परिवहन
- आधुनिक समय मे परिवहन के साधनों के विस्तार को ही आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण सूचक माना गया है।
- मानव वस्तुओं एवं विचारों का एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवागमन को परिवहन कहते हैं।
- भारत में सड़क यातायात देश के कुल यातायात का 87.4% है।

- स्थल परिवहन – भारत में 6.6 मिलियन किलोमीटर सड़क नेटवर्क है।
- विश्व में सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क USA का है। दूसरा भारत एवं तीसरा स्थान चीन का है।
- भारत का औसत सड़क घनत्व 152.04 किमी./100 वर्ग कि.मी. है
- भारत का अधिकतम सड़क घनत्व वाला राज्य केरल है- 517किमी./ 100 वर्ग कि.मी. है
- सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017-18 भारतमाला कार्यक्रम में चलाया गया जिसके अंतर्गत आर्थिक कॉरिडोर, फीडर कॉरिडोर और इंटर कॉरिडोर, राष्ट्रीय कॉरिडोर, तटवर्ती सड़कें बदंरगाह संपर्क सड़कें आदि का निर्माण किया जाएगा।
सड़क परिवहन :-
- भारत में सड़क परिवहन का जनक शेरशाह सूरी था।
- शेरशाह सूरी द्वारा पेशावर (वर्तमान पाकिस्तान) से ढाका (बांग्लादेश) तक एक सड़क का निर्माण करवाया, जिसे ग्रांड ट्रंक रोड कहा गया। इस रोड का दूसरा नाम उत्तरापथ भी है।
- आधुनिक सड़कों का जनक मैकाडम कहा जाता है।
सड़कों का वर्गीकरण :-
- 1953 में पहली बार नागपुर सम्मेलन के अनुसार सड़कों का वर्गीकरण किया गया था।
- नागपुर सम्मेलन को इंजीनियर सम्मेलन भी कहा जाता है।
1. राष्ट्रीय राजमार्ग
2. राज्य राजमार्ग
3. मुख्य जिला सड़कें
4. अन्य जिला सड़कें
5. ग्रामीण सड़कें
वर्तमान वर्गीकरण :-
एक्सप्रेस-वे :-
- ये वे राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, जिनकों 4-6 लेन में बदल दिया गया।
- इनका संचालन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
- इनके रखरखाव व निर्माण का कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जाता है।
- Mile Stone (मील का पत्थर) का प्रतीक चिह्न पीला होता है, जिस पर जगह का नाम और दूरी लिखी होती है।
- देश का पहला एक्सप्रेस-वे गुरुग्राम-जयपुर एक्सप्रेस-वे हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग :-
- दो राज्यों की राजधानी, प्रमुख औद्योगिक, धार्मिक, आर्थिक स्थान को जोड़ते हैं।
- इनका संचालन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
- इनके रखरखाव व निर्माण का कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जाता है।
Mile Stone (मील का पत्थर) का प्रतीक चिह्न पीला होता है, जिस पर जगह का नाम और दूरी लिखी होती है।
- राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल संख्या 47 है।
राज्य राजमार्ग :-
- ये राजमार्ग जिला मुख्यालय व प्रमुख स्थानों को जोड़ते हैं।
- इनका संचालन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
- इनके रखरखाव व निर्माण का कार्य रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉरर्पोरेशन ऑफ राजस्थान (RIDCOR) द्वारा किया जाता है।
- Mile Stone (मील का पत्थर) का प्रतीक चिह्न हरा होता है।
- राजस्थान में राज्य राजमार्गों की कुल संख्या 163 है।
मुख्य जिला सड़कें :-
- तहसील व जिले को राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ती हैं।
- इनका संचालन व रखरखाव का कार्य जिला परिषद् द्वारा किया जाता है।
- Mile Stone (मील का पत्थर) का प्रतीक चिह्न काला होता है।
ग्रामीण सड़कें :-
- ग्राम पंचायतों को आपस में जोड़ती हैं।
- इनका संचालन व रखरखाव का कार्य ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है।
- Mile Stone (मील का पत्थर) का प्रतीक चिह्न लाल होता है।
राज्य में सड़कों की लंबाई (31 मार्च, 2020 तक) :-
- राष्ट्रीय राजमार्ग – 10618.09 किमी.
- राज्य राजमार्ग – 15621.25 किमी.
- मुख्य जिला सड़कें – 8779.95 किमी.
- अन्य जिला सड़कें – 53791.52 किमी.
- ग्रामीण सड़कें – 180217.35 किमी.
- सड़क घनत्व – 78.61 किमी./100 किमी2 है।
राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक परिवर्तन :-
सम क्रमांक
- इनका क्रमांक परिवर्तन अप्रैल, 2010 को किया गया।
- जो राष्ट्रीय राजमार्ग उत्तर से दक्षिण की ओर जाएगा उसका सम क्रमांक होगा।
- पूर्व से पश्चिम की ओर क्रमांक नंबर बढ़ता है।
विषम क्रमांक
- जो राष्ट्रीय राजमार्ग पूर्व से पश्चिम की ओर जाएगा उसका विषम क्रमांक होगा।
- उत्तर से दक्षिण की ओर क्रमांक नंबर बढ़ता है।
स्वर्णिम चतुर्भुज योजना :-
- यह योजना चार मेट्रो शहरों का जोड़ने का कार्य करती है, जिसमें दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकाता शामिल हैं जिसकी कुल लंबाई 5846 किमी. है।
उत्तर से दक्षिण का गलियारा :-
- श्रीनगर से कन्याकुमारी तक के मार्ग को उत्तर से दक्षिण का गलियारा कहा जाता है।
- इस गलियारे की लंबाई 3745 किमी. है।
- इस गलियारे पर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 स्थित है।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग राजस्थान के धौलपुर जिले से होकर गुजरता है।
पूर्व से पश्चिम का गलियारा :-
- पोरबंदर (गुजरात) से सिलचर (असम) तक के मार्ग को पूर्व से पश्चिम का गलियारा कहा जाता है।
- इस गलियारे पर राष्ट्रीय राजमार्ग-27 स्थित है।
- इस गलियारे की कुल लंबाई 3507 किमी. है।
राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग :-
NH-3 (पुराना क्रमांक) (नया क्रमांक NH-44) :-
यह राष्ट्रीय राजमार्ग पहले आगरा से मुंबई तक जाता था।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग राजस्थान के धौलपुर जिले से होकर गुजरता है।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग को उत्तर से दक्षिण का गलियारा भी कहा जाता है।
NH-8 (नया क्रमांक NH-48, 58) :-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग दिल्ली से मुंबई तक जाता था।
- राष्ट्रीय राजमार्ग-8 राजस्थान में बहरोड (अलवर), जयपुर, अजमेर, राजसमंद, उदयपुर और रतनपुरा (डूँगरपुर) से गुजरता था।
- बहरोड (अलवर) से अजमेर तक इस राष्ट्रीय राजमार्ग का नया क्रमांक NH-48 और अजमेर से रतनपुरा (डूँगरपुर) तक इसका नया क्रमांक NH-58 है।
NH-11 (नया क्रमांक 11, 21, 52) :-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग बीकानेर से आगरा तक जाता था।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग राजस्थान के चूरू, फतेहपुर (सीकर), सीकर, जयपुर, दौसा और भरतपुर से होकर गुजरता था।
- बीकानेर से फतेहपुर (सीकर) तक इस राष्ट्रीय राजमार्ग का क्रमांक NH-11 और फतेहपुर (सीकर) से जयपुर तक इसका क्रमांक NH-52 और जयपुर से भरतपुर तक इसका क्रमांक NH-21 है।
- NH-21 घाट की धूणी (पोल्यूशन फ्री सुरंग) से होकर गुजरता है।
- NH-21 पर दौसा में मेहन्दीपुर बालाजी मंदिर स्थित है।
- NH-21 पर भरतपुर में केवलादेवी घना पक्षी राष्ट्रीय उद्यान स्थित है।
- NH-21 राजमार्ग स्वर्णिम त्रिकोण में शामिल है।
NH-12 (नया क्रमांक-52) :-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग जयपुर से जबलपुर तक स्थित है।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग राजस्थान में जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूँदी, कोटा और झालावाड़ से होकर गुजरता है।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग का नया क्रमांक NH-52 है, जो जयपुर से झालावाड़ तक स्थित है।
- NH-52 पर कोटा-बूँदी के मध्य बूँदी सुरंग स्थित है।
- NH-52 पर कोटा में मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान स्थित है।
NH-14 (नया क्रमांक 27, 62, 162) :-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग ब्यावर से होते हुए कांडला (गुजरात) तक जाता था।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग का क्रमांक ब्यावर से पाली तक NH-162 व पाली से सिरोही तक NH-62 व सिरोही से पिण्डवाड़ा
(सिरोही) तक NH-27 स्थित है।
- राष्ट्रीय राजमार्ग-162 पर ब्यावर और पाली के मध्य बर दर्रा स्थित है।
NH-15 (नया क्रमांक 11, 62, 68) :-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग पठानकोट से शुरू होकर कांडला (गुजरात) तक जाता था।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग राजस्थान के श्रीगंगानगर, बीकानेर, फलोदी (जोधपुर), जैसलमेर, बाड़मेर और सांचौर (जालोर) होकर गुजरता था।
- श्रीगंगानगर से बीकानेर तक इसका क्रमांक NH-62, बीकानरे से जैसलमेर तक NH-11 और जैसलमेर से सांचौर (जालोर) तक NH-68 है।
- NH-68 पर जैसलमेर व बाड़मेर के मध्य मरुअभयारण्य स्थित है।
NH-65 (नया क्रमांक 52, 58, 62) :-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग अम्बाला से पाली तक जाता था।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग राजस्थान में चूरू, सीकर, नागौर, जोधपुर और पाली से गुजरता है।
- चूरू से सीकर तक इसका क्रमांक NH-52 और सीकर से नागौर तक NH-58 और नागौर से पाली तक NH-62 है।
NH-71B (नया क्रमांक 919) :-
- यह राजस्थान का सबसे छोटा राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो रेवाड़ी से धारूहेड़ा (अलवर) तक जाता है।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 5 किमी. है।
NH-76 (नया क्रमांक 27):-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग पिण्डवाड़ा (सिरोही) से शिवपुरी (मध्यप्रदेश) तक जाता था।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग पर राजस्थान के सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूँदी, कोटा और बारां जिले से गुजरता है, जिसका NH-27 है।
- NH-27 पर कोटा में झुलता हुआ पुल स्थित है।
- NH-27 को पूर्व से पश्चिम के गलियारे में शामिल किया गया है।
NH-79 (नया क्रमांक 48):-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग अजमेर से नीमच (मध्यप्रदेश) तक जाता था।
- NH-48 राजस्थान के अजमेर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ से होकर गुजरता है।
NH-89 (नया क्रमांक 58, 62):-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग अजमेर से होते हुए बीकानेर तक जाता था।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग का क्रमांक अजमेर, पुष्कर और नागौर तक NH-58 है और नागौर, देशनोक और बीकानेर तक NH-62 है।
NH-112 (नया क्रमांक 25):-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग बर से पाली होते हुए बाड़मेर तक जाता था।
- अब इसका नया क्रमांक बर से बाड़मेर तक NH-25 है।
NH-113 (नया क्रमांक 56):-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़), प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा और दाहोद (गुजरात) तक जाता था।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग का नया क्रमांक निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) से बाँसवाड़ा तक NH-56 है।
NH-114 (नया क्रमांक 125):-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग जोधपुर से पोकरण (जैसलमेर) तक जाता था।
नये राष्ट्रीय राजमार्ग (NH):-
NH-11:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग जैसलमेर, फलोदी (जोधपुर), बीकानेर, रतनगढ़ (चूरू), फतेहपुर (सीकर), झुंझुनूँ, सिंघाना, नारनौल से होते हुए रेवाड़ी (हरियाणा) तक जाता है।
NH-21:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग जयपुर, दौसा, भरतपुर, आगरा से होते हुए बरेली (उत्तर प्रदेश) तक जाता है।
NH-52:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग चूरू, सीकर, जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूँदी, कोटा से होते हुए झालावाड़ तक जाता है।
NH-23:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग चाकसू (जयपुर), लालसौट (दौसा), करौली से होते हुए धौलपुर तक जाता है।
NH-25:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग मुनाबाव (बाड़मेर), बाड़मेर, जोधपुर, जैतारण (पाली) और ब्यावर (अजमेर) तक जाता है।
- NH-125 जोधपुर से पोकरण (जैसलमेर) से होकर गुजरता है।
NH-54:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग कैचिया (हनुमानगढ़) से शुरू होकर पठानकोट तक जाता है।
NH-27:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग पिण्डवाड़ा (सिरोही), उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूँदी, कोटा, बाराँ से होते हुए सिल्चर (असम) तक जाता है।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर उदयपुर में हाथी दर्रा और देबारी दर्रा स्थित है।
NH-48:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग दिल्ली से होते हुए राजस्थान के अलवर, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, डूँगरपुर से चेन्नई तक जाता है।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर देश का पहला एक्सप्रेस-वे दिल्ली से जयपुर स्थित है।
NH-58:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग फतेहपुर (सीकर), सुजानगढ़ (चूरू), लाडनूं (नागौर), नागौर, मेड़ता सिटी, पुष्कर, अजमेर, राजसमंद, उदयपुर से होते हुए डूँगरपुर तक जाता है।
- इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर राजसमंद और उदयपुर के मध्य चीरवी घाटी स्थित है।
NH-62:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग अबोहर (पंजाब), श्रीगंगानगर, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, पाली से होते हुए पिण्डवाड़ा (सिरोही) तक जाता है।
NH-62:-
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा से होते हुए दाहोद (गुजरात) तक जाता है।
विविध तथ्य:-
- राज्य में सर्वाधिक सड़कों से जुड़ा गाँवों वाला जिला उदयपुर है।
- राज्य में न्यूनतम सड़कों से जुड़ा गाँवों वाला जिला सिरोही है।
- राज्य में सड़कों से जुड़ी सर्वाधिक ग्राम पंचायतों वाला जिला जयपुर है।
- राज्य में सड़कों से जुड़ी न्यूनतम ग्राम पंचायतों वाला जिला जैसलमेर है।
- राजस्थान का पहला एक्सप्रेस-वे NH-48 है।
- राज्य में सर्वप्रथम सरकारी बस सेवा का संचालन टोंक (1952) में किया गया।
- राज्य में लोक परिवहन बस सेवा का संचालन 31 नवंबर, 2015 से शुरू हुआ।
- राज्य में ग्रामीण रोडवेज बस सेवा की शुरुआत 14 दिसंबर, 2012 (उदयपुर-आगरा) को की गई।
- RSRTC (राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम) की स्थापना 1 अक्टूबर, 1964 को की गई। इसका मुख्यालय जयपुर में स्थित है।
- सर्वाधिक सड़क घनत्व वाला जिला राजसमंद है।
- न्यूनतम सड़क घनत्व वाला जिला जैसलमेर है।
NHAI की परियोजना और राजस्थान :-
उत्तर से दक्षिण का गलियारा :-
- श्रीनगर से कन्याकुमारी तक (NH-44) का राष्ट्रीय राजमार्ग उत्तर से दक्षिण का गलियारा कहलाता है।
- यह राजस्थान के धौलपुर जिले (लंबाई 28 किमी.) से गुजरता है।
पूर्व से पश्चिम का गलियारा :-
- पोरबंदर (गुजरात) से सिल्चर (असम) तक जाता है।
- यह राजस्थान के सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूँदी, कोटा और बाराँ (कुल लंबाई 528 किमी.) से गुजरता है।
स्वर्णिम चतुर्भुज योजना :-
- यह देश के चार महानगरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकत्ता) को जोड़ने की योजना है।
- इसकी कुल लंबाई 5846 किमी. है।
- इस योजना के अंतर्गत (NH-48) राजस्थान के अलवर, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर और डूँगरपुर जिले शामिल हैं।
- राजस्थान में इस योजना की कुल लंबाई 722 किमी. (NH-48) है।
सड़क नीतियाँ :-
प्रथम सड़क नीति (1994) :-
- इस नीति का उद्देश्य निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
- स्वतंत्र सड़क नीति लाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है।
सड़क नीति (2002) :-
- 2002 की नई सड़क नीति में 1994 की सड़क नीति को संशोधित किया गया।
- सड़क का निर्माण BOT (Build, Operate, Transfer) (PPP Model) प्रक्रिया के आधार पर किया गया।
- इस नीति के अंतर्गत सर्वप्रथम टॉल टैक्स लगना प्रारंभ हुआ था।
द्वितीय नई राज्य सड़क विकास नीति :-
- भविष्य के यातायात दबाव के अनुसार नीति निर्माण
- आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा उचित प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से सड़कों का निर्माण
- सड़क के मार्ग अधिकार की सीमा पर वृक्षारोपण
- विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता
- दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की प्रतिवर्ष समीक्षा कर उन स्थानों पर सड़क सुधार कार्य।
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अन्य विभागों द्वारा निर्मित समस्त सड़कों, पुलों एवं सुरंग को सार्वजनिक निर्माण विभाग के क्षेत्राधिकार मे लाकर संधारित करना।
- सुरक्षित और कुशल सड़क का विकास
सड़क सुरक्षा नीति (2017) :-
- यह राज्य की पहली सड़क सुरक्षा नीति है।
- यह 29 नवंबर, 2016 को जारी की गई।
- इस नीति का उद्देश्य 2020 तक राज्य में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को 50% कम करना है।
अधिनियम :
1. राज्य सड़क विकास अधिनियम, 2002 (28 अप्रैल)
- 2002 की नई सड़क नीति में 1994 की सड़क नीति को संशोधित किया गया।
- सड़क का निर्माण BOT (Build, Operate, Transfer) (PPP Model) प्रक्रिया के आधार पर किया गया।
- इस नीति के अंतर्गत सर्वप्रथम टॉल टैक्स लगना प्रारंभ हुआ था।
2. राजस्थान राज्य मार्ग 2014 – 9 अप्रैल, 2015 पारित किया गया।
- राज्य में उच्च राजमार्गो का विकास व निर्माण
3. राजस्थान राज्य बस टर्मिनल Act- 2015 (अगस्त, 2015 में पारित)
- बस टर्मिनल (डिपो) का विकास व रखरखाव
- यात्रियों को उच्चतम सुविधा प्रदान करना
राजस्थान में कार्य करने वाले संगठन :
1. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (1998)
कार्य :
- राजमार्ग, एक्सप्रेस – वे का निर्माण व रख - रखाव
NHAI द्वारा चलाई गई परियोजना
- स्वर्णिम चतुर्भुज – दिल्ली – मुंबई- कोलकाता- चेन्नई
- इस योजना के तहत प्रदेश में 722 किमी. लंबाई की 7 जिलों अलवर, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौडगढ़, उदयपुर व डूँगरपुर (NH 8, 76, 79 व 79A) का निर्माण एवं रख-रखाव।
2. सीमा सड़क सगंठन – (BRO) – 1960
कार्य :
- सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्र राजमार्गों का निर्माण करना।
3. राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम – मुख्यालय (जयपुर) - 10 अक्टूबर, 1964
कार्य :
- सड़क मार्ग विकास
- यात्री बसों का संचालन
4. राजस्थान राज्य सड़क विकास व निर्माण निगम लिमिटेड - जयपुर (1979)
- राजस्थान स्टेट ब्रिज का नाम बदलकर 2001 राजस्थान राज्य सड़क विकास व निर्माण निगम लिमिटेड कर दिया गया।
- राज्य में उच्च क्षमता वाले पुल व राजमार्गों का विकास।
- भवन निर्माण।
5. राजस्थान कृषि विपणन बोर्ड – 1974 (जयपुर)
कार्य :
- कृषि मंडी निर्माण।
- मुख्य मार्ग से मंडी तक सड़क का निर्माण
6. RIDCOR
RIDCOR (रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ राजस्थान)
- इसकी स्थापना वर्ष 2004 में की गई और कार्य जुलाई, 2005 में शुरू हुआ।
- यह मेगा हाईवे व स्टेट हाईवे का निर्माण करता है।
- यह राजस्थान सरकार की एक शाखा है।
7. राजस्थान स्टेट हाईवे अथॉरिटी – 2 जून, 2015
- राजस्थान स्टेट हाईवे अथॉरिटी एक्ट – 2014 के अनुसार
संरचना :
अध्यक्ष – 1
सदस्य :
4 पूर्ण कालिक
अंशकालिक सदस्य – 6
- जिनकी नियुक्ति पाँच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक
कार्य :
1. राजमार्गो का विकास करना
2. परिवहन को विनियन व नियंत्रण
8. राजस्थान राज्य बस टर्मिनल प्राधिकरण – 25 अगस्त, 2015
संरचना :
अध्यक्ष – 1
सदस्य
4 पूर्ण कालिक
अंशकालिक सदस्य – 6
- जिनकी नियुक्ति तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक
सड़क विकास योजना :
1. NHDP – राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (1999-2000)
- राष्ट्रीय मार्ग का विकास करना
- ये 7 चरणों की योजना थी, वर्तमान में इसे भारतमाला योजना में विलय कर दिया गया।
7 चरण - स्वर्णिम चतुर्भुज, पूर्व पश्चिम गलियारा, उत्तर-दक्षिण गलियारा, एक्सप्रेस वे, बाय-पास, रिंगरोड़
एक्सप्रेस-वे इकोनॉमिक कॉरिडोर :-
- ये कॉरिडोर पंजाब से होते हुए गुजरात तक जाता है।
- इस कॉरिडोर पर तीन रिफाईनरियाँ (अंबाला, पचपदरा व जामनगर) स्थित हैं।
- यह कॉरिडोर राजस्थान में श्रीगंगानगर, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर और जालोर से होकर गुजरता है।
चंबल एक्सप्रेस-वे :-
- इसका नया नाम अटल प्रोग्रेसिव-वे है।
- यह एक्सप्रेस-वे कोटा से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से होकर गुजरता है।
दिल्ली-वड़ोदरा ग्रीन-वे :-
- यह राजस्थान के भरतपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, टोंक, बूँदी और कोटा से होकर गुजरेगा।
- इसका निर्माण कार्य प्रगति पर है।
2. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) - 25 दिसंबर, 2000
- ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क मार्ग का निर्माण/ विकास।
- 500 तक की आबादी वाले गाँवों को सड़क मार्ग से जोड़ना।
- यदि कोई गाँव आदिवासी क्षेत्र/ दूरस्थ क्षेत्र में है। तो 250 तक की आबादी वाले गाँव को सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा।
3. मुख्यमंत्री सड़क योजना :- (2005)
- इस योजना की शुरुआत 7 अक्टूबर, 2005 को की गई।
- इस योजना का प्रमुख उद्देश्य सड़क विहीन क्षेत्रों को सड़कों से जोड़ना है।
- पर्यटन तथा तीर्थ स्थलों को सड़क मार्ग से जोड़ना।
- 1 हजार किलोमीटर लंबाई की सड़क निर्माण।
4. महात्मा गांधी ग्रामीण सड़क विकास कार्यक्रम (2012-13)
- ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क मार्ग में विकास।
- वित्तीय सहायता – नाबार्ड + विश्व बैंक से मिलेगी।
- 250 से 499 की आबादी वाले गाँवों को सड़क मार्ग से जोड़ना।
5. ग्रामीण गौरव पथ (2014 - 15)
- प्रत्येक पंचायत स्तर पर 0.5 से 2 किमी. तक के सड़क मार्ग का निर्माण
4 चरण –
I – 1973 पंचायतों को शामिल
II – 2067 पंचायतों को शामिल
III – 2434 पंचायतों को शामिल
IV - 1084 पंचायतों को शामिल
6. विकास पथ योजना – (बजट 2019-20)
- ग्रामीण सड़कों के विकास हेतु वॉल टू वॉल सड़क मार्ग ।
- 10 हजार किमी. के विकास पथ निर्माण की घोषणा।
- मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा पुरस्कार श्रेष्ठ 3 जिलों को दिया जायेगा।
- सड़क सुरक्षा कोष – 100 करोड।
- प्रत्येक जिलें में ट्रैफिक पार्क की व्यवस्था की जायेगी।
- Foms की स्थापना : क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO’s) में Passport office की तर्ज पर तैयार किया जायेगा।
4. राजस्थान रोड विज़न 2025
- इस दीर्घावधि ‘विज़न’ का अनुमानित बजट करीब 9 खरब रूपये है।
- इस योजना में MOT (Maintain, Operate and Transfer) तथा BOT (Build Operate Transfer) प्रणाली पर जोर दिया गया है।
- B.O.T में अब तक राज्य में 29 परियोजनाओं को पूर्ण किया गया है।
उद्देश्य :
- न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम दुर्गम मार्ग का विकास और खनिज सड़के।
- राष्ट्रीय निर्माण, रोजगार कार्यक्रम ग्रामीण, भूमिहीन रोजगार गारंटी।
- विश्व व नाबार्ड बैंक द्वारा सड़कों का विकास।
- सीमा सड़क सुरक्षा संगठन द्वारा विकसित सड़कें।
- स्थानीय संस्थाओं जैसे जयपुर विकास प्राधिकरण नगर निगम, नगर पालिकाओं व अन्य संस्थाओं द्वारा निर्मित सड़कों का निर्माण एवं विकास।
31वाँ सड़क सुरक्षा सप्ताह :-
- 11 जनवरी – 17 जनवरी, 2020 तक यह सप्ताह मनाया गया।
- इस सड़क सुरक्षा सप्ताह की थीम “सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा” थी।
सारथी एप :-
- वाहन चालकों के लिए ऑनलाइन लाइसेंस हेतु परिवहन विभाग द्वारा जारी मोबाइल एप है।
राज्य में सड़क परिवहन का प्रशासिनक वर्गीकरण :-
- राजस्थान के संभाग में 12 RTO हैं।
- राजस्थान के जिलों में 53 DTO हैं। नवीनतम DTO खेतड़ी (झुंझुनूँ) (RJ-53) है।
- राज्य में लेन सिस्टम लागू होने वाले NH हैं – NH-48 और NH-8।
प्रधानमंत्री सड़क योजना :-
- इस योजना की शुरुआत 25 दिसंबर, 2000 को की गई।
- इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ना है।
राजस्थान में रेल परिवहन
- भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण वर्ष 1951 में किया गया।
- राजस्थान में रेलवे की शुरुआत अप्रैल, 1874 में बांदीकुई (दौसा) से आगरा फोर्ट के मध्य की गई।
- राजस्थान में कुल रेल मार्ग की लंबाई मार्च, 2018 तक 5929 किमी.थी, जो की मार्च 2013 के अंत तक 5937 किमी. हो गई है।
- राज्य में रेलमार्ग 67,415 किमी. लंबाई के हैं जो कि भारतीय रेलमार्ग का 8.81 % है।
रेलवे का वर्गीकरण :-
1. पटरी के मध्य दूरी के आधार पर :–
A. ब्रॉडगेज – दो पटरियों के मध्य दूरी 1.67 मीटर होती है। राजस्थान में लगभग 89.47% रेलमार्ग इसके अंतर्गत आता है।
B. मीटरगेज – दो पटरियों के मध्य दूरी 1 मीटर होती है। राजस्थान में लगभग 9.05% रेलमार्ग इसके अंतर्गत आता है।
C. नैरोगेज – दो पटरियों के मध्य की दूरी 0.62 मीटर होती है। राजस्थान में लगभग 1.47% रेलमार्ग इसके अंतर्गत आता है। राजस्थान का धौलपुर एकमात्र ऐसा जिला है जिसमें नैरोगेज रेलवे लाइन है।
2. प्रशासनिक वर्गीकरण :-
A. रेलवे जोन – राजस्थान में उत्तरी-पश्चिमी रेलवे जोन का मुख्यालय जयपुर में है।
B. रेलवे मण्डल – अजमेर, जयपुर, जोधपुर और बीकानेर ये मण्डल उत्तरी-पश्चिमी रेलवे जोन के अंतर्गत आते हैं, जबकि कोटा मण्डल पश्चिमी-मध्य रेलवे जोन (जबलपुर) के अंतर्गत आता है।
राज्य में रेलामार्गों का संचालन :-
राजस्थान में रेलमार्गों का संचालन निम्न जोनों द्वारा किया जाता है-
1. उत्तरी-पश्चिमी रेलवे जोन – इसका मुख्यालय जयपुर में स्थित है। इसके अंतर्गत 4 रेलवे मण्डल आते हैं – जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और अजमेर।
2. उत्तर-मध्य रेलवे जोन – इसका मुख्यालय इलाहाबाद में स्थित है। इसके अंतर्गत 2 रेलवे मण्डल आते हैं – आगरा और झाँसी।
3. पश्चिमी-मध्य रेलवे जोन – इसका मुख्यालय जबलपुर में स्थित है। इसके अंतर्गत 1 रेलवे मण्डल आता है - कोटा
4. उत्तरी रेलवे जोन – इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इसके अंतर्गत 1 रेलवे मण्डल आता है - अम्बाला
5. पश्चिमी रेलवे जोन – इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। इसके अंतर्गत 1 रेलवे मण्डल आता है – रतलाम
- राजस्थान में कुल 5 रेलवे मण्डल हैं, लेकिन रेलमार्गों का संचालन 9 मण्डलों द्वारा किया जाता है।
रेल परिवहन :-
तथ्य :-
रेलवे भर्ती मण्डल अजमेर में स्थित है।
- रेलवे प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर में स्थित है।
- रेलवे परीक्षण केंद्र पचपदरा (बाड़मेर) में स्थित है।
- रेलवे ट्रेक केंद्र नावा (नागौर) में स्थित है।
- रेलवे मॉडल कक्ष उदयपुर में स्थित है।
- एशिया का सबसे बड़ा मीटरगेज यार्ड फुलेरा (जयपुर) में स्थित है।
- 2019 में सबसे स्वच्छ रेलवे स्टेशन जयपुर रेलवे स्टेशन है।
- राजस्थान में प्रथम रेल बस सेवा की मेड़ता रोड से मेड़ता सिटी (नागौर) की शुरुआत 20 अक्टूबर, 1994 को की गई।
- राज्य का प्रथम महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित रेलवे स्टेशन गाँधीनगर (जयपुर) है।
- राज्य का प्रथम सौर ऊर्जा संचालित रेलवे स्टेशन गौरमघाट (राजसमंद) है।
- राज्य का पहला कैशलेस रेलवे स्टेशन जयपुर रेलवे स्टेशन है।
- राज्य का सबसे बड़ा रेलवे एलिवेटर स्टेशन भगत की कोठी रेलवे स्टेशन (जोधपुर) है।
- भवानी मण्डी (झालावाड़) रेलवे स्टेशन की सीमा राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों से लगती है।
- राज्य का एकमात्र रेलवे विहीन जिला प्रतापगढ़ है।
- बाँसवाड़ा से रतलाम (मध्यप्रदेश) रेलवे मार्ग राज्य सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त परियोजना है। यह देश की एकमात्र ऐसी परियोजना है, जो राज्य और केंद्र के संयुक्त सहयोग से चलाई जा रही है।
- रेलवे विहीन जिला मुख्यालय निम्न हैं – टोंक, करौली, सिरोही व बाँसवाड़ा।
जयपुर मेट्रो :-
- इसके निर्माण कार्य का शिलान्यास 14 फरवरी, 2011 को हुआ।
- जयपुर मेट्रो संचालन का उद्घाटन 3 जून, 2015 को किया गया।
- जयपुर मेट्रो का प्रथम संचालन मानसरोवर से चाँदपोल तक किया गया।
- मानसरोवर व चाँदपोल स्टेशन पर मातृत्व कक्ष/अमृत कक्ष स्थापित किए गए।
- मानसरोवर से चाँदपोल के मध्य श्यामनगर मेट्रो स्टेशन पूर्णत: महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित है।
- मानसरोवर में भारत का पहला 3 एलिवेटर सिस्टम स्थापित है।
- मानसरोवर मेट्रो स्टेशन पर 100 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित है।
जयपुर मेट्रो चरण :-
प्रथम चरण :-
- मानसरोवर से चाँदपोल के मध्य 9.2 किमी. की दूरी है।
- इसमें कुल 9 मेट्रो स्टेशन स्थित हैं, जिसमें से एक भूमिगत स्टेशन है।
- चाँदपोल से बड़ी चौपड़ के मध्य 2.7 किमी. की दूरी है। इसमें कुल 3 मेट्रो स्टेशन स्थित हैं।
द्वितीय चरण :-
- अम्बाबाड़ी से सीतापुरा के मध्य 23.7 किमी. की दूरी है।
- इसमें कुल 20 मेट्रो स्टेशन हैं।
NTES (National Train Enquiry System) :-
- इसकी शुरुआत फरवरी 2019 को झुंझुनूँ में की गई।
- इसके अंतर्गत की रेलवे के आगमन व प्रसथान की सटीक जानकारी हेतु इसकी शुरुआत की गई।
राज्य की पहली अन्त्योदय रेल (कम कीमत वाली) :- यह रेल 13 जुलाई, 2018 को बीकानेर से बिलासपुर के मध्य चलाई गई।
दर्रों से गुजरने वाले रेलमार्ग :-
1. बर दर्रा – यह अजमेर-मारवाड़ रेलमार्ग के मध्य स्थित है।
2. गोरमघाट दर्रा – यह जोधपुर-उदयपुर रेलमार्ग के मध्य स्थित है।
3. हाथी दर्रा – यह जोधपुर-जयपुर रेलमार्ग के मध्य स्थित है।
Bullet Train
- यह भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना है, जो दिल्ली से मुंबई तक चलाई जाएगी। जिसमें राजस्थान में जयपुर व उदयपुर जिले भी सम्मिलित हैं।
- दिल्ली से जयपुर की दूरी करीब 281 किमी. का सफर ये ट्रेन 1 घंटे में तय करेगी।
पाइप-लाइन परिवहन
1. जामनगर (गुजरात) से लोनी (उत्तर प्रदेश) तक :-
- यह एक GAIL (Gas Authority of India Limited) कंपनी की पाइप-लाइन है।
- इस पाइप-लाइन के द्वारा रसोई गैस का परिवहन किया जाता है।
- इस पाइप-लाइन द्वारा जयपुर व अजमेर में रसोई गैस की आपूर्ति की जाती है।
2. हजीरा (गुजरात), बीजापुर (मध्यप्रदेश), जगदीशपुर (उत्तर प्रदेश) पाइप-लाइन :-
- यह एक GAIL (Gas Authority of India Limited) कंपनी की पाइप-लाइन है।
- इस पाइप-लाइन के द्वारा प्राकृतिक गैस का परिवहन किया जाता है।
- राजस्थान में आपूर्ति –
i. अंता (बारां) में गैस विद्युत ग्रह
ii. कोटा में चंबल फर्टीलाइजर
iii. कोटा में सेमकोर ग्लास वर्क्स
3. पाइप-लाइन परिवहन (कोटा) :-
- घरेलू गैस कनेक्शन पायलेट परियोजना के तहत संचालित है।
वायु - परिवहन
- 1 अगस्त, 1953 को वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण किया गया।
- राजस्थान में वायु परिवहन की शुरुआत वर्ष, 1929 में की गई।
- महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा जोधपुर में फ्लाईंग क्लब की स्थापना वर्ष 1929 में की गई थी।
- 24 अगस्त, 2007 सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनियाँ एयर इंडिया व भारतीय विमान निगम का विलय – नेशनल एविएशन कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (NACIL) – कंपनी का ब्रांड नाम एयर इंडिया ही है।
नागरिक हवाई अड्डे :
1. सांगानेर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा :
- यह जयपुर में स्थित है।
- यह राज्य का पहला अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा व देश का 14वाँ हवाई अड्डा है।
- इस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की अधिसूचना फरवरी, 2006 में जारी की गई।
- इस हवाई अड्डे से प्रथम अंतर्राष्ट्रीय उड़ान वर्ष, 2002 में जयपुर से दुबई के बीच भरी गई।
- हाल ही में अगस्त 2020 में इसका संचालन 50 वर्ष के लिए अडानी ग्रुप को दे दिया गया।
2. महाराणा प्रताप हवाई अड्डा :-
- यह डबोक (उदयपुर) में स्थित है।
- यह एक प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
3. जोधपुर हवाई अड्डा :-
- यह जोधपुर जिले में स्थित है।
4. कोटा हवाई अड्डा :-
- यह कोटा जिले में स्थित है।
5. किशनगढ़ हवाई अड्डा :-
- यह किशनगढ़ (अजमेर) में स्थित है।
- इसको ग्रीन फिल्ड हवाई अड्डा भी कहा जाता है।
6. जैसलमेर हवाई अड्डा :-
- यह जैसलमेर जिले में स्थित है।
- यह मूल रूप से सेना का हवाई अड्डा है।
7. बीकानेर हवाई अड्डा :-
- यह बीकानेर जिले में स्थित है।
सैन्य हवाई अड्डे :-
राजस्थान में कुल 6 सैन्य हवाई अड्डे हैं, जो निम्न हैं –
1. सूरतगढ़ सैन्य हवाई अड्डा – यह सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) में स्थित है।
2. नाल हवाई अड्डा – यह बीकानेर जिले में स्थित है। यह एशिया का सबसे अच्छा भूमिगत हवाई अड्डा है।
3. जैसलमेर हवाई अड्डा – यह जैसलमेर जिले में स्थित है।
4. उतरलाइन हवाई अड्डा – यह बाड़मेर में जिले में स्थित है।
5. जोधपुर हवाई अड्डा – यह जोधपुर जिले में स्थित है।
6. फलोदी हवाई अड्डा – यह फलोदी (जोधपुर) में स्थित है। इस हवाई अड्डा पर हाल ही में तेजस की तैनाती की गई। तेजस का निर्माण HAL बेंगलुरु द्वारा वर्ष 1964 में किया गया। यह विश्व का सबसे हल्का स्वदेशी लड़ाकू विमान है।
हवाई पट्टियाँ :-
- वर्तमान में लगभग 22 पट्टियाँ स्थित हैं, जिसमें से 18 सरकारी और चार निजी हैं।
निजी पट्टियाँ –
1. बाराँ – इसका संचालन अडानी ग्रुप द्वारा किया जाता है।
2. कांकरोली (राजसमंद) – इसका संचालन जे.के. ग्रुप द्वारा किया जाता है।
3. पिलानी (झुंझुनूँ) – इसका संचालन बिरला ग्रुप द्वारा किया जाता है।
4. निवाई (टोंक) – इसका संचालन वनस्थली विद्यापीठ द्वारा किया जाता है।
ग्रीन फिल्ड हवाई अड्डा (प्रस्तावित) :-
1. नीमराणा एयरपोर्ट – अब इसे कोटाकासिम (अलवर) में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह एक एयरोट्रोलिस एयरपोर्ट होगा।
2. शिवदासपुरा (जयपुर)
3. गंगाणी (जोधपुर)
योजनाएँ :
1. इंट्रा स्टेट हवाई सेवा : इस योजना के तहत जोधपुर, उदयपुर व बीकानेर, जयपुर से जोड़ा गया।
- शीघ्र ही कोटा – अजमेर रणथंभौर (सवाई माधोपुर) को भी जयपुर से जोड़ा गया।
उद्देश्य :
- प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देना।
- छोटे शहरों को जोड़ना।
स्पाईस जेट :
- 1 अप्रैल, 2019, किशनगढ़, अहमदाबाद
जूम एयरलाइंस
- दिल्ली, आगरा, जैसलमेर 2 नवम्बर, 2019
2. रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम - अनुपयोगी व अल्प उपयोगी एयरपोर्ट को वायु सीमा से जोड़ना - 2016
3. उड़ान स्कीम (उड़े देश का आम नागरिक)
- इसका उद्देश्य - आम आदमी को हवाई सेवा उपलब्ध कराना।
- यह स्कीम भारतीय सरकार के नागरिक-उड्डयन मंत्रालय द्वारा संचालित की गई।
जल-परिवहन
- राजस्थान में कोई भी समुद्र तट न होने की वजह से राजस्थान का जल परिवहन शून्य है।
- राजस्थान का निकटतम बंदरगाह – दीनदयाल बंदरगाह (काण्डला) गुजरात में स्थित है।
- प्रस्तावित बंदरगाह :
- बाड़मेर जालोर जिले को गुजरात के समुद्री रास्ते से जोड़ने की योजना है। प्रदेश का यह पहला सूखा बंदरगाह होगा।
- दो सुरंग :
1. मानसी वाकल : राजस्थान सरकार व हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की संयुक्त योजना है। जिसमें 70% जल का उदयपुर 30% जल का उपयोग हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड करेगा।
- यह 4.6 किमी. लंबी सुरंग है।
- यह भारत और राजस्थान की सबसे लंबी सुरंग है।
2. सेई राजस्थान की पहली जल सुंरग – उदयपुर से पाली।