राजस्थान ऊर्जा
विद्युत की स्थिति:-
- विद्युत समवर्ती सूची का विषय है। राजस्थान स्थापना के समय विद्युत की बात करें तो लगभग 15 छोटे विद्युत गृह थे जिनमें 13.27 मेगावाट का उत्पादन होता था।
- वर्तमान में राजस्थान में विद्युत की स्थिति की बात करें तो 21,836 मेगावाट विद्युत उत्पादन है। (दिसम्बर 2020 तक) अर्थात राज्य में कुल विद्युत उत्पादन 21,836 मेगावाट है जिसमें से सौर ऊर्जा उत्पादन 5002 मेगावाट है और पवन ऊर्जा उत्पादन 4337 .65 मेगावाट है।
ऊर्जा स्त्रोत
- ऊर्जा प्राप्ति के स्त्रोतों को दो श्रेणी में बाँटा जा सकता है।
1. परम्परागत ऊर्जा स्त्रोत
- तापीय ऊर्जा- कोयला, गैस, खनिज तेल
- जलीय ऊर्जा
- आण्विक ऊर्जा
2. गैर परम्परागत ऊर्जा स्त्रोत
सौर ऊर्जा
- सूर्य की ऊर्जा से उत्पन्न ऊर्जा
पवन ऊर्जा
- तेज चलने वाली पवनों से उत्पन्न ऊर्जा
बायोमास ऊर्जा
- चावल तथा सरसों की भूसी तथा कचरा से उत्पन्न ऊर्जा
बायोगैस ऊर्जा
- गोबर गैस अर्थात जानवरों के मल-मूत्र के अपघटन से प्राप्त ऊर्जा
भू तापीय ऊर्जा
- पृथ्वी से निकलने वाली ऊष्मा से उत्पन्न ऊर्जा
ज्वारीय ऊर्जा
- समुद्री ज्वार भाटे से उत्पन्न ऊर्जा (राज. से इस ऊर्जा का निर्माण नहीं है)
राज्य में 2800 मेगावाट के तीन नए ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना -
(1) छबड़ा तापीय ऊर्जा संयंत्र – बाराँ
(2) रामगढ़ गैसीय ऊर्जा संयंत्र – जैसलमेर
(3) सूरतगढ़ तापीय ऊर्जा संयंत्र – श्रीगंगानगर
राजस्थान में ऊर्जा उत्पादन स्रोतों के अन्तर्गत परम्परागत स्रोत जैसे- कोयला, लिग्नाईट, प्राकृतिक गैस, तेल, पन-बिजली एवं परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ वृहद गैर-परम्परागत स्रोत जैसे- पवन, सौर तथा बायोमास अपशिष्ट सम्मिलित हैं।
– राज्य में मार्च, 2020 तक ऊर्जा की अधिष्ठापित क्षमता।
21,176 मेगावाट थी। वर्ष 2020-21 में दिसम्बर, 2020 तक 660 मेगावाट की और वृद्धि हुई है।
– राज्य में मार्च, 2013 तक कुल अति उच्च वॉल्टेज (ई.एच.वी.) प्रसारण नेटवर्क 29,605 सर्किट किमी था, जो कि (सार्वजनिक निजी सहभागिता के साथ) मार्च, 2020 तक बढ़कर 41,718 सर्किट किमी हो गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 (दिसम्बर, 2020 तक) के दौरान प्रसारण नेटवर्क में 844 सर्किट किमी की और वृद्धि हुई है।
– राज्य में मार्च, 2013 तक विद्युत की उपलब्धता कुल 5,531 करोड़ यूनिट थी, जो कि मार्च, 2020 तक बढ़कर 8,069 करोड़ यूनिट हो गई। वर्ष 2012-13 से 2019-20 तक कुल विद्युत उपलब्धता में 45.88 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार कुल शुद्ध विद्युत के उपभोग में भी 49.83 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
– राज्य में 100 प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण को प्राप्त करने के लिए, राज्य सरकार ने दिसंबर, 2020 तक 43,199 गांवों का विद्युतीकरण किया है।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत राज्य के 104 गाँवों का विद्युतीकरण किया जा चुका है।
18 दिसम्बर 2019 को राज्य की नई सौर ऊर्जा नीति और पवन ऊर्जा नीति जारी की गयी।
राजस्थान में विद्युत विकास हेतु संस्थागत प्रयास-
- राज्य में विद्युत विकास हेतु सर्वप्रथम 1 जुलाई, 1957 को राजस्थान राज्य विद्युत मण्डल की स्थापना जयपुर में की गई।
- 1991 में निजी क्षेत्र को विद्युत उत्पादन हेतु प्रोत्साहन देने का कार्य किया। ऐसा करने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य था।
- केन्द्र सरकार द्वारा राज्य विद्युत नियामक आयोग एक्ट-1998 के तहत 2 जनवरी, 2000 को राजस्थान राज्य विद्युत नियामक आयोग की स्थापना की गई।
इसके प्रथम अध्यक्ष श्री अरुण कुमार थे।
- राजस्थान राज्य विद्युत सुधार अधिनियम-1999 को 1 जून, 2000 को पारित किया गया। जिसके तहत राज्य में विद्युत क्षेत्र में सुधार करने हेतु पाँच नयी विद्युत कम्पनियाँ 19 जून 2000 को स्थापित की गयी।
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19 जून 2000 को गठित पाँच विद्युत कम्पनियाँ |
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उत्पादन |
प्रसारण |
वितरण |
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राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम - जयपुर |
राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड, जयपुर |
(1) जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (2) अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (3) जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड |
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राज्य में विद्युत वितरण कम्पनियाँ (3) |
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जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड |
अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड |
जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड |
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12 जिलों में विद्युत वितरण |
11 जिलों में विद्युत वितरण |
10 जिलों में विद्युत वितरण |
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जयपुर, दौसा, अलवर, टोंक, करौली, धौलपुर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ |
झुंझुनूँ, सीकर, अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर |
श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, पाली, जालोर, सिरोही |
राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड- जयपुर
- स्थापना – 4 दिसम्बर ,2015 को की गई। जिसका कार्य थोक में विद्युत का क्रय विक्रय करना तथा विद्युत खर्च में कमी करना तथा सस्ती दरों पर लघु, मध्यम व दीर्घकालीन विद्युत उपलब्धता को सुनिश्चित करना।
राजस्थान पावर फाइनेन्स व फाइनेंशियल सर्विसेज-
- राज्य की इन पाँच विद्युत कम्पनियों को वित्त उपलब्ध करवाने हेतु इसकी स्थापना – 14 अक्टूबर, 2015 को की गयी।
RBI Act द्वारा इसे गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनी का दर्जा दिया गया
कार्य-
- विद्युत कम्पनियों के अधिशेष को जमा करना।
- विद्युत कम्पनियों को बाजार दरों से कम दर पर वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराना।
गैर परपंरागत ऊर्जा हेतु संस्थान-
राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RREC)
Rajasthan Renewal Energy Corporation
- 9 अगस्त ,2002 को RREC की स्थापना जयपुर में की गई।
राजस्थान ऊर्जा विकास एजेन्सी (REDA)
- Raj Energy Development Agency तथा राज. स्टेट पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RSPCL) को मिलाकर 9 अगस्त, 2002 को जयपुर में RREC की स्थापना की गयी।
राज ऊर्जा विकास एजेन्सी (REDA)
- स्थापना – 1985 में
- गैर परम्परागत ऊर्जा विकास उपकरणों के उपयोग को प्रोत्साहन देने हेतु की गयी थी।
राज. स्टेट पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RSPCL)
- स्थापना 1995 में गैर परम्परागत ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करने हेतु की गयी थी।
राजस्थान में विद्युत योजनाएँ तथा विद्युत नीतियाँ
- राज्य में विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न प्रयास किये गए जिनके तहत विद्युत सम्बन्धी अनेक प्रकार की योजनाएँ तथा विद्युत नीतियाँ बनायी गयी।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना
- इस योजना को 3 दिसम्बर, 2014 से स्वीकृत प्रारंभ किया जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों का विद्युतीकरण करना तथा 24 घंटे 7 दिन विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
- यह योजना विद्युत वितरण व्यवस्था में सुधार हेतु लायी गयी जिसमें वितरण लाइन को दो भागों में बाँट दिया गया है-
- एक लाइन घरेलू कनेक्शन हेतु जिसमें 24 घंटे विद्युत सुविधा उपलब्ध होगी।
- दूसरी लाइन–3 फेज कनेक्शन हेतु जिसमें आवश्यकतानुसार विद्युत सुविधा उपलब्ध करवायी जाएगी।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युत योजना – 2004-05
- ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण करना
इन्टिग्रेटेड पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम – (IPDS)
- इस कार्यक्रम को 2014 में प्रारंभ किया गया जिसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में विद्युतीकरण करना है।
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सभी को विद्युत कनेक्शन उपलब्ध करवाना तथा 24 घंटे विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
उजाला योजना
- उन्नत ज्योति अफोर्डेबल एल ई.डी. वितरण योजना को जनवरी, 2015 में प्रारंभ किया गया।
- उजाला योजना का मुख्य उद्देश्य विद्युत खपत में कमी करना है।
- इस योजना के तहत वर्तमान में राज्य सरकार के द्वारा अफोर्डेबल ट्यूबलाइट, कम विद्युत खर्च वाले पंखें तथा 9 वॉट की LED को भी शामिल किया गया है।
उदय योजना –UDAY
- उज्ज्वल डिस्कॉम एंश्योरेंस योजना की शुरूआत 20 नवम्बर, 2015 से की गयी है।
- वर्तमान में विद्युत वितरण कम्पनियाँ घाटे में है और ये घाटे को पूरा करने हेतु बैंकों से कर्ज लेती है जिसके लिये भारी ब्याज देने से कम्पनियों पर वित्तीय भार बढ़ता है जिससे ये कम्पनियाँ प्रति यूनिट लागत में वृद्धि कर देती है।
उदय योजना का उद्देश्य
- विद्युत वितरण कम्पनियों का वित्तीय समावेशन करना।
- विद्युत दरों पर विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- विद्युत कम्पनियों के घाटे में कमी करना।
- इस योजना के द्वारा विद्युत कम्पनियों को सरकार द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी गयी।
- पुराने मीटरों तथा ट्रांसफार्मरों में परिवर्तन किया गया।
- विद्युत कम्पनियों को ऋणों का भुगतान।
- उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर 24 घन्टे विद्युत सुविधा उपलब्ध कराना।
मुख्यमंत्री विद्युत सुधार कार्यक्रम – 2016
- इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्युत प्रसारण व वितरण यंत्र में सुधार लाना है।
- इस योजना के तहत् 15% कम दरों पर विद्युत सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही है।
- विद्युत ट्रांसफार्मर व वितरण लाइन में सुधार करना है।
प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना – 2017
- इय योजना का ध्येय वाक्य है–“सहज बिजली, घर घर बिजली”
- इस योजना का उद्देश्य 31 मार्च, 2019 तक विद्युत सुविधा से वंचित घरों में विद्युत सुविधा उपलब्ध कराना है।
- सौर ऊर्जा या बैटरी व्यवस्था के माध्यम से विद्युत कनेक्शन सुविधा उपलब्ध कराना।
सौर ऊर्जा
- राजस्थान राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन की अनुकूल संभावनाएँ हैं।
- संभावना – 6-7 किलोवाट प्रतिदिन प्रति वर्ग मीटर सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावना के आधार पर राज्य का देश में प्रथम स्थान है।
- सर्वाधिक सौर ऊर्जा उत्पादन जिला – जोधपुर में है।
- वर्ष में 325 दिन सौर ऊर्जा उत्पादन किया जा सकता है।
- राज्य में मरूस्थलीय व्यर्थ भूमि की उपलब्धता है।
- 142 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन
- दिसम्बर, 2020 तक राज. में 5002 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा था।
- उत्पादन के मामले में कर्नाटक के बाद राजस्थान दूसरा स्थान है।
सौर ऊर्जा उत्पादन हेतु कम्पनी
- सौर ऊर्जा की कम्पनियाँ राज में PPP मोड पर स्थापित की गई है।
PPP मोड अर्थात् राज्य सरकार तथा निजी कम्पनी की भागीदारी से तीन कम्पनियों की स्थापना की गई है।
सौर्य ऊर्जा कम्पनी लिमिटेड ऑफ राजस्थान
- TL & FS + राजस्थान सरकार द्वारा स्थापित
एस्सेल सौर्य ऊर्जा कम्पनी लि. ऑफ राजस्थान
- एस्सेल पॉवर + राज. सरकार
अडानी रिन्यूवल कम्पनी ऑफ राज. लि.
- अडानी + राज. सरकार
- यह तीनों कम्पनियाँ राजस्थान में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का काम कर रही है।
सौर ऊर्जा हेतु कार्यक्रम
- राज्य सरकार और किलन्टन फाउण्डेशन द्वारा सोलर पार्कों हेतु वर्ष 2010 में समझौता किया गया।
- राज्य का प्रथम सौर पार्क (भड़ला – जोधपुर) में स्थापित किया गया।
- जैसलमेर के कुचेरी तथा जोगा में सोलर पार्क – स्थापित किये गये हैं।
- सोलर थर्मल अनुसंधान व शिक्षा केन्द्र की स्थापना IIT जोधपुर में स्थापित किया गया है।
सोलर तापीय कार्यक्रम
- नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सोलर तापीय कार्यक्रम की बात कही गई।
- इस कार्यक्रम के तहत घर की छत पर गर्म जल करने हेतु सौलर उपकरण स्थापित करने पर 30% अनुदान।
- विद्युत बिल में प्रति यूनिट 25 पैसे की सब्सिडी दी जाएगी।
- सब्सिडी की अधिकतम राशि ₹ 300 तक होगी।
सोलर रुफटॉप फोटो वॉल्टिक कार्यक्रम
- यह अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा चलाया जाने वाला कार्यक्रम है।
- इसके तहत् 100 किलोवाट तक के सौर संयंत्र पर 30% अनुदान दिया जाएगा।
- 2015 में नेट मीटरींग रेग्युलेशन सिस्टम लागू किया गया।
सोलर सिटी
- जयपुर, जोधपुर, अजमेर को सोलर सिटी में शामिल किया गया हैं।
सोलर एनर्जी इन्टरप्राइजिंग जोन – SEEZ
- ऐसे क्षेत्र जहाँ सोलर एनर्जी उत्पादन की सर्वाधिक संभावना है।
SEEZ में तीन जिलों को शामिल किया गया है। जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर।
आदित्य सोलर शॉप
- सौर ऊर्जा से संबंधित उपकरण कम दरों पर उपलब्ध करवाने हेतु स्थापित दुकाने हैं।
सोलर वेध शाला
- राज्य की प्रथम सौर वैधशाला उदयपुर में स्थापित की गई है।
- दूसरी प्रस्तावित सौर वेधशाला – जोधपुर में है।
MAST
- बहुपयोगी सोलर दूरबीन की स्थापना – उदयपुर में की गई है।
- देश की सबसे बड़ी सोलर दूरबीन है।
- सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला पहला गाँव – लूम्बासर – बीकानेर है।
- राज्य की प्रथम नहर के उपर सौर ऊर्जा संयंत्र अप्रैल, 2016 में मैनावली हनुमानगढ़ में स्थापित किया गया हे।
- उत्तर - पश्चिम रेलवे द्वारा राज्य की प्रथम सौर ऊर्जा संचालित ट्रेन जोधपुर से हिसार तक जुलाई, 2016 में चलाई गई।
सौर संयंत्र हेतु समझौता
IL & FS
- Infrastructure Learing and Finance Services.
के साथ 5000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन करने का संयंत्र स्थापित करने का समझौता किया गया है।
एस्सेल पॉवर
- एस्सेल पॉवर केक साथ 5000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन संयंत्र स्थापित करने का समझौता किया गया है।
अडानी ग्रुप
- अडानी ग्रुप के साथ 10, 000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन संयंत्र स्थापित करने का समझौता किया गया।
- राज्य का प्रथम निजी सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना 2011 में रिलांयस के सहयोग से खींवसर – नागौर में की गई।
अल्ट्रा सोलर पार्क समझौता – 2014
- सांभर क्षेत्र में 4000 मेगावाट की उत्पादन क्षमता का 19000 एकड़ में एक ही स्थान पर सौर ऊर्जा उत्पादन करने हेतु समझौता किया है। यह समझौता केन्द्र सरकार के 6 उपक्रमों के मध्य हुआ है-
- (1) REIL
(2) BHEL
(3) पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन लि.
(4) सांभर सॉल्ट लिमिटेड
(5) सोलर एनर्जी लि.
(6) सतलज पॉवर लि.
ऊर्जा नीतियाँ
सौर ऊर्जा नीति- 2011
- राज्य सरकार द्वारा – 19 अप्रैल, 2011 को प्रथम सौर ऊर्जा नीति लायी गयी थी।
- देश में सौर ऊर्जा नीति को लागू करने वाला राजस्थान प्रथम राज्य बना।
सौर ऊर्जा नीति- 2014
- राज्य सरकार द्वारा 8 अक्टूबर, 2014 को द्वितीय सौर ऊर्जा नीति लाई गई।
- लक्ष्य 25, 000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन करना था।
वर्तमान में राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019
- यह नीति 18 दिसम्बर, 2019 से लागू की गई थी। इस नीति में सरकार ने 2024-25 तक प्रदेश में 30, 000 मेगावाट क्षमता तक सौर ऊर्जा सृजित करने का लक्ष्य रखा है।
Vision (दृष्टिकोण)
- राज्य को सौर ऊर्जा उत्पादन के मामले में देश में प्रथम स्थान पर लाना।
- राज्य, निजी सार्वजनिक भागीदारी तथा व्यक्तिगत प्रयासों को बढ़ावा देना।
- सौर ऊर्जा उत्पादन में किसानों के सहयोग को बढ़ावा तथा किसानों की आय में वृद्धि करना।
पवन ऊर्जा
- पवन ऊर्जा उत्पादन में राजस्थान का देश में 5वाँ स्थान है। (प्रथम स्थान – तमिलनाडु)
- राजस्थान में पवन ऊर्जा उत्पादन की संभावना 127750 मेगावाट है। राजस्थान में सर्वाधिक पवन ऊर्जा उत्पादन जिला जैसलमेर है।
- पवन ऊर्जा उत्पादन की संभावना के मामले में देश में राजस्थान का 7वाँ स्थान है।
- इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रापिकल मेटालर्जी के अनुसार पवन ऊर्जा संभावना वाले राज्य में 26 स्थान चिह्नित किये गये है।
प्रमुख क्षेत्र – 8
- हर्ष पर्वत, सीकर
- देवगढ़, प्रतापगढ़
- धमोत्तर – चित्तौड़गढ़
- मोहनगढ़ – जैसलमेर
- जसवंतगढ़ – उदयपुर
- खाडोल – बाड़मेर
- फलोदी – जोधपुर
- जैसलमेर
पवन ऊर्जा नीति
- 2000, 2003, 2004, 2012 तथा 2019 आ चुकी है।
पवन ऊर्जा संयंत्र/इकाई
- राज्य की प्रथम पवन ऊर्जा इकाई-
- अमरसागर जैसलमेर में 2000 में स्थापित की गई है।
- पवन ऊर्जा का प्रथम निजी संयंत्र – बड़ा बाग जैसलमेर में स्थापित किया गया।
- राज्य का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा संयंत्र सोढ़ा बांधन जैसलमेर में सुजलोन कम्पनी द्वारा स्थापित किया गया।
- भारतीय रेलवे द्वारा स्थापित प्रथम पवन ऊर्जा प्लान्ट कोडियासर – जैसलमेर में स्थापित किया गया।
जैविक ऊर्जा
- जैविक ऊर्जा अर्थात बायोमास के स्त्रोत- सरसों की तुड़ी, चावल की भूसी तथा जूली प्लोरा, वनस्पतियों के अपशिष्ट आदि है।
राज्य में बायोमास नीति – 2010 में लाई गयी है।
- राज्य में प्रथम बायोमास संयंत्र – पदमपुर (श्रीगंगानगर) में लगाया गया है।
- राज्य में दिसम्बर,2020 तक सभी संयंत्रों की कुल समता 120.45 मेगावाट है।
13 बायोमास ऊर्जा उत्पादन संयंत्रों में से 28 मेगावाट क्षमता के 2 संयंत्र वर्ष 2012 से बंद है। वर्तमान मे 14 मेगावाट क्षमता के 2 बायोमास संयंत्रों पर काम चल रहा है।
पवन ऊर्जा
- राज्य मे पवन ऊर्जा की अनुकूल संभावनाएँ है जिसका प्रमुख कारण राज्य के 61% मरुस्थलीय क्षेत्र का विस्तार है। यहाँ पवन की गति – (9 km. – 40 km) है। राज्य में व्यर्थ भूमि की उपलब्धता है। वहाँ किया जा रहा है तथा 188 मेगावाट के 3 उत्पादन क्षमता के तीन संयंत्र निर्माणाधीन है।
- बजट 2013-14 में राज्य सरकार द्वारा 25,000 बायोगैस प्लान्ट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- कच्चरे से विद्युत ऊर्जा बनाने हेतु प्रथम प्लांट सीकर के नानी स्थान पर स्थापित किया जाएगा।
- भारतीय रेलवे द्वारा कचरे से विद्युत ऊर्जा बनाने का प्लांट जयपुर जंक्शन पर आधारित है।
पवन ऊर्जा नीति
राजस्थान पवन ऊर्जा नीति- 2012
- यह नीति 18 जुलाई 2012 को घोषित की गई। जिसके तहत प्रतिवर्ष 400 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जायेगी तथा 2500 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा।
- इससे पहले पवन ऊर्जा नीति 2000, 2003, 2004 में आयी थी।
राजस्थान पवन तथा हाइब्रिड ऊर्जा नीति- 2019
- राजस्थान सरकार द्वारा 18 दिसम्बर 2019 को पवन ऊर्जा नीति घोषित की गई।
- इस नीति का उद्देश्य – राज्य को पवन ऊर्जा के मामले में अग्रणी राज्य बनाना है।
- राजस्थान राज्य में पवन ऊर्जा उत्पादन की संभाव्य क्षमता को देखते हुये इस नीति में राज्य में वर्ष 2024-25 तक 4000 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
- पवन ऊर्जा हब के रूप में राज.को विकसित करने हेतु उपयोगी व गैर उपयोगी भूमि का उपयोग करना।
- पवन ऊर्जा हेतु निवेश को प्रोत्साहन प्रदान करना।
- MSME उद्योगों में निवेश तथा अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- रोजगार को प्रोत्साहन प्रदान करना।
परमाणु ऊर्जा उत्पादन संयंत्र
रावत भाटा परमाणु ऊर्जा संयंत्र
- स्थापना – 16 दिसम्बर 1973
रावतभाटा – चित्तौड़गढ़
- ये देश का दूसरा तथा राज्य का प्रथम ऊर्जा संयंत्र है। तथा कनाडा की सहायता से स्थापित किया गया।
इस संयंत्र में उत्पादन
- इकाई – I × 100 मेगावाट = 100 मेगावाट
इकाई = II × 200 मेगावाटा = 200 मेगावाट
इकाई - III- VI × 220 मेगावाट = 880 मेगावाट
1180 मेगावाट
- इकाई - VII- VIII × 700 मेगावाट = 1400 मेगावाट
(निर्माणधीन) है।
Note:-
- देश का सबसे बड़ा रिएक्टर पार्क (रावतभाटा परमाणु ऊर्जा संयंत्र) बनेगा।
- राजस्थान का दूसरा प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र – माही – बाँसवाडा में इकाई IV × 700 मेगावाट = 2800 मेगावाट
स्थापित किया जाएगा।
तापीय ऊर्जा
कोयला आधारित
कोटा सुपर थर्मल पॉवर प्लान्ट
- स्थापना – 1983, कोटा
- यह राज्य का कोयला आधारित प्रथम संयंत्र है।
उत्पादन
- इकाई – I - II × 110 मेगवाटा = 220 मेगावाट
इकाई – III–IV × 210 मेगावाट = 420 मेगावाट
इकाई – V × 210 मेगावाट = 210 मेगावाट
VI- VII × 195 मेगावाट = 390 मेगावाट
1240 मेगावाट
सूरतगढ़ सुपर थर्मल पॉवर प्लान्ट
- स्थापना – 1998
- लोकापर्ण – 3 अक्टूबर, 1999
- राज्य का प्रथम सुपर थर्मल पॉवर प्लान्ट
उत्पादन
- इकाई - I- VI × 250 मेगावाट = 1500 मेगावाट
क्रिटीकल इकाई VII-VIII × 660 मेगावाट = 1320 मेगावाट
2820मेगावाट
छबड़ा सुपर थर्मल पॉवर प्लान्ट
- स्थापना – 8 दिसम्बर, 2005
छबड़ा – बारां
- जल उपलब्धता – परवन व ल्हासी बाँध
उत्पादन
- इकाई - I, II, III, IV × 250 मेगावाट = 1000 मेगावाट
- क्रिटिकल इकाई – V-VI × 660 मेगावाट = 1320 मेगावाट
2320 मेगावाट
कालीसिंध सुपर थर्मल पावर प्लांट :
स्थापना 2008 में झालावाड़ में की गई।
इस प्लांट को जल की उपलब्धता कालीसिंध नदी से प्राप्त होती है।
उत्पादन इकाई :
इकाई I - II × 600 मेगावाट – 1200 मेगावाट
इकाई III – IV × 660 मेगावाट – 1320 मेगावाट (प्रस्तावित)
गिरल लिग्नाईट आधारित थर्मल पॉवर प्लांट :
इस संयंत्र की स्थापना 2007 में गिरल-बाड़मेर में की गई।
इकाई I - II × 125 मेगावाट – 250 मेगावाट
नोट :
यह संयंत्र वर्तमान में बंद है।
बरसिंहसर थर्मल पॉवर प्लांट :
इस संयंत्र की स्थापना दिसंबर, 2011 में बरसिंहसर बीकानेर में की गई।
लिग्नाईट आधारित संयंत्र :
यह निवेली लिग्नाइट इकाई द्वारा स्थापित इकाई है।
उत्पादन क्षमता :
इकाई I - II × 125 मेगावाट – 250 मेगावाट
गैस आधारित संयंत्र
अंता गैस आधारित थर्मल पॉवर प्लांट :
इस संयंत्र की स्थापना 1989-90 में अंता-बारां में की गई।
यह केन्द्र सरकार के उपक्रम एनटीपीसी द्वारा स्थापित किया गया।
राज्य का प्रथम गैस आधारित ऊर्जा संयंत्र है।
उत्पादन क्षमता :
इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता 419 मेगावाट है।
कुल उत्पादन में से राजस्थान की हिस्सेदारी 19.81% है।
रामगढ़ गैस आधारित पॉवर प्लांट :
इस संयंत्र की स्थापना 1996 में रामगढ़ जैसलमेर में की गई।
यह राज्य सरकार द्वारा स्थापित प्रथम गैस आधारित ऊर्जा संयंत्र है।
संयंत्र को जल की उपलब्धता इंदिरा गांधी नहर परियोजना से होती है।
इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता 273 मेगावाट है।
धौलपुर गैस आधारित पॉवर प्लांट:
इस संयंत्र की स्थापना 2007 में धौलपुर में की गई।
इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता – 110 मेगावाट × 330 मेगावाट है।
झामर कोटड़ा - उदयपुर :
2001 में RSMML द्वारा स्थापित 4 मेगावाट का ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया।
जल विद्युत:
2019 में भारत सरकार द्वारा जल विद्युत नवीकरणीय ऊर्जा में शामिल किया गया।
माही बजाज सागर परियोजना
नवंबर 1983 में बांसवाड़ा के बोरखेड़ा में माही नदी पर बांध बनाकर विद्युत उत्पादन शुरू किया गया। यह गुजराज तथा राजस्थान की संयुक्त परियोजना है।
उत्पादन इकाई :
इकाई 2 × 25 मेगावाट = 50 मेगावाट
इकाई 2 × 45 मेगावाट = 90 मेगावाट
राजस्थान की हिस्सेदारी 100% है।
चंबल विद्युत परियोजना
- यह राजस्थान तथा मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है। 1960 से प्रारंभ इस परियोजना में चंबल नदी पर बाँध बनाकर विद्युत उत्पादन किया जा रहा है।
- यह परियोजना की कुल उत्पादन क्षमता 386 मेगावाट है, जिसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 50% अर्थात 193 मेगावाट है।
इस परियोजना में चंबल नदी पर कुल चार बांध बने हैं :-
राजस्थान में चंबल नदी पर निर्मित बांध तीन है।
कोटा बैराज : केवल सिंचाई के काम में ली जाती है।
जवाहर सागर : 99 मेगावाट की परियोजना।
राणा प्रताप सागर : 172 मेगावाट की परियोजना
गांधी सागर – यह बाँध चंबल नदी पर मध्यप्रदेश में स्थित है तथा यह 115 मेगावाट की परियोजना है।
भाखड़ा नांगल परियोजना
- पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान के संयुक्त परियोजना का प्रारंभ 1961 से किया गया।
- सतलज नदी पर भाखड़ा व नांगल बाँध का निर्माण किया गया, जिसमें नांगल बाँध के कोटड़ा और गंगवाल से विद्युत उत्पादन किया जाता है।
- इसकी कुल उत्पादन क्षमता 1480 मेगावाट है, जिसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 15.22% है।
व्यास विद्युत परियोजना
- 1977 से प्रारंभ इस परियोजना में पंजाब, राजस्थान तथा हरियाणा की भागीदारी है।
- हिमाचल प्रदेश में व्यास नदी पर दो बाँध बनाए गए हैं –
पड़ोह तथा पोंग बाँध ।
विद्युत संयंत्र स्थापित किए गए हैं –
देहर में 1977-83 में, जिसकी उत्पादन क्षमता 990 मेगावाट तथा इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 20% थी।
पोंग– 1978-83 में 396 मेगावाट, जिसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 58.5% है।
अनास विद्युत परियोजना
अनास तथा सहायक नदी हरण पर प्रस्तावित परियोजना जिसकी अनुमानित उत्पादन क्षमता 45 मेगावॉट है।