लोकायुक्त
- भारतीय प्रशासनिक सुधार आयोग (1966) की सिफारिश पर नागरिकों की समस्या के समाधान हेतु दो विशेष प्राधिकारियों लोकपाल व लोकायुक्त की नियुक्ति की गई।
- केन्द्र स्तर पर लोकपाल एवं राज्यों में लोकायुक्त नियुक्त करने हेतु लोकपाल तथा लोकायुक्त 2013 एक्ट पारित किया गया। यद्यपि इससे पहले ही कई राज्यों में लोकायुक्त नियुक्त कर रखे थे।
- सर्वप्रथम लोकायुक्त का गठन 1971 में महाराष्ट्र में हुआ था लेकिन ओडिशा राज्य ने यह अधिनियम 1970 में पारित किया परन्तु उसे 1983 में लागू किया गया।
- सभी राज्यों में लोकायुक्त का ढाँचा (संरचना) समान नहीं है कुछ राज्यों जैसे राजस्थान, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र में लोकायुक्त के साथ उप-लोकायुक्तों के पदों का भी गठन किया गया है।
- लोकायुक्त व उपलोकायुक्तों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है। इनकी नियुक्ति के समय राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता से परामर्श अनिवार्य है।
- कुछ राज्यों में लोकायुक्त के लिए न्यायिक योग्यता निर्धारित की गई है परंतु राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार में कोई विशिष्ट योग्यता निर्धारित नहीं है।
- इनका कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की उम्र तक (जो भी पहले हो) निर्धारित है। वह पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
लोकायुक्त का क्षेत्राधिकार
1. लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार में मुख्यमंत्री को छोड़कर मंत्रिपरिषद् के सभी सदस्य शामिल हैं।
2. सेवक/अधिकारी जो किसी सार्वजनिक सेवा या पद पर नियुक्त है, शामिल है।
3. जिला परिषद् के जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख, पंचायत समिति के प्रधान और उप-प्रधान, कोई भी स्थायी समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष (जो राजस्थान पंचायत समिति और जिला परिषद् अधिनियम 1959 के तहत गठित की गई है) आदि शामिल है।
निम्नलिखित पर लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं है-
1. मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश या न्यायिक सेवा का कोई सदस्य।
2. भारत में किसी भी न्यायालय का कोई भी अधिकारी।
3. महालेखाकार राजस्थान
4. लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या कोई सदस्य
5. मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयुक्त और प्रादेशिक आयुक्त, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ।
6. विधानसभा के सचिवालय स्टॉफ का कोई भी सदस्य।
लोकायुक्त या उपलोकायुक्त को हटाना
- विधानसभा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित व मतदान करने वालो के 2/3 बहुमत से लोकायुक्त को हटा सकती है।
अन्य तथ्य
- लोकायुक्त का वेतन, भत्ता तथा सेवा अन्य शर्ते लगभग वही होती है जो राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की होती है।
- प्रतिवर्ष लोकायुक्त राज्यपाल को अपने कार्यों के संबंध में एक प्रतिवेदन देता है जिसे राज्यपाल विधानमण्डल के समक्ष प्रस्तुत करता है।