राजस्थान में कृषि विज्ञान
- राजस्थान में कृषि लंबे समय से लोगों की आजीविका का स्रोत रहा है। योजना काल के समय ही राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि कार्यों का काफी योगदान रहा है।
- क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद राजस्थान कृषि-उत्पादन के मामले में उतना योगदान नहीं कर पा रहा है। इसके दो प्रमुख कारण हैं।
1. विषम भौगोलिक भू-भाग
2. मानसून की विषमता
- राजस्थान में विशेषतया खरीफ की फसलों का उत्पादन न केवल वर्षा (Rain) की मात्रा पर निर्भर करता है बल्कि मानसून की समयावधि तथा इसकी सघनता पर भी निर्भर करता है।
- वर्तमान में कृषि क्षेत्र के विकास को बढ़ाने तथा फसल उत्पादन को भी बढ़ाने के लिए विभिन्न परियोजनाएँ केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं इनमें से प्रमुख योजनाएँ इस प्रकार हैं।
कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही प्रमुख योजनाएँ:-
1. मुख्यमंत्री बीज स्वालंबन योजना:-
- इस योजना में कृषकों को उन्नत किस्म के तथा अधिक उत्पादन देने वाले अच्छी गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्ध करवाए जाते हैं।
- प्रारंभिक चरण में इस योजना को कोटा, भीलवाड़ा एवं उदयपुर तीन जिलों में चलाया गया तथा वर्तमान में 10 भगौलिक क्षेत्र में ऐसे बीज उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
- इनमें गेहूँ, जौ, चना, उड़द, मोठ, सोयाबीन, मूँगफली, ज्वार, मूंग आदि फसलों के उन्नत किस्म के बीज शामिल हैं।
2. महिला प्रशिक्षण:-
- कृषि कार्यों से संबंधित महिलाओं के एक दिवसीय प्रशिक्षण की योजना जिसमें ग्राम पंचायत स्तर पर 30 महिलाओं को कृषि कार्यों के प्रशिक्षण संबंधित कार्यशाला का आयोजन किया जाता है।
- इन 30 महिला कृषकों को 3 हजार रुपये की सहायता राशि भी उपलब्ध कराई जाती है
3. कृषि प्रदर्शन:-
- इस योजना में कृषकों को कृषि विज्ञान संबंधित उपकरणों, फसलों या बीजों से संबंधित नवाचारों एवं तकनीकों का प्रायोगिक रूप से प्रदर्शन (Demonstration) करके समझाया जा सकता है।
- वर्तमान में ग्वार, गेहूँ एवं जौ जैसी फसलें प्रदर्शन द्वारा दर्शायी जा रही हैं।
4. कृषि शिक्षा में अध्ययनरत् बालिकाओं को प्रोत्साहन:-
- बालिकाओं में कृषि विज्ञान के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि दी जाती है जो इस प्रकार है
1. 12वीं में कृषि विज्ञान 5 हजार रुपये
2. स्नातक (Graduation) में कृषि विज्ञान 12 हजार रुपये
- कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर या PHD अध्ययनरत बालिका को 15 हजार रुपये
5. जीरो बजट नेचुरल फॉर्मिंग:-
- 2019-20 के बजट से प्रारंभ इस योजना में कृषि में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को कम करते हुए कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बाँसवाड़ा, टोंक एवं सिरोही में प्रारंभ किया गया।
- 2020-21 में इस योजना को 15 नए जिलों में लागू किए जाने की संभावना है।
6. राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धात्मक योजना:-
- वर्ल्ड बैंक द्वारा पोषित यह योजना 17 जिलों के क्लसटर्स में चलाई जा रही है
- इस योजना में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, कृषकों की आय में वृद्धि तथा सिंचाई पद्धति पर विशेष फोकस किया जाता है।
7. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (N.F.S.M.):-
- केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना में सन् 2007-08 से ही गेहूँ तथा दलहन पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन प्रारंभ हुआ।
- वित्त पोषण अंश 60:40 अनुपात में होता है।
- गेहूँ और दलहन पर NFSM के अंतर्गत उच्च कोटि के बीज उपलब्ध कराना, सिंचाई के साधनों का विकास करना, कृषि तकनीकों एवं उपकरणों की उपलब्धता, जैविक खाद तथा फसल आधारित कृषि प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
- राजस्थान में गेहूँ तथा मोटे अनाज जौ एवं मक्का के लिए अलग-अलग जिलों में इस योजना को क्रियान्वित किया जा रहा है।
8. राष्ट्रीय टिकाऊ खेती मिशन (National Mission for Sustainable Agriculture):-
- पूर्व में चल रही अलग-अलग कृषि परियोजनाओं का समेकन कर केन्द्र एवं राज्य के 60:40 वित्त पोषण अंश से इस योजना को चलाया गया तथा इस में 4 उप-मिशन शामिल किए गए-
(a) वर्षा आधारित क्षेत्र विकास:- इसमें अलग-अलग जलवायवीय क्षेत्रों में समन्वित कृषि कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है, कृषि के साथ-साथ पशुपालन, वानिकी एवं उद्यानिकी का भी विकास किया जाता है।
(b) मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (‘स्वस्थ धरा, खेत हरा’):- यह उप-मिशन टिकाऊ खेती के लिए मृदा को उपजाऊ बनाए रखने से संबंधित है।
- इसमें मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी कर मृदा में पोषक तत्त्वों का प्रबंधन करते हुए फसल उत्पादन को बढ़ाया जाता है।
(c) परम्परागत कृषि विकास योजना:- ये उप मिशन कृषि कार्यों में परम्परागत तरीकों जैसे- जैविक खेती प्राकृतिक कंपोस्ट का प्रयोग, फसल चक्रीकरण जैसी विधियों को बढ़ाने पर फोकस करना।
(d) कृषि वानिकी पर उप मिशन:- इसमें कृषि वानिकी कार्यों को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
9. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना:-
- केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित यह योजना सिंचाई साधनों के विकास से संबंधित है
- योजना का वित्त पोषण केन्द्र एवं राज्य सरकार 60:40 के योगदान से होता है।
- राजस्थान में मानसून की विषमता के कारण सिंचाई साधनों का विकास अत्यंत आवश्यक है।
10. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना:-
- 2016-17 से केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित प्रमुख कृषि योजना, जिसमें फसल बीमा के माध्यम से कृषकों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
- इसमें खाद्यान्न फसलों, तिलहन एवं बागवानी फसलों को शामिल किया गया है।
- इसमें खरीफ में 2 प्रतिशत, रबी में 1.5 प्रतिशत तथा बागवानी फसलों में 5 प्रतिशत प्रीमियम लेकर बीमा उपलब्ध करवाया जा रहा है।
- राज्य वित्त पोषित योजना द्वारा प्रीमियम सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।
टिड्डी (Locust) से बचाव के हेतु राज्य सरकार के प्रयास:-
- राज्य सरकार द्वारा सतत रूप से टिड्डी हमले को लेकर सर्वे किए जाते हैं तथा जिला स्तरीय एवं राज्य स्तरीय इकाइयों द्वारा टिड्डी चेतावनी संगठन भी बनाए गए हैं। जो संबंधित क्षेत्रों में चेतावनी जारी करते हैं।
- ट्रेक्टर द्वारा स्प्रे, आवश्यकता अनुसार रसायनों का प्रयोग, पानी टेंकर एवं फायर ब्रिगेड की सहायता से टिड्डी हमले के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जाते हैं।
- राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धात्मक योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा स्प्रेयर्स ट्रेक्टर नि:शुल्क भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
उद्यानिकी (Horticulture)
- फसली पौधों के अलावा अन्य वाणिज्यिक महत्व वाले पौधों जैसे- मसाले, फल, सब्जियाँ आदि का उत्पादन उद्यानिकी के अंतर्गत किया जाता है।
- मसालों के उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान भारत के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
- सिंचाई साधनों के विकास तथा विशेष जलवायवीय परिस्थितियाँ राजस्थान में उद्यानिकी के विकास की अनुकुल दशाएँ तैयार करते हैं ।
- राष्ट्रीय बागवानी मिशन, कृषि एवं सिंचाई सुधार योजनाओं एवं सौर ऊर्जा आधारित विद्युत उत्पादन बढ़ने से पिछले 15 से 20 वर्षों में फलों, सब्जियाँ एवं मसाला उत्पादन के क्षेत्र में प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में वृद्धि हुई है राज्य में उद्यानिकी विकास से संबंधित प्रमुख योजनाएँ इस प्रकार हैं।
1. राष्ट्रीय बागवानी मिशन:- केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित इस मिशन में राज्य के 24 जिले लाभान्वित हो रहे हैं जिससे इन जिलों में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई है।
- इस मिशन के अंतर्गत ग्रीन हाऊस संरचना निर्माण, शेडेड एरिया विकास, वर्मीकम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना, प्लास्टिक मल्चिंग जैसी सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
2. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना:- राजस्थान में कृषि एवं उद्यानिकी के विकास के लिए सिंचाई पद्धतियों एवं सिंचाई साधनों का विकास बहुत आवश्यक है।
- इस योजना के अंतर्गत बूंद-बूंद सिंचाई (Drip Irrigation) जेट फव्वारा सिंचाई पद्धति के लिए कृषकों को अनुदान (सब्सिडी) की व्यवस्था की गई।
- योजना में केन्द्र एवं राज्य का वित्त पोषण 60:40 होता है।
3. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना:- इस योजना के अंतर्गत बागवानी विभाग के लिए गठित की गई राज्य स्तरीय समितियों द्वारा अनुशंसा किए जाने पर निश्चित राशि उपलब्ध करवाई जाती है।
- 2020-21 के लिए 97.40 करोड़ रुपये इस योजना के अंतर्गत उद्यानिकी विकास के लिए स्वीकृत किए गए हैं।
- बागवानी मिशन से वंचित जिलों में उद्यानिकी विकास कार्यक्रम, शहरी क्षेत्रों में वेजिटेबल क्लसटर्स की स्थापना की गई तथा बूँदी, धौलपुर, झालावाड़, टोंक, सवाई माधोपुर, उदयपुर तथा चित्तौड़गढ़ में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस की स्थापना की गई।
- जयपुर में अनार तथा कोटा में खट्टे फलों से संबंधित उत्पादन केन्द्रों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है।
4. सौर ऊर्जा आधारित पंप परियोजना/कुसुम परियोजना:- KUSUM (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान)
- भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सौर ऊर्जा आधारित पंप सेट लगवाने की परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
- इस योजना में 3 अश्व शक्ति (Horse Power) से 10 अश्व शक्ति समता वाले पंपों पर अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
2019-20 में प्रति हेक्टेयर किलोग्राम में उत्पादकता-
1. फलों की उत्पादकता:- 1611 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
2. सब्जियों की उत्पादकता:- 10534 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
3. मसालों की उत्पादकता:- 1083 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
राजस्थान के संदर्भ में वानिकी, डेयरी विकास, पशुपालन:-
वानिकी (Forestry):- वन वे बायोम हैं जिनमें काष्टीय वनस्पति की अधिकता होती है।
- राजस्थान में घोषित कुल वन क्षेत्र 32,737 वर्ग किलोमीटर है जो कि राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 9.57 प्रतिशत है।
- वानिकी के अंतर्गत वन क्षेत्रों का प्रबंधन, उनकी सुरक्षा शामिल है।
- राजस्थान में वन आच्छादित क्षेत्र कुल भौगोलिक क्षेत्र का 4.86 प्रतिशत है
- भारतीय वन सर्वेक्षण द्विवर्षीय सर्वेक्षण अवधि (2017 से 2019) के दौरान राज्य के वन क्षेत्र में 58 वर्ग किलोमीटर की वद्धि दर्ज की गई है।
- राज्य में वानिकी क्रियाओं के अंतर्गत जैवविविधता संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण तथा वन भूमि विकास से स्थानीय लोगों की आजीविका एवं सांस्कृतिक क्रियाओं को भी बनाए रखने के प्रयास किए जाते हैं।
- संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम स्तरीय वन प्रबंधन समितियों का गठन कर वनभूमि विकास एवं संरक्षण किया जा रहा है।
- वन भूमि एवं गैर वन भूमि क्षेत्रों से लघु वन उत्पादों से प्राप्त राजस्व एकत्र करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को अधिकृत किया गया है।
- औषधीय पौधों के संरक्षण हेतु 17 क्षेत्र संरक्षित घोषित किए गए हैं।
- बीस सूत्री कार्यक्रम के अंतर्गत भी राज्य में वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
- केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत नम भूमि विकास कार्यक्रम, पारिस्थितिकी विकास परियोजनाएँ, मृदा संरक्षण कार्य, सांभर नम भूमि संरक्षण, राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों का विकास शामिल है।
- राजस्थान में पारिस्थितिकी पर्यटन (Eco Tourism) की भी बहुत ज्यादा संभावना है। यहाँ 3 राष्ट्रीय उद्यान, 27 वन्य जीव अभयारण्य, 3 बायलोजिकल पार्क तथा 14 संरक्षित क्षेत्र है।
डेयरी विकास:-
- डेयरी विकास पशुपालन एवं कृषि आधारित प्रक्रिया है
- राजस्थान डेयरी उद्योग का विकास सहकारी समितियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है।
- जिला दुग्ध उत्पादक संघ जोकि जिला स्तर पर दुग्ध उत्पादन करता है तथा इसके वितरण से जुड़े उपक्रमों की संख्या 21 है।
- राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड जयपुर डेयरी विकास से संबंधित शीर्ष राज्य स्तरीय संस्थान है।
- राज्य सरकार डेयरी विकास को बढ़ाना देने के लिए पशुओं की पौष्टिक आहार उपलब्ध करना, उन्नत नस्लों का विकास करना तथा पशुपालकों को बीमा उपलब्ध कराना, इसके अलावा डेयरी उत्पादन (दूध, घी, छाछ, लस्सी, पनीर, श्रीखण्ड) को भी बढ़ाने के प्रयास किए जाते हैं।
राजस्थान सरस सुरक्षा कवच योजना:-
- दुग्ध उत्पादकों की दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता पर 5 लाख रुपये दिए जाते हैं।
- आंशिक स्थायी विकलांगता पर 2.5 लाख रुपये दिए जाते हैं।
- “सरस सामूहिक आरोग्य बीमा” योजना भी चलाई जा रही है।
- “मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना“ के अंतर्गत दुग्ध उत्पादक संघों तथा दुग्ध उत्पादकों को अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है।
पशुपालन (Animal Husbandry):-
- राजस्थान में कृषि में संलग्न अधिकांश कृषक पशुपालन से भी जुड़े रहें।
- पशुपालन की क्रिया ऐसे कृषकों को कृषि उत्पादन में नकारात्मक रूप से प्रभावित होने की दशा में आर्थिक रूप से सुरक्षित भी करती है।
- पशुधन के मामले में राजस्थान अग्रणी राज्यों में शामिल है।
पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास-
1. केन्द्र सरकार की सहायता से राज्य व्यापी पशु टीकाकरण कार्यक्रम, जिसमें गौ वंश एवं भैसों में खुरपका-मुँहपका रोग से बचाव हेतु टीकाकरण किया जा रहा है।
2. राज्य सरकार द्वारा पशु नस्लों में सुधार हेतु अनुसंधान कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
3. पशुधन नि: शुल्क आरोग्य योजना के द्वारा पशुपालकों को लाभान्वित किया जा रहा है।
4. भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत राज्य में भेड़ व बकरी नस्ल सुधार कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
5. इस योजना का वित्त पोषण केन्द्र व राज्य सरकार की भागीदारी 60:40 है।
6. पशु चिकित्सा केन्द्रों की स्थापना की जा रही है।
7. गौ पालन विभाग की स्थापना कर गौ वंश की सुरक्षा, नस्ल सुधार तथा इनकी संख्या में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं यह विभाग गौशालाओं के समूचे प्रबंधन को सुनिश्चित करता है।