भारत का प्राकृतिक स्वरूप एवं भौतिक संरचना

 

भूगर्भीय संरचना का इतिहास :

भूगर्भीय संरचना की दृष्टि से भारत के तीन स्पष्ट विभाग हैं और वे हैं -

 

(1) प्रायद्वीपीय भारत - यह भूखंड प्राचीनतम चट्टानों का बना है, जो गोंडवाना लैंड का भाग है (विन्ध्यन से दक्षिणी दक्कन तक)

(2) नवीन वलित पर्वतीय मेखला- हिमालय पर्वत उससे संबंधित नवीन मोड़दार पर्वत श्रेणियाँ, जिनमें दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत की अपेक्षा नई चट्टानें हैं। थार का मरुस्थल टेथिस सागर में नदियों के तलछट के जमाव के परिणामस्वरूप बना। यह आर्कियन युग की आग्नेय चट्टानों से निर्मित है।

(3) सिंधु-गंगा का मैदानइसका विस्तार सिंधु नदी घाटी से असम में ब्रह्मपुत्र नदी घाटी तक है। 

 

भारत के प्राकृतिक विभाग

() उत्तरी पर्वतीय प्रदेश (हिमालय पर्वतीय प्रदेश) :

            (A) भौगोलिक, (B) प्रादेशिक एवं (C) भू-गर्भीय

(A) भौगोलिक वर्गीकरण :

 

 

(1)    वृहत् हिमालय : सबसे ऊँची लगातार फैली यह आन्तरिक श्रेणी नंगा पर्वत से लेकर नामचा बरवा पर्वत तक फैली है।

प्रमुख दर्रा या घाटी :-

 

      

बोलन घाटी (पाकिस्तान)

क्वेटा एवं कंधार को खक्कर से जोड़ती है।

खैबर दर्रा (पाकिस्तान)

पेशावर को काबुल से जोड़ता है।

जोजिला दर्रा (J & K)

श्रीनगर से लेह को जोड़ता है।

बुर्जिल दर्रा (J & K)

श्रीनगर से गिलगित को जोड़ता है।

बनिहाल (J & K)

जम्मू को कश्मीर से जोड़ता है।

काराकोरम दर्रा (J & K)

श्रीनगर से यारकन्द को जोड़ता है। भारत का सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित दर्रा है।

शिपकिला दर्रा (हिमाचल प्रदेश)

भारत-तिब्बत मार्ग, शिमला से गंगटोक (तिब्बत) को जोड़ता है।

बारालाचला (हिमाचल प्रदेश)

लेह को कुल्लू मनाली, कैलांग से जोड़ती है।

रोहतांग दर्रा (हिमाचल प्रदेश)

लाहोल स्फीति को लेह लद्दाख से जोड़ता है।

माना और नीति दर्रा (उत्तराखंड)

इससे मानसरोवर और कैलाश घाटी की ओर मार्ग जाता है।

लिपुलेख (उत्तराखंड)

यह कुमायूँ क्षेत्र को तिब्बत के तकला कोटा (पुरंग) शहर को जोड़ता है।

नाथूला एवं जेलेप ला (सिक्किम)

भारत तिब्बत मार्ग, (कालिंपोंग से ल्हासा तक जाती है) चुम्बी घाटी से होकर जाता है।

बोमडिला दर्रा (अरुणाचल प्रदेश)

भारत को चीन से जोड़ता है।

यांग्याप दर्रा (अरुणाचल प्रदेश)

भारत को चीन से जोड़ता है।

दिफू दर्रा (अरुणाचल प्रदेश)

भारत को चीन से जोड़ता है।

पांगसांड दर्रा (अरुणाचल प्रदेश)

भारत को म्यांमार से जोड़ता है।

तुजु दर्रा (मणिपुर)

भारत को म्यांमार से जोड़ता है।

प्रमुख घाटियाँ :-

क्र.सं.

घाटी

पर्वत श्रृंखला

नदी

1

कश्मीर घाटी

महान हिमालय तथा पीर पंजाल

झेलम नदी

2

कुल्लू - कांगड़ा घाटी

महान हिमालय तथा धौलाधार

व्यास नदी

3

मसूरी घाटी

महान हिमालय तथा नाग टिब्बा

यमुना नदी

4

काठमाण्डू घाटी

महान हिमालय तथा महाभारत पर्वत माला

बाघमती नदी

 

(2)   मध्य हिमालय :

(3) उप-हिमालय या शिवालिक श्रेणी : यह उपयुक्त दोनों श्रेणियों के दक्षिण में फैली है।

(4) ट्रान्स हिमालय श्रेणी : यह महान हिमालय के उत्तर में या तिब्बत के दक्षिण में स्थित है।

हिमालय के दीर्घ मोड़ : हिमालय पर्वत श्रेणियों के उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व के अंतिम छोरों के निकट दीर्घ वलन हैं जिन्हें उत्तर-पश्चिम मोड़ और उत्तरी-पूर्वी मोड़ कहा जाता है।

(B) हिमालय का प्रादेशिक वर्गीकरण :

 

         (1)    पंजाब हिमालय : यह सिन्धु नदी से लेकर सतलज नदी तक 560 किमी. लम्बाई में फैला है।

(2)     कुमायूँ हिमालय : इसका विस्तार सतलज नदी से काली नदी तक 320 किमी. की लम्बाई में उत्तराखण्ड राज्य में फैला है।

(3)     नेपाल हिमालय : यह 800 किमी. के विस्तार में काली नदी और तिस्ता नदी के बीच में फैले हैं।

(4)     असम हिमालय : तिस्ता नदी से ब्रह्मपुत्र नदी (दिहांग) तक यह 750 किमी. की लम्बाई में फैला हैं।

()    उत्तर का विशाल मैदानी भाग -

         1.  भाबर-

2.  तराई-

3.  बांगर-

4.  खादर-

5.  डेल्टा-

         जब नदियाँ समुद्र में जाकर गिरती हैं तो गिरते समय कई धाराओं में बँट जाती हैं।

क्षेत्रीय आधार पर विभाजन -

        1.  सिंधु सतलज का मैदान-

2.  गंगा नदी तंत्र के मैदान-

3.  ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का मैदान-

() प्रायद्वीपीय पठार :

 

 

         (1) मालवा का पठार :

(2) छोटा नागपुर का पठार :

(3) मेघालय का पठार :

(4) तेलंगाना का पठार :

 

  पहाड़ियाँ -

(1) अरावली पर्वतमाला -

(2) विंध्य पर्वतमाला -

(3) सतपुड़ा श्रेणी -

(4) पश्चिमी घाट -

(5) पूर्वी घाट -

()   तटीय मैदान और द्वीप समूह :

(i) तटीय मैदान

पूर्वी-पश्चिमी तटीय मैदान-

मालाबार तट पर पश्च जलों लैगूनों की अधिकता है।

पूर्वी तटीय मैदान-

 

         महानदी डेल्टा, कृष्णा-गोदावरी डेल्टा, कावेरी डेल्टा आदि क्षेत्रों में भारी अवसादों का जमाव हुआ।

(ii) द्वीप समूह :

            जिनमें से 204 द्वीप बंगाल की खाड़ी में तथा शेष 43 अरब सागर में स्थित हैं।

(A)बंगाल की खाड़ी के द्वीप :

     इन द्वीपों की उत्पत्ति ज्वालामुखी उद्गारों से हुई है। बंगाल की खाड़ी के द्वीपों को दो भागों में रखा जाता हैं -

(1) तटवर्ती द्वीप :

(2)दूरवर्ती द्वीप :

इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप शामिल हैं -

(a)अंडमान द्वीप समूह :

(b)  निकोबार द्वीप समूह :

(B) अरब सागर के द्वीप :

भारत के प्रमुख जलप्रपात

(Waterfalls of India)

1.   जोग/गरसोपा/महात्मा गांधी जलप्रपात:- कर्नाटक के शिमोगा जिले के शरावती नदी पर स्थित यह भारत में सबसे ऊँचा गैर-पंक्तिबद्ध जलप्रपात है। यह कर्नाटक के पर्यटन में एक प्रमुख आकर्षण है।

2.   शिव समुन्द्रम् जलप्रपात:- यह कर्नाटक राज्य में कावेरी नदी पर स्थित जलप्रपात है।

-      यह भारत में दूसरा सबसे ऊँचा जलप्रपात है।

3.   धुआँधार जलप्रपात:- यह नर्मदा नदी पर मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में अवस्थित है।

-      यह जलप्रपात भेड़ाघाट क्षेत्र का प्रमुख दर्शनीय स्थल है।

-      यहाँ नर्मदा की धारा 50 फीट ऊपर से गिरती है। जिसका जल सफेद धुएँ के समान उड़ने लगता है, इसी कारण इसे धुआँधार कहते हैं।

4.   हुण्डरु जलप्रपात - स्वर्ण रेखा नदी पर झारखण्ड राज्य में राँची में स्थित जलप्रपात है।

-      यहाँ पर जल 320 फीट की ऊँचाई से गिरता है।

5.   वसुधारा जलप्रपात :- अलकनन्दा नदी पर उत्तराखण्ड राज्य में बद्रीनाथ के निकट स्थित है।

-      इसे रहस्यमयी जल प्रपात के नाम से भी जाना जाता है।

6.   पानासम जलप्रपात :- ताम्रपर्णी नदी पर तमिलनाडु राज्य में स्थित जलप्रपात है।

7.   गोकक जलप्रपात:- गोकक नदी (कृष्णा नदी की सहायक) यह कर्नाटक राज्य में स्थित है।

-      यह नियाग्रा जलप्रपात के सदृश है।

-      सन् 1987 में भारत में पहली बार यहीं बिजली उत्पन्न की गई थी।

8.   चित्रकूट जलप्रपात:- इन्द्रावती नदी पर छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है।

-      इस जलप्रपात की ऊँचाई 90 फीट हैं। 90 फीट की ऊँचाई से इन्द्रावती की ओजस्विन धारा गर्जना करते हुए गिरती है।

9.   दूधसागर जलप्रपात:- मांडवी नदी पर गोवा राज्य में स्थित है।

-      यह एक पंक्तिबद्ध जलप्रपात है।

-      इसकी ऊँचाई 310 मीटर (1017 फीट) है।

10. पायकारा जलप्रपात:-पायकारा नदी पर तमिलनाडु राज्य में नीलगिरी पहाड़ियों पर स्थित जलप्रपात है।

-      इस जलप्रपात पर से जल विद्युत उत्पादन संयंत्र भी स्थापित है।

11. मधार पुनासा जलप्रपात:-चंबल नदी पर मध्यप्रदेश के खंडवा जिलों में स्थित जलप्रपात है।

-      इस झरने की खासियत यह है कि गर्मी के दिनों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी भरा रहता है।

12. चूलिया जलप्रपात:-चूलिया जलप्रपात चम्बल नदी पर भैंसरोड़गढ़ के निकट राजस्थान में स्थित है।

13. अय्यानार जलप्रपात:-यह पश्चिमी घाट में तमिलनाडु में विरुद्धनगर जिले में स्थित है।