लिये आवश्यक कच्चा माल चूना पत्थर, जिप्सम, कोयला आदि।
-राजस्थान में सीमेंट ग्रेड लाइम् स्टोन के विपुल भंडार होने के कारण राज्य सीमेंट उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
-1824 में ब्रिटेन के पोर्टलैण्ड शहर में सर्वप्रथम सीमेंट का उत्पादन प्रारंभ किया गया।
-1904 में भारत में मद्रास में सर्वप्रथम सीमेंट का कारखाना स्थापित किय गया।
-भारत में आंध्र प्रदेश के बाद राजस्थान दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक राज्य है।
-राजस्थान में सर्वप्रथम सीमेंट इकाई – 1917 में लाखेरी (बूँदी) में स्थापित की गई।
-राजस्थान में सर्वाधिक सीमेंट उत्पादन चित्तौड़गढ़ जिले में होता है।
-सवाई माधोपुर में एशिया के सबसे बड़े सीमेंट कारखाने की स्थापना 1953 में ‘जयपुर उद्योग लिमिटेड’ के नाम से की गई पर वर्तमान में यह बंद है।
राज्य में सफेद सीमेन्ट के कारखाने:-
-देश में व्हाइट सीमेंट का सबसे बड़ा उत्पादक अल्ट्राटेक सीमेंट (बिरला व्हाइट)
1.1984 – गोटन (नागौर) में जे.के. व्हाइट सीमेंट का कारखाना स्थापित।
2.1988 – खारिया खंगार (जोधपुर) में बिडला व्हाइट सीमेंट का कारखाना स्थापित किया गया।
-राजस्थान में सीमेंट उत्पादन में चित्तौड़गढ़ प्रथम स्थान पर है।
-जे.के. सीमेन्ट का सर्वाधिक उत्पादन निम्बाहेड़ा चित्तौड़ में होता है।
-अल्ट्राटेक सीमेंट
-अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड – भारत की सबसे बड़ी सीमेन्ट निर्माता कम्पनी है।
-अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की दो इकाई प्रस्तावित हैं-
-नवलगढ़ (झुंझुनूँ) और जैतारण (पाली) में
-लाफार्ज सीमेंट (फ्रांस)
-विश्व की सबसे बड़ी सीमेंट उत्पादक कम्पनी फ्रांस की लाफार्स सीमेन्ट कम्पनी द्वारा भावलिया ग्राम चित्तौड़ में सीमेंट प्लांट लगाया है।
काँच उद्योग
-काँच निर्माण में बालू मिट्टी, सिलिका, शीरा तथा सोडियम सल्फेट आदि कच्चा माल प्रयुक्त होता है।
-धौलपुर में उच्च गुणवत्ता की सिलिका उपलब्ध होने के कारण वहाँ काँच उद्योग विकसित है।
-काँच उद्योग संबंधी इकाइयाँ
1.हाइटेक प्रिसीजन ग्लास फैक्ट्री
-धौलपुर यह गंगानगर शुगर मिल्स की सहायक कम्पनी है। इसमें शराब की बोतलों का निर्माण किया जाता है।
2.धौलपुर ग्लास वर्क्स – धौलपुर
3.सेमकोर ग्लास फैक्ट्री – कोटा
- यह टेलीविजन की पिक्चर ट्यूब बनाने का कार्य करती है वर्तमान में बंद है।
4.सेन्ट गोबेन ग्लास फैक्ट्री –
-यह एशिया की सबसे बड़ी फ्लोर ग्लास की फ्रांस की कम्पनी है।
-सेंट गोबेन कम्पनी ने रीको की सहायता से घिलोट-अलवर में काँच व सिरेमिक जोन की स्थापना की है
नमक उद्योग
-राजस्थान नमक उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है – प्रथम गुजरात तथा दूसरे स्थान पर तमिलनाडु है।
-आंतरिक जल स्त्रोतों से नमक उत्पादन में राजस्थान प्रथम स्थान पर है।
-राजस्थान में खारे पानी की झीलों के विद्यमान होने के कारण नमक उत्पादन हेतु प्राकृतिक स्थितियाँ काफी अनुकूल है।
-नमक उत्पादन की दो प्रमुख विधियाँ हैं-
1. वाष्पीकरण विधि –
-राजस्थान में तापमान ज्यादा होने के वाष्पीकरण ज्यादा होने से नमक सतह पर जम जाता है खारे पानी की झीलों से मार्च अप्रैल में वाष्पीकरण विधि द्वारा नमक तैयार किया जाता है। जिसे क्यार कहते हैं।
2. निथार विधि – पानी पर से नमक मिलाकर
-सांभर झील में नमक बनाने की विधि को रेस्ता कहते हैं।
नोट -डीडवाना नमक क्षेत्र में ‘देवल’ नामक संस्थाएँ परम्परागत रूप से नमक बनाने का कार्य करती है। यहाँ के नमक में सोडियम सल्फेट की मात्रा अधिक होने के कारण यह नमक खाने योग्य नहीं होता है।
-पचपदरा झील में खारवाल जाति के लोगों द्वारा मोरली झाड़ी की सहायता से नमक तैयार किया जाता है।
सहकारी क्षेत्र में नमक उद्योग की इकाइयाँ
1. सांभर साल्ट लिमिटेड, जयपुर -
-स्थापना – 1964
-देश का 8.7% नमक सांभर झील से उत्पादित किया जाता है।
2.राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स-डीडवाना (नागौर)
-स्थापना – 1964
-डीडवाना झील से केमिकल ग्रेड का नमक उत्पादन किया जाता है
तकनीकी उद्योग
1.जयपुर मेटल्स - जयपुर
-यह विद्युत मीटर बनाने का कार्य करती है।
2.कैप्सन मीटर – जयपुर, पाली
-पानी के मीटर बनाने का काम।
3.नेशनल इंजीनियरिंग जयपुर
-बॉल वेयरिंग बनाने में एशिया की सबसे बड़ी कम्पनी है।
4.राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड़ – जयपुर
-यह टेलीविजन बनाने का कार्य।
5.सिमको वेगन फैक्ट्री – भरतपुर
-रेलवे डिब्बे बनाने का कार्य।
6.फ्लोर्सपार संयंत्र – डूंगरपुर – फ्लोराइड बनाना
7.इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड – कोटा –
विद्युत उपकरण बनाने का कार्य।
3.पचपदरा साल्ट लिमिटेड – बाड़मेर
-स्थापना – 1960
-पचपदरा झील के नमक उत्पादन में आयोडिन की मात्रा सर्वाधिक पायी जाती है।
4.मॉडल साल्ट फार्म, नावां (नागौर)
-स्थापना – जनवरी 2002
निजी क्षेत्र में नमक उद्योग इकाइयाँ
लूणकरणसर – बीकानेर
फलोदी – जोधपुर
पोकरण – जैसलमेर
जाब्दी नगर – नागौर
रेवासा – सीकर
उर्वरक उद्योग
-यह राज्य का आधारभूत उद्योग है-
-राज्य में सर्वाधिक उर्वरक कारखाने उदयपुर में है
1. फास्फेट उर्वरक
-उदयपुर
-कोटा
-श्रीगंगानगर
-खेतड़ी
2. कैल्सियम कार्बाइड
-उदयपुर
-धौलपुर
3. पाइराइट्स एवं फास्फेट लिमिटेड़
-नीम का थाना – सीकर
कोटा में उर्वरक कारखाने
1.श्री राम फर्टिलाइजर्स – कोटा
2.चम्बल फर्टिलाइजर्स – गढे़पान, कोटा
3.जीवन फर्टिलाइजर्स – कोटा
धातु उद्योग
-राजस्थान में अनेक धात्विक खनिज उपलब्ध है – ताँबा, जस्ता, सीसा, चाँदी, लोहा, मैंगनीज, टंगस्टन आदि-
-धातुओं पर आधारित उद्योगों की दृष्टि से राजस्थान में ताँबा और जस्ता उद्योग महत्वपूर्ण है।
(i) ताँबा उद्योग – हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड भारत सरकार का उपक्रम है, जो झुंझुनूँ जिले के खेतड़ी गाँव के निकट स्थापित है - 09 नवंबर, 1967
-इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की वेस्टर्न नेप इंजीनियरिंग कंपनी की सहायता से की गई।
-इसका प्रधान कार्यालय कलकत्ता में है:-
-इसके अंतर्गत राज्य में तीन परियोजनाएँ कार्यरत है।
1. खेतड़ी कॉपर कॉम्पलेक्स, खेतड़ी नगर, झुंझुनूँ – देश की सबसे बड़ी ताम्र खनन एवं शोधक इकाई हैं।
-चाँदमारी ताम्र परियोजना, अलवर
(ii)जस्त उद्योग (Zinc Industry) – हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, उदयपुर के निकट देबारी में स्थित है।
-जस्ता परिद्रावक संयंत्र से न केवल जस्ता अपितु कैडमियम, चाँदी, सिंगल सुपर फॉस्फेट और गंधक तेजाब भी तैयार किया जाता है,
-हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड की एक नई परियोजना भीलवाड़ा जिलें में ‘’रामपुरा – आगुचा’’ में स्थापित की गई।
-चित्तौड़गढ़ जिले में चन्देरिया सीसा – जस्ता प्रदावक स्थापित किया गया।
खादी एवं ग्रामोद्योग-
-खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की स्थापना असंगठित क्षेत्र के कारीगरों को रोजगार प्रदान करने, उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादों के उत्पादन में सहायता प्रदान करने, दस्तकारों को प्रशिक्षण प्रदान करने और आत्मनिर्भरता की भावना जाग्रत करने के लिए की गई।
तेल एवं प्राकृतिक गैस-
-संयुक्त राज्य अमेरिका एवं चीन के बाद भारत विश्व में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में विश्व का लगभग 5 प्रतिशत कच्चा तेल खपत होता है।
-राजस्थान भारत में कच्चे तेल का महत्वपूर्ण उत्पादक है। भारत में कच्चे तेल के कुल उत्पादन (34 एम.एम.टी.पी.ए.) में राज्य का योगदान लगभग 22-23 प्रतिशत (7.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष) है और यह बॉम्बे हाई, जो कि लगभग 40 प्रतिशत का योगदान देता है, के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
-राज्य में पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित 4 पेट्रोलीफेरस बेसिन के अन्तर्गत लगभग 1,50,000 वर्ग किमी. (14 जिलों ) क्षेत्र में विस्तृत है-
-बाड़मेर- सांचोर बेसिन- (बाड़मेर एवं जालोर जिले)
-जैसलमेर बेसिन- (जैसलमेर जिला)
-बीकानेर- नागौर बेसिन- (बीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ एवं चूरू जिले)
-विंध्यन बेसिन – (कोटा, बारां, बूँदी, झालावाड़ जिले तथा भीलवाड़ा एवं चित्तौड़गढ़ जिलों का कुछ हिस्सा) राज्य में।
-बाड़मेर से प्राकृतिक गैस का उत्पादन वर्ष 2012 से प्रारम्भ हुआ।
-जैसलमेर से प्राकृतिक गैस का उत्पादन वर्ष 1994 से प्रारम्भ हुआ।
-जैसलमेर जिले के बाघेवाला क्षेत्र से लगभग 30,981 बैरल भारी तेल का दोहन किया गया है। वर्तमान में, 130 से 140 बैरल प्रतिदिन भारी तेल का उत्पादन किया जा रहा है।
-मैसर्स फोकस एनर्जी द्वारा 8 जुलाई, 2010 से प्राकृतिक गैस का उत्पादन आरम्भ किया और वर्तमान में रामगढ़ विद्युत संयंत्र (110 मेगावाट एवं 160 मेगावाट) को आपूर्ति करने के लिए 2-3 लाख घनमीटर प्रतिदिन उत्पादन किया जा रहा है।
मंगला तेल क्षेत्र बाड़मेर
-मंगला तेल क्षेत्र से खनिज तेल का व्यावसायिक उत्पादन 29 अगस्त, 2009 से प्रारम्भ हुआ और वर्तमान में 12 क्षेत्रों यथा- मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती, रागेश्वरी, कामेश्वरी एवं अन्य सेटेलाइट क्षेत्र से लगभग 1,40,000 बैरल्स खनिज तेल का प्रतिदिन उत्पादन किया जा रहा है।
राजस्थान रिफाइनरी परियोजना-
-9 मिलियन टन वार्षिक क्षमता की राजस्थान रिफाइनरी सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स परियोजना के कार्य का शुभारम्भ 16 जनवरी, 2018 को पचपदरा, जिला बाड़मेर में किया गया।
-इस परियोजना में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एच.पी.सी.एल.) एवं राजस्थान सरकार का संयुक्त उद्यम परियोजना में क्रमश: 74 प्रतिशत और 26 प्रतिशत की इक्विटी भागीदारी है।
-देश की प्रथम ऐसी परियोजना है, जिसमें रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स का सम्मिश्रण है।
-परियोजना में लागत 43,129 करोड़ रुपये है।
-रिफाइनरी से निकलने वाले उत्पाद- बी.एस.-VI
रासायनिक उद्योग
-‘’राजस्थान स्टेट केमिकल्स वर्क्स लिमिटेड’’ डीडवाना (नागौर) में कार्यरत है।
- राजस्थान का प्रथम जैव उवर्रक खाद कारखाना भरतपुर है।
-RSMML एवं राष्ट्रीय केमिकल्स एण्ड फर्टिलाइजर लिमिटेड (RCPL) ने मिलकर कपासन चित्तौडगढ़ में रु. 425 करोड़ की लागत से राजस्थान राष्ट्र केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर नाम से डीएपी खाद का कारखाना स्थापित किया।
प्रमुख रसायन एवं उवर्रक कारखानें :-
-श्रीराम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल लिमिटेड – कोटा
-रासायनिक खाद का उत्पादन, देबारी जिंक स्केल्टर (उदयपुर)
-ज्योति – ट्रिपल खार कारखाना – खेतड़ी, झुंझुनूँ
-सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट – अलवर
-चम्बल फर्टिलाइजर एंड केमिकल इंडस्ट्रीज, गढ़ेपान(कोटा)
-देश का सबसे बड़ा निजी रासायनिक खाद कारखाना निजी
-मोदी एल्केलाइन एंड केमिकल लिमिटेड – अलवर
-शुष्क अमोनिया सल्फेट उर्वरक संयंत्र – चित्तौड़गढ़
हस्तशिल्प उद्योग
-राजस्थान के आर्थिक विकास में हस्तशिल्प अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है, यहाँ का हस्तशिल्प विश्वविद्यालय है
-हस्तकला – हाथों से बनाई गई वस्तुएँ, कलाकारी
-हस्तशिल्प उद्योग कुटीर व टाईनी उद्योगों की श्रेणी में आती है।
-क्षेत्र स्थानीय लोगों को रोजगार के साथ साथ राज्य को सर्वाधिक विदेशी मुद्रा हस्तकला उद्योग से ही प्राप्त होती है।
-एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य में 407700 हस्तशिल्प – ग्रामीण – 202212 एवं शहरी – 205488 इकाइयाँ कार्यरत हैं।
-राजस्थान में हस्तकला को बढ़ावा देने तथा प्रोत्साहित करने के लिए उदयपुर में शिल्प ग्राम तथा जोधपुर में पाल शिल्दम ग्राम, जयपुर में जवाहर कला केन्द्र की स्थापना की गई।
-राजस्थान में हस्तकला का सबसे बड़ा केन्द्र ‘बोरनाडा’ (जोधपुर) है।
-एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य में हस्तशिल्प – ग्रामीण – एवं शहरी – इकाइयाँ कार्यरत हैं।
-राजस्थान में हस्तकला को बढ़ावा देने तथा प्रोत्साहित करने के लिए उदयपुर में शिल्प ग्राम तथा जोधपुर में पाल शिल्दम ग्राम, जयपुर में जवाहर कला केन्द्र की स्थापना की गई।
-राजस्थान में हस्तकला का सबसे बड़ा केन्द्र ‘बोरनाडा’ (जोधपुर) है।
प्रसिद्ध हस्तशिल्प उद्योग
|
हस्तशिल्प |
प्रसिद्ध स्थान |
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लाख पर हस्तशिल्प |
उदयपुर, जयपुर, जोधपुर |
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हाथी दाँत |
जयपुर, जोधपुर, उदयपुर |
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खेसला, टुकड़ी |
बालोतरा, फालना |
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बंधेज साड़ियाँ |
जोधपुर |
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चूनरिया व लहरिया |
जयपुर |
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संगमरमर की मूर्तियाँ |
जयपुर |
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लकड़ी के खिलौने |
उदयपुर, सवाई माधोपुर |
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कठपुतलियाँ |
उदयपुर |
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मिट्टी की मूर्तियाँ |
मोलेला गांव राजसमंद |
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डोरिया व मसूरिया साड़ियाँ |
कोटा |
|
फड़ चित्रण |
शाहपुरा- भीलवाड़ा |
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मीनाकारी |
जयपुर |
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चमड़े की मोजड़ी एवं जूतियाँ |
नागौर, सिरोही, भीनमाल, टोंक, जोधपुर व जयपुर |
|
कृत्रिम रेशम |
कोटा, उदयपुर, बाँसवाड़ा |
-वनोपज पर आधारित उद्योगों में बीड़ी उद्योग – टोंक भीलवाड़ा, अजमेर ब्यावर
-राज्य में ऊनी धागा – बीकानेर, चुरू, लांडनूं व कोटा में संचालित ऊनी खादी – जैसलमेर, बरड़ी बीकानेर के ऊनी कम्बल
हस्तशिल्प के निर्यात
-हैंडीक्राफ्ट मेगा क्लस्टर जोधपुर : करीब 108 करोड़ का प्रोजेक्ट्स
-राजस्थान में हस्तशिल्प के निर्यात में वृद्धि हेतु राज्य सरकार द्वारा उठाए गये कदम
-स्पेशल इकोनॉमिक जोन पर हैण्डीक्राफ्ट, बोरानाडा जोधपुर
-निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क, बोरानाडा (जोधपुर)
-एयर कार्गो कॉम्पलेक्स, जयपुर
-इन्लैण्ड कंटेनर, डिपो – सूखा बंदरगाह
-हस्तशिल्पियों को निर्यात पुरस्कार – निर्यातकों के प्रोत्साहन देना।
DMIC – दिल्ली मुम्बई इन्डस्ट्रीयल कॉरिडोर
-भारत सरकार द्वारा जापान के सहयोग से यह कॉरिडोर बनाने हेतु 2006 में समझौता हुआ। इस कॉरिडोर के अंतर्गत सात राज्य सम्मिलित होंगे। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तक जाएगा।
-यह कॉरिडोर दादरी (उत्तर प्रदेश) से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट तक के 1483 किलोमीटर की लम्बाई को कवर करेगा। इसकी चौड़ाई 150 किलोमीटर होगी- जिसका लगभग 39% भाग राजस्थान से होकर गुजरेगा।
दिल्ली मुम्बई इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर का राजस्थान में भूमिका या महत्त्व
-DMIC के कुल 1483 किलोमीटर लम्बाई का 39 प्रतिशत भाग राजस्थान से गुजरेगा। इससे राज्य के लगभग 22 जिले लाभांवित होंगे।
-DMIC के 22 नोड में से 5 नोड (7 से 11) राजस्थान से गुजरेंगे जिसमें से (2) निवेश जोन और (3) औद्योगिक जोन शामिल होंगे-
(1)निवेश जोन –
1. नीमराना भिवाड़ी खुशखेड़ा
2. अजमेर – किशनगढ़
(2)औद्योगिक जोन
1. जयपुर – दौसा
2. भीलवाड़ा – राजसमंद
3. जोधपुर पाली – मारवाड़
DMIC के प्रथम चरण में खुशखेड़ा – भिवाड़ी नीमराना क्षेत्र तथा जोधपुर पाली मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जाएगा।
(1) खुशखेड़ा – भिवाड़ी – नीमराना निवेश क्षेत्र
-इस क्षेत्र के 165 वर्ग किमी क्षेत्र अलवर जिले के 42 गाँव सम्मिलित है जिनका विकास करने हेतु ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना भिवाड़ी में तथा कुछ भाग में नॉलेज सिटी स्थापित की जाएगी।
(2) जोधपुर – पाली – मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र
-जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को दूसरे नोड के रूप में विकसित करने हेतु चयनित अर्लीबर्ड परियोजनाएँ निम्न प्रकार से हैं।
(3) मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब
-पाली में टेक्सटाइल पार्क – निर्माण
-पाली औद्योगिक क्षेत्र में एग्रोफूड प्रोसेसिंग जोन का निर्माण
-पाली सोजत बाईपास का निर्माण
-पाली मारवाड़ हेतु जल आपूर्ति व वेस्ट वाटर प्रबंधन
राजस्थान विजन 2020 :
-राज्य सरकार के दस्तावेज ’राजस्थान विजन 2020’ के अनुसार सकल राज्य घरेलू उत्पाद की वार्षिक वद्धि दर को बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने और इसे बनाए रखने के लिए सार्वजनिक- निजी पूँजी निवेश में वृद्धि आवश्यक है। इस लक्षित विकास दर को अर्जित करने के लिए वही कहीं भी सभंव होगा।
एकल खिड़की स्वीकृति/अनुमति प्रणाली (सिंगल विण्डो क्लियरेन्स सिस्टम)
-इस खिड़की का प्रमुख उद्देश्य उद्यमियों को भूमि, पानी, बिजली, रजिस्ट्री, सलाह, वित्तीय सहायता व ऋण जैसी सुविधाएँ एक ही जगह सुलभ करवाई जाएंगी।
-एकल खिड़की स्वीकृति/अनुमति प्रणाली (सिंगल विण्डो क्लियरेन्स सिस्टम) में प्रारंभिक तौर पर 11 विभागों की 56 ऐसी सेवाएँ सम्मिलित थीं, जो व्यापार/उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक थीं।
पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत औद्योगिक विकास
-राजस्थान के निर्माण के प्रारंभिक वर्ष में प्रशासनिक व वित्तीय समस्याओं के कारण वित्तीय संसाधन सीमित थे और उनका भी उपयोग औद्योगिक विकास के लिए न्यायोचित रूप से नहीं किया जा सका। फिर भी राज्य में विभिन्न आकारों की लगभग 95 औद्योगिक इकाइयाँ कार्यरत थीं, जिन्हें राज्य के आकार तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है। परंतु धीरे-धीरे इस स्थिति में परिवर्तन आने लगा है। सरकार ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राज्य के औद्योगिक विकास के लिए प्रयत्न किए हैं, जिनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956) –
-प्रथम पंचवर्षीय योजना में औद्योगिक कार्यक्रमों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961) –
-औद्योगिक सर्वेक्षण का कार्य करवाया गया, भरतपुर में वैगन फैक्ट्री, सवाई माधोपुर में सीमेंट फैक्ट्री अस्तित्व में आई।
-गंगानगर शुगर मिल सरकारी प्रभुत्व में आई।
-इसके अतिरिक्त जयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, कोटा, जोधपुर, भरतपुर, श्रीगंगानगर, उदयपुर में औद्योगिक बस्तियों का निर्माण किया गया।
तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966) –
-सूती कपड़ा मिलें – किशनगढ़, भीलवाड़ा। वूलटोप्स फैक्ट्री – कोटा। वूलन स्पिनिंग मिल – जोधपुर। सोडियम सल्फेट संयंत्र – डीडवाना में स्थापित किए गए।
सातवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में मैसर्स अरावली फर्टिलाइजर्स लिमिटेड को गैस पर आधारित खाद संयंत्र की स्थापना गढ़ेपान (कोटा) हेतु स्वीकृति।
-जयपुर में जैम स्टोन इंडस्ट्रीयल पार्क की स्थापना की गई। जयपुर में एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन की स्थापना की गई।
-नए उद्योगों के लिए राज्य पूँजी विनियोजन अनुदान योजना 1990 प्रारंभ की गई।
आठवीं पंचवर्षीय योजना –
-कोटा, जयपुर, फालना, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर आदि राजस्थान में प्रमुख औद्योगिक केंद्र बने। जहाँ वर्ष 1951 में पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 240 थी वह अब बढ़कर 10,509 हो गई।
-इस योजना में छोटे पैमाने के उद्योगों में निजी क्षेत्र का कुल विनियोग 1032.16 करोड़ रुपये था।
नौवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में राज्य के बड़े व मध्यम उद्योगों में 27 हजार करोड़ रुपये निजी क्षेत्रों द्वारा नियोजित किए गए।
-इस योजना के अंतर्गत जो अन्य प्रयास किए गए, वे निम्न हैं –
-राज्य के शुद्ध घरेलू उत्पाद का 16% भाग निर्माण क्षेत्र से प्राप्त करना।
-राज्य के साधनों का अनुकूलतम प्रयोग करना।
-रोजगार के अतिरिक्त पर्याप्त अवसर प्रदान करना।
-राज्य के उद्योगों की तकनीकी क्षमता में वृद्धि करना।
-मानवीय संसाधनों के विकास पर ध्यान देना।
-दसवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में उद्योग तथा खनिज विकास के लिए 1113.56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
-ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में खनिज एवं उद्योगों के विकास हेतु कुल राशि का 1.03% खर्च करने का प्रावधान किया गया था।
-बारहवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में खनिज व उद्योग के लिए कुल राशि का 0.50% खर्च करने का प्रावधान किया गया।
राज्य स्तरीय औद्योगिक संस्थाएँ-
निवेश संवर्द्धन ब्यूरो (BIP) –
-निवेश संवर्द्धन ब्यूरो राजस्थान की निवेश संवर्द्धन एजेंसी है, जो राज्य में निवेश प्रस्तावों की स्थापना हेतु सुविधा प्रदान करती है।
-बी.आई.पी. सक्रिय रूप से विभिन्न वर्गों में उपलब्ध निवेश अवसरों की ओर घरेलू एवं विदेशी कंपनियों के संभावित निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता है और राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करता है।
-बी.आई.पी.द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 (दिसंबर, 2019 तक) के दौरान राज्य में निवेश के अवसरों का प्रदर्शन करने के लिए निम्नलिखित कार्यक्रमों में भाग लिया –
|
कार्यक्रम का नाम |
आयोजित तिथि |
अयोजित स्थल |
|
इनवेस्ट नॉर्थ – 2019 |
29-30 अगस्त, 2019 |
बेंगलुरु |
|
टेकोटैक्स – 2019 |
29-31 अगस्त, 2019 |
मुम्बई |
|
मेक इन इंडिया वर्कशॉप – 2019 |
30 अक्टूबर, 2019 |
नई दिल्ली |
|
आई.आई.टी.एफ. – 2019 |
14-27 नवंबर, 2019 |
नई दिल्ली |
|
एम.एस.एम.ई. कॉनक्लेव – 2019 |
19 दिसंबर, 2019 |
जयपुर |
-इसके अलावा एकल खिड़की एवं एम.एस.एम.ई. अधिनियम के प्रचार तथा शिकायतों के निवारण हेतु संभागीय मुख्यालयों पर उद्योग विभाग के समन्वय से दिसंबर, 2019 तक सेमिनार आयोजित किए गए।
इण्डिया स्टोनमार्ट-2019-
-इण्डिया स्टोनमार्ट - 2019 के 10वें संस्करण का आयोजन 31 जनवरी से 3 फरवरी, 2019 के मध्य जयपुर में किया गया, जिसमें 484 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों (एक्जिबिटर्स) द्वारा अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया गया तथा बड़ी संख्या में विदेशी क्रेता/आपूर्तिकर्ताओं ने भाग लिया।
ग्लोबल स्टोन टेक्नोलॉजी फोरम-2019-
-सेन्टर ऑफ डवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सी.डी.ओ.एस.) ने ग्लोबल स्टोन टेक्नॉलोजी फोरम (जी.एस.टी.एफ) के सहयोग से एक अन्तर्राष्ट्रीय पत्थर प्रौद्योगिकी सम्मेलन (8वाँ संस्करण) का आयोजन 19 से 20 दिसम्बर, 2019 को उदयपुर, राजस्थान में किया गया।
-यह फोरम आयामी पत्थर क्षेत्र में नवीनतम और अभिनव तकनीकी प्रवृत्तियों पर ध्यान केन्द्रित करता है।
-ग्लोबल स्टोन टेक्नॉलोजी फोरम (जी.एस.टी.एफ.) आयामी पत्थर के उपयोगकर्ताओं एवं उत्पादकों के अलावा अन्य हितधारों जैसे- प्रौद्योगिकी एंव मशीनरी आपूर्तिकर्ताओं, आर्किटेक्क्ट्स, इंजीनियर्स और बिल्डर्स आदि ,द्वारा सभी प्रतिभागियों के लाभ हेतु परस्पर संवाद करने एवं अपने अनुभव को साझा करने के लिए एक आदर्श मंच है।
प्रसिद्ध हस्तशिल्प उद्योग
|
हस्तशिल्प |
प्रसिद्ध स्थान |
|
लाख पर हस्तशिल्प |
उदयपुर, जयपुर, जोधपुर |
|
हाथी दाँत |
जयपुर, जोधपुर, उदयपुर |
|
खेसला, टुकड़ी |
बालोतरा, फालना |
|
बंधेज साड़ियाँ |
जोधपुर |
|
चूनरिया व लहरिया |
जयपुर |
|
संगमरमर की मूर्तियाँ |
जयपुर |
|
लकड़ी के खिलौने |
उदयपुर, सवाई माधोपुर |
|
कठपुतलियाँ |
उदयपुर |
|
मिट्टी की मूर्तियाँ |
मोलेला गांव राजसमंद |
|
डोरिया व मसूरिया साड़ियाँ |
कोटा |
|
फड़ चित्रण |
शाहपुरा- भीलवाड़ा |
|
मीनाकारी |
जयपुर |
|
चमड़े की मोजड़ी एवं जूतियाँ |
नागौर, सिरोही, भीनमाल, टोंक, जोधपुर व जयपुर |
|
कृत्रिम रेशम |
कोटा, उदयपुर, बाँसवाड़ा |
-वनोपज पर आधारित उद्योगों में बीड़ी उद्योग – टोंक भीलवाड़ा, अजमेर ब्यावर
-राज्य में ऊनी धागा – बीकानेर, चुरू, लांडनूं व कोटा में संचालित ऊनी खादी – जैसलमेर, बरड़ी बीकानेर के ऊनी कम्बल
हस्तशिल्प के निर्यात
-हैंडीक्राफ्ट मेगा क्लस्टर जोधपुर : करीब 108 करोड़ का प्रोजेक्ट्स
-राजस्थान में हस्तशिल्प के निर्यात में वृद्धि हेतु राज्य सरकार द्वारा उठाए गये कदम
-स्पेशल इकोनॉमिक जोन पर हैण्डीक्राफ्ट, बोरानाडा जोधपुर
-निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क, बोरानाडा (जोधपुर)
-एयर कार्गो कॉम्पलेक्स, जयपुर
-इन्लैण्ड कंटेनर, डिपो – सूखा बंदरगाह
-हस्तशिल्पियों को निर्यात पुरस्कार – निर्यातकों के प्रोत्साहन देना।
DMIC – दिल्ली मुम्बई इन्डस्ट्रीयल कॉरिडोर
-भारत सरकार द्वारा जापान के सहयोग से यह कॉरिडोर बनाने हेतु 2006 में समझौता हुआ। इस कॉरिडोर के अंतर्गत सात राज्य सम्मिलित होंगे। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तक जाएगा।
-यह कॉरिडोर दादरी (उत्तर प्रदेश) से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट तक के 1483 किलोमीटर की लम्बाई को कवर करेगा। इसकी चौड़ाई 150 किलोमीटर होगी- जिसका लगभग 39% भाग राजस्थान से होकर गुजरेगा।
दिल्ली मुम्बई इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर का राजस्थान में भूमिका या महत्त्व
-DMIC के कुल 1483 किलोमीटर लम्बाई का 39 प्रतिशत भाग राजस्थान से गुजरेगा। इससे राज्य के लगभग 22 जिले लाभांवित होंगे।
-DMIC के 22 नोड में से 5 नोड (7 से 11) राजस्थान से गुजरेंगे जिसमें से (2) निवेश जोन और (3) औद्योगिक जोन शामिल होंगे-
(1)निवेश जोन –
1. नीमराना भिवाड़ी खुशखेड़ा
2. अजमेर – किशनगढ़
(2)औद्योगिक जोन
1. जयपुर – दौसा
2. भीलवाड़ा – राजसमंद
3. जोधपुर पाली – मारवाड़
DMIC के प्रथम चरण में खुशखेड़ा – भिवाड़ी नीमराना क्षेत्र तथा जोधपुर पाली मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जाएगा।
(1) खुशखेड़ा – भिवाड़ी – नीमराना निवेश क्षेत्र
-इस क्षेत्र के 165 वर्ग किमी क्षेत्र अलवर जिले के 42 गाँव सम्मिलित है जिनका विकास करने हेतु ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना भिवाड़ी में तथा कुछ भाग में नॉलेज सिटी स्थापित की जाएगी।
(2) जोधपुर – पाली – मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र
-जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को दूसरे नोड के रूप में विकसित करने हेतु चयनित अर्लीबर्ड परियोजनाएँ निम्न प्रकार से हैं।
(3) मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब
-पाली में टेक्सटाइल पार्क – निर्माण
-पाली औद्योगिक क्षेत्र में एग्रोफूड प्रोसेसिंग जोन का निर्माण
-पाली सोजत बाईपास का निर्माण
-पाली मारवाड़ हेतु जल आपूर्ति व वेस्ट वाटर प्रबंधन
राजस्थान विजन 2020 :
-राज्य सरकार के दस्तावेज ’राजस्थान विजन 2020’ के अनुसार सकल राज्य घरेलू उत्पाद की वार्षिक वद्धि दर को बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने और इसे बनाए रखने के लिए सार्वजनिक- निजी पूँजी निवेश में वृद्धि आवश्यक है। इस लक्षित विकास दर को अर्जित करने के लिए वही कहीं भी सभंव होगा।
एकल खिड़की स्वीकृति/अनुमति प्रणाली (सिंगल विण्डो क्लियरेन्स सिस्टम)
-इस खिड़की का प्रमुख उद्देश्य उद्यमियों को भूमि, पानी, बिजली, रजिस्ट्री, सलाह, वित्तीय सहायता व ऋण जैसी सुविधाएँ एक ही जगह सुलभ करवाई जाएंगी।
-एकल खिड़की स्वीकृति/अनुमति प्रणाली (सिंगल विण्डो क्लियरेन्स सिस्टम) में प्रारंभिक तौर पर 11 विभागों की 56 ऐसी सेवाएँ सम्मिलित थीं, जो व्यापार/उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक थीं।
पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत औद्योगिक विकास
-राजस्थान के निर्माण के प्रारंभिक वर्ष में प्रशासनिक व वित्तीय समस्याओं के कारण वित्तीय संसाधन सीमित थे और उनका भी उपयोग औद्योगिक विकास के लिए न्यायोचित रूप से नहीं किया जा सका। फिर भी राज्य में विभिन्न आकारों की लगभग 95 औद्योगिक इकाइयाँ कार्यरत थीं, जिन्हें राज्य के आकार तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है। परंतु धीरे-धीरे इस स्थिति में परिवर्तन आने लगा है। सरकार ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राज्य के औद्योगिक विकास के लिए प्रयत्न किए हैं, जिनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956) –
-प्रथम पंचवर्षीय योजना में औद्योगिक कार्यक्रमों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961) –
-औद्योगिक सर्वेक्षण का कार्य करवाया गया, भरतपुर में वैगन फैक्ट्री, सवाई माधोपुर में सीमेंट फैक्ट्री अस्तित्व में आई।
-गंगानगर शुगर मिल सरकारी प्रभुत्व में आई।
-इसके अतिरिक्त जयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, कोटा, जोधपुर, भरतपुर, श्रीगंगानगर, उदयपुर में औद्योगिक बस्तियों का निर्माण किया गया।
तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966) –
-सूती कपड़ा मिलें – किशनगढ़, भीलवाड़ा। वूलटोप्स फैक्ट्री – कोटा। वूलन स्पिनिंग मिल – जोधपुर। सोडियम सल्फेट संयंत्र – डीडवाना में स्थापित किए गए।
सातवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में मैसर्स अरावली फर्टिलाइजर्स लिमिटेड को गैस पर आधारित खाद संयंत्र की स्थापना गढ़ेपान (कोटा) हेतु स्वीकृति।
-जयपुर में जैम स्टोन इंडस्ट्रीयल पार्क की स्थापना की गई। जयपुर में एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन की स्थापना की गई।
-नए उद्योगों के लिए राज्य पूँजी विनियोजन अनुदान योजना 1990 प्रारंभ की गई।
आठवीं पंचवर्षीय योजना –
-कोटा, जयपुर, फालना, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर आदि राजस्थान में प्रमुख औद्योगिक केंद्र बने। जहाँ वर्ष 1951 में पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 240 थी वह अब बढ़कर 10,509 हो गई।
-इस योजना में छोटे पैमाने के उद्योगों में निजी क्षेत्र का कुल विनियोग 1032.16 करोड़ रुपये था।
नौवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में राज्य के बड़े व मध्यम उद्योगों में 27 हजार करोड़ रुपये निजी क्षेत्रों द्वारा नियोजित किए गए।
-इस योजना के अंतर्गत जो अन्य प्रयास किए गए, वे निम्न हैं –
-राज्य के शुद्ध घरेलू उत्पाद का 16% भाग निर्माण क्षेत्र से प्राप्त करना।
-राज्य के साधनों का अनुकूलतम प्रयोग करना।
-रोजगार के अतिरिक्त पर्याप्त अवसर प्रदान करना।
-राज्य के उद्योगों की तकनीकी क्षमता में वृद्धि करना।
-मानवीय संसाधनों के विकास पर ध्यान देना।
-दसवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में उद्योग तथा खनिज विकास के लिए 1113.56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
-ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में खनिज एवं उद्योगों के विकास हेतु कुल राशि का 1.03% खर्च करने का प्रावधान किया गया था।
-बारहवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में खनिज व उद्योग के लिए कुल राशि का 0.50% खर्च करने का प्रावधान किया गया।
राज्य स्तरीय औद्योगिक संस्थाएँ-
निवेश संवर्द्धन ब्यूरो (BIP) –
-निवेश संवर्द्धन ब्यूरो राजस्थान की निवेश संवर्द्धन एजेंसी है, जो राज्य में निवेश प्रस्तावों की स्थापना हेतु सुविधा प्रदान करती है।
-बी.आई.पी. सक्रिय रूप से विभिन्न वर्गों में उपलब्ध निवेश अवसरों की ओर घरेलू एवं विदेशी कंपनियों के संभावित निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता है और राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करता है।
-बी.आई.पी.द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 (दिसंबर, 2019 तक) के दौरान राज्य में निवेश के अवसरों का प्रदर्शन करने के लिए निम्नलिखित कार्यक्रमों में भाग लिया –
|
कार्यक्रम का नाम |
आयोजित तिथि |
अयोजित स्थल |
|
इनवेस्ट नॉर्थ – 2019 |
29-30 अगस्त, 2019 |
बेंगलुरु |
|
टेकोटैक्स – 2019 |
29-31 अगस्त, 2019 |
मुम्बई |
|
मेक इन इंडिया वर्कशॉप – 2019 |
30 अक्टूबर, 2019 |
नई दिल्ली |
|
आई.आई.टी.एफ. – 2019 |
14-27 नवंबर, 2019 |
नई दिल्ली |
|
एम.एस.एम.ई. कॉनक्लेव – 2019 |
19 दिसंबर, 2019 |
जयपुर |
-इसके अलावा एकल खिड़की एवं एम.एस.एम.ई. अधिनियम के प्रचार तथा शिकायतों के निवारण हेतु संभागीय मुख्यालयों पर उद्योग विभाग के समन्वय से दिसंबर, 2019 तक सेमिनार आयोजित किए गए।
इण्डिया स्टोनमार्ट-2019-
-इण्डिया स्टोनमार्ट - 2019 के 10वें संस्करण का आयोजन 31 जनवरी से 3 फरवरी, 2019 के मध्य जयपुर में किया गया, जिसमें 484 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों (एक्जिबिटर्स) द्वारा अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया गया तथा बड़ी संख्या में विदेशी क्रेता/आपूर्तिकर्ताओं ने भाग लिया।
ग्लोबल स्टोन टेक्नोलॉजी फोरम-2019-
-सेन्टर ऑफ डवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सी.डी.ओ.एस.) ने ग्लोबल स्टोन टेक्नॉलोजी फोरम (जी.एस.टी.एफ) के सहयोग से एक अन्तर्राष्ट्रीय पत्थर प्रौद्योगिकी सम्मेलन (8वाँ संस्करण) का आयोजन 19 से 20 दिसम्बर, 2019 को उदयपुर, राजस्थान में किया गया।
-यह फोरम आयामी पत्थर क्षेत्र में नवीनतम और अभिनव तकनीकी प्रवृत्तियों पर ध्यान केन्द्रित करता है।
-ग्लोबल स्टोन टेक्नॉलोजी फोरम (जी.एस.टी.एफ.) आयामी पत्थर के उपयोगकर्ताओं एवं उत्पादकों के अलावा अन्य हितधारों जैसे- प्रौद्योगिकी एंव मशीनरी आपूर्तिकर्ताओं, आर्किटेक्क्ट्स, इंजीनियर्स और बिल्डर्स आदि ,द्वारा सभी प्रतिभागियों के लाभ हेतु परस्पर संवाद करने एवं अपने अनुभव को साझा करने के लिए एक आदर्श मंच है।
प्रसिद्ध हस्तशिल्प उद्योग
|
हस्तशिल्प |
प्रसिद्ध स्थान |
|
लाख पर हस्तशिल्प |
उदयपुर, जयपुर, जोधपुर |
|
हाथी दाँत |
जयपुर, जोधपुर, उदयपुर |
|
खेसला, टुकड़ी |
बालोतरा, फालना |
|
बंधेज साड़ियाँ |
जोधपुर |
|
चूनरिया व लहरिया |
जयपुर |
|
संगमरमर की मूर्तियाँ |
जयपुर |
|
लकड़ी के खिलौने |
उदयपुर, सवाई माधोपुर |
|
कठपुतलियाँ |
उदयपुर |
|
मिट्टी की मूर्तियाँ |
मोलेला गांव राजसमंद |
|
डोरिया व मसूरिया साड़ियाँ |
कोटा |
|
फड़ चित्रण |
शाहपुरा- भीलवाड़ा |
|
मीनाकारी |
जयपुर |
|
चमड़े की मोजड़ी एवं जूतियाँ |
नागौर, सिरोही, भीनमाल, टोंक, जोधपुर व जयपुर |
|
कृत्रिम रेशम |
कोटा, उदयपुर, बाँसवाड़ा |
-वनोपज पर आधारित उद्योगों में बीड़ी उद्योग – टोंक भीलवाड़ा, अजमेर ब्यावर
-राज्य में ऊनी धागा – बीकानेर, चुरू, लांडनूं व कोटा में संचालित ऊनी खादी – जैसलमेर, बरड़ी बीकानेर के ऊनी कम्बल
हस्तशिल्प के निर्यात
-हैंडीक्राफ्ट मेगा क्लस्टर जोधपुर : करीब 108 करोड़ का प्रोजेक्ट्स
-राजस्थान में हस्तशिल्प के निर्यात में वृद्धि हेतु राज्य सरकार द्वारा उठाए गये कदम
-स्पेशल इकोनॉमिक जोन पर हैण्डीक्राफ्ट, बोरानाडा जोधपुर
-निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क, बोरानाडा (जोधपुर)
-एयर कार्गो कॉम्पलेक्स, जयपुर
-इन्लैण्ड कंटेनर, डिपो – सूखा बंदरगाह
-हस्तशिल्पियों को निर्यात पुरस्कार – निर्यातकों के प्रोत्साहन देना।
DMIC – दिल्ली मुम्बई इन्डस्ट्रीयल कॉरिडोर
-भारत सरकार द्वारा जापान के सहयोग से यह कॉरिडोर बनाने हेतु 2006 में समझौता हुआ। इस कॉरिडोर के अंतर्गत सात राज्य सम्मिलित होंगे। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तक जाएगा।
-यह कॉरिडोर दादरी (उत्तर प्रदेश) से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट तक के 1483 किलोमीटर की लम्बाई को कवर करेगा। इसकी चौड़ाई 150 किलोमीटर होगी- जिसका लगभग 39% भाग राजस्थान से होकर गुजरेगा।
दिल्ली मुम्बई इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर का राजस्थान में भूमिका या महत्त्व
-DMIC के कुल 1483 किलोमीटर लम्बाई का 39 प्रतिशत भाग राजस्थान से गुजरेगा। इससे राज्य के लगभग 22 जिले लाभांवित होंगे।
-DMIC के 22 नोड में से 5 नोड (7 से 11) राजस्थान से गुजरेंगे जिसमें से (2) निवेश जोन और (3) औद्योगिक जोन शामिल होंगे-
(1)निवेश जोन –
1. नीमराना भिवाड़ी खुशखेड़ा
2. अजमेर – किशनगढ़
(2)औद्योगिक जोन
1. जयपुर – दौसा
2. भीलवाड़ा – राजसमंद
3. जोधपुर पाली – मारवाड़
DMIC के प्रथम चरण में खुशखेड़ा – भिवाड़ी नीमराना क्षेत्र तथा जोधपुर पाली मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जाएगा।
(1) खुशखेड़ा – भिवाड़ी – नीमराना निवेश क्षेत्र
-इस क्षेत्र के 165 वर्ग किमी क्षेत्र अलवर जिले के 42 गाँव सम्मिलित है जिनका विकास करने हेतु ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना भिवाड़ी में तथा कुछ भाग में नॉलेज सिटी स्थापित की जाएगी।
(2) जोधपुर – पाली – मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र
-जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को दूसरे नोड के रूप में विकसित करने हेतु चयनित अर्लीबर्ड परियोजनाएँ निम्न प्रकार से हैं।
(3) मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब
-पाली में टेक्सटाइल पार्क – निर्माण
-पाली औद्योगिक क्षेत्र में एग्रोफूड प्रोसेसिंग जोन का निर्माण
-पाली सोजत बाईपास का निर्माण
-पाली मारवाड़ हेतु जल आपूर्ति व वेस्ट वाटर प्रबंधन
राजस्थान विजन 2020 :
-राज्य सरकार के दस्तावेज ’राजस्थान विजन 2020’ के अनुसार सकल राज्य घरेलू उत्पाद की वार्षिक वद्धि दर को बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने और इसे बनाए रखने के लिए सार्वजनिक- निजी पूँजी निवेश में वृद्धि आवश्यक है। इस लक्षित विकास दर को अर्जित करने के लिए वही कहीं भी सभंव होगा।
एकल खिड़की स्वीकृति/अनुमति प्रणाली (सिंगल विण्डो क्लियरेन्स सिस्टम)
-इस खिड़की का प्रमुख उद्देश्य उद्यमियों को भूमि, पानी, बिजली, रजिस्ट्री, सलाह, वित्तीय सहायता व ऋण जैसी सुविधाएँ एक ही जगह सुलभ करवाई जाएंगी।
-एकल खिड़की स्वीकृति/अनुमति प्रणाली (सिंगल विण्डो क्लियरेन्स सिस्टम) में प्रारंभिक तौर पर 11 विभागों की 56 ऐसी सेवाएँ सम्मिलित थीं, जो व्यापार/उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक थीं।
पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत औद्योगिक विकास
-राजस्थान के निर्माण के प्रारंभिक वर्ष में प्रशासनिक व वित्तीय समस्याओं के कारण वित्तीय संसाधन सीमित थे और उनका भी उपयोग औद्योगिक विकास के लिए न्यायोचित रूप से नहीं किया जा सका। फिर भी राज्य में विभिन्न आकारों की लगभग 95 औद्योगिक इकाइयाँ कार्यरत थीं, जिन्हें राज्य के आकार तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है। परंतु धीरे-धीरे इस स्थिति में परिवर्तन आने लगा है। सरकार ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राज्य के औद्योगिक विकास के लिए प्रयत्न किए हैं, जिनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956) –
-प्रथम पंचवर्षीय योजना में औद्योगिक कार्यक्रमों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961) –
-औद्योगिक सर्वेक्षण का कार्य करवाया गया, भरतपुर में वैगन फैक्ट्री, सवाई माधोपुर में सीमेंट फैक्ट्री अस्तित्व में आई।
-गंगानगर शुगर मिल सरकारी प्रभुत्व में आई।
-इसके अतिरिक्त जयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, कोटा, जोधपुर, भरतपुर, श्रीगंगानगर, उदयपुर में औद्योगिक बस्तियों का निर्माण किया गया।
तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966) –
-सूती कपड़ा मिलें – किशनगढ़, भीलवाड़ा। वूलटोप्स फैक्ट्री – कोटा। वूलन स्पिनिंग मिल – जोधपुर। सोडियम सल्फेट संयंत्र – डीडवाना में स्थापित किए गए।
सातवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में मैसर्स अरावली फर्टिलाइजर्स लिमिटेड को गैस पर आधारित खाद संयंत्र की स्थापना गढ़ेपान (कोटा) हेतु स्वीकृति।
-जयपुर में जैम स्टोन इंडस्ट्रीयल पार्क की स्थापना की गई। जयपुर में एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन की स्थापना की गई।
-नए उद्योगों के लिए राज्य पूँजी विनियोजन अनुदान योजना 1990 प्रारंभ की गई।
आठवीं पंचवर्षीय योजना –
-कोटा, जयपुर, फालना, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर आदि राजस्थान में प्रमुख औद्योगिक केंद्र बने। जहाँ वर्ष 1951 में पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 240 थी वह अब बढ़कर 10,509 हो गई।
-इस योजना में छोटे पैमाने के उद्योगों में निजी क्षेत्र का कुल विनियोग 1032.16 करोड़ रुपये था।
नौवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में राज्य के बड़े व मध्यम उद्योगों में 27 हजार करोड़ रुपये निजी क्षेत्रों द्वारा नियोजित किए गए।
-इस योजना के अंतर्गत जो अन्य प्रयास किए गए, वे निम्न हैं –
-राज्य के शुद्ध घरेलू उत्पाद का 16% भाग निर्माण क्षेत्र से प्राप्त करना।
-राज्य के साधनों का अनुकूलतम प्रयोग करना।
-रोजगार के अतिरिक्त पर्याप्त अवसर प्रदान करना।
-राज्य के उद्योगों की तकनीकी क्षमता में वृद्धि करना।
-मानवीय संसाधनों के विकास पर ध्यान देना।
-दसवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में उद्योग तथा खनिज विकास के लिए 1113.56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
-ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में खनिज एवं उद्योगों के विकास हेतु कुल राशि का 1.03% खर्च करने का प्रावधान किया गया था।
-बारहवीं पंचवर्षीय योजना –
-इस योजना में खनिज व उद्योग के लिए कुल राशि का 0.50% खर्च करने का प्रावधान किया गया।
राज्य स्तरीय औद्योगिक संस्थाएँ-
निवेश संवर्द्धन ब्यूरो (BIP) –
-निवेश संवर्द्धन ब्यूरो राजस्थान की निवेश संवर्द्धन एजेंसी है, जो राज्य में निवेश प्रस्तावों की स्थापना हेतु सुविधा प्रदान करती है।
-बी.आई.पी. सक्रिय रूप से विभिन्न वर्गों में उपलब्ध निवेश अवसरों की ओर घरेलू एवं विदेशी कंपनियों के संभावित निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता है और राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करता है।
-बी.आई.पी.द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 (दिसंबर, 2019 तक) के दौरान राज्य में निवेश के अवसरों का प्रदर्शन करने के लिए निम्नलिखित कार्यक्रमों में भाग लिया –
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कार्यक्रम का नाम |
आयोजित तिथि |
अयोजित स्थल |
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इनवेस्ट नॉर्थ – 2019 |
29-30 अगस्त, 2019 |
बेंगलुरु |
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टेकोटैक्स – 2019 |
29-31 अगस्त, 2019 |
मुम्बई |
|
मेक इन इंडिया वर्कशॉप – 2019 |
30 अक्टूबर, 2019 |
नई दिल्ली |
|
आई.आई.टी.एफ. – 2019 |
14-27 नवंबर, 2019 |
नई दिल्ली |
|
एम.एस.एम.ई. कॉनक्लेव – 2019 |
19 दिसंबर, 2019 |
जयपुर |
-इसके अलावा एकल खिड़की एवं एम.एस.एम.ई. अधिनियम के प्रचार तथा शिकायतों के निवारण हेतु संभागीय मुख्यालयों पर उद्योग विभाग के समन्वय से दिसंबर, 2019 तक सेमिनार आयोजित किए गए।
इण्डिया स्टोनमार्ट-2019-
-इण्डिया स्टोनमार्ट - 2019 के 10वें संस्करण का आयोजन 31 जनवरी से 3 फरवरी, 2019 के मध्य जयपुर में किया गया, जिसमें 484 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों (एक्जिबिटर्स) द्वारा अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया गया तथा बड़ी संख्या में विदेशी क्रेता/आपूर्तिकर्ताओं ने भाग लिया।
ग्लोबल स्टोन टेक्नोलॉजी फोरम-2019-
-सेन्टर ऑफ डवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सी.डी.ओ.एस.) ने ग्लोबल स्टोन टेक्नॉलोजी फोरम (जी.एस.टी.एफ) के सहयोग से एक अन्तर्राष्ट्रीय पत्थर प्रौद्योगिकी सम्मेलन (8वाँ संस्करण) का आयोजन 19 से 20 दिसम्बर, 2019 को उदयपुर, राजस्थान में किया गया।
-यह फोरम आयामी पत्थर क्षेत्र में नवीनतम और अभिनव तकनीकी प्रवृत्तियों पर ध्यान केन्द्रित करता है।
-ग्लोबल स्टोन टेक्नॉलोजी फोरम (जी.एस.टी.एफ.) आयामी पत्थर के उपयोगकर्ताओं एवं उत्पादकों के अलावा अन्य हितधारों जैसे- प्रौद्योगिकी एंव मशीनरी आपूर्तिकर्ताओं, आर्किटेक्क्ट्स, इंजीनियर्स और बिल्डर्स आदि ,द्वारा सभी प्रतिभागियों के लाभ हेतु परस्पर संवाद करने एवं अपने अनुभव को साझा करने के लिए एक आदर्श मंच है।