महिला सशक्तीकरण क्या है क्यों होना चाहिए तथा महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने हेतु संस्थागत प्रयास क्या होने चाहिए, क्या नीतियां तथा योजनाएँ होनी चाहिए
- महिला सशक्तीकरण एक व्यापक शब्द है जिसमें अधिकार तथा शक्तियों का समावेशन होता है।
- महिला सशक्तीकरण एक ऐसी सामाजिक प्रक्रिया जिसमें महिलाओं के सर्वसम्पन्न और विकसित होने हेतु संभावनाओं के द्वारा खुले हों नए विकल्प तैयार हों।
- महिलाओं को भोजन, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं की उपलब्धता तथा कानूनी हक प्राप्त हो तथा प्रतिभाओं के विकास हेतु रचनात्मक अवसर प्राप्त हो।
महिला सशक्तीकरण हेतु आधारभूत स्तंभ
1. विधानमंडल में महिलाओं की भागीदारी
2. प्रशासन व प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी
3. प्रोफेशनल व तकनीकी सेवा में हिस्सेदारी
4. प्रति व्यक्ति आय में महिला की हिस्सेदारी में वृद्धि
महिला विकास में बाधक तत्व
1. सामाजिक ढांचे में पुरूषों के पास अधिक अधिकार और निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त है।
2. कृषि में अधिकतर कार्य महिलाओं द्वारा फिर भी कृषक दर्जा पुरूषों को प्राप्त है।
3. महिलाओं को पुरूषों के समान कार्य करने के बावजूद कम वेतन मिलता है।
4. माता पिता को मुखाग्नि देने का अधिकार महिलाओं को प्राप्त नही हैं।
5. दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, बलात्कार, महिला उत्पीड़न जैसी घटनाएँ घटित होना।
6. महिलाओं के घर के बाहर आने जाने पर प्रतिबंध होना।
7. स्वास्थ्य, शिक्षा व पोषण सुविधा का पूर्ण लाभ महिला को नहीं मिल पाता है।
8. डकैती, व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति विवाद, गुप्त प्रेम आदि में महिलाएँ सर्वाधिक प्रभावित होती हैं।
महिला सशक्तिकरण हेतु प्रयास-
♦ संस्थागत प्रयास
महिला तथा बाल विकास मंत्रालय 1981 में महिला तथा बाल विकास की स्थापना की गयी जिसे 2006 में महिला तथा बाल विकास मंत्रालय बना दिया गया।
राष्ट्रीय महिला आयोग
- महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने तथा उनके कानून निर्माण करने और महिलाओं संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना अधिनियम 1990 के तहत 1992 में की गई।
- राष्ट्रीय महिला आयोग पर एक सांविधिक संस्था है।
- राष्ट्रीय महिला आयोग अर्द्वन्यायिक संस्था के रूप में कार्य करती है।
- इस आयोग की संरचना में एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य होते है जिनमें कम से कम 1 सदस्य ST/SC होता है।
- राष्ट्रीय महिला आयोग की पहली अध्यक्ष जयंती पटनायक थी तथा वर्तमान अध्यक्ष रेखा शर्मा है।
आयोग के कार्य
- महिला हेतु कानूनों को लागू करवाना
- महिला शोषण में कमी करना।
- महिलाओं की शिकायतों की जाँच करना।
- महिला कल्याण को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को लागू कराना।
राजस्थान राज्य महिला आयोग
- राज्य महिला आयोग की स्थापना 15 मई 1999 को की गयी।
- राज्य महिला आयोग में 1 अध्यक्ष तथा चार सदस्य होते हैं जिनमें एक सदस्य SC/ST/OBC वर्ग का होना अनिवार्य है।
- राज्य महिला आयोग की प्रथम अध्यक्ष कांता खतूरिया थी तथा वर्तमान अध्यक्ष
आयोग का कार्य
- महिलाओं की शिकायतों को दर्ज करना।
- महिला कल्याण में वृद्वि करना
- महिला शिकायतों की जाँच करना
लैंगिक बजट
- 2005 से स्वीकृत किया गया महिलाओं हेतु लैंगिक बजट की बजट की वह प्रक्रिया जिसमें सरकार द्वारा लैंगिक प्रतिबद्वताओं को पूरा करने हेतु लैंगिक आधार पर बजटीय आवंटन का विभाजन किया जाता है।
राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण नीति 2001
- इस नीति का निर्माण प्रासंगिक संस्थाओं का गठन करने तथा उन्हें मजबूत बनाने हेतु किया गया।
- राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का अनुपालन करना।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य
- सकारात्मक आर्थिक व सामाजिक सुधारों की सहायता से महिला सामर्थ्य में वृद्वि हेतु वातावरण तैयार करना।
- सभी क्षेत्रों में महिलाओं को पुरूषों के समान अधिकार प्रदान करना।
- नीति निर्माण में महिलाओं की सहभागिता बढा़ना।
- विकास प्रक्रिया में लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करना।
- नागरिक समाज और विशेषकर महिला संगठनों की सहभागिता को बढा़ना तथा उन्हें मजबूत करना।
12वीं पचवर्षीय योजना में महिलाओं हेतु प्रावधान
1. आर्थिक सशक्तीकरण हो
2. सामाजिक अवसंरचना का निर्माण
3. सक्षम वैज्ञानिक कानून
4. शासन में महिला सहभागिता को बढ़ाना
5. सभी श्रेणीयों की महिलाओं तक विकास प्रक्रिया को पहुँचाना
6. राष्ट्रीय नीतियों व कार्यक्रमों में महिला सहभागिता को बढ़ावा देना।
महिला सुरक्षा हेतु कानून
1. सती प्रथा समाप्ति एक्ट 1829
2. विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856
3. दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961
4. मुस्लिम वुमन एक्ट 1981
5. हिन्दू विवाह अधिनियम 1955
6. महिला घरेलू हिंसा संरक्षण एक्ट 2005
7. बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006
8. महिला अश्लील प्रतिनिधित्व अधिनियम 1986
9. प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक (PCPNDT) (रेगुलेशन एंड प्रिवेंशन ऑफ मिसयूज एक्ट 1994)
10. राजस्थान डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2015
11. महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न नियमन एक्ट 2013 इस एक्ट के तहत बलात्कार के आरोपी को 20 साल की सजा जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास में बदला जा सकता है।
- आजीवन कारावास से तात्पर्य व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन से है।
- पहले दोषी ठहराए गए व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा दी जा सकती है।
- पीड़िता की मृत्यु होने अथवा मृतपाय होने पर मृत्युदंड की सजा का प्रावधान है।
- महिला का पीछा करना, घूरना, घूर-घूर कर देखना गैर जमानती अपराध है बशर्ते अपराध दूसरी बार किया गया हो।
♦ योजनाएँ
- महिला सशक्तीकरण हेतु योजनाएँ बनाते समय महिला संरक्षण, महिला शिक्षा व स्वास्थ्य तथा महिलाओं को वित्त सुविधा व रोजगार संबंधी मुद्दों को ध्यान में रखा जाता है।
मुख्यमंत्री सात सूत्रीय महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम-2009-10
इस योजना का उद्देश्य
- सुरक्षित मातृत्व
- शिशु मृत्यु दर में कमी लाना
- जनसंख्या स्थिरीकरण
- बाल विवाह पर रोक
- 10वीं कक्षा तक स्कूलों में ठहराव
- सुरक्षित वातावरण प्रदान करना
- रोजगार के अवसर प्रदान करना
- स्वयं सहायता समूह की सहायता से आर्थिक सशक्तीकरण करना
- स्वास्थ्य, महिला व बाल विवाह, गृह तथा शिक्षा विभाग की संयुक्त योजना
सहयोग व उपहार योजना
- 13 जुलाई 2016 से प्रारंभ योजना में BPL परिवार/अन्त्योदय परिवार/विधवा महिला का परिवार लाभार्थी होगा।
- ऐसे परिवारों की अधिकतम दो बेटियों की शादी पर आर्थिक सहायता 20,000 रू. तक की दी जाएगी।
- यदि बालिका 10वीं पास है तो 10,000 रू. की अतिरिक्त सहायता राशि तथा बेटी स्नातक है तो 20 हजार रू. तक की अतिरिक्त सहायता राशि दी जाएगी अर्थात अधिकतम सहायता राशि 40,000 रू. है।
सामूहिक विवाह अनुदान योजना-2016
- ऐसे दम्पत्ती जिनका विवाह सामूहिक विवाह में हुआ है तथा आयोजक जिसने सामूहिक विवाह आयोजित करवाया है।
- सामूहिक विवाह पर प्रति युगल 18,000 रू. की सहायता दी जाती है।
- 18,000 में से 15000 दम्पत्ति के बैंक खाते अथवा डाकघर खाते में जमा तथा 3000 रूपये आयोजक को प्रदान किये जाते हैं।
शुभ शक्ति योजना-2016
- इस योजना के तहत श्रमिकों की अधिकतम 2 बेटियों की शिक्षा व शादी हेतु 55 हजार रू. की आर्थिक सहयोग राशि प्रदान की जाएगी।
विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना-1 अप्रेल 2007
- इस योजना में पेंशन प्राप्त विधवा को पुनर्विवाह करने पर 30 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
- इस योजना का उद्देश्य विधवा विवाह को बढ़ावा देना है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
- यह योजना 22 जनवरी 2015 को प्रारंभ की गई थी।
- इस योजना का उद्देश्य बालिका शिशु मृत्यु में कमी करना तथा लिंगानुपात के स्तर को बढ़ाना तथा बालिका शिक्षा में वृद्वि करना।
- इस कार्यक्रम को सबसे कम लिंगानुपात वाले 100 जिलों में प्रारंभ में संचालित किया गया।
- राजस्थान के 10 जिलों में इस योजना को प्रारंभ किया गया था
- जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, करौली,झुंझुनू, सीकर, गंगानगर बाद में 4 जिलों को और इस योजना में शामिल किया गया। हनुमानगढ़, जोधपुर, जैसलमेर, टोंक।
उज्ज्वला योजना-2007
- इस योजना में यौन शोषण में पीड़ित महिला को सामाजिक धारा में लाना तथा आवास व रोजगार सुविधा उपलब्ध कराना है।
चिराली योजना
- 26 सितम्बर 2017 से इस योजना को सात जिलों में संचालित किया जा रहा है-
बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, नागौर, बूंदी, जालोर, झालावाड़ तथा प्रतापगढ़
- यह योजना पंचायत स्तर पर एक महिला को चिराली बनाया जाएगा जो अन्य बालिकाओं तथा महिलाओं को आत्मरक्षा हेतु प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री राज श्री योजना
- पूर्व में चल रही शुभ लक्ष्मी योजना को परिवर्तित कर यह योजना 1 जून 2016 से प्रारंभ की गई।
- इस योजना का उद्देश्य- लिंगानुपात में वृद्वि करना तथा महिला शिक्षा स्तर में सुधार लाना है।
- इस योजना के तहत 50000 रूपये की आर्थिक सहायता बेटी के संस्थागत जन्म पर 6 किश्तों में प्रदान की जाती है।
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बेटी के जन्म पर |
2500 |
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1 वर्ष की आयु होने पर |
2500 |
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प्रथम कक्षा में प्रवेश लेने पर |
4000 |
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5वीं कक्षा में प्रवेश |
5000 |
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दसवीं कक्षा उत्तीर्ण |
11000 |
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बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर |
25000 |
अभय कमाण्ड सेंटर
- मार्च 2017 में प्रथम अभय कमाण्ड सेंटर जयपुर में स्थापित किया गया।
- अभय कमाण्ड सेंटर एक कंट्रोल रूम है।
- अभय कमाण्ड सेंटर कैमरा निगरानी आधारित है जिससे GPS द्वारा ट्रेकिंग करके महिला सुरक्षा बनायी रखी जा सके।
- सड़को के दोनों किनारों तथा ट्रेफिक लाइट्स चौराहों पर कैमरे लगाये गए हैं।
- सभी संभागों पर अभय कमाण्ड सेंटर की स्थापना की जा चुकी है।
राज्य की प्रथम महिला पुलिस थाना
- गांधीनगर, जयपुर में पहला महिला पुलिस थाना 2017 में स्थापित किया गया।
- राज्य का प्रथम महिला रेल्वे स्टेशन भी गांधीनगर जयपुर रेल्वे स्टेशन बना है।
गरिमा बालिका संरक्षण व सम्मान योजना-2016
- इस योजना का उद्देश्य बालिका संरक्षण को प्रोत्साहन देना है इस योजना में लाभार्थी व्यक्ति बालिका संरक्षण को बढ़ावा देने वाला होगा।
- बालिका दिवस (24 जनवरी) पर इस लाभार्थी को 25,000 रूपये की सम्मान राशि प्रदान की जायेगी।
तेजस्विनी योजना
- यह योजना झारखंड राज्य तथा विश्व बैंक के सहयोग से 22 दिसम्बर 2015 से चलायी जा रही हैं।
- इस योजना के तहत किशोर बालिकाओं को जीवन कौशल में दक्ष करने हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
महिला शिक्षा हेतु योजनाएँ
कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय
- अगस्त 2004 से विद्यालय ऐसी बालिकाओं हेतु प्रारंभ किये गये हैं जो विद्यालय छोड़ चुकी हैं या जिनका नामांकन नहीं है। ऐसी बालिकाओं को कक्षा 6-8 तक के पाठ्यक्रम हेतु कस्तूरबा गाँधी विद्यालय प्रारंभ किये गये हैं।
विद्यालय स्तर पर दो मंच बनाए गये है
जिनका उद्देश्य बालिकाओं में सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना है-
मीना राजू मंच
कक्षा 6-8 तक की बालिकाओं के लिए
गार्गी मंच
कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं के लिए बनाये गए है
अध्यापिका मंच
- उपखंड स्तर पर अध्यापिका मंच बनाये गये हैं जिनमें अधिकतम 100 शिक्षिकाएँ शामिल होंगी इस मंच का उद्देश्य बालिका जागरूकता को बढ़ावा देना है।
बालिका शिक्षा में नवाचार
- विद्यालयो में बालिकाओं का नामांकन, ठहराव व सीखने की प्रवृत्ति में वृद्वि हेतु बालिका शिक्षा में नवाचार लाने हेतु सक्षम तथा जागृति कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
सक्षम- बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु
जागृति- बालिका शिक्षा स्तर में सुधार हेतु
मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना 2015-16
- इस योजना का उद्देश्य बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन प्रदान करना है।
- इस योजना में एक जिले से चार बालिकाओं को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षा में प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त बालिका, एक बीपीएल श्रेणी की बालिका तथा एक अनाथ बालिका इस योजना की लाभार्थी होगी।
- 11वीं तथा 12वीं में स्कूल ट्यूशन फीस हेतु 15000 रूपये तथा कोचिंग हेतु 1 लाख रू. की सहायता तथा स्नातक में ट्यूशन फीस हेतु 25,000 रू. तथा कोचिंग हेतु दो लाख रूपये की सहायता इस योजना के तहत प्रदान की जाएगी।
इन्दिरा गांधी प्रियदर्शिनी योजना-2019
- पूर्व में संचालित पद्माक्षी योजना को बदलकर 2019 में इसे इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी योजना नाम दिया गया।
- इस योजना में लाभार्थी जिला स्तर पर कक्षा 8 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बालिका को 40,000 तथा कक्षा 10वीं प्रथम स्थान प्राप्त बालिका को 75,000 रू, कक्षा बारहवीं में प्रथम स्थान प्राप्त बालिका को 1 लाख रूपये और स्कूटी प्रदान की जाएगी।
नोट-
- लाभार्थी बालिका को कम से कम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य हैं।
मुख्यमंत्री आपकी बेटी योजना-2005
- बालिका जन्म को प्रोत्साहन देने तथा महिला सशक्तीकरण हेतु यह योजना 2005 में प्रारंभ
- आर्थिक रूप से कमजोर तथा माता पिता में से किसी एक की मृत्यु हो चुकी बालिकाएँ इस योजना में लाभार्थी होंगी
- इस योजना के तहत आर्थिक सहायता के रूप में 2100 रू. की राशि कक्षा 1 से 8 की बालिका को तथा 2500 रू. कक्षा 9 से 12 में अध्यनरत बालिका को प्रदान किये जाएँगे।
नोट: पूर्व में यह राशि 1100 तथा 1500 रू. थी जिसे बढ़ाकर अब 2100 तथा 2500 कर दिया गया हैं।
गार्गी पुरस्कार-1998
- बालिकाओं को शिक्षा में क्षेत्र में यह पुरस्कार दिया जाता है जो 1998 से प्रारंभ किया गया था।
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 75% से अधिक अंक प्राप्त करने वाली बालिकाएँ इस योजना की लाभार्थी होंगी।
- लाभार्थी बालिकाओं को 11वीं तथा 12वीं में प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाता है।
- बसंत पंचमी के दिन यह सम्मान पंचायत समिति स्तर पर समारोह आयोजित कर प्रदान किया जाता है।
- गार्गी पुरस्कार में सम्मान राशि 3000 रू दी जाती है जब बालिका ने 10वीं कक्षा में 75% से अधिक अंक प्राप्त किये हो।
लाडो रानी योजना-2016
- नागौर के तत्कालीन जिला कलेक्टर विशाल राजन द्वारा बालिका उच्च् शिक्षा को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु जुलाई 2016 में लाडो रानी योजना प्रारंभ की गयी।
- इस योजना के तहत सोनोग्राफी सेंटर संचालकों से रूपयों का सहयोग लेकर बालिका उच्च शिक्षा में व्यय किया जाता है।
शादी शगुन योजना-2017
- इस योजना का को अल्प संख्यक मंत्रालय द्वारा अगस्त 2017 से प्रारंभ किया।
- इस योजना में लाभार्थी अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाएँ होंगी।
- अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं को उच्च शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना इस योजना का उद्देश्य हैं।
वित्तीय सशक्तीकरण हेतु योजना-
महिला स्वयं सहायता समूह (SHG)
- 1997-98 से स्वयं सहायता समूह स्थापित किये गये। स्वयं सहायता समूह जो कि सहकारिता पर आधारित होते हैं। इसमे 10 से 20 महिलाओं का समूह बनाया गया जो मिलकर उत्पादन कार्य करता है।
- स्वयं सहायता समूह के निर्माण का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है। महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने हेतु बनाये गये-
(i) अमृता सोसायटी
(ii) अमृता स्वयं सहायता समूह हाट बाजार
- ये हाट बाजार 2004-05 में प्रारंभ किये गये स्वयं सहायता समूह के उत्पादों के विपणन को प्रोत्साहित करने हेतु बनाये गये।
(iii) ग्राम्या
कृषि तथा बागवानी उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन देने हेतु ग्राम्या की स्थापना की गयी।
इंदिरा गांधी महिला शक्ति निधि-
- बजट 2019-20 में महिला सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु इस निधि की स्थापना हेतु प्रस्ताव रखा गया था।
- दिसम्बर 2019 में इंदिरा गांधी महिला शक्ति निधि की स्थापना कर दी गयी जिसमें निधि राशि 1000 करोड़ रूपये हैं।
- इस निधि को बनाने का उद्देश्य महिला उद्योगों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना, नवीन अनुसंधानों को बढा़वा देना तथा महिलाओं को कौशल विकास हेतु प्रोत्साहन प्रदान करना है।
- महिलाओं को शिक्षा व पुनर्वास की सुविधा उपलब्धता करवाना भी इस निधि का उद्देश्य है।
स्वावलम्बन योजना-2009-10
- विधवा, परित्यकता व तलाकशुदा एकल निर्धन महिलाओं हेतु स्वावलम्बन योजना 2009-10 में प्रारंभ की गयी।
- इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण, महिला जीवन स्तर में सुधार करना है।
- पारम्परिक व गैर पारम्परिक व्यवसाय में प्रशिक्षण उपलब्ध करवाकर महिलाओं का वित्तीय सशक्तिकरण करना।
- इस योजना का संचालन राजस्थान आजीविका विभाग राजस्थान सरकार द्वारा किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री जनधन योजना
- विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना सबसे बड़ी बैंक खाता योजना बन चुकी है। इस योजना में 11 करोड़ बैंक खाते खोलने का लक्ष्य रखा गया था। जो वर्तमान में लगभग 33 करोड़ खाते खुल चुके है।
- इस योजना की घोषणा 15 अगस्त 2014 को की गयी थी।
- प्रधानमंत्री जन धन योजना को 28 अगस्त 2014 को पूरे देश में प्रारंभ किया गया था।
- जिसका उद्देश्य वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ बैंकिंग, बचत जमा खाता, ऋण, पेंशन आदि वित्तीय सेवाओं को सभी तक पहुँचाना है।
- इस योजना का स्लोगन ‘मेरा खाता भाग्य विधाता’ रखा गया।
- इस योजना में सभी को बैंक खाता सुविधा उपलब्धता जीरो बेलेन्स अर्थात् शून्य जमा पर दी जाएगी।
- बैंक खाता खोलने पर रूपे कार्ड की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।
- इस योजना में 2 लाख की दुर्घटना बीमा सुविधा प्रदान की जा रही है। (पहले 1 लाख था जिसे बढ़ाकर 2 लाख कर दिया गया है)
- प्रधानमंत्री जन धन योजना में खाता खुलवाने पर 10 हजार रूपये तक की ओवर ड्रॉफ्ट (अधिनिकासी) की सुविधा प्रदान की गई है। (यह सुविधा पहले 5000 रूपये तक की थी जिसे अब 10,000 रूपये कर दिया गया है।)
स्टैण्ड अप इण्डिया-2016
- महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने हेतु यह योजना अप्रेल 2016 से शुरू की गयी।
- महिलाओं को स्वरोजगार को प्रोत्साहन देना तथा औद्योगिक उत्पादन में वृद्वि करना इस योजना का उद्देश्य है।
- इस योजना में लाभार्थी SC/ST/ महिला सभी वर्गो की होंगी
- देश में करीब सवा लाख बैंको ब्रांचे है और प्रत्येक ब्रांच कम से कम दो लोगो को ऋण सुविधा प्रदान करेगी तो हर साल 2.50 लाख नए उद्योग स्थापित होंगे।
- यह ऋण राशि 10 लाख से 1 करोड़ रू. तक की प्रदान की जाएगी।
- ऋण की अवधि 7 वर्ष होगी।
- योजना का संचालन हेतु 10 हजार करोड़ रू. के स्टैण्ड अप फण्ड की स्थापना की गयी है।
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना-2017
- वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना का प्रारंभ गर्भवती महिलाओं को पूर्ण पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने हेतु की गई।
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।
- गर्भवती महिला का ममता कार्ड बनाया जाता है जिसमें तीन किश्तों में 5000 ₹ तीन किश्तों (1000, 2000, 2000) के रूप में सीधे बैंक खाते में प्राप्त होगें। दो किश्ते प्रसव पूर्व तथा एक किश्त प्रसव बाद प्रदान की जाएगी।
- यह नगद सहायता योजना अर्थात् (DBT) प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना है।
पेंशन योजनाएँ
इंदिरा गाँधी वृद्वावस्था राष्ट्रीय पेंशन योजना
- नवंबर 2007 से बीपीएल परिवार के वरिष्ठ नागरिक हेतु यह पेंशन योजना प्रारंभ की गयी।
- इस योजना का लाभ 60-75 वर्ष तक की आयु वाले को 750 रू. प्रतिमाह तथा 75 वर्ष से अधिक आयु वर्ग को 1000 रूपये की सहायता प्रतिमाह उपलब्ध करवायी जाएगी।
1. इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन-योजना
- 7 अक्टूबर 2009 को बीपीएल परिवार की विधवा महिलाओं हेतु यह पेंशन योजना शुरू की गयी।
- 40-55 वर्ष की विधवा महिला को 500 रू. प्रतिमाह पेंशन के रूप में दिये जाएँगे।
- 55-60 वर्ष की विधवा महिला को 750 रू. प्रतिमाह तथा 60-75 वर्ष की विधवा महिला को 1000 रू. प्रतिमाह
2. मुख्यमंत्री वृद्वावस्था पेंशन योजना
- यह योजना 55 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं हेतु पेंशन योजना हैं।
- इस योजना का लाभ 55-75 वर्ष की महिला का 750 रू. तथा 75 वर्ष से अधिक आयु की महिला को 1000 रू. प्रतिमाह पेंशन उपलब्ध करवायी जाएगी।
3. मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना
- इस योजना में लाभार्थी विधवा, परित्यकता, तलाकशुदा महिला होगी जिसके परिवार की वार्षिक आय 48,000 रूपये से कम हो।
- 18-55 वर्ष की महिला को 500 रू. प्रतिमाह 55-60 वर्ष की महिला को 750 रू प्रतिमाह 60-75 वर्ष की महिला को 1000 रू. प्रतिमाह 75 वर्ष से अधिक आयु की महिला को 1500