डेयरी (Dairy)

- राजस्थान की अर्थव्यवस्था मुख्यत: ग्रामीण व कृषि आधारित है। ग्रामीण क्षेत्रों में मिश्रित कृषि के तहत पशुपालन व डेयरी व्यवसाय का महत्वपूर्ण स्थान है।

-  सन् 2020 में, देश भर में राजस्थान दूसरा सबसे अधिक दूध उत्पादक राज्य है।

 राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF):-

 राजस्थान में सन् 1972-73 में डेयरी विभाग के अन्तर्गत जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों की स्थापना की गई। वर्ष 1975 में विश्व बैंक की सहायता से ‘राज्य डेयरी विकास निगम' की स्थापना की गई। जिसे सन् 1977 में राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) में परिवर्तित कर दिया गया।

 राजस्थान में डेयरी विकास कार्यक्रम का वर्तमान संस्थागत ढाँचा।

 1. शीर्ष स्तर - राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) इसकी स्थापना वर्ष 1977 में राज्य के दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का उचित मूल्य दिलवाने व उपभोक्ताओं को शुद्ध दुग्ध उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से की गई। RCDF ‘सरस' ब्रांड से दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराता है।

 2. जिला स्तर - जिला दुग्ध उत्पादक संघ - वर्तमान में राज्य में 21 जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ कार्यरत है।

 3. प्राथमिक स्तर - प्राथमिक स्तर पर वर्तमान में राज्य में 14466 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। ये दुग्ध उत्पादकों से दूध एकत्रित कर जिला दुग्ध उत्पादक संघों को उपलब्ध करवाती है। दुग्ध प्रसंस्करण एवं विपणन का कार्य RCDF के अधीन डेयरी संयंत्रों व अवशीतन केन्द्रों द्वारा किया जाता है। वर्तमान में विभिन्न योजनाओं से उपलब्ध वित्तीय सहायता एवं स्वयं के संसाधनों से जिला दुग्ध उत्पादन संयंत्रों की दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़कर 20.35 लाख लीटर प्रतिदिन (स्रोत 2017-18) हो गई है। वर्तमान में, राज्य भर में 8.0 लाख दुग्ध उत्पादक सहकारिता पर आधारित डेयरी विकास कार्यक्रम से संबंद्ध है। डेयरी फेडरेशन द्वारा घी, छाछ, लस्सी, श्रीखंड, पनीर, दही, चीज़ इत्यादि उत्पादों का भी उत्पादन किया जा रहा हैं।

राज्य में डेयरी विकास की मुख्य योजनाएँ:-

1. सरस सुरक्षा कवच (जन श्री बीमा योजना)- RCDF द्वारा इस योजना का संचालन LIC के माध्यम से किया जाता है। इस योजना के तहत राज्यभर के दुग्ध उत्पादकों को सामाजिक सुरक्षा के साथ साथ उनके बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हाल ही मे इसके चौथे चरण मे एक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना 1 जनवरी, 2020 से लागू की गई है। इस योजना मे दुग्ध उत्पादक की दुर्घटना मृत्यु एवं पूर्ण स्थायी विकलांगता पर 5 लाख रुपये एवं आंशिक  स्थायी विकलांगता पर 2.50 लाख रुपये की बीमा राशि देय है। इस योजनान्तर्गत दिसम्बर,2020 तक 135587 दुग्ध उत्पादकों को बीमित किया गया है। 

2. सरस सामूहिक आरोग्य बीमा योजना (मेडिक्लेम) - इस योजना के तहत दुग्ध उत्पादकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई है। जिसमें दुग्ध उत्पादकों द्वारा अपने व अपने परिजनों के इलाज में व्यय हुई संपूर्ण राशि यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी द्वारा सीधे ही संबंधित जिला चिकित्सालय को अदा की जाती है। दुग्ध उत्पादकों को चिकित्सालय में कोई राशि अदा नहीं करनी पड़ती है।

 इसका 15वाँ चरण 15 अक्टूबर, 2020 प्रारंभ की गई जिसके अंतर्गत माह दिसम्बर,2020  तक 46506 दुग्ध उत्पादकों को बीमित किया गया है। 

4 .मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजनाः वित्तीय वर्ष 2020-21 में मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजनान्तर्गत जिला दुग्ध संघों द्वारा माह अप्रैल, 2020 से नवम्बर, 2020 तक दुग्ध उत्पादकों को ₹2 प्रति लीटर की दर से अनुदान राशि का भुगतान देय/जारी है।

 इस योजनान्तर्गत वर्ष 2020-21 में ₹200.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है जिसके विरूद्ध ₹50.00 करोड़ की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां गोपालन विभाग राजस्थान द्वारा प्रसारित की गई है। अप्रैल, 2020 से दिसम्बर, 2020 तक दुग्ध उत्पादकों को लगभग ₹93.11 करोड़ अनुदान राशि का भुगतान देय है।

आर.सी.डी.एफ. द्वारा वर्ष 2020-21 में भारत सरकार की केंद्रीय प्रवर्तित योजना नेशनल लाईव स्टॉक मिशन फोडर सीड प्रोक्योरमेन्ट, प्रोडक्शन एण्ड डिस्ट्रीब्यूशन परियोजना अन्तर्गत 60:40 के फण्डिंग पैटर्न पर ₹29.63 लाख (भारत सरकार का अंशदान) के माह दिसम्बर, 2020 तक विभिन्न जिला दुग्ध संघों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों हेतु जई चारा फसल प्रमाणित बीज के 17,107 मिनीकिटस वितरित किये गये तथा शेष 40 प्रतिशत राशि लाभार्थी द्वारा वहन की गई है। जिला दुग्ध संघों के दुग्ध उत्पादकों को दिसम्बर, 2020 तक 4,051 क्विंटल उन्नत चारा बीज उचित मूल्य पर उपलब्ध कराया गया हैं।

5 . कामधेनु डेयरी योजना - सरकार ने देशी गाय के हाइटेक डेयरी फॉर्म को बढ़ावा देने के लिए कामधेनु डेयरी योजना शुरू की है।

- इसका उद्धेश्य कोविड-19 महामारी के चलते नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराना एवं उनके इम्यूनिटी को मजबूत करना।

- इस योजना में एक इकाई अधिकतम 36.38 लाख की होगी।

- इस योजना में प्रोजेक्ट लागत का 30% सरकार के द्वारा खर्च किया जाएगा और 10% राशि डेयरी स्थापित करने वाले उद्यमी को इन्वेस्ट करनी होगी। 60% राशि बैंक द्वारा लोन दी जाएगी- अर्थात् इस योजना के तहत किसानों और पशुपालकों को 90% लोन दिया जायेगा।

- योजना में 15-15 का गायों का क्रय कर डेयरी स्थापित की जायेगी।

वर्तमान स्थिति- वर्ष 2019-20 :-

-  राजस्थान में डेयरी विकास कार्यक्रम, सहकारी समितियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में दिसम्बर, 2020 तक 15,318 दुग्ध सहकारिता समितियों को राज्य में 21 जिला दुग्ध उत्पादन सहकारी संघों एवं राज्य स्तर पर शीर्षस्थ संस्थान, राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) लिमिटेड जयपुर से सम्बद्ध किया गया है।

- विभिन्न योजनाओं में उपलब्ध वित्तीय सहायता एवं स्वयं के संसाधनों से जिला दुग्ध संघ संयंत्रों की दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ कर 40.95 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में माह दिसम्बर, 2020 तक RCDF से सम्बद्ध सभी दुग्ध संघों ने प्रतिदिन औसतन 23.19 लाख किग्रा. दुग्ध संकलित किया गया है। वर्तमान में, राज्य भर में 8.44 लाख दुग्ध उत्पादन सहकारीता पर आधारित डेयरी विकास कार्यक्रम से सम्बद्ध है एवं वर्ष पर्यन्त दुग्ध का पारिश्रमिक प्राप्त कर रहे हैं। दुग्ध संघों ने वर्ष 2020-21 के दौरान दुग्ध उत्पादकों को माह दिसम्बर, 2020 तक रुपये 2,314.50 करोड़ का भुगतान किया है।

पशुआहार :-

 राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन द्वारा पौष्टिक पशुआहार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2020-21  में दिसम्बर, 2020 तक 2,39,806  मैट्रिक टन पशु आहार का उत्पादन किया गया है एवं राज्य के दूध उत्पादकों  को 239338 मैट्रिक टन पशु  आहार बेज गया है।